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अगले अल कायदा प्रमुख पर ध्यान दें क्योंकि भारतीय एजेंसियां सतर्क रहती हैं

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नई दिल्ली,अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन के सटीक ड्रोन हमले में अल कायदा प्रमुख अयमान अल-जवाहिरी की मौत की घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर, एक संभावित उत्तराधिकारी के चारों ओर अटकलें लगाई गईं, मिस्र के अल कायदा के एक अन्य व्यक्ति, मोहम्मद सलाहलदीन जिदान, जो सैफ के नाम से जाना जाता है। क्षेत्र की निगरानी करने वाले सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार अल-अदेल एक संभावित उम्मीदवार के रूप में उभर रहा है। एडेल के वर्तमान ठिकाने पर कोई स्पष्टता नहीं है, जिसके बारे में लंबे समय से ईरान में होने की अफवाह थी।ऊपर उद्धृत लोगों ने यह भी कहा कि अल-जवाहिरी की मौत से भारत में समूह के समर्थकों और कैडरों का मनोबल टूटेगा, लेकिन इससे मोहभंग करने वाले लड़ाकों के इस्लामिक स्टेट-खुरासान प्रांत (ISKP) के प्रति निष्ठा को स्थानांतरित करने की भी चिंता है। वैश्विक आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी समूहों की गतिविधियों पर नज़र रखने में शामिल एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा: "शानदार हमले करने के लिए ISKP की परिचालन क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए, अल कायदा से इस्लामिक स्टेट के किसी भी संभावित झुकाव पर गंभीर ध्यान देने की आवश्यकता है।भारतीय खुफिया समुदाय अल कायदा की गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रहा है क्योंकि एडेल, एक अनुभवी क्षेत्र विशेषज्ञ और मिस्र के विशेष बलों में पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल ने 1998 में केन्या और तंजानिया में अमेरिकी दूतावासों की बमबारी जैसे खुले हमलों का नेतृत्व किया है। 1980 के दशक में अफगानिस्तान में सोवियत सेना से भी लड़े और शुरू में ऑपरेशन का विरोध करने के बावजूद 9/11 के हमलों में शामिल कुछ अपहर्ताओं को प्रशिक्षित किया। भारत सरकार की ओर से जवाहारी की मृत्यु पर कोई आधिकारिक शब्द नहीं था, जिसने हाल ही में काबुल में एक राजनयिक उपस्थिति को फिर से स्थापित किया।बहरहाल, जवाहिरी की मौत से अल-कायदा के क्षेत्रीय सहयोगियों जैसे भारतीय उपमहाद्वीप में अल कायदा (एक्यूआईएस) और अंसार अल-इस्लाम (एएआई) में बाधा आने की संभावना है। इस साल जुलाई में संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध निगरानी टीम की नवीनतम रिपोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि एक्यूआईएस में कथित तौर पर 180-400 लड़ाकू विमान हैं, जो मुख्य रूप से बांग्लादेश, भारत, म्यांमार और पाकिस्तान से हैं।तालिबान की लड़ाकू इकाइयों में एक्यूआईएस लड़ाकों का भी प्रतिनिधित्व किया जाता है। सहयोगी का नेतृत्व ओसामा महमूद और उनके डिप्टी आतिफ याह्या गौरी कर रहे हैं, और कई अफगान प्रांतों में इसकी उपस्थिति है। खुफिया एजेंसियों को हाल ही में इनपुट मिले हैं कि भारत में अल कायदा कैडर प्रचार अभियानों और संगठन के पुनर्निर्माण के प्रयासों के पीछे थे, खासकर पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ भाजपा के दो पूर्व प्रवक्ताओं द्वारा की गई टिप्पणी पर विवाद के बाद। बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नुपुर शर्मा के बयानों के जवाब में एक्यूआईएस ने जून में दिल्ली, मुंबई, यूपी और गुजरात समेत कई जगहों पर हमले की धमकी दी थी। अल-जवाहिरी द्वारा जारी किए गए अंतिम संदेशों में से एक इस साल अप्रैल में जारी एक वीडियो था, जिसमें उन्होंने कर्नाटक में हिजाब विवाद के बारे में बात की थी और उपमहाद्वीप में मुसलमानों से इस्लाम पर हमले से लड़ने के लिए कहा था "बौद्धिक रूप से, मीडिया का उपयोग करके, और साथ में युद्ध के मैदान पर हथियार ”। उन्होंने कश्मीर के बारे में भी कई बार बात की, जिसमें जुलाई 2019 भी शामिल है, जब उन्होंने "कश्मीर में मुजाहिदीन" को भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर में सरकार पर लगातार प्रहार करने के लिए कहा। पिछले साल अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद, भारत में चिंताएं थीं कि अल कायदा की ताकत बढ़ेगी और प्रशिक्षित लड़ाकों को भारत भेजा जा सकता है क्योंकि तालिबान की मुख्य लड़ाई शाखा, हक्कानी नेटवर्क, भारतीय हितों पर कई हमलों के पीछे था। . एक अन्य अधिकारी ने कहा, "तालिबान और अल कायदा के बीच बेहद करीबी संबंध इस तथ्य से स्पष्ट हैं कि अल-जवाहिरी एक पॉश काबुल पड़ोस में तैनात था। यह करीबी अल कायदा-तालिबान गठजोड़ पूरी तरह से भारतीय हितों के खिलाफ है, खासकर भारत को निशाना बनाने के अल कायदा के इरादों की पृष्ठभूमि में।

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बार एसोसिएशन चुनाव: तारीख को लेकर संशय बरकरार

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फरवरी के प्रथम सप्ताह में चुनाव होने की अटकले तेज
वर्तमान कार्यकारिणी ने चुनाव को लेकर उत्पन्न विवाद में बार काउंसिल आॅफ इंडिया का खटखटाया दरवाजा
गाजियाबाद (करंट क्राइम)। बार एसोसिएशन चुनाव को लेकर वर्तमान कार्यकारिणी और वरिष्ठ अधिवक्ताओं के बीच पैदा हुए विवाद के चलते चुनाव स्थिगित वाले मोड़ में आ गये हैं। तारीख को लेकर कोई स्पष्ट स्थिति नहीं बनी है और वर्तमान बार कार्यकारिणी ने अब बार काउंसिल आॅफ इंडिया का दरवाजा खटखटा दिया है। विवाद के चलते अभी तक ये भी तय नहीं हो पाया है कि बार एसोसिएशन का चुनाव 25-15 या फिर 20-10 वाले पैटर्न पर होगा या फिर नहीं। फिलहाल कचहरी परिसर में अटकले तेज हो गई हैं कि बार एसोसिएशन का चुनाव फरवरी माह के प्रथम सप्ताह में सम्पन्न कराया जा सकता है।
बता दें कि बार एसोसिएशन चुनाव को लेकर कई बार विरोधात्तक स्थिति देखने को मिल चुकी है। कभी एल्डर कमेटी का विवाद सामने आया है तो कभी अध्यक्ष एवं सचिव के उम्र वाले पैटर्न पर विवाद खड़ा हो चुका है। एल्डर कमेटी को लेकर सहमति बनना बताया जा रहा है कि राम अवतार गुप्ता की एल्डर कमेटी के नेतृत्व में चुनाव सम्पन्न कराया जायेगा। लेकिन अभी तक उम्र वाले पैटर्न को लेकर विवाद बना हुआ है। बताया जा रहा है कि चुनाव में हुए विवाद को लेकर वर्तमान बार कार्यकारिणी ने बार काउंसिल आॅफ इंडिया का दरवाजा खटखटा दिया है।
20-10 वाले पैटर्न में इन दावेदारों की दावेदारियां हैं प्रमुख
अभी हाल में बार एसोसिएशन चुनाव को लेकर अध्यक्ष के लिए 20 वर्ष एवं सचिव के लिए 10 वर्ष का अनुभव तय किया गया था। उक्त उम्र व्यवस्था के चलते अध्यक्ष पद के लिए तीन दावेदार जिसमें पूर्व अध्यक्ष रहे राकेश त्यागी काकड़ा, पूर्व अध्यक्ष राकेश त्यागी कैली और पूर्व में सचिव रहे दीपक शर्मा की दावेदारियां प्रबल थी। वहीं सचिव पद के लिए पांच अधिवक्ताओं की ओर से दावेदारियां की गई थी। सचिव पद के लिए स्नेह त्यागी, विनित शर्मा, अमित नेहरा, हरेंद्र गौतम, लोकेश कुमार आदि के नाम प्रमुख बताये जा रहे हैं। अब देखना होगा कि बार चुनाव में किस उम्र के पैटर्न को बार काउंसिल आॅफ इंडिया परमिशन देगा।
2500 अधिवक्ताओं की
लिस्ट हो चुकी है तैयार
बार एसोसिएशन चुनाव में अभी तक 2500 अधिवक्ता मतदाताओं की सूची तैयार कर ली गई है। चंूकि चुनाव स्थिगित हो गये हैं लिहाजा एक बार फिर से मतदाता अधिवक्ताओं की सूची को संशोधित करने का काम किया जायेगा। बताया जा रहा है कि संशोधित मतदाता अधिवक्ताओं की सूची में करीब 300 अधिवक्ताओं के नाम ओर शामिल किये जा सकते हैं।
पंजीकृत या फिर सीओपी धारक ही कर सकेंगे बार चुनाव में मतदान
बार एसोसिएशन की तरफ से चुनाव को लेकर पूर्व में ही घोषणा की गई थी कि चुनाव में पंजीकृत अधिवक्ता या फिर सीओपी धारक ही मतदान में हिस्सा ले सकेंगे। बार काउंसिल आॅफ उत्तर प्रदेश से सबंद्ध अधिवक्ता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेगा। बार चुनाव की गाइड लाइन में उक्त को प्रमुखता से लागू किया जायेगा।

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गंगाजल की धारा ले लेगी गाजियाबाद की ओर मोड़

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यदि जीडीए और नगर निगम उपलब्ध करा दें 442 करोड़
गाजियाबाद (करंट क्राइम)। आबादी के साथ बुनियादी जरूरतें भी बढ़ रही हैं और इनमें से एक सबसे बड़ी जरूरत पानी की है। दिल्ली से सटे गाजियाबाद में आबादी का अनुपात बढ़ा है और इसी अनुपात में पानी की जरूरत भी बढ़ी है। यहां पानी की जरूरत को कैसे मैनेज किया जायेगा, इसे लेकर जिलाधिकारी गाजियाबाद आरके सिंह ने कई विभागों को साथ लेकर बैठक की। इस बैठक में मुख्य विषय यही था कि ऊपरी गंगा नहर प्रणाली से गाजियाबाद नगर निगम को 100 क्यूसेक कच्चा जल उपलब्ध कराया जाये। यहां पर जल निगम के अधिक्षण अभियंता ने अवगत कराया कि 250 क्यूसेक पानी की जरूरत है और इस जरूरत के सापेक्ष सिंचाई विभाग ऊपरी गंगा नहर प्रणाली द्वारा 100 क्यूसेक जल उपलब्ध कराया जा सकता है। यहां पर जब डीएम राकेश कुमार सिंह ने जल की उपलब्धता को लेकर सवाल किया तो सिंचाई निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता संजय सिंह जादौन ने बताया कि यह एक नीतिगत मामला है और इस पर शासन की अनुमति से ही जल उपलब्ध कराया जा सकता है। इसके लिए 442.38 करोड़ की परियोजना तैयार कर स्वीकृति के लिए भेजी गयी थी। परियोजना पर होने वाले इस खर्च को जीडीए तथा नगर निगम द्वारा किया जाना है। इन्हीं दोनो विभागों को इस परियोजना पर होने वाले इस खर्च को देना है। यदि जीडीए और नगर निगम इस धन की व्यवस्था कर देंगे तो ऊपरी गंग नहर प्रणाली से 100 क्यूसेक कच्चा जल गाजियाबाद को दिया जा सकता है।
अधिशासी अभियंता बोले हमने दिये थे सुझाव नहीं मिले आदेश
गाजियाबाद की आने वाली सबसे बड़ी जरूरत यहां का भू जल है। जल की आपूर्ति के लिए नहरों और अन्य साधनों से भी जल चाहिए। जल को लेकर बुधवार को कलेक्ट्रेट में डीएम की अध्यक्षता में बैठक हुई। इस बैठक में पानी की उपलब्धता को लेकर और पानी की बचत को लेकर सभी विभागों के अधिकारियों ने अपनी राय रखी। इस बैठक में सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता मेरठ नीरज कुमार लांबा ने बताया कि गंगा नहर प्रणाली के अंतर्गत नहरों की लाईनिंग करके पानी की बचत की जा सकती है। लेकिन उच्च अधिकारियों
द्वारा नहरों की लाईनिंग कराये जाने के विषय में कोई आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं।

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लखनऊ वाली बैठक से निकले हैं कई संदेश, निगम चुनाव में नहीं मिलेगी परिवारवाद को तवज्जो और कार्यकर्ताओं पर रहेगा फोकस

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वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोमवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय पर जो बैठक हुई उस बैठक से संदेश राष्टÑ से लेकर प्रदेश और क्षेत्र ये लेकर जिले तक आ रहे है। सूत्र बताते हैं कि बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई लेकिन यहां फोकस में लोकसभा चुनाव और निगम चुनाव रहे है। बैठक कई दौर में हुई। इस बैठक में प्रदेश प्रभारी से लेकर मोर्चों के अध्यक्ष भी शामिल रहे है। क्षेत्रीय पदाधिकारी भी मौजूद थे और कई दौर की इस बैठक में राष्टÑीय महामंत्री बीएल संतोष और उत्तर प्रदेश प्रभारी राधा मोहन सिंह भी थे।
प्रदेश संगठन के सभी पदाधिकारी थे और सूत्र बता रहे हैं कि यहां पर साफ कर दिया गया है कि नेतृत्व के विकास में परिवारवाद के लिए कोई जगह नहीं होगी। भ्रष्टाचार और लालच के लिए कोई जगह नहीं होगी। कार्यकर्ता काम कर रहे है, उन्हें आगे लाना प्रथम प्राथमिकता है। यदि ऐसा होगा तभी एक सक्षम संदेश कार्यकर्ताओं के बीच जाएगा।
सरकार और संगठन के बीच समन्वय होना बहुत जरूरी
लखनऊ वाली बैठक में जब भाजपा के सारे कर्णधार नेता एकसाथ बैठे तो चिंतन-मनन केवल चुनाव पर ही नहीं हुआ बल्कि सरकार और संगठन को लेकर भी विचार रखे गए। बताया जाता है कि यहां स्पष्ट किया गया कि सरकार और संगठन के बीच समन्वय होना बहुत जरूरी है। क्योंकि जब सरकार और संगठन के बीच समन्वय होता है तभी पार्टी मजबूत होती है। तभी पार्टी की शक्ति बढ़ती है।
मोर्चों के अध्यक्ष विशेष रूप
से संकल्प पत्र पर दे ध्यान
लखनऊ वाली बैठक में केवल संगठन ही नहीं बल्कि फ्रंटल संगठन की कार्यशैली को लेकर भी चर्चा हुई। मोर्चों को विशेष रूप से अहम माना गया है और यह कहा गया कि किसान मोर्चा, ओबीसी मोर्चा और अल्पसंख्यक मोर्चा सहित सभी मोर्चों के अध्यक्षों को पार्टी के संकल्प पत्र के हर बिंदु पर ध्यान देना है। जो भी बिंदु उनके मोर्चे से संबंधित है उस पर काम करना है। दायित्व केवल दिखावे के लिए न लें। जो भी दायित्व ले उस पर काम करें।
नए चेहरों के साथ सभी समाज को मिले समान प्रतिनिधित्व
उत्तर प्रदेश भाजपा की मैराथन बैठक में 2024 का चुनाव रहा है और साथ ही निगम के चुनाव पर भी फोकस रहा है। निगम चुनाव को लेकर कहा गया है कि यदि रिजल्ट यहीं ठीक नहीं रहा तो फिर 2024 में मजबूती से चुनाव कैसे लड़ेंगे।
बैठक में युवाओं को आगे लाने की बात कही गई है और नए चेहरों के साथ नई लीडरशिप विकसित होने का सीन बन रहा है। यहां पर ये भी तय किया गया है कि भले ही किसी समाज की वोट कम हैं लेकिन हर समाज को संगठन से लेकर सरकार तक प्रतिनिधित्व मिलें। इस तरह से स्वरूप तैयार हो कि हर समाज के लोग भाजपा के साथ समाज की विकास यात्रा में मुख्यधारा में साथ रहे।

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