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ग़ाजियाबाद

जुबान संभाल के (6/03/2021)

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नोमिनेट बनना लक था इलेक्टिड टिकट मांगना हक हैं

भगवा गढ़ में जिन नेताओं को सरकार कृपा से नवाज कर ये मान रही थी कि इस आब्लीगेशन के बाद अब वो कोई टेंशन नही देगें तो ये सरकार की गलतफहमी थी। सरकार को याद रखना चाहिये था कि ख्वाहिशे तो कभी बादशाहों की पूरी नही हुई तो इन गली मौहल्ले के नेताओं की कहां से हो पूरी हो जाती। नामित बन गये तो इलेक्टिड की तमन्ना मचल रही हैं अब वो तो मौहल्ले के भगवा सिटिंग पार्षद को ही आंख दिखा रहे हैं। वार्ड के विकास में खोट गिना रहे हैं और दबी जुबान से कह रहे है कि जिसे वोट दिया था आप ने उससे विकास प्रोपरली ना हुया। हमें देखो हमने एक साल में ही बेंच भी लगवा दी और कूड़ाघर भी बनवाया। कई मौहल्लों में तो विधायक और मेयर कोटे का के्रडिट भी नामित वाले ले गये। डोर टू डोर जाकर बता रहे है कि मेयर और विधायक से भी हम ही पास करवा लाये हैं ये काम। एक बारफिर से मौका मिला चुनाव लड़ने का तो कसम से वार्ड को लंदन बना देंगे वार्ड को पेरिस बना देगें के वादे शुरू हो गये हैं। प्रचार का कमाल ये है कि कमल ही कमल के खिलाफ हैं। ना कहीं हाथी ना साईकिल और ना कहीं हाथ है। वो कह रहे है कि नोमिनेट बने वो हमारा लक था और टिकट मांगना तो हक हैं

निगम कार्यकारिणी को नही हैं टैक्स की पावर
जब निगम के अफसर ने हाऊस टैक्स को डबल किया तब उन्होने बिना मेयर और पार्षदों का नाम लिये बिना ही कहा कि मुझे किसी बोर्ड से नही पूछना। आई हैव राईट और सवाल उठाने वालो ं को एडवाईज दी कि पहले निगम एक्ट की फला ढिमका धारा पढ़ लो फिर आकर करना फाईट। अफसर के साथ फिर डाक बगंले में निगम मुखिया, थ्री विधायक और सगंठन सिटी प्रधान बैठे और म्यूचल अडंर स्टैडिग बनी कि अफसर तुम साईलेंट रहो हम इस का भी के्रडिट लेगेें कि हमने कम करा दिया मगर कार्यकारिणी बैठक के बाद जब हाथ वाले पार्षद ने क्रेडिट लेने की कोशिश व्हाटसएप गु्रप पर की तो कमल वाले क्रातिंवीर ने मोर्चा खोला। उन्होने कहा कि क्या होती ये कार्यकारिणी। साफ एलान किया कि कार्यकारिणी प्रस्ताव ला सकती है किसी फैसले को फाईनल नही कर सकती। फाईनल करने की पावर केवल सदन के पास हैं। टैक्स के मामलें को बोर्ड ही फाईनल करेगा। अब कनफ्Þयूजन ये है कि निगम में पावर का टावर सही में किसके पास हैं। निगम अफसर ने कहा कि एक्ट पढ़ ले सबके सब जो फैसला हमने ले लिया वो फाईनल। डाक बगंले में भगवा कमांडर टू निगमी मेयर विद थ्री विधायक ने अफसर से कहा कि गो बैक अबाऊट दिस डिसीजन अदवाईज पैक योअर बैग एंड बैगेज विदआऊट रीजन। समझा करो साहब आ रहा है चुनावी सीजन। अब भगवा पार्षद और जीडीए बोर्ड मेंबर ने कहा कि कार्यकारिणी निगम की मालिक नही है। निगम का फैसला बोर्ड बैठक में होता है। टैक्स खत्म करना है,कम करना ज्यादा करना हैं ये फैसला तो बोर्ड बैठक में होगा।कार्यकारिणी केवल प्रस्ताव देगी फाईनल बोर्ड करेगा।

चार साल से कब्जें ही तो खाली करा रही सरकार
चुनावी मैनीफेस्टो में एंटी भूमाफिया अभियान चलाने की बात कमल वालों ने कही थी। सरकार आने के बाद बुलडोजर जीडीए वालो का निकला और निगम वालो के रिटायर फौजी सफारी सूट पहनकर बदूंके लेकर जमीनो को कब्जे से छुड़ाने लगे। जीडीए की दो आईएएस मैडमों ने तो सरकार वालों के यहां सील लगा दी। लोनी मेें विधायक बताने लगे कि आ जाओ जी बुलडोजर लेके यहां हो रहा है कब्जा। मगर गाजियाबाद में पता नही ऐसी कौन सी और कितनी जमीन अवैध कब्जे में थी कि चार साल बीतने के बाद भी जमीने ही खाली कराई जा रही है। सरकार के ही अफसर ने कहा कि मौके पर जांच करा लो आज भी करोड़ो रूपये की जमीन पर फिर दोबारा से कब्जा हो गया हैं। एंटी भूमाफिया अभियान तो अगली सरकार के आने तक भी चलता ही रहेगा। पता नही कितनी जमीन पर अवैध कब्जा है यहां।

झंडा लगाने से ही काम हो रहा है हमारा तो
राजनीति सरकार बदलने के साथ एक व्यापारी नेता भी बदल जाते हैं। कार पर भाजपा का झंडा लगा लिया हैं जबकि 2012 में सपा का झंडा था। गर्व से चेंज का कारण बताया कि झंडा लगाने से ही काम हो जाता हैं हमारा तो।

उत्तर प्रदेश

इसे ही कहते हैं मोहब्बत का रूल

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कम समय में सबसे मिलकर चले गए आईएएस महेन्द्र सिंह तंवर, जब था टाइट पूरा शेड्यूल
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। कई अधिकारी जिले में आते हैं और चले जाते हैं लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो दिल में बस जाते हैं। वो जब भी जिले में आते हैं तो फिर सब उनसे मिलने आते हैं और वो सबसे मिलकर जाते हैं। ऐसे अधिकारियों में नगरायुक्त पद पर कार्यरत रह चुके आईएएस महेन्द्र सिंह तंवर भी हैं। ये एक ऐसे अधिकारियों में गिने जाते हैं जो अपने व्यवहार और प्यार से सरकार तो क्या विपक्ष के पार्षदों को भी अपना बना चुके हैं। इन दिनों अपने विजन और व्यवहार का जलवा मुख्यमंत्री की नगरी गोरखपुर में बिखेर रहे हैं। वहां गोरखपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष हैं।
वह जब शुक्रवार को गाजियाबाद आये तो उन्होंने गाजियाबाद आने से पहले गाजियाबाद के सभी साथियों को फोन किये। ये उनका अंदाज है कि उनके आने की खबर से ही सब उत्साहित थे। वो बता चुके थे कि मैं कल गाजियाबाद आ रहा हूं और यहां पर सभी साथियों से वो मिले भी। भाजपा महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा के पिता की शोकसभा में पहुंचे तो पत्रकार दीपक सिरोही के घर पर भी गये और उनकी माता के निधन पर शोक व्यक्त किया। निवर्तमान मेयर आशा शर्मा ने उन्हें देखा तो कहा कि डीएम बनकर गाजियाबाद आओ। पूर्व राज्यमंत्री व शहर विधायक अतुल गर्ग ने उनकी तारीफ की। कनेक्टिविटी के साथ महेन्द्र सिंह तंवर ने एक बार फिर से रिश्तों को लेकर अपना विजन दिखाया और अपनेपन का एक अहसास कराया।

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उत्तर प्रदेश

दो महीने तीन दिन में निर्णायक मोड़ पर पहुंची सुनवाई

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गाजियाबाद (करंट क्राइम)। शनिवार को एक पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। एक दुष्कर्म के आरोपी पर आज फैसला आएगा। साहिबाबाद थानाक्षेत्र में साढे 4 वर्षीय बच्ची का अपहरण कर दुष्कर्म के बाद हत्या की सनसनीखेज वारदात हुई थी। इस मामले में विशेष न्यायाधीश पास्को एक्ट की अदालत ने शुक्रवार को आरोपित को दोषी करार दिया है। सजा पर सुनवाई शनिवार को होगी। अभियोजन की तरफ से कुल 15 लोगों की गवाही हुई है। बच्ची के परिजनों ने दोषी को फांसी की सजा दिए जाने की मांग की है। इस मामले में गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट के पुलिस अधिकारियों ने 15 दिसंबर को आरोप पत्र पेश किए थे। मामले में प्रतिदिन सुनवाई चल रही थी, यही कारण है कि घटना के दो माह तीन दिन में यह मामला निर्णायक मोड़ तक जा पहुंचा है।
1 दिसंबर 2022 को घर से लापता हुई थी बच्ची
विशेष लोक अभियोजन संजीव ने बताया है कि साहिबाबाद थानाक्षेत्र की करहैड़ा कॉलोनी में राजमिस्त्री का परिवार के साथ रहता था। 1 दिसंबर 2022 को करीब 2:30 बजे उनकी साढ़े 4 साल की बेटी घर से बाहर खेलते हुए लापता हो गई थी। दूसरे दिन सिटी फॉरेस्ट के जंगल में उसका शव घर के पास ही मिला था। इसके बाद परिजनों ने शव की शिनाख्त की और पुलिस इस पूरे मामले में जांच में जुट गई थी। इसके बाद पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर अपहरण, हत्या और दुष्कर्म के आरोप में एफआईआर दर्ज करवाई थी।
महिला अधिकारियों की कांप गई थी रूह
साढ़े 4 साल की बच्ची के साथ अपहरण कर दुष्कर्म की सनसनीखेज हत्या ने इस पूरे मामले में तात्कालिक डीसीपी ट्रांस हिंडन दीक्षा शर्मा और एसीपी साहिबाबाद पूनम मिश्रा की रूह का कांप दी थी। पुलिस की महिला अधिकारियों ने शुरू से ही इस मामले में प्रमुखता से साक्ष्य न्यायालय के सामने पेश किए और आरोपी को अधिकतम सजा दिलाने के प्रयास किए हैं, जो शनिवार को सुनवाई के बाद सफल हो सकते हैं।

 

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उत्तर प्रदेश

भगवा गढ़ में बन रही है सरकार वालों के व्यापार की कौन सी लिस्ट!

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गाजियाबाद (करंट क्राइम)। सरकार वाले बाजार में भी हैं और अलग अलग व्यापार में भी हैं। बस कारोबार को लेकर वो रडार पर आ गये हैं। सुना है कि सयंम वाले मामले के बाद भगवा कारोबारियों के व्यापार की लिस्ट मांग ली गई है। इस लिस्ट में प्रापर्टी डीलरों से लेकर रेस्टोरेंट कारोबारी हैं तो सरकारी विभागों के ठेकेदारों से लेकर लाईजनिंग वाले नाम भी आ गये हैं।
बताने वाले बता रहे हैं कि लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी कतई नहीं चाहती कि किसी भी भगवाई के कारोबार को लेकर विपक्ष या मीडिया सरकार के काम काज पर किसी तरह की अंगुली उठा दे। अदंरखाने निर्देश मिले हैं कि धुआं, जुआ, शराब, शबाब से लेकर खराब निर्माण वाला भगवाई मिले तो उसे पार्टी से भगा दें। अब सगंठन में पद देते समय इस बात का शिजरा निकल कर आयेगा। पार्टी कारोबार को लेकर सरकार की फजीहत कराने के मूड में नहीं है। कारोबार वाले सावधान हो जाये क्योंकि लिस्ट का ट्वीस्ट अभी नहीं बल्कि आठ महीने के बाद दिखाई देगा।
कन्फर्म सूत्र बता रहे हैं कि इस लिस्ट का ट्वीस्ट आने वाले समय में दिखाई देगा। क्योंकि बड़ी खबर यह है कि अन्दर खाने कौन सा नेता कौन सा कारोबार कर रहा है यह खबर भी भाजपा वाले ही खुद देकर आएंगे। इस लिस्ट में कई के कारोबार निकलकर सामने आएंगे। फिलहाल लिस्ट को लेकर काम शुरु हो गया है।

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