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ग़ाजियाबाद

बैसाखियों पर हैं कांग्रेस के फ्रन्टल संगठन

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गाजियाबाद । वर्ष-2012 में हुए विधानसभा और वर्ष-2014 में हुए लोकसभा चुनाव में करारी हार का सामना का चुकी कांग्रेस पार्टी आज भी अपने पुराने ढर्रे पर ही चल रही है। दो बड़े चुनाव हारने के बाद भी कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारी संगठन की ओवर हालिंग की ओर कोई प्रभावी कदम उठाते नजर नहीं आ रहे हैं। जनपद गाजियाबाद की बात की जाए तो मुख्य संगठन पदाधिकारियों को जहां और धार देने की जरूरत हैं, वहीं कांग्रेस के फ्रन्टल संगठन बुरी तरह से बैसाखियों पर टिके हुए हैं। लंबे अर्से से कांग्रेस के फ्रन्टल संगठनों की कोई ओवर हालिंग नहीं की गई है। कई फ्रन्टल संगठन ऐसे भी हैं, जिन पर लंबे समय से किसी की नियुक्ति नहीं की जा सकी है, या फिर कुछ ऐसे पदाधिकारी भी हैं जो वर्तमान में दूसरे राजनैतिक दलों का स्वाद चख रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के स्थानीय नेता उन्हें आज भी कांग्रेस का ही सिपाही बता रहे हैं। (ghaziabad hindi news )

करंट क्राइम की ओर से जनपद गाजियाबाद के राजनैतिक संगठनों की समीक्षा की एक मुहिम शुरू की गई है, जिसमें सबसे पहले कांग्रेस संगठन की बात की जायेगी। विधानसभा चुनाव वर्ष-2012 में जनपद गाजियाबाद कांग्रेस की कमान पार्टी के वरिष्ठ नेता बिजेंद्र यादव के हाथों में थी, वहीं महानगर अध्यक्ष के रूप में ओमप्रकाश शर्मा कांग्रेस की बागडौर संभाल रहे थे। विधानसभा चुनाव के दौरान गाजियाबाद जनपद की पांचों विधानसभा सीटों में से किसी एक पर भी कांग्रेस की जीत का परचम नहीं फहरा और संगठन पदाधिकारी ज्यौ के त्यौ अपने अपने पदों पर बने रहे। विधानसभा चुनाव हारने के बाद भी लोकसभा चुनाव वर्ष-2014 तक कांग्रेस के जिला व महानगर अध्यक्ष बिजेंद्र यादव व ओमप्रकाश शर्मा बने रहे। दोनों संगठन अध्यक्षों की संगठन टीमों की बदौलत चुनाव लड़ा गया, और लोकसभा चुनाव लड़ रहे फिल्म अभिनेता राजबब्बर को साढे पांच लाख वोटो से हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में यूं तो कांग्रेस का देश से ही सुफड़ा साफ हो गया, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने भी माना कि चुनाव में बड़े स्तर पर चूक हुई है, जिस कारण लोकसभा चुनाव में पार्टी को बुरी हार का सामना करना पड़ा। लोकसभा चुनाव हारने के कुछ दिनों बाद ही जनपद गाजियाबाद के संगठन में व्यापक स्तर पर फेरबदल हुआ और जिले की कमान हरेंद्र कसाना को सौंपी गई और महानगर अध्यक्ष पार्टी के वरिष्ठ नेता वीके अग्निहोत्री को बनाया गया। संगठन स्तर पर हुए फेरबदल के बाद दोनों अध्यक्षों ने अपनी 55-55 सदस्यों की कमेटियां भी घोषित की, और वर्तमान में संगठन को धार देने का काम किया जा रहा है। फिलहाल जो परिस्थितियां बनी हुई हैं, उनमें संगठन पदाधिकारी पुराने माहौल से बाहर निकलने का प्रयास कर रहे हैं।

क्या है जिला संगठन की वर्किंग

लोकसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस आलाकमान ने जिले की कमान हरेंद्र कसाना को सौंपी थी। श्री कसाना ने जिलाध्यक्ष बनने के बाद 55 सदस्यों की अपनी कमेटी घोषित की। कमेटी में पूर्व की कमेटी पदाधिकारियों को भी जगह देने की कौशिश की गई। इसके अलावा जिला कमेटी की ओर से जिले के आठ ब्लाकों पर अध्यक्षों की घोषणा की गई। ब्लाक स्तर पर कमेटी कितनी मजबूत हुई है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केंद्र की सरकार को एक वर्ष पूरा हो चुका है और साल में एक ही बार ब्लाक स्तर पर भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को लेकर विरोध प्रदर्शन किया गया है, इसके अलावा साल भी ब्लाक स्तर की कार्रवाई शून्य मात्र रही है। जिला कांग्रेस कमेटी स्तर पर सालभर के भीतर कई तरह के विरोध प्रदर्शन किये गये, जिसमें संख्या बल बेहद कम रहा और प्रदर्शन की इतिश्री मात्र की गई।

महानगर संगठन की वर्किंग

महानगर संगठन की बात की जाएं तो महानगर अध्यक्ष वीके अग्निहोत्री जब से अध्यक्ष बने हैं तब से वह कांग्रेस के प्रचार प्रसार में स्वयं जुटे हुए हैं। महानगर की जो कमेटी गठित की गई है, उसके इक्का दुक्का पदाधिकारियों को छोड़कर कांग्रेस के कार्यक्रमों से हमेशा दूरियां बनाये रखते हैं। कमेटी गठित करने के बाद नगर निगम के 80 वार्डो में वार्ड अध्यक्ष नियुक्त किये जा चुके हैं, लेकिन 80 वार्ड अध्यक्ष अपने अपने वार्डो में पार्टी का क्या प्रचार प्रसार कर रहे हैं, उस पर पूरी तरह से धूल जमी हुई है। सालभर के भीतर दर्जनों बार कार्यक्रम आयोजित किये जा चुके हैं, लेकिन सभी 80 वार्डो के अध्यक्ष एक छत के नीचे एकत्र हुए हो ऐसा एक बार भी देखने को नहंी मिला है।

युवा कांग्रेस में है बिखराव

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के निर्देश पर देशभर में युवा कांग्रेस के पदाधिकारियों को वोट के माध्यम से चुना गया था। जनपद गाजियाबाद लोकसभा सीट पर संगीता कौशिक विजयी रही थी, और शहर विधानसभा सीट पर लक्ष्मी वर्मा, साहिबाबाद सीट पर अहसान अली, लोनी सीट पर चांद मलिक, मुरादनगर सीट से विनित त्यागी और धौलाना विधानसभा सीट से राहुल शिशोदिया विजयी हुए थे। पार्टी गाइड लाइन के मुताबिक युवा कांग्रेस में जिस कांग्रेस को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा, उसे उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। युवा कांग्रेस लोकसभा अध्यक्ष संगीता कौशिक के सामने जुनैद चौधरी विजयी हुये थे, शहर सीट पर लक्ष्मी वर्मा के सामने नवीन चौधरी चुनाव मैदान में थे, साहिबाबाद सीट पर अहसान अली के सामने इमरान अली ने चुनाव लड़ा था। लोनी सीट पर चांद मलिक निर्विरोध निर्वाचित हुए थे, इसके अलावा मुरादनगर सीट पर विनित त्यागी निर्विरोध जीतकर अध्यक्ष बने थे। धौलाना सीट पर राहुल शिशोदिया के सामने भी एक कांग्रेस ने चुनाव लड़ा था। पार्टी की ओर से हारने वाले युवा कांग्रेसियों को उपाध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया था, लेकिन जब से युवा कांग्रेस का चुनाव सम्पन्न हुआ है तब से लेकर आज तक हारने वाले किसी भी युवा कांग्रेसी का कोई अता पता नहीं है।

अल्पसंख्यक मोर्चा की ओर से बेपरवाह हैं कांग्रेसी
उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोटों को अपने पक्ष में करने के लिए यूं तो कई राजनैतिक दल इन दिनों अपनी अपनी राजनैतिक गोटियां बिठाने में लगे हुए हैं, वहीं कांग्रेस मुस्लिम वोटों को अपने पक्ष में करे, इसकों लेकर गंभीर नजर नहीं आ रही है। कांग्रेस के जिला स्तर पर बने अल्पसंख्यक मोर्चा को देखकर तो यहीं अंदाजा लगाया जा रहा है। वर्ष-2012 तक अल्पसंख्यक मोर्चा का दायित्व पार्टी के कद्दावर नेता मौहम्मद आजाद के पास था, लेकिन नगर निगम चुनाव में मेयर का टिकट नहीं मिलने के बाद मौहम्मद आजाद ने कांग्रेस अल्पसंख्यक मोर्चा के जिलाध्यक्ष का पद छोड़ दिया था और पीस पार्टी को ज्वाईन कर लिया था। जब से अल्पसंख्यक मोर्चा में किसी को नियुक्त नहीं की जा सका है, हॉलाकि कुछ दिनों के लिए बॉबी चौधरी अल्पसंख्यक मोर्चा के जिलाध्यक्ष मनोनीत किये गये थे, लेकिन वह चंद दिनों तक मोर्चा के जिलाध्यक्ष रहने के बाद बसपा में शामिल हो गये थे। आज भी अधिकांश कांग्रेसी बॉबी चौधरी को ही अल्पसंख्यक मोर्चा की जिलाध्यक्ष मानते हैं, लेकिन वह बसपा में हैं।

एससी-एसटी मोर्चा भी है शांत

कांग्रेस एससी-एसटी मोर्चा में लंबे समय तक रणसिंह रहे और उनके समय में उक्त मोर्चा खासा सक्रिय था। वरिष्ठ कांग्रेसी रणसिंह का देहांत हो जाने के बाद से कांग्रेस का यह मोर्चा अब पूरी तरह से शांत पड़ा हुआ है। लंबे समय से इस मोर्चे का दायित्व किसी कांग्रेसी को नहीं सौंपा गया है। फ्रन्टल संगठनों को मजबूत करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है, जिससे कांग्रेस आने वाले दिनों में कैसी मजबूत होगी, इसकी कल्पना आसानी से की जा सकती है।

कांग्रेस सेवादल में हुआ बदलाव

कांग्रेस सेवादल में डेढ़ दशक से जिलाध्यक्ष के पद पर दिनेश कौशिक विराजमान थे, लेकिन उन्हें पिछले दिनों ही पार्टी की ओर से हटा दिया गया और उनके स्थान पर सूरज पाल बाल्मिकी को बनाया गया है, इसके अलावा महानगर कांग्रेस सेवादल का दायित्व विरेंद्र त्यागी को सौंपा गया है। फिलहाल कांग्रेस सेवादल की वह गतिविधियां देखने को नहीं मिल रही है, जिसके लिए पार्टी में सेवादल का गठन किया गया था।

महिला कांग्रेस में भी हुआ बदलाव

लोकसभा चुनाव के दौरान महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष पद सुनीता उपाध्याय के पास था, अभी हाल में हुए श्रीमति उपाध्याय को प्रदेश महिला कमेटी में प्रदेश महासचिव का दायित्व सौंपा गया है और उनके स्थान पर पुरानी कांग्रेस नेता मायादेवी को बिठाया गया है। इसके अलावा महानगर अध्यक्ष सीट पर मुक्ताश्री हैं, जो कभी पार्टी के कार्यक्रमों में नजर नहंी आती हैं। हां लोकसभा चुनाव के दौरान महिला महानगर अध्यक्ष मुक्ताश्री ने काफी सक्रियता दिखाई थी, लोकसभा चुनाव हारने के बाद यकायक उन्होंने पार्टी के कार्यक्रमों से दूरियां बना ली हैं।

एनएसयूआई भी है सुस्त

एनएसयूआई की बात की जाए तो लंबा समय हो चुका है कि जनपद गाजियाबाद छात्र संघ चुनाव में पुरानी धार देखने को नहीं मिली है। कई कालेजों में स्थिति इतनी नाजुक बनी हुई है कि एनएसयूआई की ओर से कोई पैनल तक नहीं उतारा जाता है। जनपद गाजियाबाद में एनएसयूआई की हालत भी कांग्रेस के अन्य फ्रन्टल संगठनों के जैसी ही है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को इस ओर सोवचा चाहिए ताकि आने वाले दिनों में पार्टी को इसका लाभ मिल सके।

चुनाव के बाद खामोशी जाती है पसर
वर्ष-2012 में हुए विधानसभा चुनाव, चुनाव जनपद स्तर पर पूरे जोश खरोस के साथ लड़ा गया और जनपद की पांचों विधानसभाओं पर लड़े प्रत्याशियों ने चुनाव प्रचार भी खूब किया, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। चुनाव हारने के बाद कांग्रेस का संगठन ओर चुनाव लड़ने वाले नेता गहरी खामोशी में चले गये। इसके अलावा पिछले लोकसभा चुनाव में भी पार्टी के नेता प्रत्याशी राजबब्बर के साथ पूरे जोश से लगे और चुनाव हारने के बाद राजबब्बर पूरी तरह से जनपद गाजियाबाद को अलविदा कह गये। लोकसभा चुनाव हारने के बाद भी कांग्रेसियों का उत्साह एक बार फिर से गड़बड़ा गया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने जैसे ही ज्वलंत मुद्दों को उठाना शुरू किया वैसे ही कांग्रेस में एक बार फिर से जान आ गई। पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी के मैदान में उतर जाने के बाद अब एक जोश का माहौल बन गया है और इसी माहौल को बनाये रखने की जरूरत है। इसके अलावा जनपद गाजियाबाद के कांग्रेसियों की आपसी कलह भी पार्टी को नुकसान पहुंचा रही है, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को जनपद के हालात सुधारने की दिशा में भरसक प्रयास करने होंगे, तभी कुछ हालातों में सुधार आ सकेगा।

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खुशखबरी: जनपद को जल्द मिलेगा एक और संयुक्त जिला चिकित्सालय

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संयुक्त जिला चिकित्सालय लोनी के लिए 50 पद स्वीकृत, 20 चिकित्सक और 20 पैरा मेडिकल स्टाफ के हैं पद
गाजियाबाद (करंट क्राइम)। जिले को जल्द एक और संयुक्त जिला चिकित्सालय मिलने वाला है। लोनी में संयुक्त जिला चिकित्सालय बनकर तैयार है। 50 बेड के इस चिकित्सालय के लिए शासन से 58 पद भी स्वीकृत हो गए हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डा. भवतोष शंखधर ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया चिकित्सालय में महिला और पुरुष विंग बनाए जा रहे हैं।
ये पद किए गए स्वीकृत
दोनों के लिए अलग-अलग मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के पद स्वीकृत हुए हैं। कुल चिकित्सकों के पदों में से 14 पुरुष विंग के लिए और छह महिला विंग के लिए हैं। इसके अलावा 20 पद पैरा मेडिकल स्टाफ के हैं और सहायक कर्मचारियों के 18 पद आऊटसोर्सिंग के जरिए भरे जाएंगे। सीएमओ ने मंगलवार को संयुक्त चिकित्सालय लोनी का निरीक्षण भी किया।
आउट सोर्सिंग से भरे जायेंगे 18 पद
सहायक कर्मचारियों के 18 पद आऊटसोर्सिंग के जरिए भरे जाएंगे। सीएमओ ने कहा एक और संयुक्त जिला चिकित्सालय शुरू होने से जिले में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होंगी। लोनी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को गाजियाबाद तक की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। इसके साथ ही जिला एमएमजी चिकित्सालय और संजयनगर संयुक्त जिला चिकित्सालय पर काम का बोझ कम होगा और लाभार्थियों को पहले से बेहतर सुविधाएं प्राप्त हो सकेंगी।

इन चिकित्सकों की होंगी नियुक्तियां
(करंट क्राइम)। सीएमओ ने बताया – पुरुष इकाई में एक फिजीशियन, एक बाल रोग विशेषज्ञ, एक रेडियोलॉजिस्ट, एक पैथोलॉजिस्ट, एक डेंटल सर्जन, एक एनस्थेटिस्ट, एक जनरल सर्जन, एक हड्डी रोग विशेषज्ञ, एक ईएनटी सर्जन, एक नेत्र सर्जन, एक ईएमओ (इमरजेंसी मेडिकल आफिसर) और एक मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का पद स्वीकृत किया गया है। इसी प्रकार महिला इकाई के लिए एक अधीक्षिका, एक स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक निश्चेतक और तीन पद ईएमओ के हैं। पैरा मेडिकल स्टाफ में एक एक्स-रे टेक्नीशियन, दो लैब टेक्नीशियन, दो फार्मासिस्ट, एक वरिष्ठ सहायक, दो कनिष्ठ सहायक, दो नर्सिंग सिस्टर, आठ स्टाफ नर्स, एक नेत्र सहायक और एक डेंटल हाईजिनिस्ट का पद स्वीकृत किया गया है।

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लैंडक्राफ्ट में युवक की संदिग्ध मौत, पुलिस जांच में जुटी

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आठवीं मंजिल पर क्या कर रहा था मृतक युवक
गाजियाबाद (करंट क्राइम)। कवि नगर थाना अंतर्गत आने वाले लैंडक्राफ्ट सोसाइटी में मंगलवार की रात एक 20 वर्षीय युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि वह आठवीं मंजिल से नीचे गिर गया। मृतक की शिनाख्त हापुड़ निवासी वरदान शर्मा के रूप में हुई है। परिवार वालों के अनुसार वह शाम चार बजे तक हापुड़ में था। यहां वह क्या करने आया था और किससे मिलने, यह किसी को पता नहीं है। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। साथ ही सोसाइटी की सीसीटीवी फुटेज व अन्य पहलुओं पर जांच की जा रही है। कवि नगर एसएचओ अमित ने बताया है कि मृतक की पहचान वरदान शर्मा पुत्र सुनील शर्मा निवासी हापुड़ के रूप में हुई है। पुलिस को सूचना मिली कि युवक आठवीं मंजिल से गिरा है। पुलिस मौके पर पहुंची और तब तक उसे आसपास के लोग पास के निजी अस्पताल लेकर पहुंचे जहां उसकी मौत हो चुकी थी। उधर मृतक युवक के परिजन इसे हादसा होने से इंकार कर रहे हैं। पुलिस फिलहाल पूरे मामले को संदिग्ध मौत मानकर जांच कर रही है। सवाल उठ रहा है कि युवक ने आत्महत्या की या उसको किसी ने धक्का दिया।
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उत्तर प्रदेश

क्या बागियों पर हो रही ये कृपा बदलेगी निगम चुनाव की हवा

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लेंगे टिकट न मिलने पर देवतुल्य प्रेरणा और चुनाव लड़ेंगे होकर खफा वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। भाजपा में इन दिनों बागियों पर कृपा हो रही है। निगम चुनाव से ठीक पहले भाजपा ने विधानसभा चुनाव बागी होकर लड़ने वाले चेहरों से लेकर वार्ड में मोर्चा खोलने वाले चेहरों पर कृपा की है। सवाल अब ये उठा है कि भाजपा आखिर चुनाव में पूरी ताकत से बूथ पर पसीना बहाने वाले कार्यकर्ताओं को इग्नोर कर प्योर रूप से बगावत करने वाले चेहरों पर ये कृपा क्यों कर रही है। जिन्होंने मोर्चा खोला, जिन्होंने पार्टी की खिलाफत की, जिन्होंने खुलेआम बगावत की पार्टी उन्हीं पर ज्वाइनिंग की मेहरबानी कर रही है।
सियासी जानकार भाजपा की इस नई नीति को लोकसभा की रीति से जोड़कर चल रहे है। वो ये मान रहे है कि भाजपा चुनावों से ठीक पहले तैयारी नहीं करती है बल्कि वो चुनावों से बहुत पहले अपनी रणनीति को साधना शुरू करती है। चुनाव भले ही निगम और निकाय का है लेकिन फोकस लोकसभा चुनाव पर है। इसलिए भाजपा अपनी नीति को बदल रही है और पुरानी रीति से नहीं बल्कि नए रिवाज से चुनाव मैदान में आ रही है। भाजपा का संगठन भी जानता है कि जनता फूल का बटन यहां के स्थानीय चेहरों को देखकर नहीं दबाएगी बल्कि वो भाजपा की नीति और रीति के साथ आएगी। आम जनता को इससे कोई लेना-देना नहीं होता है कि फलां चेहरा नाराज है, वो तो पार्टी की नीति और पार्टी के माहौल के साथ है।
अब ये चर्चा है कि आखिर बागियों पर कृपा की ये हवा क्यों चल रही है। यदि संगठन को कार्यकर्ताओं की ताकत पर भरोसा है तो फिर वो बागी चेहरों को लेकर क्यों इतना राजी हो रही है। वो सुबह के भूलों को फिर से कमल के फूलों में क्यों कन्वर्ट कर रही है। अब भाजपा का एक वर्ग मान रहा है कि इस नीति से वो कार्यकर्ता प्रेरणा लेंगे जिन्हें पार्षद चुनाव में टिकट नहीं मिलेगा। उनका माइंड अभी से इस बात को लेकर सेट होगा कि यदि हमे वार्ड का टिकट नहीं मिला तो हम भी बागी होकर चुनाव लड़ेंगे। ये कार्यकर्ता को बगावत की तरफ प्रेरित करेगी। जब कार्यकर्ता को लगेगा कि अगर हम भी बागी होकर चुनाव लड़ लिए तो क्या दिक्कत है। जब उनकी घर वापसी हो गई तो हमारी भी हो जाएगी।
क्यों हो आने से उनके खफा, पहले भी ऐसा हुआ है कई दफा
केके शुक्ला पुराने भाजपाई है और विधानसभा चुनाव में उन्होंने विद्रोह कर दिया और वो बसपा में गए और भाजपा उम्मीदवार अतुल गर्ग के सामने चनाव लड़े। सुदेश शर्मा रालोद से विधायक रहे है और वर्ष 2022 में वो भाजपा उम्मीदवार मंजू शिवाच के सामने चुनाव लड़े है। अब जिन्हें ये लग रहा है कि पार्टी अपने खिलाफ चुनाव लड़ने वालों को अपने साथ ले रही है तो वो खफा न हो क्योंकि ऐसा पहले भी कई दफा हुआ है। जिला पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मी मावी और उनके पति पवन मावी जिला पंचायत चुनाव में खुलकर बागी हुए और चुनाव लड़े, भाजपा से निष्कासित हुए। फिर पवन मावी भाजपा में वापिस हुए। पार्षद में ऐसे कई उदाहरण है।

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