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दिल्ली एन.सी.आर

मसरत (Masrat Alam) की रिहाई पर केंद्र से नहीं हुई थी बात: मोदी

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नई दिल्ली : जम्मू-कश्मीर में अलगावादी नेता मसरत आलम (masrat alam) की रिहाई के मुद्दे पर विपक्ष ने संसद के दोनों सदनों में जमकर हंगामा किया। लोकसभा में इस मुद्दे पर बयान देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा विपक्ष को आलोचना का हक है और देश में जो आक्रोश है उसमें एक स्वर मेरा भी है। उन्होंने कहा कि इस तरह की किसी भी हरकत पर आक्रोश जताना उचित है। हालांकि, अपने बयान में पीएम ने यह भी कहा कि हमें देशभक्ति की सीख न दें, हमने कश्मीर के लिए अपने नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान है। उनकी इस बात पर विपक्षी सदस्य हंगामा करने लगे।

पीएम से पहले गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन को जम्मू-कश्मीर गृह विभाग से मसरत आलम की रिहाई के बारे में मिली रिपोर्ट की जानकारी दी। राजनाथ सिंह ने कहा कि केंद्र इस रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं है और कुछ मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। राजनाथ सिंह ने अपना बयान संसद के ऊपर सदन राज्यसभा में भी दोहराया।

सोमवार को लोकसभा में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, एनसीपी, आरजेडी और जेडी (यू) सदस्यों ने प्रधानमंत्री के बयान की मांग करते हुए भारी हंगामा किया, जिसके कारण बैठक करीब सवा 11 बजे 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। एनडीए सरकार ने इसे गंभीर मसला बताया और इससे दूरी बनाने का प्रयास करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार से सलाह नहीं ली थी। साढ़े 11 बजे सदन की बैठक फिर से शुरू होने पर विपक्षी सदस्य प्रधानमंत्री के बयान की मांग करने लगे। नायडू ने एक बार फिर से सदस्यों को आश्वस्त किया कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह 12 बजे सदन में आकर बयान देंगे और प्रधानमंत्री भी सदन में मौजूद रहेंगे तथा जरूरत पड़ी तो वह हस्तक्षेप करेंगे। इसके बाद विपक्षी सदस्य शांत हुए और प्रश्नकाल की कार्यवाही सुचारू रूप से चली।

राजनाथ सिंह ने लोकसभा में बयान देते हुए कहा, ‘सदन के कई सम्मानित सदस्यों ने अलगाववादी नेता मसरत आलम की रिहाई पर चिंता जताई है। जैसे ही हमें उसकी रिहाई की जानकारी मिली हमने जम्मू-कश्मीर के गृह विभाग से इसकी रिपोर्ट मांगी। यह रिपोर्ट हमें मिल चुकी है। पूरे सदन को इस मामले में आश्वस्त करना चाहता हूं कि जब भी देश या जनता की सुरक्षा का सवाल उठेगा उस बारे में हम कोई समझौता नहीं करेगा।’ गृह मंत्री ने कहा कि जो भी जानकारी हमें जम्मू-कश्मीर गृह विभाग से मिली है, उसके बारे में सदन को जानकारी देने चाहता हूं।

राजनाथ सिंह राज्य सरकार से मिली जानकारी के आधार पर बताया, ‘मसरत ने 2010 में घाटी में हुए उग्र प्रदर्शनों में मुख्य भूमिका निभाई थी। 1995 से लेकर अब तक उस पर 27 मामले दर्ज किए गए जिनमें देशद्रोह, हत्या का प्रयास और साजिश रचने के मामले हैं। विभाग का कहना है कि सभी 27 मामलों में उसे कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। फरवरी 2010 से पब्लिक सेफ्टी ऐक्ट के तहत उसे 8 बार हिरासत में लिया जा चुका है। हाई कोर्ट का कहना है कि किसी एक शख्स को एक ही आरोप में दो साल से ज्यादा हिरासत में नहीं रख सकते हैं। हम गृह विभाग के इस जवाब से संतुष्ट नहीं है और कुछ मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। सदन अगर चाहेगा तो स्पष्टीकरण मिलने के बाद उस बारे में भी सूचित किया जाएगा।’

इस मामले में दखल देते हुए पीएम ने कहा, ‘देश में जो आक्रोश है, उस आक्रोश के स्वर में मेरा भी स्वर है। इस तरह की किसी भी हरकत पर आक्रोश जताना उचित है। देश अलगाववाद के मुद्दे पर दलबंदी के आधार पर न पहले कभी सोचता था , न अब सोचता है और न कभी आगे सोचेगा।’ उन्होंने कहा, ‘जम्मू-कश्मीर में सरकार बनने के बाद वहां जो भी हो रहा है उसकी भारत सरकार को जानकारी नहीं है। इस बारे में केंद्र सरकार से कोई सलाह नहीं ली गई है। हमें ऐसी कोई हरकत स्वीकार नहीं। हमने कुछ मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगा है और जैसा कि गृहमंत्री ने बताया कि स्पष्टीकरण आने के बाद सदन को सूचित किया जाएगा।’

प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे पर कहा, ‘समय आने पर अवश्य राजनीतिक टिप्पणियां करें। बीजेपी वहां सरकार में हिस्सेदार है और आप उसकी भरपूर आलोचना करें, होनी भी चाहिए लेकिन ऐसा करते समय देश की एकता के संबंध में यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि हमारे भिन्न स्वर हैं। ऐसा संदेश न देश में , न दुनिया में और न कश्मीर में जाना चाहिए।’ विपक्ष द्वारा हंगामा जारी रहने पर उन्होंने कहा, ‘यह पूछा जा रहा है कि मोदी जी चुप क्यों हैं? ऐसा कोई कारण नहीं है कि हमें इस मुद्दे पर चुप रहना पड़े हम वो लोग हैं जिन्होंने इन आदर्शों के लिए श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान दिया है, इसलिए कृपया करके हमें देशभक्ति न सिखाएं।’

इससे पहले आसन के समक्ष सदस्यों की नारेबाजी के बीच संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा, ‘यह बेहद गंभीर मामला है और पूरे देश से जुड़ा हुआ है। यह किसी एक पार्टी से जुडा मामला नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘जहां तक सरकार का सवाल है, केंद्र सरकार से सलाह नहीं की गई।’ लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने भी इस मसले पर कार्य स्थगन प्रस्ताव पेश करने वाले कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे, दीपेन्द्र सिंह हुड्डा और तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय को आश्वासन दिया कि वह 12 बजे सदस्यों को अपनी बात रखने का मौका देंगी।

राज्यसभा में विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए सत्ता पक्ष के नेता और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि हमारी सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा, ‘जहां तक एक शख्स की रिहाई को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो केंद्र सरकार ने इस बारे में जम्मू-कश्मीर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। प्रारंभिक रिपोर्ट आई है और इस बारे में गृहमंत्री सदन में बयान देंगे।’ इसके बाद मोदी से जवाब की मांग कर रहे कांग्रेस सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा की बैठक आज करीब 20 मिनट के लिए दोपहर 12 बजे तक स्थगित हो गई।

इससे पहले कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि इसके लिए उन्होंने कार्यस्थगन प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में नई सरकार के आने के एक हफ्ते के भीतर ही अलगाववादी तत्वों की गतिविधियां बढ़ गई हैं और वे जलसे कर राष्ट्रविरोधी बयान दे रहे हैं। शर्मा ने कहा कि अब राज्य की सरकार ने एक अलगाववादी को रिहा किया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक राज्य नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र की सुरक्षा का विषय है।

शर्मा ने कहा कि पीडीपी नेता कह रहे हैं कि इस अलगाववादी को न्यूनतम साझा कार्यक्रम के तहत छोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि दो पार्टियों द्वारा सरकार चलाने के लिए बनाई गई सीएमपी से विदेश नीति तय नहीं हो सकती। कांग्रेस नेता ने कहा कि राज्य में पीडीपी-बीजेपी सरकार के शपथ लेने के समय प्रधानमंत्री भी गए थे और केंद्र सरकार मुद्दे से अपना पल्ला नहीं झाड़ सकती है।

पीडीपी के मीर मोहम्मद फैयाज ने इस मुद्दे को इस समय उठाने के लिए आलोचना करते हुए कहा कि कांग्रेस ने उस समय एक भी शब्द नहीं बोला था, जब 2002 में पीडीपी-कांग्रेस गठबंधन सरकार ने सैयद अली शाह गिलानी, शब्बीर शाह और यासीन मलिक जैसे हुर्रियत नेताओं को छोड़ा था। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने राज्यसभा में आने के लिए सिद्धांतों से समझौता किया क्योंकि पांच कांग्रेस विधायकों ने संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी पर चढ़ाए जाने के मामले में पीडीपी के समान विचार व्यक्त किए थे।

आजाद ने पीडीपी सदस्य के इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि कांग्रेस के तीन-चार विधायकों ने पीडीपी के मुख्य प्रवक्ता और अब राज्य सरकार के एक मंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया जताते हुए कहा था कि मानवता के आधार पर अफजल के परिजनों को उससे मिलने की इजाजत दी जानी चाहिए थी और उसका शव सौंपा जाना चाहिए था। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेसस विधायकों ने अफजल की फांसी के बारे में कुछ नहीं कहा था उन्होंने फांसी की भर्त्सना नहीं की थी।

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46 साल 11 दिन बाद जनपद गाजियाबाद घोषित हुआ पुलिस कमिश्नरेट

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गाजियाबाद में तीन तहसील, चार ब्लॉक व 24 हैं थाने
गाजियाबाद (करंट क्राइम)। दिल्ली से जनपद गाजियाबाद भी अब पुलिस कमिश्नरेट बन गया है। शुक्रवार को यूपी सरकार कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी मिल दी गई। 14 नवंबर 1976 को गाजियाबाद अलग जिला बना। पंडित जवाहर लाल नेहरू की जयंती पर तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने इसे जिला घोषित किया था। इससे पहले ये मेरठ जिले का हिस्सा हुआ करता था। नोएडा की दादरी, हापुड़ की हापुड़ और गढ़मुक्तेश्वर तहसील भी पहले गाजियाबाद जिले का हिस्सा होती थीं। जब हापुड़ और नोएडा नए जिले बने तो गाजियाबाद की तीन तहसीलें उनमें चली गईं। अब गाजियाबाद में तीन तहसील, चार ब्लॉक और 24 पुलिस स्टेशन हैं। गाजियाबाद की सीमाएं दिल्ली से सटी हैं, इसलिए इसे गेटवे आॅफ यूपी भी कहा जाता है। गाजियाबाद से मेरठ, नोएडा और दिल्ली एकदम सटे हुए हैं।
गाजियाबाद में नगर निगम की स्थापना 31 अगस्त 1994 को हुई। नगर निगम का एरिया 220 वर्गकिलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। 2011 की जनगणना के हिसाब से जिले की आबादी 46 लाख 61 हजार 452 है।
पुलिस को मिल जाएंगी ये शक्तियां
अब तक बड़े शहरों में ही यह व्यवस्था लागू थी। अब आगरा में भी यह व्यवस्था लागू होगी। इसके बाद शांति भंग और 107-116 की कार्रवाई में एसीपी की कोर्ट में पेश होना होगा। आईपीएस अधिकारियों की संख्या बढ़ेगी। आपात स्थिति में कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी सहित अन्य अधिकारियों के आदेश का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पुलिस कमिश्नर खुद फैसला लेकर कार्रवाई के लिए निर्देशित कर सकेंगे। प्रदर्शन, किसी आयोजन, रूट प्लान की अनुमति आदि के लिए जिलाधिकारी के पास नहीं जाना होगा।
दंगा होने की स्थिति में कितनी फोर्स लगाई जानी है। लाठीचार्ज करना है या नहीं, इसकी अनुमति भी नहीं लेनी पड़ेगी। होटल, बार और हथियार के लाइसेंस देने का अधिकार भी पुलिस कमिश्नर के पास होगा। जमीन से संबंधित विवाद के निस्तारण के लिए भी अधिकार पुलिस के पास ही पहुंच जाएंगे।
इस व्यवस्था के बाद ये होंगे पुलिस के पद
पुलिस आयुक्त या पुलिस कमिश्नर (सीपी)। संयुक्त आयुक्त या ज्वाइंट कमिश्नर (जेसीपी)। डिप्टी कमिश्नर (डीसीपी)। सहायक आयुक्त (एसीपी)। पुलिस इंस्पेक्टर। सब इंस्पेक्टर।
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अब डीएम नहीं दे सकेंगे कानून व्यवस्था संबंधी कोई निर्देश
(करंट क्राइम)। पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद डीएम के कई अधिकार पुलिस कमिश्नर को मिल जाते हैं। इसमें पुलिसकर्मियों के तबादले अब कमिश्नर स्तर पर हो सकेंगे। लाठी चार्ज या फायरिंग के आदेश पुलिस कमिश्नर दे सकते हैं। जिन जिलोंं में यह सिस्टम लागू नहीं है, वहां डीएम के पास सीआरपीसी कानून- व्यवस्था संबंधी कई अधिकार होते है। पुलिस कमिश्नरी सिस्टम में ये सारे अधिकार डीएम की बजाय सीधे पुलिस कमिश्नर के पास होंगे।

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सब जानते हैं इंद्रजीत सिंह टीटू का हमेशा रहता है नेक ईरादा

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मूर्ति ना सही पत्थर पर नाम लिखवाकर पूरा करें सुच्चा सिंह के परिवार से किया वादा
गाजियाबाद (करंट क्राइम)। दशमेश वाटिका एक लम्बे संघर्ष के बाद सिख समाज को मिली है। दशमेश वाटिका के संघर्ष में जब भी कोई नाम आयेगा तो यहां इंद्रजीत सिंह टीटू का नाम सबसे पहले आयेगा। लेकिन एक नाम ऐसा है जो अब इस दुनिया में नहीं है लेकिन दशमेश वाटिका के संघर्ष में इस नाम को कभी भुलाया नही जायेगा। ये नाम सरदार सुच्चा सिंह का है, जो अब इस दुनिया मे नही है। हाल ही में यहां एक एतिहासिक कार्यक्रम हुआ और इस कार्यक्रम के आयोजन में, सिख समाज की शौर्य गाथा को सजीव रूप से बताने में सरदार इंद्रजीत सिंह टीटू की अहम भूमिका रही। सरदार इंद्रजीत सिंह टीटू हमेशा से धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं और उनकी कोशिश हमेशा सबको साथ लेकर चलने की और सबको आगे बढ़ावा देने की रहती है। दशमेश वाटिका की बात करें तो दस साल का संघर्ष रहा है और हाल ही में जब यहां ब्रिटिश सेना के अधिकारी भी आये तो यहां पर स्वर्गीय सरदार सुच्चा सिंह के परिजनों को भी बुलाया गया था। यहां पर नामों की चर्चा हुई लेकिन जब बात मूर्तियों के इतिहास से लेकर पत्थर पर दर्ज होने की आयी तो यहां सुच्चा सिंह और उनके परिवार के इसी सदस्य का नाम दर्ज नहीं हुआ। परिजनों ने याद दिलाया है कि दो साल पहले इंद्रजीत सिंह टीटू ने ही शिब्बनपुरा के गुरुद्वारा में दशमेश वाटिका में सुच्चा सिंह का स्टैच्यु लगाने की बात कही थी। उनकी श्रृद्धांजलि सभा में ये बात कही गयी थी और ईधर ये कहा गया कि सरदार इंद्रजीत सिंह टीटू का हमेशा से नेक ईरादा रहता है और वो अपना वादा भी पूरा करेंगे।
दशमेश वाटिका की लिस्ट 40 में हों संघर्ष यात्रा में शामिल लोगों के नाम
दशमेश वाटिका ऐसे ही सिख समाज को नही मिली है। यहां एक लम्बा संघर्ष सिख समाज ने किया है। इन नामों का जिक्र होगा तो यहां पूर्व पार्षद धीरेन्द्र बिल्लु का भी नाम आयेगा।
यहां इंद्रजीत टीटू का भी नाम आयेगा तो सरदार सुच्चा सिंह का भी नाम आयेगा। ये वो लोग हैं और कई नाम हैं जिन्होंने संघर्ष किया है। यदि इस संघर्ष यात्रा के फोटो से लेकर खबरों की कटिंग निकाली जायेगी तो यहां सुच्चा सिंह का फोटो हर तीसरी खबर में आयेगा। सुच्चा सिंह के परिवार की भी तमन्ना है कि लिस्ट 40 में उन्हें भी स्थान मिले। जिस व्यक्ति ने संघर्ष किया है उसके परिवार के किसी सदस्य का नाम इस लिस्ट में नही है।
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सुच्चा सिंह के सुपुत्र मनप्रीत ने कहा पिता के संघर्ष की दास्तां हो दर्ज

स्वर्गीय सुच्चा सिंह के सुपुत्र मनप्रीत सिंह मन्नी और उनके चचेरे भाई अशमीत सिंह करंट क्राइम मुख्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने कहा कि दो साल पहले पिता के निधन के बाद श्रृद्धांजलि सभा में परिवार को आर्थिक सहायता देने की बात कही गयी थी, जो आजतक नहीं मिली। लेकिन हमें आर्थिक सहायता नही चाहिए। वादा तो मूर्ति लगवाने का भी हुआ था लेकिन मूर्ति भी नहीं चाहिए मगर हमारे पिता स्वर्गीय सुच्चा सिंह ने दशमेश वाटिका के लिए संघर्ष किया है और हम चाहते हैं कि पिता के संघर्ष की दास्तां यहां दर्ज हो। एक पत्थर हमारे पिता के नाम पर भी यहां लगाया जाये।

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भगवागढ़ की सियासी जमीन पर ऐसे ही नही हो रही है रिश्तों की ये केयर

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कुछ तो बन रहा है सियासी समीकरण क्योंकि ये सीन होता है बहुत ही रेयर
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। सियासत में कभी भी चीजें अचानक नही होती हैं। ये ठीक उस बारिश की तरह होती हैं जो हमें बादल के रूप में दिखाई तो अचानक देती हैं लेकिन इनके आने की भूमिका आसमान में काफी पहले तैयार हो रही होती है। भगवा गढ़ में विधानसभा और लोकसभा वाली राहें अब जुदा-जुदा सी दिखायी देती हैं। जुबान भले ही खामोश है लेकिन लहजे बता रहे हैं कि लिहाज अब उतना नही रहा जितना पहले रिवाज हुआ करता था। अगर वो बदल रहे हैं तो फिर बहुत कुछ बदल रहा है और भगवा गढ़ की सियासी जमीन पर रिश्तों की नयी फसल तैयार हो रही है। ऐसे ही रिश्तों की केयर नहीं की जा रही है और वो देखने को मिल रहा है जो अक्सर पहले रेयर होता था। अब मेयर चुनाव से पहले ये सब देखने को मिल रहा है। विधानसभा में टोली अलग है तो लोकसभा की बोली भी अब अलग हो रही है। नये समीकरण बन रहे हैं और उथल पुथल के मंथन में रिश्तों की नयी इबारत तैयार हो रही है। सियासी लोग इस नयी आहट को भांप रहे हैं और वो भी अब अधिक जानकारी के लिए भाजपा वालों में ही झांक रहे हैं। कहीं साहब की हमदर्दी अधिक है तो कहीं दीदी ने नये रिश्ते बनाये हैं। मंच पर ये रिश्ते नजर आये हैं।
दिनेश गोयल का अलग स्टैण्ड बता दिया बिना नाम लिये पार्टी के अगेंस्ट
जब लोकसभा में समीकरण बदल रहे हैं तो इफेक्ट वहां भी हैं जिन्हें गैर विवादित कहा जाता है। एमएलसी दिनेश गोयल इस कहानी में साईलेंट मोड पर नहीं रहे। वो सामने आये और उन्होंने अलग से स्टैण्ड लिया। उन्होंने तो नाम लिये बिना ही कह दिया कि जो अपने सांसद के लिए ऐसा कह रहे हैं या कर रहे हैं तो वो एक तरह से पार्टी के अगेंस्ट जा रहे हैं। उन्होंने जनरल वीके सिंह को सबसे बेस्ट बताया और उनके चुनाव लड़ने के सवाल पर कोई शक ही नही जताया। उन्होंने यहां सीधे सीधे खुद को पार्टी स्टैण्ड के साथ सांसद के साथ खड़ा किया।
जनरल ने दिया संदेश गम की घड़ी में साथ खड़े हैं हम
कहानी में किरदार बदले हैं और दिलदार वही हैं। राजनीति में संदेश दिये जाते हैं और नये किरदार के साथ ये संदेश जनरल वीके सिंह ने दिया है। भाजपा नेता अशोक मोंगा के भाई का निधन हुआ तो जनरल वीके सिंह शोक व्यक्त करने अशोक मोंगा के घर पहुंचे। एक बार नहीं दो बार पहुंचे और शोक व्यक्त करने के लिए बैठे तो घड़ी की सुईयां नहीं देखीं। ये संदेश दिया कि अशोक मोंगा हम तुम्हारे गम की घड़ी में साथ हैं।
केवल राजनीति की सबकुछ नही होती, रिश्ते भी होते हैं। इसके बाद अशोक मोंगा के भाई की शोक सभा में भी जनरल वीके सिंह पहुंचे। ये संदेश उन्हीं लोगों के लिए था जहां जनरल संदेश पहुंचाना चाहते थे।
रिश्तों की खिली बहार जब दीदी के साथ ये चेहरे दिखे
एक साथ
पहले बताया था कि राजनीति में बिना वजह कुछ नही होता। रिश्तों के पौधे पर स्रेह का फूल आया है। आईएमएस में आयोजित कार्यक्रम का ये चित्र यही संदेश लेकर आया है। इस कार्यक्रम में जनरल वीके सिंह को आना था, वो नहीं पहुंचे तो उनकी पुत्री मृणालिनी सिंह पहुंची। चित्र में राजनीति वालों के लिए विचित्र बात ये है कि इस चित्र में मृणालिनी सिंह के साथ एमएलसी दिनेश गोयल हैं तो दूसरी तरफ भाजपा नेता अशोक मोंगा हैं। ये संदेश है कि हम साथ साथ हैं। रिश्तों की ये बहार बता रही है कि इफेक्ट चुनाव से लेकर सरकार तक दिखाई देंगे। अशोक मोंगा भाजपा का पुराना समर्पित कार्यकर्ता वाला चेहरा हैं और पंजाबी समाज से मेयर वाली दावेदारी में ये नाम चल रहा है। वहीं एमएलसी दिनेश गोयल का नाम मंत्री मंडल वाली लिस्ट में कभी भी ट्विस्ट करा सकता है। नये समीकरण हैं और राजनीति की नयी जमीन तैयार हो
रही है।

 

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