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नई तकनीकों के साथ अपराधी कर रहे हैं इन दिनों क्राइम को रि-डिफाइन

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सावधान रहें, सतर्क रहें और पुलिस को सूचित करें अगर आपके साथ ऐसा हो क्राइम
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। पुलिस अगर हाईटेक हो रही है तो अपराधी भी अब अपनी तकनीक को बदल रहे है। साइबर क्राइम में जहां रोज नए हथकंडों से ये अपराधी दूर बैठकर अपने शिकार को फांस लेते है तो जिस अपराध की हम बात कर रहे है, उसमें अपराधी बीच सड़क पर और आपकी सोसायटी में आपके ही घर में आपको निशाना बना रहे है। मौका लगने पर घातक हमला भी कर सकते है और इनका अपराध करने का तरीका ऐसा है कि जब तक व्यक्ति कुछ समझेगा तब तक वो शिकार हो जाएगा।
क्राइम का ये सीन लगातार संगीन हो रहा है और अपराधी नई तकनीकों के साथ आ गए है तो यहां पर थोड़ी सी भी सावधानी आपको बड़ी परेशानी में उलझने से बचा सकती है। जिन क्राइम सीन का हम जिक्र कर रहे है वो किसी के साथ भी हो सकता है। कोई डिलीवरी ब्वॉय बनकरआपको घेरे में ले सकता है तो कोई फर्जी रोडरेज का सीन रचकर आपको जबरन लूट सकता है। हाईवे पर गाड़ी रोके तो सतर्क रहे यहां एक गिरोह काम कर रहा है।
करंट क्राइम आपको ऐसे तीन क्राइम सीन से सावधान कर रहा है। यदि ऐसा हो तो तुरंत पुलिस को सूचित करें और बेहतर है कि आप सतर्क रहे, सावधान रहे।
हाईवे पर है कार तो रहे इस तरह के कार सवार बदमाशों से सावधान
सदि आप हाईवे पर है तो आप ध्यान रखे कि कोई आपकी रैकी न कर रहा हो। यदि किसी भी कारण से कार रोकनी है तो सुनसान जगह पर न रोके। आपको लघुशंका जाना है या सेल्फी लेनी है तो थोड़ा सतर्क रहे। डासना पैरिफेरल एक्सप्रेस वे पर कार में सवार चार दोस्त रूके तो उनकी कार में एक व्यक्ति अचानक आकर बैठ गया। चारों युवकों ने जब उसे देखा तो वह कार स्टार्ट करने की कोशिश कर रहा था लेकिन चाबी वो युवक साथ ले गए थे। चारों ने उसे पकड़ा तो इतनी देर में उसके गिरोह के अन्य बदमाश भी आ गए। यहां युवक जब बदमाशों पर भारी पड़े तो वो आनन-फानन में साथी को कार में बैठाकर फरार हो जाते है। ये नया तरीका हाईवे पर इजाद हुआ है और फिर से दोहरा दे कि सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।

जब एक्सीडेंट का लगाकर आरोप जबरन घेर लिया स्कूटी सवार को
(करंट क्राइम)। ये घटना राजनगर एक्सटेंशन में स्कूटी पर आ रहे एक व्यक्ति की है। व्यक्ति सामान्य तरीके से स्कूटी पर जा रहा है अचानक उसके आगे एक कार आकर रूकती है और उसमें सवार चार युवक उतरते है। जब तक स्कूटी सवार कुछ समझ पाता तब तक ये लड़के उसे घेर लेते है और उससे कहते है कि तुमने हमारी कार को टक्कर मारी है, इस नुकसान की तुम्हें भरपाई करनी होगी। स्कूटी सवार अकेला है तो युवक उस पर हावी होते है और चाबी निकालने की कोशिश करते है और पांच हजार रुपये का नुकसान बताते है। गनीमत ये रहती है कि स्कूटी सवार के पास नकद पैसे नहीं होते और वो अपने जानकार को फोन कर देता है। इसी बीच स्कूटी सवार के परिवार के लोग भी पहुंच जाते है। जब दोस्त और परिजन पहुंचते है और कार सवार युवकों को निशाने पर लेते है और पुलिस बुलाने की बात होती है तो ये गैंग वहां से फरार हो जाता है। स्कूटी सवार की किस्मत अच्छी थी कि उसके परिजन और दोस्त आ गए वरना ये गिरोह उससे पांच हजार रुपये लूटकर फरार हो जाता।

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खुशखबरी: जनपद को जल्द मिलेगा एक और संयुक्त जिला चिकित्सालय

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संयुक्त जिला चिकित्सालय लोनी के लिए 50 पद स्वीकृत, 20 चिकित्सक और 20 पैरा मेडिकल स्टाफ के हैं पद
गाजियाबाद (करंट क्राइम)। जिले को जल्द एक और संयुक्त जिला चिकित्सालय मिलने वाला है। लोनी में संयुक्त जिला चिकित्सालय बनकर तैयार है। 50 बेड के इस चिकित्सालय के लिए शासन से 58 पद भी स्वीकृत हो गए हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डा. भवतोष शंखधर ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया चिकित्सालय में महिला और पुरुष विंग बनाए जा रहे हैं।
ये पद किए गए स्वीकृत
दोनों के लिए अलग-अलग मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के पद स्वीकृत हुए हैं। कुल चिकित्सकों के पदों में से 14 पुरुष विंग के लिए और छह महिला विंग के लिए हैं। इसके अलावा 20 पद पैरा मेडिकल स्टाफ के हैं और सहायक कर्मचारियों के 18 पद आऊटसोर्सिंग के जरिए भरे जाएंगे। सीएमओ ने मंगलवार को संयुक्त चिकित्सालय लोनी का निरीक्षण भी किया।
आउट सोर्सिंग से भरे जायेंगे 18 पद
सहायक कर्मचारियों के 18 पद आऊटसोर्सिंग के जरिए भरे जाएंगे। सीएमओ ने कहा एक और संयुक्त जिला चिकित्सालय शुरू होने से जिले में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होंगी। लोनी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को गाजियाबाद तक की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। इसके साथ ही जिला एमएमजी चिकित्सालय और संजयनगर संयुक्त जिला चिकित्सालय पर काम का बोझ कम होगा और लाभार्थियों को पहले से बेहतर सुविधाएं प्राप्त हो सकेंगी।

इन चिकित्सकों की होंगी नियुक्तियां
(करंट क्राइम)। सीएमओ ने बताया – पुरुष इकाई में एक फिजीशियन, एक बाल रोग विशेषज्ञ, एक रेडियोलॉजिस्ट, एक पैथोलॉजिस्ट, एक डेंटल सर्जन, एक एनस्थेटिस्ट, एक जनरल सर्जन, एक हड्डी रोग विशेषज्ञ, एक ईएनटी सर्जन, एक नेत्र सर्जन, एक ईएमओ (इमरजेंसी मेडिकल आफिसर) और एक मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का पद स्वीकृत किया गया है। इसी प्रकार महिला इकाई के लिए एक अधीक्षिका, एक स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक निश्चेतक और तीन पद ईएमओ के हैं। पैरा मेडिकल स्टाफ में एक एक्स-रे टेक्नीशियन, दो लैब टेक्नीशियन, दो फार्मासिस्ट, एक वरिष्ठ सहायक, दो कनिष्ठ सहायक, दो नर्सिंग सिस्टर, आठ स्टाफ नर्स, एक नेत्र सहायक और एक डेंटल हाईजिनिस्ट का पद स्वीकृत किया गया है।

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लैंडक्राफ्ट में युवक की संदिग्ध मौत, पुलिस जांच में जुटी

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आठवीं मंजिल पर क्या कर रहा था मृतक युवक
गाजियाबाद (करंट क्राइम)। कवि नगर थाना अंतर्गत आने वाले लैंडक्राफ्ट सोसाइटी में मंगलवार की रात एक 20 वर्षीय युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि वह आठवीं मंजिल से नीचे गिर गया। मृतक की शिनाख्त हापुड़ निवासी वरदान शर्मा के रूप में हुई है। परिवार वालों के अनुसार वह शाम चार बजे तक हापुड़ में था। यहां वह क्या करने आया था और किससे मिलने, यह किसी को पता नहीं है। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। साथ ही सोसाइटी की सीसीटीवी फुटेज व अन्य पहलुओं पर जांच की जा रही है। कवि नगर एसएचओ अमित ने बताया है कि मृतक की पहचान वरदान शर्मा पुत्र सुनील शर्मा निवासी हापुड़ के रूप में हुई है। पुलिस को सूचना मिली कि युवक आठवीं मंजिल से गिरा है। पुलिस मौके पर पहुंची और तब तक उसे आसपास के लोग पास के निजी अस्पताल लेकर पहुंचे जहां उसकी मौत हो चुकी थी। उधर मृतक युवक के परिजन इसे हादसा होने से इंकार कर रहे हैं। पुलिस फिलहाल पूरे मामले को संदिग्ध मौत मानकर जांच कर रही है। सवाल उठ रहा है कि युवक ने आत्महत्या की या उसको किसी ने धक्का दिया।
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46 साल 11 दिन बाद जनपद गाजियाबाद घोषित हुआ पुलिस कमिश्नरेट

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गाजियाबाद में तीन तहसील, चार ब्लॉक व 24 हैं थाने
गाजियाबाद (करंट क्राइम)। दिल्ली से जनपद गाजियाबाद भी अब पुलिस कमिश्नरेट बन गया है। शुक्रवार को यूपी सरकार कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी मिल दी गई। 14 नवंबर 1976 को गाजियाबाद अलग जिला बना। पंडित जवाहर लाल नेहरू की जयंती पर तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने इसे जिला घोषित किया था। इससे पहले ये मेरठ जिले का हिस्सा हुआ करता था। नोएडा की दादरी, हापुड़ की हापुड़ और गढ़मुक्तेश्वर तहसील भी पहले गाजियाबाद जिले का हिस्सा होती थीं। जब हापुड़ और नोएडा नए जिले बने तो गाजियाबाद की तीन तहसीलें उनमें चली गईं। अब गाजियाबाद में तीन तहसील, चार ब्लॉक और 24 पुलिस स्टेशन हैं। गाजियाबाद की सीमाएं दिल्ली से सटी हैं, इसलिए इसे गेटवे आॅफ यूपी भी कहा जाता है। गाजियाबाद से मेरठ, नोएडा और दिल्ली एकदम सटे हुए हैं।
गाजियाबाद में नगर निगम की स्थापना 31 अगस्त 1994 को हुई। नगर निगम का एरिया 220 वर्गकिलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। 2011 की जनगणना के हिसाब से जिले की आबादी 46 लाख 61 हजार 452 है।
पुलिस को मिल जाएंगी ये शक्तियां
अब तक बड़े शहरों में ही यह व्यवस्था लागू थी। अब आगरा में भी यह व्यवस्था लागू होगी। इसके बाद शांति भंग और 107-116 की कार्रवाई में एसीपी की कोर्ट में पेश होना होगा। आईपीएस अधिकारियों की संख्या बढ़ेगी। आपात स्थिति में कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी सहित अन्य अधिकारियों के आदेश का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पुलिस कमिश्नर खुद फैसला लेकर कार्रवाई के लिए निर्देशित कर सकेंगे। प्रदर्शन, किसी आयोजन, रूट प्लान की अनुमति आदि के लिए जिलाधिकारी के पास नहीं जाना होगा।
दंगा होने की स्थिति में कितनी फोर्स लगाई जानी है। लाठीचार्ज करना है या नहीं, इसकी अनुमति भी नहीं लेनी पड़ेगी। होटल, बार और हथियार के लाइसेंस देने का अधिकार भी पुलिस कमिश्नर के पास होगा। जमीन से संबंधित विवाद के निस्तारण के लिए भी अधिकार पुलिस के पास ही पहुंच जाएंगे।
इस व्यवस्था के बाद ये होंगे पुलिस के पद
पुलिस आयुक्त या पुलिस कमिश्नर (सीपी)। संयुक्त आयुक्त या ज्वाइंट कमिश्नर (जेसीपी)। डिप्टी कमिश्नर (डीसीपी)। सहायक आयुक्त (एसीपी)। पुलिस इंस्पेक्टर। सब इंस्पेक्टर।
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अब डीएम नहीं दे सकेंगे कानून व्यवस्था संबंधी कोई निर्देश
(करंट क्राइम)। पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद डीएम के कई अधिकार पुलिस कमिश्नर को मिल जाते हैं। इसमें पुलिसकर्मियों के तबादले अब कमिश्नर स्तर पर हो सकेंगे। लाठी चार्ज या फायरिंग के आदेश पुलिस कमिश्नर दे सकते हैं। जिन जिलोंं में यह सिस्टम लागू नहीं है, वहां डीएम के पास सीआरपीसी कानून- व्यवस्था संबंधी कई अधिकार होते है। पुलिस कमिश्नरी सिस्टम में ये सारे अधिकार डीएम की बजाय सीधे पुलिस कमिश्नर के पास होंगे।

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