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ग़ाजियाबाद

गाजियाबाद में माननीयों की फौज

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जिला गाजियाबाद के कुछ क्षेत्र मेरठ, बागपत और गौतमबुद्ध नगर लोकसभा में आते हैं

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश में जनपद गाजियाबाद का अपना एक महत्तव है, यहां से सूबे का बड़ा राजस्व प्राप्त होता है, वहीं जनप्रतिनिधियों की संख्या के मामले में भी जनपद गाजियाबाद सूबे के अन्य जनपदों से आगे निकल चुका है। (latest ghaziabad hindi news) गाजियाबाद में अभी तक जनप्रतिनिधियों की संख्या 16 थी, वह अब सपा नेता जितेंद्र यादव के एमएलसी बनने के बाद 17 हो गई है। अकेला जनपद ऐसा हैं जहां पर सबसे अधिक छह सांसद हैं, और चार एमएलसी व सात विधायक रहते हैं, या उनका कार्य क्षेत्र जनपद से कहीं न कहीं जुड़ा हुआ है। माननीयों की बढ़ी संख्या के चलते ही जनपद राजनीति के गलियारों में अपनी एक अलग पहचान बनाये हुआ है।

संसद में गाजियाबाद का प्रतिनिधितत्व सांसद वीके सिंह जहां कर रहे हैं, वहीं जनपद की मोदीनगर विधानसभा सीट बागपत लोकसभा का हिस्सा है, और यहां से सांसद सत्यपाल सिंह हैं, वहीं धौलाना विधानसभा सीट हापुड़ में आती है और हापुड़ मेरठ लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है, यहां से सांसद राजेंद्र अग्रवाल हैं, धौलाना विधानसभा का आधा हिस्सा जनपद गाजियाबाद के अभिलेखों में सम्मिलित है। गौतमबुद्धनगर सीट का कनावनी हिस्सा आता है, और यहां से सांसद डाक्टर महेश शर्मा हैं। कनावनी यूं तो गौतमबुद्धनगर का हिस्सा है, लेकिन भूलेखाअधिकार जनपद गाजियाबाद के पास ही हैं। इसके अलावा जनपद के रहने वाले केसी त्यागी और नरेंद्र कश्यप राज्यसभा में सांसद हैं। राज्यसभा व लोकसभा सांसदों की संख्या छह है, जो अन्य जनपदों के मुकाबले सबसे ज्यादा है।

अब बात करते हैं विधान परिषद सदस्यों की, जनपद में विधान परिषद सदस्यों की संख्या भी चार है। जिसमें मेरठ गाजियाबाद बागपत सीट से प्रशांत चौधरी एमएलसी हैं, वहीं मुकुट लाल तोमर, समाजवादी पार्टी के पूर्व राज्यमंत्री आशु मलिक व अब जितेंद्र यादव को सपा ने एमएलसी बनाया है। एमएलसी के साथ विधायकों की संख्या भी छह है, मोदीनगर विधानसभा सीट से सुदेश शर्मा विधायक हैं तो मुरादनगर सीट से बहाव चौधरी, साहिबाबाद सीट से अमरपाल शर्मा, लोनी विधानसभा सीट से जाकिर अली, शहर सीट से सुरेश बंसल, धौलाना विधानसभा सीट से धर्मेश तोमर विधायक हैं। इसके अलावा एमएलसी प्रशांत चौधरी की धर्मपत्नी हेमलता चौधरी भी बागपत सीट से विधायक हैं और वह राजनगर में रहती हैं।

माननीयों की सूची
नाम सांसद/विधायक
वीके सिंह सांसद
सत्यपाल सिंह सांसद
राजेंद्र अग्रवाल सांसद
डाक्टर महेश शर्मा सांसद
केसी त्यागी राज्यसभा सांसद
नरेंद्र कश्यप राज्यसभा सांसद
प्रशांत चौधरी एमएलसी
मुकुटलाल तोमर एमएलसी
आशु मलिक एमएलसी
जितेंद्र यादव एमएलसी
बहाव चौधरी विधायक मुरादनगर
सुदेश शर्मा विधायक मोदीनगर
अमरपाल शर्मा विधायक साहिबाबाद
जाकिर अली विधायक लोनी
सुरेश बंसल विधायक गा.बाद शहर
धर्मेश तोमर विधायक धौलाना
हेमलता चौधरी विधायक बागपत

 

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दिल्ली के बड़े सियासी घर में जब जाट चेहरे रखने गये अपनी बात

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यह पंजाबी फेस कैसा रहेगा सामने से आई ये आवाज
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। मेयर चुनाव का काउंट डाउन शुरू हो चुका है। बिरादरियों के समीकरण का अपडाउन हो रहा है। मेयर वाला क्राउन किसके सिर पर जायेगा इसे लेकर मंथन हो रहा है। यदि मेयर वाले सीन को देखें तो यहां बिरादरी ही दो फोकस में रही हैं। जिनमें ब्राह्मण और वैश्य बिरादरी का नाम आता है। इस बार तीन वाले सीन में पंजाबी फैक्टर की चर्चा चली है। खास तौर से भाजपा की एक लॉबी ने तो ये माहौल बनाया है कि समीकरण कुछ नही है केवल टिकट की माया है। जिसे भी टिकट मिल गया उसी की उम्मीदों का कमल खिल गया।
लिहाजा इस बार पंजाबी समाज को टिकट दिये जाने का एक माहौल तैयार हो रहा है। यहां पर तीन पंजाबी चेहरों की बात चल रही है। जिनमें अशोक मोंगा का नाम है। अशोक मोंगा महानगर अध्यक्ष रहे हैं, क्षेत्रीय कमेटी में रहे हैं और पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं। वहीं यहां पर सरदार एसपी सिंह का भी नाम आता है। एसपी सिंह सौम्य व्यवहार वाले शालीन नेताओं की गिनती में आते हैं। पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं और पंजाबी समाज के खाते में यदि सीट जाती है तो उनका नाम भी लिया जा सकता है। उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य रहे हैं। महानगर संयोजक रहे हैं और इसी कड़ी में तीसरा नाम जगदीश साधना का भी लिया जाता है। जगदीश साधना भाजपा के उन कर्मठ कार्यकर्ताओं में हैं जो पार्टी के हर कार्यक्रम में दिखाई देते हैं। व्यवहार बेहद शालीन है और बड़ी बात ये है कि एक सामान्य कार्यकर्ता की तरह काम करते हैं। पार्टी यदि पंजाबी समाज को ही फैक्टर मान रही है तो फिर यहां सरदार एसपी सिंह और जगदीश साधना भी एक मुकाम रखते हैं। बहरहाल एक बड़े जाट नेता चाहते हैं कि उनके नाम पर भी कन्सीडर हो। वो मन में यही भाव लेकर दिल्ली के एक बड़े घर में पहुंचे। ये घर सियासी फैसले लेने के लिए भी जाना जाता है। बताते हैं कि यहां पहुंचने पर भगवा जाट नेता ने बड़े चेहरे के सामने बात रखी कि यदि मैं मेयर टिकट के लिए दावेदारी करूं तो …। सूत्र बताते हैं कि जाट चेहरे ने अभी बात पूरी भी नही की थी कि सामने से बड़े नेता की आवाज ये आई कि यह नाम कैसा रहेगा।
सूत्र बताते हैं कि दिल्ली वाले बड़े चेहरे की जुबान पर गाजियाबाद के एक पंजाबी चेहरे का नाम था। अब जो जाट लीडर अपनी बात लेकर गये थे उनके पास यह सुनने के बाद फिर कहने सुनने को कुछ भी नही बचा था। बात दिल्ली में हुई और फिर इसकी चर्चा गाजियाबाद में भी फैल गयी। राजनीति में चर्चा तो पर्चा भरने के समय होती ही है। लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि यदि बड़े नेता ने ऐसा कहा है तो फिर कुछ तो हवा चल रही है। क्योंकि कुछ तो आग है जो ये धुंआ उठा है, कहीं ना कहीं कुछ तो हुआ है।

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उत्तर प्रदेश

खतौली में चला दे दनादन हैंडपम्प और आ गये जीतकर मदन

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रालोद ने रचा इतिहास और बदल दिए सियासत के समीकरण
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। राष्टÑीय लोकदल ने जाट लैन्ड की राजनीति में उपचुनाव वाली सीट भाजपा से जीतकर एक बड़ा संदेश दिया है। राष्टÑीय लोकदल ने खतौली उपचुनाव में भाजपा को उस सीट पर हराया जिस सीट पर भाजपा काबिज थी। मुजफ्फरनगर दंगों के मुकदमें में यहां से निर्वाचित भाजपा विधायक विक्रम सैनी की सदस्यता चली गयी थी और उसके बाद खतौली में उपचुनाव हुआ। यहां पर भाजपा ने एक तरह से अपने ही विधायक को रिपीट किया।
उन्होंने सदस्यता गंवाने वाले विधायक विक्रम सैनी की पत्नी और कवाल गांव की पूर्व प्रधान राजकुमारी को टिकट दिया। यहां पर राष्टÑीय लोकदल ने खेकड़ा के पूर्व विधायक रहे मदन भईया को चुनावी मैदान में उतारा और मदन भईया ने यहां भाजपा उम्मीदवार को हरा दिया। उपचुनाव में आठ दिसम्बर गुरुवार का दिन रोमांच से भरा दिन रहा। यहां पर रालोद और सपा गठबंधन के उम्मीदवार मदन भईया ने 97071 वोट हासिल किये जबकि भाजपा की उम्मीदवार राजकुमारी सैनी को 74906 वोट मिले। मदन भईया ने यह सीट 22165 वोटों से इस चुनाव को जीता। मतगणना शुरू हुई और नवीन मंडी स्थल पर हो रही इस मतगणना में रालोद उम्मीदवार मदन भईया ने पहले राउंड से ही बढ़त बनाई और आखिरी राउंड तक वो फिर इस बढ़त को बढ़ाते चले गये।
दलित वोटों की लामबंदी हुई इस तरह मदन भईया के पक्ष में
उपचुनाव में मदन भईया ने ऐसे समय में ये जीत हासिल की है जब वो कुछ महीने पहले ही लोनी विधानसभा चुनाव में आठ हजार वोटों से हारे थे। यहां भाजपा के नंदकिशोर गुर्जर दूसरी बार जीते। लेकिन जब मदन भईया लोनी से खतौली पहुंचे तो उन्होंने यहां लगभग 22 हजार से ज्यादा वोटों से भाजपा उम्मीदवार को हराया। राष्टÑीय लोकदल ने उनपर भरोसा जताया था और वो इस भरोसे पर खरे उतरे। यहां पर उनकी जीत का एक बड़ा कारण दलित वोट बैंक भी माना जा रहा है। यहां पर गुडलक ये था कि बसपा इस उपचुनाव से दूर रही। यदि बसपा इस चुनाव में आती तो वह नुकसान हैन्डपम्प का ही होता। दूसरा फायदा ये हुआ कि आजाद समाज पार्टी के मुखिया चन्द्रशेखर रावण ने इस उपचुनाव में रालोद का साथ दिया। जयंत ने चन्द्रशेखर रावण को साथ लेकर नये समीकरण बनाये। रालोद को बसपा की चुनाव से दूरी का लाभ मिला और उसके वोटों का माईलेज रालोद को मिल गया।
मतदाता ने नही दिल तोड़ा सभी को खुश किया थोड़ा थोड़ा
चुनाव केवल खतौली में ही नही था बल्कि चुनाव रामपुर में भी था। चुनाव मैनपुरी में भी था, चुनाव गुजरात में भी था और चुनाव हिमांचल में भी था। मतदाताओं ने भी कुछ इस तरह से मतदान किया कि दिल किसी का नहीं तोड़ा है और सबको थोड़ा थोड़ा खुश किया है। दिल्ली एमसीडी चुनाव में मतदाता आम आदमी पार्टी के साथ गये हैं तो गुजरात में जनादेश भाजपा को मिला है। हिमांचल प्रदेश में कांगे्रस आई है तो यूपी की सभी उपचुनाव सीटों पर अलग अलग जनादेश हैं। रामपुर में भाजपा चुनाव जीती है और सपा के आजमखान चुनाव हार गये हैं। मैनपुरी में सपा के राष्टÑीय अध्यक्ष तथा पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव रिकॉर्ड वोटों से चुनाव जीती हैं। यहां भाजपा को बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। खतौली में भाजपा चुनाव हारी है।
भाजपा के दिग्गज जाट चेहरों के लिए एक बड़ी चुनौती है
उपचुनाव में भाजपा खतौली से हारी है लेकिन रामपुर से वो चुनाव जीती है। मगर यहां पर उसके जाट चेहरों के लिए ये चुनौती है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी जाट हैं। भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष मोहित बेनिवाल जाट हैं और सबसे बड़ी चुनौती केन्द्रीय मंत्री संजीव बालियान के लिए है। क्योंकि यह बेल्ट उन्हीं के क्षेत्र में आती है। यहां की जीत रालोद के लिए और हार भाजपा के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि उसकी पूरी लॉबी यहां चुनाव जिताने के लिए उतरी थी। लेकिन मदन भईया ने यहां बड़ा झटका दिया है और संदेश दिया है कि फिल्म अभी बाकी है।

खेकड़ा से खतौली तक ‘ख’ शब्द रहा मदन भईया के लिए लकी
(करंट क्राइम)। मदन भईया ने एक एतिहासिक जीत हासिल की है और यहां पर एक संयोग ये बना है कि वो सबसे पहले खेकड़ा से विधायक रहे और इसके बाद उन्होंने लोनी से दो चुनाव लड़े और वह दोनों ही चुनाव में परास्त रहे। लेकिन जब खेकड़ा छोड़कर वो खतौली पहुंचे तो यहां उन्होंने सत्ताधारी दल की उम्मीदवार को उपचुनाव में हरा दिया। मदन भईया की जीत के यहां तीन प्रमुख कारण हैं। मौजूदा समय की राजनीति में लोग यहां भाजपा उम्मीदवार से नाराज बताये जाते हैं। वहीं मदन भईया ने डेरा डालकर एक सधी हुई रणनीति के तहत प्रचार किया। कार्यकर्ताओं को साथ लिया और मतदाताओं को ये विश्वास दिलाने में कामयाब रहे कि ताकतवर नेता ही हमेशा जनता की रक्षा करता है।

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जीडीए ने अवैध कब्जे को कराया मुक्त करोड़ों रुपये की जमीन पर था लंबे समय से कब्जा

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गाजियाबाद (करंट क्राइम)। जीडीए उपाध्यक्ष के द्वारा निर्देश दिये गये कि किसी भी दशा में अवैध कालोनी अवैध निर्माण न होने पाये। उक्त आदेश के अनुपालन में वीरवार को लगातार दूसरे दिन जबरदस्त कार्यवाही करते हुए प्रताप विहार भवन भूखण्ड संख्या केए-170/ 177 के पीछे विद्यमान प्राधिकरण की लगभग 200 वर्गमी जमीन को तथाकथित भू-माफिया महेश यादव से मुक्त करायी गयी। उसी क्रम में उक्त द्वारा स्थल पर दिए गए अस्थायी निर्माण यथा टीन शेड इत्यादि का पूर्णतया ध्वस्त कर दिया। गया दाथा मौके पर तबेले से 08 भैसो को भी हटाया गया। उक्त जमीन पर तथाकथित भु-माफिया द्वारा काफी पहले से अवैध कब्जा किया हुआ था एवं प्राधिकरण के कर्मचारियों का भी धमकाने की बात सामने आयी थी।
विस्तृत खबर पेज-7 पर

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