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ग़ाजियाबाद

गाजियाबाद : एक मौके के इंतजार में है युवा पीढ़ी

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गाजियाबाद। देश में सभी राजनैतिक दल युवाओं को लेकर भावी रणनीतियां तैयार करने में जुटे हुए हैं। केंद्र हो या फिर उत्तर प्रदेश में समाजवादी सरकार, दोनों को बनाने में युवाओं का महत्तवपूर्ण योगदान रहा है। (latest ghaziabad hindi news) कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अब से सात वर्ष पहले युवाओं को राजनीति में लाने का आह्वान किया था, किए गए आह्वान के बाद सभी राजनैतिक दलों ने युवाओं को लेकर अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। बड़े नेताओं द्वारा युवाओं की तरफ दिखाये जा रहे रूझान का असर जनपद गाजियाबाद के सभी राजनैतिक दलों में भी देखने को मिल रहा  है। कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल या फिर अन्य राजनैतिक दल सभी में नई युवा पीढ़ी उभर कर जनता के सामने आ रही है और पार्टी की ओर एक मौका दिए जाने की फिराक में है। पार्टियों में आई युवा फौज अपने-अपने तरीके से समाज की कुरितियों को दूर करने का काम कर रहे हैं और पार्टी की गतिविधियों में उनकी सक्रियता देखते ही बन रही है। आईये देखते हैं किस राजनैतिक दल में कौन युवा है जो आज संघर्ष कर रहा है और आने वाले समय में राजनैतिक विचारधाराओं को साकार करने का काम करेगा। 

सबसे पहले बात करते हैं भारतीय जनता पार्टी की, जनपद गाजियाबाद में भाजपा के भीतर इन दिनों युवा चेहरों की भरमार है। कई युवा चेहरें ऐसे भी हैं जिन्हें पार्टी संगठन में महत्तवपूर्ण पद भी दिए गए हैं। अपनी सक्रियता के चलते भाजपा की युवा पीढ़ी राजनीति का क, ख, ग सीख रहे हैं।

लोनी विधानसभा में रहने वाले नंदकिशोर गुर्जर की बात की जाए तो वर्तमान में पार्टी ने उन्हें जिले की बागडोर सौंपी हुई है। नंदकिशोर गुर्जर उर्जावान हैं और उन्हें सक्रियता के चलते ही जिलाध्यक्ष मनोनीत किया गया है। पिछले 12 वर्षो से नंदकिशोर गुर्जर सक्रिय राजनीति कर रहे हैं, राजनीति की शुरूआत उन्होंने छात्र राजनीति से की। छात्र राजनीति के दौरान ही उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया और इसके बाद भाजपा में शामिल हो गये। भाजपा में उनकी गिनती सक्रिय नेता के रूप में हो रही है।
यतेंद्र नागर भी भाजपा में ऐसा नाम है जो सक्रिय है। छात्र राजनीति से लेकर आज तक यतेंद्र नागर जनता की समस्याओं को उठा रहे हैं और भारतीय जनता पार्टी के प्रत्येक कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति निरंतर बनी रहती है। यतेंद्र नागर लाइनपार क्षेत्र में रहते हैं और शहर विधानसभा सीट से टिकट की दावेदारी भी कर रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी में प्रेम त्यागी भी खासे सक्रिय हैं। प्रेम त्यागी राजनीति में जहां सुलझे हुए हैं, वहीं समय समय पर पार्टी की ओर से उन्हें महत्त्तवपूर्ण दायित्व भी सौंपे जाते रहे हैं। राजनीति की पाठशाला में प्रेम त्यागी परिपक्व हैं, और निरंतर पार्टी की गतिविधियों में बने हुए हैं। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले समय में प्रेम त्यागी जिले की विधानसभा सीट से दावेदारी करेंगे।
केके शुक्ला भाजपा युवा मोर्चा में क्षेत्रीय अध्यक्ष का पदभार संभाल रहे हैं। सक्रिय युवाओं में उनकी गिनती शीर्ष में होती है। पार्टी की प्रत्येक गतिविधि में केके शुक्ला में अपनी निरंतरता बनाये हुए हैं। भाजपा युवा मोर्चा में उन्हें क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाया जाना उनकी सक्रियता को बंया कर रहा है।
अजय शर्मा भाजपा महानगर संगठन में महामंत्री का दायित्व निभा रहे हैं। अजय शर्मा सक्रिय हैं और कई महत्तवपूर्ण कार्यक्रम उन्होंने अपने बल पर सफल कराये हैं। भाजपा महानगर संगठन में उन्हें जो दायित्व सौंपा गया है, उस पर भी वह खरे उतर रहे हैं, और आने वाले दिनों विधानसभा सीट से उनकी दावेदारी होने की भी संभावना है।
संजीव शर्मा ट्रांसहिडंन क्षेत्र में मजबूत चेहरा हैं और वर्ष-2012 में उन्होंने साहिबाबाद सीट से दावेदारी की थी, लेकिन उन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दिया और सुनील शर्मा को बतौर प्रत्याशी के रूप में साहिबाबाद विधानसभा सीट से उतारा गया। संजीव शर्मा राजनीति में परिपक्व हो गये हैं और पार्टी के बड़े नेता भी उनकी सक्रियता को देखते हुए आगामी चुनाव में बड़ा दायित्व सौंपेंगे।
संजीव शर्मा की बात हो और उनके बड़े भाई जैसे पप्पू पहलवान की बात न हो तो ऐसा हो ही नहीं सकता। पप्पू पहलवान और संजीव शर्मा की जोड़ी साहिबाबाद में मशहूर है, पूर्व पार्षद पप्पू पहलवान अपने क्षेत्र में खासे सक्रिय हैं और वर्ष-2012 में हुए नगर निगम चुनाव में वह चंद वोटो से ही हारे थे। पार्टी में पप्पू पहलवान का कद मजबूत है और उनकी तरफ से भी जिले की किसी सीट से दावेदारी की जा सकती है।
अश्वनी शर्मा भाजपा में एक ऐसा नाम है जो सुलझे हुए नेताओं में शामिल है। अश्वनी शर्मा वर्तमान में महापौर तेलूराम काम्बोज के कामकाज को संभाल रहे हैं। पेशे से अश्वनी शर्मा टीचर हैं और भाजपा में डेढ़ दशक से उनकी सक्रियता बनी हुई है। पार्टी में समय समय पर उन्हें दायित्व दिए जाते रहे हैं।
अजय त्यागी भाजपा युवा मोर्चा में महानगर अध्यक्ष हैं। अजय त्यागी की सक्रियता के चलते ही उन्हें महानगर अध्यक्ष का पदभार सौंपा हुआ है। पार्टी की प्रत्येक गतिविधियों में उनकी सक्रियता बनी हुई है और अजय त्यागी भी पार्टी की ओर से एक मौके के इंतजार में है। पार्टी दायित्व सौंपेगी, तो निश्चित तौर पर अजय त्यागी उस पर खरा उतरने का काम करेंगे।
विनय चौधरी पूर्व पार्षद हैं और पार्टी में उनकी सक्रियता लंबे समय से बनी चली आ रही है। साहिबाबाद क्षेत्र में विनय चौधरी का जनता में खासा दबदबा बना चला आ रहा है और पार्टी उनकी निरंतर सक्रियता को देखते हुए आगामी दिनों में बड़ा दायित्व दे सकती है।
नरेश यादव की भाजपा में सक्रिय युवाओं में गिनती होती है। नरेश यादव पार्टी की प्रत्येक गतिविधियों में निरंतर सक्रियता बनाये हुए हैं। नरेश यादव आगामी जिला पंचायत चुनाव की तैयारियां कर रहे हैं। इसके अलावा पार्टी के नेताओं में उनका खासा सामन्जस्य बना हुआ है।
बॉबी त्यागी भाजपा युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष हैं और पार्टी में वह सक्रिय हैं और पार्टी के नेताओं से उनका खासा तालमेल बना हुआ है। उनकी सक्रियता को देखते हुए ही उन्हें जिले का पदभार सौंपा हुआ है।
मंजीत सिंह भाजपा किसान मोर्चा में जिलाध्यक्ष हैं और वह पिछले लंबे समय से सक्रिय राजनीति को कर रहे हैं। किसानों की प्रत्येक समस्या पर मंजीत सिंह सक्रियता दिखाते हैं और पार्टी में उनका निरंतर कद बढ़ रहा है।

 

कांग्रेस पार्टी में सक्रिय युवाओं की बात की जाए तो सबसे पहले नाम आता है नसीम खां का। नसीम खां लंबे समय से सक्रिय राजनीति कर रहे हैं और पार्टी की ओर से उन्हें निरंतर महत्तवपूर्ण दायित्व भी सौंपे जाते रहे हैं। पूर्व की जिला कमेटी में नसीम खां को जिला मीडिया प्रभारी नियुक्त किया गया था, कमेटी भंग हुई तो उनका पदभार भी हट गया। आज नसीम खां लाइनपार की समस्याओं को निरंतर उठाते रहते हैं और पार्टी में उनकी सक्रियता अब किसी बड़े नेता से छिपी नहीं है। आने वाले समय में नसीम खां शहर विधानसभा सीट से दावेदारी कर सकते हैं।
परमानंद गर्ग की बात की जाएं तो कुछ समय के भीतर ही उनकी गिनती सक्रिय नेताओं में होने लगी है। अपनी लगन शीलता के चलते ही वह पार्टी में आज अलग पहचाने जाते हैं, और निरंतर पार्टी के कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। पार्टी के बड़े नेताओं से भी उनका तालमेल ठीक बना हुआ है। आने वाले समय में उनकी तरफ से भी जिले की किसी सीट पर दावेदारी ठोंकी जायेगी।
सुभाष शर्मा कांग्रेस की जिला कमेटी में कोषाध्यक्ष पद पर हैं और वह लंबे समय से कांग्रेस की राजनीति कर रहे हैं। जिले के प्रत्येक कार्यक्रम में उनकी भागीदारी शत प्रतिशत रहती है। पार्टी में उन्हें जो पदभार सौंपा गया है, उसे वह पूरी लगन के साथ कर रहे हैं। सुभाष शर्मा का बड़े नेताओं से आपसी सामन्जस्य बेहतर है जिसका उन्हें आने वाले समय में लाभ मिल सकता है।
मनोज कौशिक की बात की जाए तो पार्टी में उनकी गिनती सक्रिय युवाओं में होती है। पार्टी के प्रत्येक कार्यक्रम में वह बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। उनकी पत्नी संगीता कौशिक युवा कांग्रेस में गाजियाबाद लोकसभा क्षेत्र की अध्यक्ष हैं। पार्टी में उनका कद निरंतर बढ़ रहा है और आने वाले समय में उन्हें इसका लाभ मिलेगा।
अश्वनी त्यागी भी कांग्रेस में सक्रिय नेताओं में गिने जाते हैं। नगर निगम चुनाव में उन्होंने पार्षद का चुनाव लड़ा, लेकिन चंद वोटों से उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वर्तमान में अश्वनी त्यागी जिला पंचायत चुनाव में वार्ड-4 से अपनी दावेदारी कर रहे हैं। अश्वनी त्यागी भी निरंतर कांग्रेस की सक्रिय राजनीति में बने हुए हैं।
कार्तिकेय कौशिक की बात की जाए तो पार्टी में वह प्रदेश कमेटी में शामिल हैं। कार्तिकेय कौशिक निरंतर पार्टी की प्रत्येक गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं। उनके पिता ओमप्रकाश कौशिक भी पुराने कांग्रेसी रहे हैं। कार्तिकेय कौशिक ने वर्तमान में कांग्रेस में अपनी एक खास जगह बनाई है, और आने वाले समय में उनकी जिले की किसी विधानसभा से दावेदारी होगी।
आदेश शर्मा जिला कमेटी में महासचिव के पद पर हैं। पिछले एक दशक से आदेश शर्मा सक्रिय राजनीति कर रहे हैं। वर्ष-2006 में हुए नगर निगम चुनाव में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पार्षद का चुनाव लड़ा। निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उन्होंने मजबूती से चुनाव लड़ा, इसके अलावा वर्ष-2012 में कांग्रेस के सिंबल पर पार्षद का चुनाव लड़ा, लेकिन चुनाव में उन्हें जीत नहीं मिल सकी। वर्तमान में आदेश शर्मा सहकारी संघ लिमिटेड डासना के वाइस चेयरमैन, जिला सहकारी बैंक गाजियाबाद में प्रतिनिधि, सिविल डिफेंस में डिप्टी पोस्ट वार्डन और अखिल भारतवर्षीय ब्राहम्ण महासभा में नगर अध्यक्ष जैसे महत्तवपूर्ण पदों पर हैं।
सलीम सैफी भी कांग्रेस में सक्रिय हैं और वह निरंतर गरीब लोगों की आवाज को बुलंद कर रहे हैं। कई बार जीडीए मुख्यालय पर सलीम सैफी की तरफ से धरने प्रदर्शन किए जा चुके हैं। इसके अलावा सलीम सैफी साहिबाबाद विधानसभा क्षेत्र की समस्याओं को अधिकारियो के समक्ष उठा रहे हैं।
आसिफ सैफी कांग्रेस में युवा हैं और वह निरंतर पार्टी की प्रत्येक गतिविधियों में बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं और जिला कमेटी के भी हर कार्यक्रम में शामिल होते हैं। आसिफ सैफी ने कांग्रेस में यकायक अपने कद को बढ़ाया है, और पार्टी के नेताओं में उनकी एक पहचान अब बन चुकी है।
पूर्व पार्षद अमोल वशिष्ठ की बात की जाए तो कम उम्र में ही वह नगर निगम में पार्षद बन गये थे, और आज तक सक्रिय राजनीति कर रहे हैं। अपने वार्ड में अमोल वशिष्ठ का अच्छा खासा दबदबा है और पार्टी में उनका एक कद बना हुआ है।
विनित त्यागी ने कांग्रेस में एनएसयूआई से की, छात्रों की राजनीति कर रहे हैं और जिले के बाद अब प्रदेश एनएसयूआई में वह पदाधिकारी हैं। लंबे समय से कांग्रेस के प्रत्येक कार्यक्रम में उनकी भागीदारी बनी हुई है, और पार्टी में बड़े नेता उनके संपर्क में हैं।
इसके अलावा पवन दीक्षित, रफीक कुरैशी, अजय हितैशी, संजय शर्मा मवई, विनोद चौहान करहैड़ा, अमन शिशोदिया, अहसान अली भी कांग्रेस में अपने वजूद को बढ़ाने के लिए जदोजहद कर रहे हैं।

 

समाजवादी पार्टी की बात की जाए तो यहां पर भी युवा की एक लंबी फहरिस्त है, जो एक मौके की तलाश में है, मौका मिला तो, युवा चौका मारने में तनिक भी देर नहीं लगायेंगे।

सबसे पहले बात करते हैं पूर्व जिलाध्यक्ष राशिद मलिक की, जनपद गाजियाबाद के इतिहास में राशिद मलिक ऐसे युवा हैं जिन्हें कम उम्र में ही जिले की बागडौर संभालने का मौका मिला। जिलाध्यक्ष बनने के बाद राशिद मलिक ने अपने आपकों साबित करने की दिशा में भरसक प्रयास भी किए। वर्तमान में राशिद मलिक ने लोनी विधानसभा सीट से अपनी दावेदारी की है। लोनी सीट पर दावेदारी किए जाने बाद से पार्टी के अन्य नेताओं में खलबली मची हुई है।
संजय यादव वर्तमान में महानगर अध्यक्ष हैं, उन्हें पार्टी ने दोबारा से महानगर अध्यक्ष मनोनीत किया है। वर्ष-2011 में निकाली गई साईकिल यात्रा में संजय यादव ने अपनी ताकत का एहसास कराया था, पार्टी में उनकी छवि कद्दावर नेताओं में की जाती है। फिलहाल संगठन की राजनीति को संजय यादव धार देने का काम कर रहे हैं। फिलहाल अभी जिले की किसी विधानसभा सीट से उन्होंने अपनी दावेदारी नहीं की है।
राहुल चौधरी की बात की जाए वह पार्टी में सक्रिय हैं और कई मौकों पर उन्होंने अपनी राजनैतिक सूझबूझ का लौहा भी मनवाया है। श्री चौधरी मझे हुए युवा नेता है और जनता के बीच उनका संवाद निरंतर कायम रहता है। मुरादनगर विधानसभा सीट से श्री चौधरी ने अपनी दावेदारी पार्टी नेतृत्व के समक्ष की है।
विनोद यादव पार्टी में हैं और उनका कद शीर्ष नेताओं मेें गिना जाता है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से उनकी नजदिकियां हैं और वह भी जिले में सक्रिय युवा नेताओं के साथ अपनी मजबूत राजनीति मैदान को तैयार कर रहे हैं।
ईश्वर मावी की बात की जाए तो पार्टी ने उन्हें बागपत जिले का अध्यक्ष बनाया था, फिलहाल ईश्वर मावी क्षेत्र में सक्रिय हैं, और लोनी की समस्याओं को उठाते रहते हैं। ईश्वर मावी की ओर से लोनी विधानसभा सीट पर दावेदारी की हुई है। इसके अलावा उनकी सक्रियता पार्टी के प्रत्येक कार्यक्रमों में देखने को मिलती है।
विरेंद्र यादव की बात की जाए तो पार्टी ने उन्हें पिछले वर्ष नगर निगम में बतौर मनोनीत पार्षद नियुक्त किया है। विरेंद्र यादव साहिबाबाद विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हैं और उन्होंने भी सीट पर दावेदारी की हुई है। पार्टी में वह निरंतर सक्रिय हैं और प्रत्येक कार्यक्रम में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं।
पवन मावी ने 2012 में सपा की दामन थामा और तब से लेकर आज तक वह पार्टी में सक्रिय है और पार्टी के प्रत्येक कार्यक्रम में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेता है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से पवन मावी का आपसी सामन्जस्य बेहतर है और इसी के चलते उन्हें आने वाले दिनों में इसका लाभ मिलेगा।
संतोष यादव समाजवादी पार्टी युवजन सभा की जिला ईकाई के अध्यक्ष हैं और पार्टी में उनकी गिनती सक्रिय युवाओं में होती है। पार्टी के बड़े बड़े कार्यक्रमों में संतोष यादव भारी भीड़ के साथ पहुंचते हैं। पार्टी में उनकी सक्रियता को देखते हुए ही उन्हें युवजन सभा की बागडौर सौंपी गई है।
आनन्द चौधरी सपा में सक्रिय हैं और वाणिज्यकर सलाहकार समिति में सदस्य भी मनोनीत किया गया था। पार्टी के प्रत्येक कार्यक्रम में उनकी उपस्थित सराहनीय रही है और उन्होंने कम समय में पार्टी में अपनी एक अलग जगह भी बनाई है।
नवीन गुप्ता वाणिज्यकर सलाहकार समिति में सदस्य रहे हैं और वह पार्टी में सक्रिय बने हुए हैं। पार्टी का कोई भी कार्यक्रम आयोजित हो उसमें नवीन गुप्ता का उपस्थिति शत प्रतिशत रूप से रहती है।
मनोज शर्मा की बात की जाए तो सपा में उन्हें पहले छात्र सभा का महानगर अध्यक्ष बनाया गया। महानगर अध्यक्ष पद से हटने के बाद उन्हें सपा युवजन सभा का प्रदेश सचिव मनोनीत किया। मनोज शर्मा पार्टी में अपनी सक्रियता को बनाये हुए है, और प्रत्येक कार्यक्रम में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेता है।
प्रवीण ढाका समाजवादी पार्टी में ऐसा नाम है जो अपनी एक अलग पहचान बनाये हुए है। सपा का कोई कार्यक्रम हो या फिर बैठक, सभी में प्रवीण ढाका की उपस्थिति शतप्रतिशत रहती है। जनसभाओं में भी प्रवीण ढाका दलबल के साथ पहुंचते हैं। पिछले एक दशक से प्रवीण ढाका समाजवादी
पार्टी का दामन थामे हुए हैं, और सक्रिय राजनीति कर रहे हैं।
रविंद्र चौहान सपा में सक्रिय हैं और जिला कमेटी में उपाध्यक्ष भी हैं। रविंद्र चौहान की गिनती भी जनपद में सक्रिय नेताओं में होती है और प्रत्येक कार्यक्रम में रविंद्र चौहान खासे सक्रिय रहते हैं।
जितेंद्र कसाना भी सपा में खासे सक्रिय हैं और उन्होंने साहिबाबाद विधानसभा क्षेत्र की डीएलएफ आरडब्ल्यूए चुनाव में पूरे पैनल को जीत दिलाने में अहम जिम्मेदारी निभाई थी। पार्टी के प्रत्येक कार्यक्रम में वह सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

 

बहुजन समाज पार्टी की बात की जाए तो यहां पर युवाओं की अच्छी खासी तादाद सक्रिय राजनीति में है, लेकिन पार्टी के मजबूत अनुशासन के कारण युवा चेहरे हमेशा सुर्खियों से दूर रहते हैं। संगठन पदाधिकारी व जनप्रतिनिधि ही बसपा में सुर्खियों में रहते हैं, जबकि युवा टीम भी निरंतर पार्टी को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।

सबसे पहले बात करते हैं हरिदत्त जाटव की, पार्टी में लंबे समय से हैं और पार्टी की नीतियों का प्रचार प्रसार हमेशा करते रहते हैं। पार्टी के प्रत्येक कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति हमेशा रहती है। नगर निगम में पार्षद का चुनाव भी लड़ा, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी, इसके बावजूद आज भी वह सक्रिय राजनीति कर रहे हैं।
गंगाशरण बबलू बसपा में सक्रिय हैं और शहर विधायक सुरेश बंसल के प्रतिनिधि के रूप में काम कर रहे हैं। पार्टी का कोई भी कार्यक्रम हो उसमें गंगाशरण बबलू की उपस्थिति हमेशा रहती है। पार्टी के बडेÞ नेताओं में भी बबलू अपनी एक अलग पहचान बनाये हुए है।
मोहन बॉबी बसपा में सक्रिय है और मुरादनगर विधायक बहाव चौधरी के खास सिपेहसलारों में गिनती होती है। पार्टी के लिए वफादार होने के साथ पार्टी के प्रत्येक कार्यक्रम में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेता है। कई चुनावों में मोहन बॉबी ने अहम जिम्मेदारी निभाई है।
राजेंद्र राजू की बात की जाए तो पार्टी में वह सक्रिय हैं और प्रत्येक कार्यक्रम में उनकी उपस्थित बेहद सराहनीय है। बड़ी जनसभाओं से लेकर छोटे कार्यक्रमों में राजेंद्र राजू अहम भूमिका निभाते हैं।
सुनील भारती बसपा में ऐसा गुमनाम नाम है, जो कभी सुर्खियों में नहीं रहते। वे पार्टी में पूरी ईमानदारी के साथ काम करते हैं। संगठन की ओर से जो भी जिम्मेदारी सुनील भारती को सौंपी गई, उसे पूरी ईमानदारी के साथ करते हैं। इसके अलावा मुक्कमिल चौधरी, सुभाष जाटव, संजय कुमार, सुशील कर्दम आदि ऐसे युवा हैं जो पार्टी की सेवा कर रहे हैं।

 

राष्ट्रीय लोकदल की बात की जाएं तो यहां भी युवा है जो पार्टी की नीतियों का प्रचार प्रसार तन मन से कर रहे हैं। सबसे पहले बात करते हैं पूर्व महानगर अध्यक्ष प्रवीन शर्मा, उन्होंने संगठन को धार देने का काम किया। जब तक वह महानगर अध्यक्ष पद पर रहे, उन्होंने पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाया। प्रवीन शर्मा वफादारी के साथ संगठन की राजनीति कर रहे हैं। पिछले लंबे समय से रालोद का दामन थामा हुआ है।

अमित त्यागी की बात की जाए तो पार्टी में उन्हें युवा रालोद का जिलाध्यक्ष मनोनीत किया हुआ है। अमित त्यागी भी पार्टी में खासे सक्रिय हैं और निरंतर पार्टी की सेवा कर रहे हैं। जिला पंचायत सदस्य चुनाव की अमित त्यागी फिलहाल तैयारियां कर रहे हैं।
सुभेंदू कौशिक भी पार्टी में सक्रिय हैं और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव जयंत चौधरी से उनकी बेहद नजदिकियां हैं। पार्टी के प्रचार प्रसार के अलावा प्रत्येक कार्यक्रम में शुभेंदू कौशिक की उपस्थिति हमेशा बनी रहती है।
संजीव चौधरी ढिंढार भी लंबे समय से पार्टी की सेवा कर रहे हैं। मुरादनगर, मोदीनगर विधानसभा क्षेत्रों में संजीव चौधरी की सक्रियता अधिक है। ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी के प्रचार-प्रसार का जिम्मा संजीव चौधरी बखूबी निभाते हैं। पार्टी के कार्यक्रमों में भी उनकी उपस्थिति रहती है।
आकाश शर्मा भी पार्टी की प्रत्येक गतिविधियों में शामिल रहते हैं। मोदीनगर के रहने वाले आकाश शर्मा पार्टी की सच्चे मन से सेवा कर रहे हैं और निरंतर पार्टी की गतिविधियों को बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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46 साल 11 दिन बाद जनपद गाजियाबाद घोषित हुआ पुलिस कमिश्नरेट

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गाजियाबाद में तीन तहसील, चार ब्लॉक व 24 हैं थाने
गाजियाबाद (करंट क्राइम)। दिल्ली से जनपद गाजियाबाद भी अब पुलिस कमिश्नरेट बन गया है। शुक्रवार को यूपी सरकार कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी मिल दी गई। 14 नवंबर 1976 को गाजियाबाद अलग जिला बना। पंडित जवाहर लाल नेहरू की जयंती पर तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने इसे जिला घोषित किया था। इससे पहले ये मेरठ जिले का हिस्सा हुआ करता था। नोएडा की दादरी, हापुड़ की हापुड़ और गढ़मुक्तेश्वर तहसील भी पहले गाजियाबाद जिले का हिस्सा होती थीं। जब हापुड़ और नोएडा नए जिले बने तो गाजियाबाद की तीन तहसीलें उनमें चली गईं। अब गाजियाबाद में तीन तहसील, चार ब्लॉक और 24 पुलिस स्टेशन हैं। गाजियाबाद की सीमाएं दिल्ली से सटी हैं, इसलिए इसे गेटवे आॅफ यूपी भी कहा जाता है। गाजियाबाद से मेरठ, नोएडा और दिल्ली एकदम सटे हुए हैं।
गाजियाबाद में नगर निगम की स्थापना 31 अगस्त 1994 को हुई। नगर निगम का एरिया 220 वर्गकिलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। 2011 की जनगणना के हिसाब से जिले की आबादी 46 लाख 61 हजार 452 है।
पुलिस को मिल जाएंगी ये शक्तियां
अब तक बड़े शहरों में ही यह व्यवस्था लागू थी। अब आगरा में भी यह व्यवस्था लागू होगी। इसके बाद शांति भंग और 107-116 की कार्रवाई में एसीपी की कोर्ट में पेश होना होगा। आईपीएस अधिकारियों की संख्या बढ़ेगी। आपात स्थिति में कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी सहित अन्य अधिकारियों के आदेश का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पुलिस कमिश्नर खुद फैसला लेकर कार्रवाई के लिए निर्देशित कर सकेंगे। प्रदर्शन, किसी आयोजन, रूट प्लान की अनुमति आदि के लिए जिलाधिकारी के पास नहीं जाना होगा।
दंगा होने की स्थिति में कितनी फोर्स लगाई जानी है। लाठीचार्ज करना है या नहीं, इसकी अनुमति भी नहीं लेनी पड़ेगी। होटल, बार और हथियार के लाइसेंस देने का अधिकार भी पुलिस कमिश्नर के पास होगा। जमीन से संबंधित विवाद के निस्तारण के लिए भी अधिकार पुलिस के पास ही पहुंच जाएंगे।
इस व्यवस्था के बाद ये होंगे पुलिस के पद
पुलिस आयुक्त या पुलिस कमिश्नर (सीपी)। संयुक्त आयुक्त या ज्वाइंट कमिश्नर (जेसीपी)। डिप्टी कमिश्नर (डीसीपी)। सहायक आयुक्त (एसीपी)। पुलिस इंस्पेक्टर। सब इंस्पेक्टर।
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अब डीएम नहीं दे सकेंगे कानून व्यवस्था संबंधी कोई निर्देश
(करंट क्राइम)। पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद डीएम के कई अधिकार पुलिस कमिश्नर को मिल जाते हैं। इसमें पुलिसकर्मियों के तबादले अब कमिश्नर स्तर पर हो सकेंगे। लाठी चार्ज या फायरिंग के आदेश पुलिस कमिश्नर दे सकते हैं। जिन जिलोंं में यह सिस्टम लागू नहीं है, वहां डीएम के पास सीआरपीसी कानून- व्यवस्था संबंधी कई अधिकार होते है। पुलिस कमिश्नरी सिस्टम में ये सारे अधिकार डीएम की बजाय सीधे पुलिस कमिश्नर के पास होंगे।

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सब जानते हैं इंद्रजीत सिंह टीटू का हमेशा रहता है नेक ईरादा

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मूर्ति ना सही पत्थर पर नाम लिखवाकर पूरा करें सुच्चा सिंह के परिवार से किया वादा
गाजियाबाद (करंट क्राइम)। दशमेश वाटिका एक लम्बे संघर्ष के बाद सिख समाज को मिली है। दशमेश वाटिका के संघर्ष में जब भी कोई नाम आयेगा तो यहां इंद्रजीत सिंह टीटू का नाम सबसे पहले आयेगा। लेकिन एक नाम ऐसा है जो अब इस दुनिया में नहीं है लेकिन दशमेश वाटिका के संघर्ष में इस नाम को कभी भुलाया नही जायेगा। ये नाम सरदार सुच्चा सिंह का है, जो अब इस दुनिया मे नही है। हाल ही में यहां एक एतिहासिक कार्यक्रम हुआ और इस कार्यक्रम के आयोजन में, सिख समाज की शौर्य गाथा को सजीव रूप से बताने में सरदार इंद्रजीत सिंह टीटू की अहम भूमिका रही। सरदार इंद्रजीत सिंह टीटू हमेशा से धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं और उनकी कोशिश हमेशा सबको साथ लेकर चलने की और सबको आगे बढ़ावा देने की रहती है। दशमेश वाटिका की बात करें तो दस साल का संघर्ष रहा है और हाल ही में जब यहां ब्रिटिश सेना के अधिकारी भी आये तो यहां पर स्वर्गीय सरदार सुच्चा सिंह के परिजनों को भी बुलाया गया था। यहां पर नामों की चर्चा हुई लेकिन जब बात मूर्तियों के इतिहास से लेकर पत्थर पर दर्ज होने की आयी तो यहां सुच्चा सिंह और उनके परिवार के इसी सदस्य का नाम दर्ज नहीं हुआ। परिजनों ने याद दिलाया है कि दो साल पहले इंद्रजीत सिंह टीटू ने ही शिब्बनपुरा के गुरुद्वारा में दशमेश वाटिका में सुच्चा सिंह का स्टैच्यु लगाने की बात कही थी। उनकी श्रृद्धांजलि सभा में ये बात कही गयी थी और ईधर ये कहा गया कि सरदार इंद्रजीत सिंह टीटू का हमेशा से नेक ईरादा रहता है और वो अपना वादा भी पूरा करेंगे।
दशमेश वाटिका की लिस्ट 40 में हों संघर्ष यात्रा में शामिल लोगों के नाम
दशमेश वाटिका ऐसे ही सिख समाज को नही मिली है। यहां एक लम्बा संघर्ष सिख समाज ने किया है। इन नामों का जिक्र होगा तो यहां पूर्व पार्षद धीरेन्द्र बिल्लु का भी नाम आयेगा।
यहां इंद्रजीत टीटू का भी नाम आयेगा तो सरदार सुच्चा सिंह का भी नाम आयेगा। ये वो लोग हैं और कई नाम हैं जिन्होंने संघर्ष किया है। यदि इस संघर्ष यात्रा के फोटो से लेकर खबरों की कटिंग निकाली जायेगी तो यहां सुच्चा सिंह का फोटो हर तीसरी खबर में आयेगा। सुच्चा सिंह के परिवार की भी तमन्ना है कि लिस्ट 40 में उन्हें भी स्थान मिले। जिस व्यक्ति ने संघर्ष किया है उसके परिवार के किसी सदस्य का नाम इस लिस्ट में नही है।
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सुच्चा सिंह के सुपुत्र मनप्रीत ने कहा पिता के संघर्ष की दास्तां हो दर्ज

स्वर्गीय सुच्चा सिंह के सुपुत्र मनप्रीत सिंह मन्नी और उनके चचेरे भाई अशमीत सिंह करंट क्राइम मुख्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने कहा कि दो साल पहले पिता के निधन के बाद श्रृद्धांजलि सभा में परिवार को आर्थिक सहायता देने की बात कही गयी थी, जो आजतक नहीं मिली। लेकिन हमें आर्थिक सहायता नही चाहिए। वादा तो मूर्ति लगवाने का भी हुआ था लेकिन मूर्ति भी नहीं चाहिए मगर हमारे पिता स्वर्गीय सुच्चा सिंह ने दशमेश वाटिका के लिए संघर्ष किया है और हम चाहते हैं कि पिता के संघर्ष की दास्तां यहां दर्ज हो। एक पत्थर हमारे पिता के नाम पर भी यहां लगाया जाये।

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भगवागढ़ की सियासी जमीन पर ऐसे ही नही हो रही है रिश्तों की ये केयर

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कुछ तो बन रहा है सियासी समीकरण क्योंकि ये सीन होता है बहुत ही रेयर
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। सियासत में कभी भी चीजें अचानक नही होती हैं। ये ठीक उस बारिश की तरह होती हैं जो हमें बादल के रूप में दिखाई तो अचानक देती हैं लेकिन इनके आने की भूमिका आसमान में काफी पहले तैयार हो रही होती है। भगवा गढ़ में विधानसभा और लोकसभा वाली राहें अब जुदा-जुदा सी दिखायी देती हैं। जुबान भले ही खामोश है लेकिन लहजे बता रहे हैं कि लिहाज अब उतना नही रहा जितना पहले रिवाज हुआ करता था। अगर वो बदल रहे हैं तो फिर बहुत कुछ बदल रहा है और भगवा गढ़ की सियासी जमीन पर रिश्तों की नयी फसल तैयार हो रही है। ऐसे ही रिश्तों की केयर नहीं की जा रही है और वो देखने को मिल रहा है जो अक्सर पहले रेयर होता था। अब मेयर चुनाव से पहले ये सब देखने को मिल रहा है। विधानसभा में टोली अलग है तो लोकसभा की बोली भी अब अलग हो रही है। नये समीकरण बन रहे हैं और उथल पुथल के मंथन में रिश्तों की नयी इबारत तैयार हो रही है। सियासी लोग इस नयी आहट को भांप रहे हैं और वो भी अब अधिक जानकारी के लिए भाजपा वालों में ही झांक रहे हैं। कहीं साहब की हमदर्दी अधिक है तो कहीं दीदी ने नये रिश्ते बनाये हैं। मंच पर ये रिश्ते नजर आये हैं।
दिनेश गोयल का अलग स्टैण्ड बता दिया बिना नाम लिये पार्टी के अगेंस्ट
जब लोकसभा में समीकरण बदल रहे हैं तो इफेक्ट वहां भी हैं जिन्हें गैर विवादित कहा जाता है। एमएलसी दिनेश गोयल इस कहानी में साईलेंट मोड पर नहीं रहे। वो सामने आये और उन्होंने अलग से स्टैण्ड लिया। उन्होंने तो नाम लिये बिना ही कह दिया कि जो अपने सांसद के लिए ऐसा कह रहे हैं या कर रहे हैं तो वो एक तरह से पार्टी के अगेंस्ट जा रहे हैं। उन्होंने जनरल वीके सिंह को सबसे बेस्ट बताया और उनके चुनाव लड़ने के सवाल पर कोई शक ही नही जताया। उन्होंने यहां सीधे सीधे खुद को पार्टी स्टैण्ड के साथ सांसद के साथ खड़ा किया।
जनरल ने दिया संदेश गम की घड़ी में साथ खड़े हैं हम
कहानी में किरदार बदले हैं और दिलदार वही हैं। राजनीति में संदेश दिये जाते हैं और नये किरदार के साथ ये संदेश जनरल वीके सिंह ने दिया है। भाजपा नेता अशोक मोंगा के भाई का निधन हुआ तो जनरल वीके सिंह शोक व्यक्त करने अशोक मोंगा के घर पहुंचे। एक बार नहीं दो बार पहुंचे और शोक व्यक्त करने के लिए बैठे तो घड़ी की सुईयां नहीं देखीं। ये संदेश दिया कि अशोक मोंगा हम तुम्हारे गम की घड़ी में साथ हैं।
केवल राजनीति की सबकुछ नही होती, रिश्ते भी होते हैं। इसके बाद अशोक मोंगा के भाई की शोक सभा में भी जनरल वीके सिंह पहुंचे। ये संदेश उन्हीं लोगों के लिए था जहां जनरल संदेश पहुंचाना चाहते थे।
रिश्तों की खिली बहार जब दीदी के साथ ये चेहरे दिखे
एक साथ
पहले बताया था कि राजनीति में बिना वजह कुछ नही होता। रिश्तों के पौधे पर स्रेह का फूल आया है। आईएमएस में आयोजित कार्यक्रम का ये चित्र यही संदेश लेकर आया है। इस कार्यक्रम में जनरल वीके सिंह को आना था, वो नहीं पहुंचे तो उनकी पुत्री मृणालिनी सिंह पहुंची। चित्र में राजनीति वालों के लिए विचित्र बात ये है कि इस चित्र में मृणालिनी सिंह के साथ एमएलसी दिनेश गोयल हैं तो दूसरी तरफ भाजपा नेता अशोक मोंगा हैं। ये संदेश है कि हम साथ साथ हैं। रिश्तों की ये बहार बता रही है कि इफेक्ट चुनाव से लेकर सरकार तक दिखाई देंगे। अशोक मोंगा भाजपा का पुराना समर्पित कार्यकर्ता वाला चेहरा हैं और पंजाबी समाज से मेयर वाली दावेदारी में ये नाम चल रहा है। वहीं एमएलसी दिनेश गोयल का नाम मंत्री मंडल वाली लिस्ट में कभी भी ट्विस्ट करा सकता है। नये समीकरण हैं और राजनीति की नयी जमीन तैयार हो
रही है।

 

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