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देश

पेंशन हक के लिए आंदोलन करेंगे सेवानिवृत्त सैनिक

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नई दिल्ली| भारतीय सशस्त्र बलों के सेवानिवृत्त सैनिक सरकार के साथ ‘वन-रैंक-वन-पेंशन’ की मांग को लेकर सरकार के साथ लंबे समय से चल रही नाराजगी को लेकर अगले महीने से आंदोलन करेंगे।(one rank one pension hindi news) भारतीय सशस्त्र सेना के दो युद्ध नायकों विंग कमांडर एस.डी. कर्णिक एवं विंग कमांडर भोपाडेकर के एक दिन पहले एक सरकारी कार्यक्रम में जाने से मना करने के बाद इंडियन एक्स-सर्विसमेन मूवमेंट के अध्यक्ष मेजर जनरल सतबीर सिंह (सेवानिवृत्त) ने कहा कि वे लंबे समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक मिलने का समय नहीं दिया गया।

गुरुवार के कार्यक्रम में रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर कर्णिक और भोपाडेकर को सम्मानित करने वाले थे।

सिंह ने  बताया, “प्रधानमंत्री ने सत्ता में आने के 100 दिनों के अंदर ही ‘वन-रैंक-वन-पेंशन’ लागू करने का वादा किया था, अब तो एक साल पूरा हो चुका है, उनके वादे का क्या हुआ?”

उन्होंने कहा, “हम लंबी लड़ाई की तैयार कर रहे हैं। हम जून के मध्य से आंदोलन शुरू करेंगे, सड़कों पर प्रदर्शन भी करेंगे।”

इंडियन एक्स-सर्विसमेन मूवमेंट में करीब 30,000 सक्रिय सदस्य हैं और यह संगठन दूसरे कई संगठनों से भी जुड़ा हुआ है।

सिंह ने कहा, “यह कहना गलत होगा कि हम सभी सरकारी कार्यक्रमों का बहिष्कार करेंगे। लेकिन यदि जरूरत पड़ी तो अपनी बात सरकार के समक्ष रखने के लिए लिए हम अगले साल गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा नहीं लेंगे।”

उन्होंने कहा, “हम रक्षामंत्री से चार दफा मिल चुके हैं। सभी औपचारिकताएं पूरी की जा चुकी हैं..तो फिर सरकार क्यों देर कर रही है।”

उन्होंने याद दिलाया कि यह वादा प्रधानमंत्री मोदी ने खुद चुनाव से पहले किया था।

सिंह ने कहा, “हमने प्रधानमंत्री को चार दफा पत्र लिखे, हम उनसे मिलने के लिए वक्त चाहते हैं, वह हमसे बात तक नहीं करना चाहते।”

उन्होंने कहा, “मोदी ने तीन बातों का वादा किया था : एक्स-सर्विसमेन आयोग, इंडिया गेट पर युद्ध स्मारक और वन-रैंक-वन-पेंशन। अब तक एक भी वादा पूरा नहीं हुआ। एक्स-सर्विसमेन चुनाव के समय कई जगहों पर राय निर्माता रहे, कम से कम 150 ऐसे निर्वाचन क्षेत्र हैं, जहां एक्स-सर्विसमेन मतदान के रुख को प्रभावित करते हैं।”

इस समय सेवानिवृत्त सैनिकों के लिए पेंशन का आधार सेवानिवृत्ति के समय वेतन आयोग की सिफारिशों पर निर्भर है, जिसकी वजह से अलग-अलग तारीखों पर एक ही रैंक से सेवानिवृत्त होने वाले सैनिकों की पेंशन राशि अलग अलग हो सकत है।

वन-रैंक-वन-पेंशन के लागू होने के बाद सेना के एक ही रैंक से सेवानिवृत्त सैनिकों और जवानों को समान पेंशन मिलेगा।

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असम-मेघालय बॉर्डर पर हिंसा, फायरिंग में अब तक 6 लोगों की मौत; 7 जिलों में इंटरनेट सेवा बंद

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गुवाहाटी। असम-मेघालय सीमा पर लकड़ी की तस्करी को रोके जाने के दौरान मंगलवार तड़के हिंसा भड़क गई। हिंसा में वन रक्षक समेत 6 लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि असम-मेघालय सीमा पर पुलिस ने अवैध लकड़ी के ट्रक को रोका था, जिसके बाद हिंसा भड़क गई। एहतियात के तौरे पर 7 जिलों में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है।

वन रक्षकों ने तीन लोगों को पकड़ा

पश्चिम कार्बी आंगलोंग के पुलिस अधीक्षक इमदाद अली ने इसकी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि असम वन विभाग ने मेघालय सीमा पर ट्रक को रोका था। ट्रक चालक ने भागने की कोशिश की। उसे रोकने के लिए वन रक्षकों ने फायरिंग कर दी। अधिकारी ने आगे बताया कि फायरिंग में ट्रक का टायर पंचर हो गया। वन रक्षकों ने ट्रक चालक समेत तीन लोगों को पकड़ लिया, हालांकि अन्य भागने में कामयाब रहे।

हथियार समेत पहुंची भीड़

अधिकारी ने बताया कि घटना के बारे में नजदीकी पुलिस थाना में जानकारी दी गई और अतिरिक्त पुलिस बल की मांग की। सुबह पांच बजे पुलिस के पहुंचते ही कुछ स्थानीय लोग हाथों में हथियार लिए वहां पहुंच गए। भीड़ ने तस्करों को छोड़े जाने की मांग को लेकर वन रक्षकों और पुलिस को घेर लिया। बचाव में भीड़ पर गोली चलानी पड़ी।

वन रक्षक समेत 6 लोगों की मौत

गोलीबारी में वन रक्षक की मौत हो गई। उसके अलावा मेघालय के पांच लोगों की भी मौत हुई है। हिंसा में घायल हुए लोगों को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है। वन रक्षक की मौत की वजह का पता नहीं चल सका है। इस घटना की जांच शुरू कर दी गई है।

7 जिलों में इंटरनेट सेवा बंद

उधर, एहतियात के तौर पर मेघालय के सात जिलों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं। सीएम कोनराड संगमा ने बताया कि मामले में मेघालय पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है।

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उत्तर प्रदेश

पूर्व मंत्री बालेश्वर त्यागी ने मेयर चुनाव की दावेदारी से किया इंकार

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कहा पार्टी मेरे नाम पर करेगी विचार तो भी मैं चुनाव के लिए नहीं तैयार
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)
गाजियाबाद। पूर्व मंत्री बालेश्वर त्यागी अक्सर अपनी बेबाक राय के लिए जाने जाते हैं। वो शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली में खामी को खुलकर लिखते हैं। कई बार अपने कार्यकाल के संस्मरण भी लिखते हैं और कई बार वो अपने शब्दों से मौजूदा निजाम को आईना भी दिखाते हैं। बालेश्वर त्यागी उत्तर प्रदेश सरकार में गृह राज्यमंत्री, व्यापार कर मंत्री और बेसिक शिक्षा मंत्री रहे हैं। एक लम्बे समय से वो भाजपा की राजनीति में अपने लिए नयी जिम्मेदारी और नयी पारी का इंतजार कर रहे हैं लेकिन अब पता चला है कि बारी का इंतजार खत्म हो गया है और बालेश्वर त्यागी जनप्रतिनिधि वाली कोई चुनावी पारी नहीं खेलना चाहते। सियासी गलियारों में ये चर्चा उठी थी कि पूर्व मंत्री बालेश्वर त्यागी भी मेयर टिकट के लिए दावेदारी में हैं। उन्होंने अपनी कई पोस्ट में निगम की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाये थे। यहीं से उनकी निगम मेयर दावेदारी की बात चली। करंट क्राइम ने इस मामले में पूर्व मंत्री बालेश्वर त्यागी से बात की और उन्हीं से पूछा कि क्या आप मेयर टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। यहां पर बालेश्वर त्यागी ने कहा कि मेरा कोई विचार नहीं है और कोई दावेदारी नहीं है। उन्होंने कहा कि अब आयु 74 वर्ष हो चुकी है और चीजें समय के साथ होती हैं। जब उनसे पूछा गया कि यदि पार्टी आपके नाम पर विचार करती है तो क्या आप मेयर चुनाव लड़ेंगे। यहां पूर्व मंत्री बालेश्वर त्यागी ने कहा कि यदि पार्टी मेरे नाम पर ही विचार करेगी तो भी मैं तैयार नही हूं। 56 वर्ष की आयु में मैं चुनाव हार गया और अब 74 वर्ष की आयु है। पार्टी ने तब मौका नहीं दिया और अब उम्र इस पद के लिहाज से भागदौड़ की नही है।

मैंने तेलूराम काम्बोज को दी थी चुनाव न लड़ने की सलाह
मैंने तेलूराम को समझाया भी था और चुनाव लड़वाया भी था उम्र के हवाले से अब बालेश्वर त्यागी मेयर चुनाव की दावेदारी भी नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि निगम में ना तो पार्टी का कोई मामला होता है और ना ही पार्षद पार्टी गाईड लाईन को मानते हैं और ना ही अनुशासन को मानते हैं। विधानसभा में विधायकों पर अनुशासन की नीति होती है और उन्हें पार्टी का निर्णय मानना पड़ता है। लेकिन निगम में पार्षद ही पार्षद की बात कई बार नहीं मानते। मैंने तेलूराम काम्बोज को समझाया था कि मेयर चुनाव मत लड़ो, आयु का तकाजा है। लेकिन एक भाजपा कार्यकर्ता की तरह मैंने उनकी पैरोकारी भी की और उन्हें चुनाव भी लड़वाया। लेकिन समझाया भी था कि 75 की उम्र में कई चीजों को बदला नहीं जा सकता है।

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दिल्ली

मैं कड़ी मेहनत करता हूं और काम करके दिखाता हूं: पीएम मोदी

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुरेंद्रनगर में सार्वजनिक बैठक शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने अभिभाषण भी दिया। मैंने कहा कि नर्मदा योजना का सबसे बड़ा लाभ किसी भी जिले को मिलेगा, सुरेंद्रनगर जिले को मिलेगा और आज वह लाभ आप तक पहुंच गया है।
पीएम मोदी नो कहा कि मैं जानता हूं कि गुजरात में घर-घर 24 घंटे बिजली पहुंचाना एक कठिन काम है, लेकिन मुझे कड़ी मेहनत करनी पड़ी है। मैं कड़ी मेहनत करता हूं और
काम करके दिखाता हूं।
पीएम मोदी ने कहा कि हमारा सुरेंद्रनगर जिला नमक बनाने में एक है। भारत के 80% नमक का उत्पादन गुजरात में होता है। इससे लाखों लोगों को रोजगार मिलता है। पहले के जमाने में गुजरात में उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्य जाना पड़ता था, आज दूसरे राज्यों के युवा गुजरात की धरती पर पढ़ने आते हैं।
मैं वार महोत्सव में अपमान को निगलता हूं क्योंकि मैं इस देश के 130 करोड़ लोगों का भला करना चाहता हूं, मैं इस भारत को एक विकसित भारत बनाना चाहता हूं।

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