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ग़ाजियाबाद

गाजियाबाद की जिला पंचायत सीट हुई ओबीसी के लिए आरक्षित!

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  • कई प्रत्याशियों के अरमानों पर फिरा पानी, इस बार अध्यक्ष पद की दौड़ में हैं कई प्रत्याशी
  • 18 वार्डो पर सौ से अधिक प्रत्याशी ठोंकेंगे ताल, सभी ने चुनाव की तैयारियां की जोर शोर से शुरू
  • 5 महिलाएं भी इस बार होंगी चुनाव मैदान में

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश शासन द्वारा कराये गये परिसीमन के आधार पर इस बार गाजियाबाद जिला पंचायत अध्यक्ष पद की सीट ओबीसी के लिए आरक्षित कर दी गई है। (ghaziabad hindi news) अध्यक्ष पद की सीट ओबीसी के लिए आरक्षित किये जाने की अभी कोई विधिवत रूप से घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राजनैतिक गलियारों में अध्यक्ष सीट ओबीसी के लिए आरक्षित किये जाने की चर्चाएं खूब चल रही हैं। चर्चाओं के आधार पर ही ओबीसी केटागिरी से जुड़े प्रत्याशियों ने अपने अपने चुनाव को तेज कर दिया है और वार्ड स्तर पर चुनाव की रफ्तार को तेज कर दिया गया है। जनपद गाजियाबाद के कुल 18 वार्डो पर इस बार सौ से अधिक प्रत्याशी चुनाव मैदान में रहेंगे, वहीं 5 महिलाएं भी 18 वार्डो पर चुनाव लड़ेंगी।

शासन स्तर से जिला पंचायत की 18 सीटों को लेकर आरक्षण तय कर दिया गया है, जिसमें 3 सीटे एससी-एसटी के लिए आरक्षित कर दी गई हैं, इसके अलावा जिले की चार सीटों को ओबीसी के लिए आरक्षित कर दिया हैं। इसके अलावा जनपद गाजियाबाद की ग्यारह सीटें सामान्य रहेंगी। महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण तय किये जाने के बाद इस बार जनपद गाजियाबाद में कुल पांच महिला प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरेंगी। 3 एससी-एसटी के लिए आरक्षित सीटों में से एक महिला एससी-एसटी के लिए आरक्षित रहेगी, वहीं 4 ओबीसी के लिए आरक्षित सीटों में से एक महिला ओबीसी के लिए आरक्षित रहेगी।
वहीं ग्यारह सामान्य सीटों में से तीन महिला सामान्य के लिए तय की गई हैं। इस बार होने वाले जिला पंचायत चुनाव में सौ से अधिक उम्मीदवार चुनाव मैदान में होंगे और जनपद गाजियाबाद में जिला पंचायत का चुनाव बेहद रौचक रहेगा और आने वाले दिनों में सभी प्रत्याशी अपने प्रचार को धार देने का काम करेंगे। बता दें कि जनपद गाजियाबाद जिला पंचायत में पहले 14 वार्ड हुआ करते थे, और शासन द्वारा कराये गये परिसीमन के बाद अब वार्डो की संख्या में इजाफा कर दिया गया है, जिसके तहत अब जनपद गाजियाबाद में कुल 18 वार्ड कर दिये गये हैं। 18 वार्ड होने के बाद जिला पंचायत का जहां दायरा बढ़ा है वहीं छोटे वार्ड होने के कारण विकास की संभावनाएं भी ओर अधिक बढ़ गई हैं।

अध्यक्ष पद पर रहेगी मारा-मारी
जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट ओबीसी के लिए आरक्षित किये जाने के बाद कई दिग्गज पंचायत चुनाव में उतरने का मन बना चुके हैं और उन्होंने अपनी तैयारियों को भी जोर शोर से शुरू कर दिया है। करीब आधा दर्जन से अधिक ओबीसी नेताओं ने अध्यक्ष पद सीट को ध्यान में रखकर अपनी रणनीति भी तैयार करनी शुरू कर दी है। फिलहाल अभी जो नाम सामने आ रहे हैं उनमें रजापुर ब्लाक के प्रमुख जितेंद्र यादव, सपा नेता पवन मावी, पूर्व बागपत सपा जिलाध्यक्ष ईश्वर मावी, बसपा के युवा नेता राहुल चौधरी डैनी, बवेंद्र नेहरा आदि के नाम सुर्खियों में बने हुए हैं। सभी ने जिला पंचायत सदस्य के चुनाव की ताल ठोंकी हुई है और सभी अध्यक्ष पद की कुर्सी को ध्यान में रखकर चुनाव लड़ रहे हैं। राजनीति के जानकारों का कहना है कि आगामी दिनों में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए अच्छा खासा संघर्ष देखने को मिलेगा।

जिला पंचायत वार्ड आरक्षण सूची
वार्ड संख्या              स्थिति
01                          अनारक्षित
02                         ओबीसी
03                         महिला
04                       अनारक्षित
05                       अनारक्षित
06                       ओबीसी महिला
07                       अनुसूचित महिला
08                     अनारक्षित
09                     ओबीसी
10                      महिला
11                       अनारक्षित
12                      अनारक्षित
13                      ओबीसी महिला
14                      महिला
15                      अनुसूचित
16                     अनारक्षित
17                    अनुसूचित
18                  अनारक्षित

ब्लाक प्रमुख आरक्षण सूची
ब्लाक                    आरक्षण की स्थिति
लोनी                      अनुसूचित जाति महिला
मुरादनगर              ओबीसी महिला
भोजपुर                  अनारक्षित
रजापुर                    अनारक्षित

जिला पंचायत: आपराधिक प्रवृत्ति, जमानत पर आये और चुनाव प्रभावित करने वालों के होंगे शस्त्र जमा

पंचायत चुनाव का खाका प्रशासनिक स्तर पर इन दिनों तैयार किया जा रहा है। पंचायत चुनाव शांति पूर्वक निपटे इसके लिए भी प्रशासनिक अधिकारी निरंतर मंथन कर रहे हैं। पंचायत चुनाव में इस बार भी आपराधिक प्रवृत्ति, जमानत पर आये अपराधियों व चुनाव प्रभावित करने या कौशिश करने वालों के ही शस्त्र जमा कराये जायेंगे। प्रशासनिक स्तर पर इस ओर कवायद को शुरू कर दिया गया है, और सभी थाना प्रभारियों को इस ओर निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। इसके अलावा डीएम विमल कुमार शर्मा और एसएसपी धर्मेंद्र सिंह की अध्यक्षता में एक स्क्रीनिंग कमेटी तैयार की जायेगी, जिसमें भावी तैयारियों का ब्लूप्रिंट तैयार किया जायेगा और उक्त निर्देशों को जारी किया जायेगा।

गौरतलब है कि वर्ष-2005 में पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की ओर से निर्देश जारी हुए थे कि पंचायत चुनाव शांति पूर्वक कराने के संबंध में आपराधिक प्रवृत्ति, जमानत पर आये आपराधिक व्यक्तियों व चुनाव प्रभावित करने वाले या कौशिश करने वालों के शस्त्र जमा कराये जायें। वर्ष-2005 के उच्च न्यायालय के आदेशों को भी इस बार प्रशासनिक अधिकारी लागू करेंगे। जनपद के उन हिस्सों के लाइसेंस धारकों के शस्त्र नहीं जमा कराये जायेंगे जो पंचायत चुनाव के क्षेत्र में नहीं आते हैं। जनपद गाजियाबाद में कुल 16 हजार के आसपास शस्त्रधारक हैं, जिनमें से करीब हजारों की तादाद में शस्त्रों को जमा किया जायेगा।
एलआईयू बढ़ा रही है जिला प्रशासन की मुसीबतें
पंचायत चुनाव को लेकर जिले में एलआईयू ने भी अपनी गतिविधियों को बढ़ा दिया है। एलआईयू की ओर से निरंतर प्रशासन को क्षेत्रवार रिपोर्ट सौंपी जा रही है। प्रशासन को जो रिपोर्ट सौंपी जा रही है उसमें बकायदा अवगत कराया जा रहा है, कई पंचायत वार्ड, ग्राम पंचायतों पर आपराधिक प्रवृत्ति के लोग चुनाव लड़ रहे हैं।
एलआईयू द्वारा सौंपी जा रही उक्त रिपोर्ट के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के होश उड़े हुए हैं। प्रशासनिक अधिकारी भी निरंतर पंचायत चुनावों की तैयारियों को फूंक फूंककर पूरा कर रहे हैं, इसके अलावा संबंधित
थाना क्षेत्रों से भी चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों का पूरा खाका तैयार करने के निर्देश जारी किये हुए हैं।

उत्तर प्रदेश

इसे ही कहते हैं मोहब्बत का रूल

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कम समय में सबसे मिलकर चले गए आईएएस महेन्द्र सिंह तंवर, जब था टाइट पूरा शेड्यूल
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। कई अधिकारी जिले में आते हैं और चले जाते हैं लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो दिल में बस जाते हैं। वो जब भी जिले में आते हैं तो फिर सब उनसे मिलने आते हैं और वो सबसे मिलकर जाते हैं। ऐसे अधिकारियों में नगरायुक्त पद पर कार्यरत रह चुके आईएएस महेन्द्र सिंह तंवर भी हैं। ये एक ऐसे अधिकारियों में गिने जाते हैं जो अपने व्यवहार और प्यार से सरकार तो क्या विपक्ष के पार्षदों को भी अपना बना चुके हैं। इन दिनों अपने विजन और व्यवहार का जलवा मुख्यमंत्री की नगरी गोरखपुर में बिखेर रहे हैं। वहां गोरखपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष हैं।
वह जब शुक्रवार को गाजियाबाद आये तो उन्होंने गाजियाबाद आने से पहले गाजियाबाद के सभी साथियों को फोन किये। ये उनका अंदाज है कि उनके आने की खबर से ही सब उत्साहित थे। वो बता चुके थे कि मैं कल गाजियाबाद आ रहा हूं और यहां पर सभी साथियों से वो मिले भी। भाजपा महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा के पिता की शोकसभा में पहुंचे तो पत्रकार दीपक सिरोही के घर पर भी गये और उनकी माता के निधन पर शोक व्यक्त किया। निवर्तमान मेयर आशा शर्मा ने उन्हें देखा तो कहा कि डीएम बनकर गाजियाबाद आओ। पूर्व राज्यमंत्री व शहर विधायक अतुल गर्ग ने उनकी तारीफ की। कनेक्टिविटी के साथ महेन्द्र सिंह तंवर ने एक बार फिर से रिश्तों को लेकर अपना विजन दिखाया और अपनेपन का एक अहसास कराया।

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उत्तर प्रदेश

दो महीने तीन दिन में निर्णायक मोड़ पर पहुंची सुनवाई

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गाजियाबाद (करंट क्राइम)। शनिवार को एक पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। एक दुष्कर्म के आरोपी पर आज फैसला आएगा। साहिबाबाद थानाक्षेत्र में साढे 4 वर्षीय बच्ची का अपहरण कर दुष्कर्म के बाद हत्या की सनसनीखेज वारदात हुई थी। इस मामले में विशेष न्यायाधीश पास्को एक्ट की अदालत ने शुक्रवार को आरोपित को दोषी करार दिया है। सजा पर सुनवाई शनिवार को होगी। अभियोजन की तरफ से कुल 15 लोगों की गवाही हुई है। बच्ची के परिजनों ने दोषी को फांसी की सजा दिए जाने की मांग की है। इस मामले में गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट के पुलिस अधिकारियों ने 15 दिसंबर को आरोप पत्र पेश किए थे। मामले में प्रतिदिन सुनवाई चल रही थी, यही कारण है कि घटना के दो माह तीन दिन में यह मामला निर्णायक मोड़ तक जा पहुंचा है।
1 दिसंबर 2022 को घर से लापता हुई थी बच्ची
विशेष लोक अभियोजन संजीव ने बताया है कि साहिबाबाद थानाक्षेत्र की करहैड़ा कॉलोनी में राजमिस्त्री का परिवार के साथ रहता था। 1 दिसंबर 2022 को करीब 2:30 बजे उनकी साढ़े 4 साल की बेटी घर से बाहर खेलते हुए लापता हो गई थी। दूसरे दिन सिटी फॉरेस्ट के जंगल में उसका शव घर के पास ही मिला था। इसके बाद परिजनों ने शव की शिनाख्त की और पुलिस इस पूरे मामले में जांच में जुट गई थी। इसके बाद पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर अपहरण, हत्या और दुष्कर्म के आरोप में एफआईआर दर्ज करवाई थी।
महिला अधिकारियों की कांप गई थी रूह
साढ़े 4 साल की बच्ची के साथ अपहरण कर दुष्कर्म की सनसनीखेज हत्या ने इस पूरे मामले में तात्कालिक डीसीपी ट्रांस हिंडन दीक्षा शर्मा और एसीपी साहिबाबाद पूनम मिश्रा की रूह का कांप दी थी। पुलिस की महिला अधिकारियों ने शुरू से ही इस मामले में प्रमुखता से साक्ष्य न्यायालय के सामने पेश किए और आरोपी को अधिकतम सजा दिलाने के प्रयास किए हैं, जो शनिवार को सुनवाई के बाद सफल हो सकते हैं।

 

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उत्तर प्रदेश

भगवा गढ़ में बन रही है सरकार वालों के व्यापार की कौन सी लिस्ट!

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गाजियाबाद (करंट क्राइम)। सरकार वाले बाजार में भी हैं और अलग अलग व्यापार में भी हैं। बस कारोबार को लेकर वो रडार पर आ गये हैं। सुना है कि सयंम वाले मामले के बाद भगवा कारोबारियों के व्यापार की लिस्ट मांग ली गई है। इस लिस्ट में प्रापर्टी डीलरों से लेकर रेस्टोरेंट कारोबारी हैं तो सरकारी विभागों के ठेकेदारों से लेकर लाईजनिंग वाले नाम भी आ गये हैं।
बताने वाले बता रहे हैं कि लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी कतई नहीं चाहती कि किसी भी भगवाई के कारोबार को लेकर विपक्ष या मीडिया सरकार के काम काज पर किसी तरह की अंगुली उठा दे। अदंरखाने निर्देश मिले हैं कि धुआं, जुआ, शराब, शबाब से लेकर खराब निर्माण वाला भगवाई मिले तो उसे पार्टी से भगा दें। अब सगंठन में पद देते समय इस बात का शिजरा निकल कर आयेगा। पार्टी कारोबार को लेकर सरकार की फजीहत कराने के मूड में नहीं है। कारोबार वाले सावधान हो जाये क्योंकि लिस्ट का ट्वीस्ट अभी नहीं बल्कि आठ महीने के बाद दिखाई देगा।
कन्फर्म सूत्र बता रहे हैं कि इस लिस्ट का ट्वीस्ट आने वाले समय में दिखाई देगा। क्योंकि बड़ी खबर यह है कि अन्दर खाने कौन सा नेता कौन सा कारोबार कर रहा है यह खबर भी भाजपा वाले ही खुद देकर आएंगे। इस लिस्ट में कई के कारोबार निकलकर सामने आएंगे। फिलहाल लिस्ट को लेकर काम शुरु हो गया है।

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