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दिल्ली

‘आधार’ कब होगा दमदार?

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एक ओर जहां आधार कार्ड जटिल कानूनों में उलझा हुआ है, वहीं निगरानी और निजता को लेकर इस पर विवाद शुरू हो गया है। (latest news) यह सच है कि आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया में अपनाई जाने वाली वैज्ञानिक तकनीक से देश की ज्यादातर आबादी बिल्कुल बेखबर है, लेकिन निजता पर हमला की आशंका के जवाब में सरकार का सुप्रीम कोर्ट में कोई ठोस तर्क न दे पाना इशारा करता है कि यह मामला जल्द सुलझने वाला नहीं है। आधार कार्ड वह प्रामाणिक आधार बन सकता है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में दोहरा और फर्जी लाभ लेने वालों पर अंकुश लगे (कुछ क्षेत्रों में लगा भी है) और सरकारी खजाने पर सेंधमारी भी रुके। लेकिन सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि यह निजता पर खतरा कैसे नहीं है? सरकार इसे स्पष्ट करे।

फिलहाल सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का फायदा लेने के लिए आधार कार्ड वैकल्पिक रहेगा तथा इसका उपयोग केवल सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) व रसोई गैस वितरण के अलावा नहीं हो सकेगा। अब तक 90 करोड़ से ज्यादा भारतीयों का आधार कार्ड बन चुका है।

आधार कार्ड को निजता का हनन बताने वालों का तर्क है कि निजता, गोपनीय होती है। व्यक्तिगत-गोपनीय जानकारियां हासिल कर दूसरे इसका दुरुपयोग नहीं कर पाएं। साथ ही यह भी तर्क है कि भविष्य में आधार कार्ड प्रोजेक्ट किसी भी व्यक्ति की निजी प्रोफाइल जैसा ही होगा, जिसमें हर कुछ डाटा बेस के रूप में सहेजा हुआ होगा। मसलन उसने कब, कहां, कैसे यात्रा की, किस-किस से कब-कब रुपयों का लेन-देन किया यहां तक कि फोन काल डिटेल रिकॉर्ड भी। मतलब सारा कुछ रिकॉर्ड रख पाना आसान। इसी कारण याचिकाकर्ता इसे निजता और स्वतंत्रता का हनन मानते हैं।

सरकार भी चौतरफा घिरती नजर आ रही है, क्योंकि यह सच है कि सन् 2011 में महज एक आदेश पर शुरू इस योजना के लिए तब न तो कोई विधिक और न ही संवैधानिक प्रावधान किए गए थे। बाद में जो भी किया गया, एक तरह से आधा-अधूरा था क्योंकि तब भी इसके आंकड़ों के दुरुपयोग को रोकने और निजता के उल्लंघन से निपटने का ध्यान ही नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट में भी बहस के दौरान सरकार का तर्क यही था कि निजता का अधिकार मूल अधिकार नहीं है। संवैधानिक रूप से यह सच भी हो लेकिन क्या सूचना क्रांति के इस युग में यह भय और आने वाले खतरों का विषय नहीं?

यह कहना भी ठीक नहीं कि भारत में लोगों के पास कोई पहचान-पत्र नहीं है। हकीकत यह कि बहुतों के पास एक से ज्यादा हैं। 1985 में देश के 10 राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों में ‘पब्लिक इवैल्यूएशन ऑफ एन्टाइटलमेंट प्रोग्राम’ के सर्वे से पता चला था कि 85.6 प्रतिशत लोगों के पास तब भी मतदाता पहचान-पत्र, राशन कार्ड या राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना कार्ड था। इसमें एक मजेदार तथ्य आया, लगभग 76 प्रतिशत लोगों के पास तीनो पहचान-पत्र थे।

मतलब यह हुआ कि पहचान-पत्र के बावजूद लोग सरकारी योजनाओं से वंचित रह जाते हैं। इसका यह मतलब भी नहीं कि जिन गरीबों के पास आधार कार्ड है, सभी को अनिवार्य रूप से सब्सिडी वाला राशन और सामाजिक सुरक्षा पेंशन मिल रही हो। वहीं ऐसे लोगों की भी खासी संख्या है जो बिना आधार के ही सरकारी योजनाओं का फायदा ले रहे हैं।

तमिलनाडु में बिना आधार पीडीएस का फायदा सभी को मिलता है, जिसमें त्रुटि 10 प्रतिशत से भी कम है। इसी तरह ओडीशा और छत्तीसगढ़ ने भी मनरेगा मजदूरी भुगतान बिना आधार के ही खाते के जरिए त्रुटि रहित रूप से करने में सफलता पाई।

हां, आधार कार्ड व्यक्तिगत विशिष्ट पहचान यानी यूनिक आईडेंटिटी का वैज्ञानिक तरीका हो सकता है, होना भी चाहिए ताकि व्यक्ति की ऑनलाइन पहचान हो सके। इस हेतु स्पष्ट प्रावधान हों, सर्वसम्मत सहमति बने, कई पहचान पत्रों से मुक्ति मिले।

जहां पहचान के लिए इलेक्ट्रॉनिक पहचान तंत्र की सर्व सुलभ सुविधा हो, आधार नंबर बताएं और फौरन उसकी पुष्टि हो जाए। वहीं अपराधियों की पहचान होगी, दुर्घटना के शिकार या लावारिशों की शिनाख्त आसान होगी, क्योंकि विशिष्ट पहचान-पत्र में दर्ज बायोलॉजिकल डाटा ही पहचान उगलेगा। लेकिन यह पहचान तक ही सीमित हो तो ठीक है।

यदि इसके जरिए निजी क्रिया-कलापों का प्रोफाइल बनाकर सार्वजनिक मंच से जोड़ा जाएगा तो निजता पर हमले की बात तो लगती है। यकीनन मामला जटिल है लेकिन सरल बनाने के लिए सरकारी पहल भी आसान प्रतीत नहीं होती है। ऐसा लग रहा है कि भारत में वो दिन अभी बहुत दूर है जब भारतीयों को विशिष्ट पहचान दिलाकर आधार, लगेगा खूब दमदार।

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विक्रम वेधा के बाद पुष्कर गायत्री ला रहे क्राइम सीरीज, प्राइम वीडियो पर इस दिन होगी रिलीज

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नई दिल्ली। यह साल दक्षिण भारत के नाम रहा। फिल्में हों या कलाकार। दक्षिण भारतीय भाषाओं का कंटेंट खूब चला। इसीलिए, कई ऐसी फिल्में और सीरीज आयीं, जिन्हें हिंदी में भी रिलीज किया गया। इसी क्रम में वधांधी- द फेबल ऑफ वेलोनी आ रही है। मूल रूप से यह तमिल क्राइम थ्रिलर है, जिसे तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ के साथ हिंदी में भी स्ट्रीम किया जाएगा। सीरीज का ट्रेलर मंगलवार को जारी कर दिया गया।

क्या है सीरीज की कहानी?

वधांधी की कहानी के केंद्र में एक ईमानदार और तेजतर्रार पुलिस अफसर विवेक है, जो 18 साल की वेलोनी के कत्ल की गुत्थी सुलझाने में लगा है। कत्ल को बाद वेलोनी को लेकर कुछ अफवाहें फैलने लगती हैं, जो उसकी छवि को बिगाड़ रही हैं। विवेक के सामने यह भी एक चुनौती है कि जल्दी से केस सुलझाकर इन अफवाहों पर विराम लगाये।

सीरीज की स्टार कास्ट

वधांधी से तमिल एक्टर एसजे सूर्या ओटीटी डेब्यू कर रहे हैं। विवेक का किरदार उन्होंने ही निभाया है। सीरीज का निर्माण पुष्कर और गायत्री ने किया है, जिनकी फिल्म विक्रम वेधा में ऋतिक रोशन और सैफ अली खान ने लीड रोल्स निभाये थे। उनके अलावा नासर, विवेक प्रसन्ना, कुमारन थंगराजन और स्मृति वेंकट अहम भूमिकाओं में दिखेंगे। एंड्रयू लुइस निर्देशित सीरीज में लोकप्रिय अभिनेत्री लैला अहम भूमिका में दिखेंगी। साथ में संजना भी एक किरदार में नजर आएंगी। उनका यह डेब्यू है। एंड्रयू ने कहा- यह नोइर क्राइम थ्रिलर है और दर्शकों को अंदाजा लगाना मुश्किल होगा कि कहानी कहां जा रही है। स्क्रिप्ट से लेकर सीरीज के निर्देशन तक का पूरा सफर काफी रोमांचक रहा है। एसजे सूर्या, तमिल सिनेमा के चर्चित एक्टर-डायरेक्टर हैं। एंड्रयू ने सहायक निर्देशक के तौर पर सूर्या के साथ सात सालों तक काम किया है। सूर्या ने अपने ओटीटी डेब्यू को लेकर कहा कि जब पुष्कर-गायत्री ने मुझे सीरीज के लिए एप्रोच किया तो मैं बहुत खुश हुआ था। पहले भी पुलिस अफसर का किरदार निभा चुका हूं, लेकिन विवेक सामान्य किरदार नहीं है। सस्पेंस से भरी इस कहानी में दर्शक डूब जाएंगे।  अपने किरदार के बारे में लैला ने बताया कि मेरा किरदार काफी मजबूत है। हालांकि, यह एक ऐसी महिला का है, जो कमजोर है। मुश्किलों में रह रही यह महिला अपनी छोटी बेटी की हिफाजत की कोशिशों में जुटी रहती है। सीरीज में वेलोनी का टाइटल रोल संजना निभा रही हैं। संजना ने इस चुनौतीपूर्ण भूमिका के लिए लेखक-निर्देशक और निर्माताओं का शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने संजना में भरोसा दिखाया। नवोदित एक्ट्रेस सीरीज को अपना ड्रीम डेब्यू मानती हैं।

 

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UAE के विदेश मंत्री दो दिवसीय भारत दौरे पर , एस जयशंकर से की मुलाकात

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नई दिल्ली। एस जयशंकर ने मंगलवार को यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से दिल्ली में मुलाकात की। इस दौरान जयशंकर ने कहा कि भारत और यूएई अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाएंगे। जयशंकर ने ट्वीट कर कहा कि भारत में यूएई के महामहिम शेख अब्दुल बिन जायद का स्वागत करना हमेशा प्रसन्नता का विषय है। इस साल ये हमारी चौथी संरचित बैठक है। जयशंकर ने कहा कि हम अपनी व्यापक रणनीतिक सहभागिता को आगे बढ़ाएंगे।

भारत की आधिकारिक यात्रा पर जायद

बता दें कि जायद भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, ‘यूएई के विदेश मामलों के और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मंत्री महामहिम शेख अब्दुल्ला 21-22 नवंबर को भारत की आधिकारिक यात्रा कर रहे हैं।’ जायद के साथ एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है।

पीएम मोदी ने की थी यूएई की यात्रा

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, उनकी ये यात्रा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय और पारस्परिक हित के वैश्विक मुद्दों पर नियमित परामर्श का हिस्सा होगी। मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 जून 2022 को यूएई का दौरा किया था। तब उन्होंने दौरान उन्होंने शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की थी। वहीं, जयशंकर ने जायद के साथ तीसरी रणनीतिक वार्ता की सह-अध्यक्षता करने के लिए यूएई का दौरा किया था।

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मैं कड़ी मेहनत करता हूं और काम करके दिखाता हूं: पीएम मोदी

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुरेंद्रनगर में सार्वजनिक बैठक शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने अभिभाषण भी दिया। मैंने कहा कि नर्मदा योजना का सबसे बड़ा लाभ किसी भी जिले को मिलेगा, सुरेंद्रनगर जिले को मिलेगा और आज वह लाभ आप तक पहुंच गया है।
पीएम मोदी नो कहा कि मैं जानता हूं कि गुजरात में घर-घर 24 घंटे बिजली पहुंचाना एक कठिन काम है, लेकिन मुझे कड़ी मेहनत करनी पड़ी है। मैं कड़ी मेहनत करता हूं और
काम करके दिखाता हूं।
पीएम मोदी ने कहा कि हमारा सुरेंद्रनगर जिला नमक बनाने में एक है। भारत के 80% नमक का उत्पादन गुजरात में होता है। इससे लाखों लोगों को रोजगार मिलता है। पहले के जमाने में गुजरात में उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्य जाना पड़ता था, आज दूसरे राज्यों के युवा गुजरात की धरती पर पढ़ने आते हैं।
मैं वार महोत्सव में अपमान को निगलता हूं क्योंकि मैं इस देश के 130 करोड़ लोगों का भला करना चाहता हूं, मैं इस भारत को एक विकसित भारत बनाना चाहता हूं।

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