Connect with us

एक्सक्लूसिव न्यूज़

मुस्लिम महिलाएं 600 साल बाद अचानक अछूत क्यों हो गईं?

Published

on

जून 2012 में मैं अपने परिवार के साथ हाजी अली की दरगाह पर गई थी – एकदम अंदर मजार तक. अकेली नहीं थी मैं. मेरे जैसी हजारों और महिलाएं भी थीं. मजार के आगे सिर झुकाया हर एक शख्स चाहे महिला हो या पुरुष, हिंदू भी मुसलमान भी. साबित हो रहा था कि इस्लाम में सब बराबर हैं. हाजी अली के प्रति मेरी श्रद्धा अगले महीने जुलाई में फिर से मुझे वहां खींच ले गई. अफसोस तब सब कुछ बदल चुका था. मजार तक औरतों के जाने पर मनाही कर दी गई थी. हम औरतों से हमारे इस्लामिक समानता का हक छीन लिया गया था.

मुस्लिम महिलाओं के हक की आवाज उठाना ही मेरा काम है. 2007 से मैं यही करते आ रही थी. अपने हक को मरते देख मैं कैसे चुप रहती! जब इस तुगलकी और गैर-इस्लामिक फैसले के बारे में जानने की कोशिश की तो बताया गया कि हाजी अली दरगाह के ट्रस्ट ने यह फैसला लिया है. ट्रस्ट को तो दरगाह के इंतजाम से जुड़े मसले देखने चाहिए, वो इस्लाम की व्याख्या करने वाले कौन होता है! और फिर ऐसी कौन सी व्याख्या, जिससे इस्लाम का सैद्धांतिक आधार ही खत्म हो जाए. पुरुष और महिलाओं की बराबरी ही इस्लाम का आधार है. मेरे ये सारे तर्क बाबा हाजी अली तक तो पहुंच रहे थे पर उनकी दरगाह के ट्रस्टियों के सामने दम तोड़ रहे थे.

मैंने और मेरी एक महिला मित्र जाकिया सोमन जो मेरी ही तरह भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की सह-संस्थापक हैं, दोनों ने एक साथ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. बॉम्बे हाई कोर्ट का. पीआईएल फाइल की. कोर्ट के सामने हाजी अली दरगाह के ट्रस्ट ने अपना पक्ष रखा – हास्यास्पद पक्ष. मैं तो हंस चुकी. आप भी पढ़ें, शर्तिया हंसी आएगी.

इस्लाम के अनुसार पुरुषों की कब्र के आस-पास महिलाओं का जाना ‘महापाप’ है.

ट्रस्ट के फैसले से महिलाएं खुश हैं. खुश हैं क्योंकि मजार पर भीड़भाड़ के कारण होने वाली छेड़छाड़ की घटनाएं अब कम हो गई हैं.

संविधान की धारा 26 के तहत ट्रस्ट को यह मौलिक अधिकार दिया गया है कि वह धार्मिक मामलों के फैसले स्वयं ले और इसमें किसी तीसरे पक्ष की दखलअंदाजी न हो.

सबसे पहली बात. मुझे इनकी नेक नीयती पर इतना शक तो है ही कि बिना किसी सबूत के मैं बता दूं कि हाजी अली दरगाह की ट्रस्ट में कोई भी महिला मेंबर नहीं होगी. भला कोई महिला अपने ही अधिकारों का गला क्यों घोंटेगी? दूसरी बात इस्लाम में यह कहां कहा गया है कि महिलाएं मजार के पास नहीं जा सकती हैं? और अगर ऐसा है तो मुंबई के जिन 19 दरगाहों में मैं गई हूं, उनमें से सिर्फ 7 (हाजी अली सहित) ही ऐसे क्यों हैं, जहां महिलाओं के जाने पर पाबंदी लगा दी गई है. क्या यह मान लिया जाए कि बाकी के दरगाह इस्लाम की तौहीन कर रहे हैं.

ट्रस्ट के फैसले से महिलाएं खुश हैं! वो भी इसलिए क्योंकि इससे हाजी अली दरगाह पर छेड़छाड़ कम हो गई है! अरे जनाब, हम महिलाओं के साथ छेड़छाड़ तो स्कूलों, कॉलेजों, बसों और तो और घरों तक में होती आई है. तो क्या करें, स्कूल-कॉलेज जाना छोड़ दें, घरों से निकलना छोड़ दें या जीना ही छोड़ दें! और हां, रह गई बात महिलाओं के खुश होने की, तो जो पीआईएल फाइल की गई है, कम से कम उसे तो पढ़ कर जवाब दिया होता. कोर्ट भी हंस रहा होगा आपके तर्कों पर… वो इसलिए क्योंकि पीआईएल सैकड़ों महिलाओं की आपत्ति और उनके हस्ताक्षर के साथ फाइल की गई थी. तो बेहतर है कि महिलाओं की खुशी और दुख का पैमाना हम महिलाओं को ही तय करने दीजिए. और हां, आखिर में आपने संविधान का तर्क दिया – मौलिक अधिकार का. अब क्या यह भी बताने की जरूरत है कि मौलिक अधिकार पर पहला हक इंसानों का होता है, धर्म का बाद में.

आप अपनी व्याख्या को इस्लाम की व्याख्या मत बताइए. ऊपर वाले ने हम महिलाओं को न सिर्फ कुरान-ए-पाक पढ़ने की इजाजत दी है बल्कि उसको समझने का दिमाग भी दिया है. इस्लाम पर जितना हक मर्दों का है, उससे कम हक हमारा भी नहीं है. और हां, आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि जिन महिलाओं को आप हाजी अली की मजार तक जाने से रोक रहे हैं, ठीक वैसी ही कोई महिला उनकी मां रही होगी, उन्हें जन्म दिया होगा, पाला-पोसा और बड़ा बनाया होगा. और लगभग 600 वर्षों से सब कुछ ठीक ही तो चला आ रहा था – क्या महिला क्या पुरुष – सभी तो मजार पर मत्था टेक ही रहे थे. तो अब क्यों अचानक से हमें अछूत बना दिया गया? अपने गैर-इस्लामिक कृत्य को इस्लाम का नाम देना बंद कीजिए. लोग हंसते हैं और शायद हाजी अली भी.

Continue Reading
Click to comment

You must be logged in to post a comment Login

Leave a Reply

उत्तर प्रदेश

BREAKING NEWS ‼️ लखनऊ।योगी कैबिनेट की बैठक खत्म ‼️

Published

on

प्रयागराज, गाजियाबाद और आगरा बने पुलिस कमिश्नरेट,
कैबिनेट की बैठक में प्रस्ताव पास किया गया,
प्रयागराज, गाजियाबाद, आगरा में अब पुलिस कमिश्नर,
योगी कैबिनेट की बैठक में लिया गया बड़ा फैसला,
अब यूपी के 7 जिलों में पुलिस आयुक्त व्यवस्था,
लखनऊ,कानपुर,वाराणसी,नोएडा में पहले से पुलिस कमिश्नरेट,
बैठक में डेढ़ दर्जन से ज्यादा प्रस्तावों पर मुहर लगी,
नगर विकास, पर्यटन, आवास विभाग के प्रस्ताव पास ‼️

Continue Reading

उत्तर प्रदेश

नए भारत का नया उत्तर प्रदेश (एक्सक्लूसिव)

Published

on

सम्मुख फैला अगर ध्येय पथ,प्रगति चिरंतन कैसा इति अब, सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ,असफल, सफल समान मनोरथ,सब कुछ देकर कुछ न मांगते,पावस बनकर ढलना होगा,कदम मिलाकर चलना होगा। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्मृतिशेष अटल बिहारी वाजपेयी जी की कलम से नि:सृत ये पंक्तियां मुझे सतत ध्येय प्राप्ति हेतु साधना करने की शक्ति प्रदान करती रहीं हैं। उत्तर प्रदेश की सेवा करते 4 वर्ष कैसे बीते इसका क्षण भर भी भान न हो सका और अब यह विश्वास और ²ढ़ हो चला है कि साफ नीयत और नेक इरादे से किए गए सत्प्रयास सुफलित अवश्य होते हैं।

कोविड-19 की विभीषिका से संघर्ष का एक वर्ष बीत चुका है। मुझे याद आता है जनता कर्फ्यू का वह दिन जब कोरोना के गहराते संकट के बीच महामहिम राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति महोदय ने फोन पर बातचीत कर मुझसे प्रदेश की तैयारी के संबंध में जानकारी ली थी। उन्हें चिंता थी कि कमजोर हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर, सघन जनघनत्व और बड़े क्षेत्रीय विस्तार वाला उत्तर प्रदेश इस महामारी का सामना कैसे करेगा? मैंने उन्हें भरोसा दिलाया कि उत्तर प्रदेश इस आपदा में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेगा और अंतत: हुआ भी यही। एक तरफ हमने मंत्रिपरिषद की एक टीम बनाई जो पॉलिसी तय किया करती थी, तो दूसरी तरफ अधिकारियों की एक टीम-11 गठित की। सभी की जिम्मेदारी तय की गई। हर दिन पूरे प्रदेश की छोटी-छोटी गतिविधियों की बारीकी से समीक्षा होती थी और त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित की जाती थी। दूसरे प्रदेशों में रह रहे उत्तर प्रदेश वासियों की कोई समस्या हो अथवा प्रदेश में निवासरत लोगों की जरूरतें, सब पर सीधी नजर रखी गई। मुझे आज यह लिखते हुए आत्मिक संतोष की अनुभूति हो रही है कि इस वैश्विक लड़ाई में पूरा उत्तर प्रदेश एकजुट रहा। हमने अपने आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘टेस्टिंग और ट्रेसिंग’ के मंत्र को आत्मसात किया और और समवेत प्रयास से इसे व्यवहारिक धरातल पर उतारने की चुनौती में सफलता प्राप्त की। परिणामत: आज प्रतिष्ठित वैश्विक संस्थाएं भी उत्तर प्रदेश की कोरोना प्रबंधन की सराहना कर रही हैं।

विकास की राह पर आगे बढ़ता हुआ यह वही उत्तर प्रदेश है जहां महज 4 साल में 40 लाख परिवारों को आवास मिला, 1 करोड़ 38 लाख परिवारों को बिजली कनेक्शन मिला, हर गांव की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाया गया तथा गांव-गांव तक ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। आज हम सभी के निरन्तर प्रयास से अंतरराज्यीय संपर्क को सुदृढ़ किया गया है। पांच एक्सप्रेस-वे विकास को रफ्तार देने के लिए तैयार हो रहे हैं तो देश को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए डिफेंस कॉरिडोर का निर्माण हो रहा है। हमें याद रखना होगा कि यह वही यूपी है जहां वर्ष 2015-16 में प्रति व्यक्ति आय मात्र 47,116 रुपये थी। आज 94,495 रुपये है। यह है परिवर्तन।

बदलते वातावरण का परिणाम है कि आज निवेशकों की पहली पसंद उत्तर प्रदेश है। चार साल के भीतर ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की राष्ट्रीय रैंकिंग में 12 पायदान ऊपर उठकर नम्बर दो पर आना कोई सरल कार्य नहीं था पर हमने यह कर दिखाया। यही नहीं व्यवसाय के साथ-साथ आज हमारी सरकार ‘ईज ऑफ लिविंग’ पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री जी ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ का सपना देखा है। वह देश को 5 ट्रिलियन यूएस डॉलर वाली अर्थव्यवस्था बनाने का महान लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। उत्तर प्रदेश इस लक्ष्य का संधान कर उनके स्वप्न को साकार करने में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करता है।

चार वर्ष पूर्व अन्नदाता किसान के ऋण की माफी से वर्तमान सरकार की लोककल्याण की यात्रा प्रारंभ हुई थी। राज्य सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक तब तक नहीं की, जब तक लघु व सीमान्त किसानों के ऋणमाफी की कार्ययोजना तैयार नहीं कर ली। आज प्रदेश में किसान उन्नत तकनीक से जुड़कर कृषि विविधीकरण की ओर अग्रसर हो रहे हैं। हाल ही में केंद्र सरकार ने कृषि सुधारों की ऐतिहासिक पहल की है। यह किसानों की प्रगति को नवीन आयाम देने वाले प्रयास हैं। आज किसानों की लागत को कम करने और आय को बढ़ाने के लिए कार्य किया जा रहा है। किसानों को एमएसपी से अधिक मूल्य जहां मिले वहां बेचने के लिए स्वतंत्रता हासिल है। मंडियों को राष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी प्लेटफॉर्म ई-नाम से जोड़ने की योजना प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में लागू की जा रही है। प्रदेश सरकार ने दशकों से लम्बित पड़ी सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने का कार्य किया है। किसान के प्रति यह हमारी प्रतिबद्धता ही है कि प्रदेश में अब तक 1.26 लाख करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य भुगतान किसानों को किया जा चुका है। हमारी सरकार ने बन्द चीनी मिलों को चलाने का कार्य किया। कोरोना कालखंड के दौरान 119 चीनी मिलें कार्य करती रहीं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में उत्तर प्रदेश को सर्वोत्तम प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। प्रदेश के 2 करोड़ 42 लाख किसान इस योजना से लाभान्वित हुए हैं। कृषक दुर्घटना बीमा योजना का दायरा बढ़ाया गया है और अब बटाईदार और किसान के परिजन भी इससे लाभान्वित हो सकेंगे। किसानों की उम्मीद और खुशहाली हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और हम इसपर पूरी तरह खरा उतरने के लिए सतत प्रयत्नशील हैं।

बीते चार वर्षों में उत्तर प्रदेश में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की जो ज्योति प्रज्‍जवलित हुई है, उसने हर सनातन आस्थावान व्यक्ति के हृदय को आलोकित किया है। ‘गंगा यात्रा’ के माध्यम से आस्था और आर्थिकी दोनों के उद्देश्य पूरे हुए। इसके साथ ही श्रीरामजन्मभूमि पर सकल आस्था के केंद्र प्रभु श्री राम के भव्य-दिव्य मंदिर के निर्माण के शिलान्यास की सदियों पुरानी बहुप्रतीक्षित साधना वर्ष 2020 में पूरी हुई। अयोध्या दीपोत्सव, काशी की देव दीपावली और ब्रज रंगोत्सव की सर्वत्र सराहना हुई। सप्तपुरियों में प्रथम अयोध्या हमारे लिए राष्ट्रीय गौरव का विषय है। वर्तमान राज्य सरकार अयोध्या को वैदिक और अधुनातन संस्कृति के समन्वित नगर की प्रतिष्ठा से विभूषित करने के लिए नियोजित प्रयास कर रही है। प्रभु श्री राम के आशीष से हमारा यह प्रयास भी अवश्य सफल होगा। ‘आस्था और अर्थव्यवस्था’ दोनों के प्रति हमारा समदर्शी भाव है। हमारी नीतियों में दोनों भाव समानांतर गति करते हैं।

पिछले चार वर्षों में नए भारत के नए उत्तर प्रदेश का सृजन हुआ है। चार साल पहले जिस प्रदेश को देश और दुनिया में बीमारू कहा जाता था, जो भारत का सबसे बड़ा राज्य होने के बाद भी अर्थव्यवस्था के पैमाने पर 5वें पायदान पर था, जहां युवा पलायन को मजबूर था, आज उसकी प्रगति और उसकी नीतियां अन्य राज्यों के लिए नजीर बन रही हैं। 2015-16 में 10.90 लाख करोड़ की जीडीपी वाला राज्य समन्वित प्रयासों से आज 21.73 लाख करोड़ की जीडीपी के साथ देश मे दूसरे नम्बर की अर्थव्यवस्था वाला राज्य बन कर उभरा है। राज्य वही है, संसाधन वही हैं, काम करने वाले वही हैं, बदली है तो बस कार्यसंस्कृति। यही प्रतिबद्धतापूर्ण, समर्पित भावना वाली पारदर्शी कार्यसंस्कृति इस नए उत्तर प्रदेश की पहचान है।

प्रधानमंत्री जी ने ‘सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास’ का पाथेय प्रदान किया है। आज जबकि वर्तमान प्रदेश सरकार चार वर्ष पूरे कर रही है तो मुझे व्यक्तिगत प्रसन्नता है कि हम इसी पाथेय के अनुरूप अपनी नीतियों को क्रियान्वित करने में सफल रहे हैं। किसान, नौजवान, महिला और गरीब वर्तमान सरकार की नीतियों के केंद्र में है। सरकार की नीति और नीयत साफ है और यही वजह है कि जनता सरकार के साथ है। कुछ समय पूर्व जब हम उत्तर प्रदेश को संभावनाओं वाला प्रदेश कहते थे तो कुछ लोग कहते थे यहां कुछ नहीं हो सकता था। लेकिन लोककल्याण के संकल्प की शक्ति के बल पर आज उत्तर प्रदेश सिद्धि के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। मां भारती हमारा पथ प्रशस्त करें..

स्वस्ति प्रजाभ्य: परिपालयन्तां

न्यायेन मार्गेण महीं महीशा:।

गोब्राह्मणेभ्य: शुभमस्तु नित्यं

लोका: समस्ता: सुखिनो भवन्तु

(लेखक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं)

Continue Reading

एक्सक्लूसिव न्यूज़

‘आतंक का टाइगर’ आखिरकार इंटेलीजेंस के रडार पर

Published

on

नई दिल्ली)| नैरोबी से संचालित होने वाली केन्याई खाद्य आयात कंपनी, मैग्नम अफ्रीका ने देश के मोस्ट वांटेड भगोड़े टाइगर मेमन को लेकर भारत की खुफिया एजेंसी रॉ की उम्मीदें फिर जगा दी है। टाइगर 1993 के मुंबई सीरियल (सिलसिलेवार) धमाकों का मास्टरमाइंड है। उपमहाद्वीप में सबसे भयावह हमलों में से एक में 257 लोग मारे गए थे।

पिछले पांच वर्षों से मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल टाइगर मेमन खुफिया एजेंसियों के रडार से दूर है।

पाकिस्तान में मैग्नम अफ्रीका की डील पर नजर रखने से खुलासा हुआ है कि अनाज के व्यापार की आड़ में कंपनी एक अंतर्राष्ट्रीय ड्रग (मादक पदार्थ) तस्करी रैकेट में शामिल है। कागज पर, मैग्नम ने भले ही पाकिस्तान से उच्च गुणवत्ता वाले चावल और अन्य अनाज आयात किए लेकिन इसके असली सौदे मादक पदार्थो से संबंधित थे।

कराची से भारत में तस्करी कर लाई गई 35 किलोग्राम की हेरोइन की डील करते हुए पुलिस ने फरवरी 2020 में अब्दुल मजीद उर्फ मूसा को पकड़ा था।

सीरियल धमाकों के एक आरोपी मूसा को टाइगर मेमन का दाहिना हाथ माना जाता है। मूसा को मुंबई हवाई अड्डे पर तब गिरफ्तार किया गया था, जब वह नैरोबी से दुबई जा रहा था। मूसा से पूछताछ में टाइगर मेमन के ठिकाने के बारे में कुछ जानकारी मिली।

‘आतंक के टाइगर’ पर इंटेलिजेंस डोसियर में कहा गया है कि 59 वर्षीय टाइगर मेमन ने मुंबई में सीरियल बम धमाकों को अंजाम देने के लिए अंडरवल्र्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से मदद मांगी थी।

जहां दाऊद इब्राहिम के कराची के पते के बारे में पता चल गया वहीं टाइगर मेमन के ठौर-ठिकाने के बारे में किसी को भनक तक नहीं थी।

सीरियल धमाकों के मुख्य अभियोजक उज्‍जवल निकम कहते हैं, “हमारे पास कराची में दाऊद इब्राहिम की मौजूदगी को लेकर पर्याप्त सबूत हैं, लेकिन हमें टाइगर मेमन के मामले में बहुत कम जानकारी है, जो मुख्य आरोपी है।”

पिछली बार जब पुलिस ने टाइगर मेमन का पता लगाया था, वह जुलाई 2015 में था। टाइगर ने मुंबई में सीरियल बम धमाकों में अपने छोटे भाई याकूब को फांसी दिए जाने से घंटों पहले मुंबई में अपनी मां को फोन किया था।

फोन पर अपनी मां के साथ तीन मिनट की बातचीत में, टाइगर ने याकूब की फांसी का बदला लेने की कसम खाई थी। उसके बाद से टाइगर के बारे में कुछ पता नहीं चला।

मुंबई बम धमाकों सहित कई बड़े आतंकी मामलों में विशेष सरकारी वकील निकम ने कहा, “हमने टाइगर मेमन का पता लगाने और गिरफ्तार करने के लिए पाकिस्तान को कई इंटरपोल नोटिस भेजे हैं। लेकिन दूसरी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। हमारी फाइलों पर, सीरियल धमाकों का एक मास्टरमाइंड टाइगर फरार है।”

उन्होंने कहा, “हालांकि मुकदमा खत्म हो चुका है, हम अभी भी उसकी गिरफ्तारी का इंतजार कर रहे हैं। जिस पल वह पकड़ा जाएगा, अदालत के समक्ष पहले से पेश किए गए सबूतों के आधार पर एक नई चार्जशीट दायर की जाएगी।”

सूत्रों ने बताया कि मुंबई सीरियल धमाकों को अंजाम देने के बाद टाइगर मेमन पाकिस्तान भाग गया और कराची के गुलशन-ए-इकबाल इलाके में रहने लगा था। बाद में वह उसी शहर के पॉश डिफेंस हाउसिंग एरिया में शिफ्ट हो गया। भले ही दाऊद और उसका भाई अनीस इब्राहिम भी कराची में रहते हैं, लेकिन सूत्रों ने कहा कि टाइगर मेमन और डी कंपनी के अलग-अलग व्यवसाय हैं।

मुख्य रूप से मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल टाइगर मेमन ने कराची में कुछ प्रमुख निर्माण परियोजनाएं भी शुरू की हैं। संगठित अपराध अभियानों के अलावा, टाइगर मेमन दुबई में गेस्ट हाउस और होटल भी चलाता है।

मुंबई सीरियल धमाकों के संबंध में दायर चार्जशीट में कहा गया है कि टाइगर मेमन ने 15 मार्च, 1993 को बम धमाकों को अंजाम देने में मदद करने के लिए मूसा को शामिल किया था। मूसा ने उसके निर्देश पर उन तीन स्कूटरों को खरीदा था जिनका इस्तेमाल धमाकों में किया गया था।

सिलसिलेवार धमाकों के बाद, मूसा उत्तर प्रदेश के बरेली भाग गया और फिर वहां से वह बैंकॉक चला गया। बाद में, मेमन ने उसे अनवर मुहम्मद के नाम से पाकिस्तानी पासपोर्ट दिलवाया।

सूत्रों ने कहा कि मूसा फिर नैरोबी में शिफ्ट हो गया और वह मैग्नम अफ्रीका चलाने लगा था, जो शुरू में पाकिस्तान से चावल के आयात में शामिल था।

Continue Reading

Trending

%d bloggers like this: