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ग़ाजियाबाद

जुबान सम्भाल के

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बोल दिया यादव जी आपकी पहुंच जानते हैं

सूबे में समाजवादी पार्टी की सरकार चल रही है जनपद गाजियाबाद के कई थाने ऐसे हैं जिनमें सपा के बड़े पदाधिकारियों के रहमोकरम से पुलिस अधिकारी थानों व चौकियों में तैनात हैं। अब सपा के बड़े नेताओं के चेहतें थाने व पुलिस चौकियों में तैनात हैं तो उनमें हैकड़ी भी ओर अन्य अधिकारियों से ज्यादा होगी। हुआ कुछ यूं कि ट्रांस हिडंन क्षेत्र के एक थाने के इंचार्ज से कुछ दिन पहले कांग्रेस के एक बड़े नेता मिलने पहुंचे, मिलने के पीछे अपने कार्यकर्ता की पैरवी थी, ऐसे में जब पैरवी की गई तो इंचार्ज सहाब थोड़ा सा उखड़ गये। कांग्रेसी नेता ने इंचार्ज साहब के उखड़ते ही बोल दिया यादव जी आपकी पहुंच जानते हैं, आपका कोई कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता, लेकिन आपकों यहां काम के लिए भेजा है तो आपको काम तो करना ही पड़ेगा। कांग्रेसी नेता की बातों को सुनकर इंचार्ज साहब भी थोड़ा संभले। अब जुबान कहां संभलती है, अब ये नेताजी गाहे बगाहे उक्त प्रकरण को जहां बैठ रहे हैं, वहां कहने से नहीं चूक रहे हैं।

नेताजी को सता रही है पुत्र की चिंता

भारतीय जनता पार्टी की केंद्र में सरकार है और उत्तर प्रदेश में भाजपाई किसी भी सूरत में सरकार बनाना चाहते हैं। भाजपा की शीर्ष पंक्ति के नेताओं ने भी मिशन 2017 की तैयारियां शुरू कर दी हैं। ऐसे में कई भाजपाई ऐसे भी हैं जो मिशन 2017 की सफलता में अपने पुत्रों को भी राजनीति में सफल होता देखना चाह रहे हैं। भाजपा में एक नेता ऐसे हैं जो अपने पुत्र को अपनी पुरानी जमीन से चुनाव लड़वाना चाहतें हैं, हालांकि उन्होंने अपने पुत्र के लिए कई विधानसभाएं चिन्हित कर रखी हैं। कई विधानसभाएं चिन्हित करने के पीछे नेताजी तर्क दे रहे हैं कि पार्टी आलाकमान अब कहां से टिकट दे, ये तो पता नही है, ऐसे में कई विधानसभाओं पर उनके पुत्र का दावेदारी रहेगी। अब जुबान कहां संभलती है, एक कार्यक्रम में पहुंचे नेताजी ने कह दिया कि उनका दायरा जनपद गाजियाबाद और हापुड दोनों है, ऐसे में पार्टी आलाकमान जहां से चाहे उनके पुत्र को टिकट दे, वह अपने पुत्र को चुनाव जरूर लड़वायेंगे।

चुनाव लड़ना था मेरी मजबूरी

वर्ष-2012 में हुए विधानसभा चुनाव में जिले की एक विधानसभा सीट से चुनाव लड़े एक नेताजी इन दिनों अपनी खोई हुई जमीन को लेकर काफी परेशान दिख रहे हैं। नेताजी चुनाव लड़े थे और उन्हें चुनाव में करारी हार का सामना भी करना पड़ा था। चुनाव में उन्हें तीसरें नंबर पर संतोष करना पड़ा था, और चुनाव हारने के बाद से पार्टी आलाकमान के सामने उनके नंबर काफी कम हो गये थे। विधानसभा चुनाव से पहले इन नेताजी की पार्टी में तूती बोला करती थी, लेकिन चुनाव हारने के बाद उनका ग्राफ सैन्सेक्स की तरह गिर गया। पिछले दिनों एक कार्यक्रम में नेताजी से किसी ने पूछ लिया कि आपने विधानसभा चुनाव क्यों लड़ा। यह बात सुनने के बाद अब नेताजी की जुबान कहां संभलती है उन्होंने तपाक से कहा कि वह चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं थे, लेकिन उन्हें पार्टी आलाकमान के निर्देशों का पालन करना पड़ा, इसलिए चुनाव में उतरे।

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खुशखबरी: जनपद को जल्द मिलेगा एक और संयुक्त जिला चिकित्सालय

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संयुक्त जिला चिकित्सालय लोनी के लिए 50 पद स्वीकृत, 20 चिकित्सक और 20 पैरा मेडिकल स्टाफ के हैं पद
गाजियाबाद (करंट क्राइम)। जिले को जल्द एक और संयुक्त जिला चिकित्सालय मिलने वाला है। लोनी में संयुक्त जिला चिकित्सालय बनकर तैयार है। 50 बेड के इस चिकित्सालय के लिए शासन से 58 पद भी स्वीकृत हो गए हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डा. भवतोष शंखधर ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया चिकित्सालय में महिला और पुरुष विंग बनाए जा रहे हैं।
ये पद किए गए स्वीकृत
दोनों के लिए अलग-अलग मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के पद स्वीकृत हुए हैं। कुल चिकित्सकों के पदों में से 14 पुरुष विंग के लिए और छह महिला विंग के लिए हैं। इसके अलावा 20 पद पैरा मेडिकल स्टाफ के हैं और सहायक कर्मचारियों के 18 पद आऊटसोर्सिंग के जरिए भरे जाएंगे। सीएमओ ने मंगलवार को संयुक्त चिकित्सालय लोनी का निरीक्षण भी किया।
आउट सोर्सिंग से भरे जायेंगे 18 पद
सहायक कर्मचारियों के 18 पद आऊटसोर्सिंग के जरिए भरे जाएंगे। सीएमओ ने कहा एक और संयुक्त जिला चिकित्सालय शुरू होने से जिले में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होंगी। लोनी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को गाजियाबाद तक की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। इसके साथ ही जिला एमएमजी चिकित्सालय और संजयनगर संयुक्त जिला चिकित्सालय पर काम का बोझ कम होगा और लाभार्थियों को पहले से बेहतर सुविधाएं प्राप्त हो सकेंगी।

इन चिकित्सकों की होंगी नियुक्तियां
(करंट क्राइम)। सीएमओ ने बताया – पुरुष इकाई में एक फिजीशियन, एक बाल रोग विशेषज्ञ, एक रेडियोलॉजिस्ट, एक पैथोलॉजिस्ट, एक डेंटल सर्जन, एक एनस्थेटिस्ट, एक जनरल सर्जन, एक हड्डी रोग विशेषज्ञ, एक ईएनटी सर्जन, एक नेत्र सर्जन, एक ईएमओ (इमरजेंसी मेडिकल आफिसर) और एक मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का पद स्वीकृत किया गया है। इसी प्रकार महिला इकाई के लिए एक अधीक्षिका, एक स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक निश्चेतक और तीन पद ईएमओ के हैं। पैरा मेडिकल स्टाफ में एक एक्स-रे टेक्नीशियन, दो लैब टेक्नीशियन, दो फार्मासिस्ट, एक वरिष्ठ सहायक, दो कनिष्ठ सहायक, दो नर्सिंग सिस्टर, आठ स्टाफ नर्स, एक नेत्र सहायक और एक डेंटल हाईजिनिस्ट का पद स्वीकृत किया गया है।

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लैंडक्राफ्ट में युवक की संदिग्ध मौत, पुलिस जांच में जुटी

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आठवीं मंजिल पर क्या कर रहा था मृतक युवक
गाजियाबाद (करंट क्राइम)। कवि नगर थाना अंतर्गत आने वाले लैंडक्राफ्ट सोसाइटी में मंगलवार की रात एक 20 वर्षीय युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि वह आठवीं मंजिल से नीचे गिर गया। मृतक की शिनाख्त हापुड़ निवासी वरदान शर्मा के रूप में हुई है। परिवार वालों के अनुसार वह शाम चार बजे तक हापुड़ में था। यहां वह क्या करने आया था और किससे मिलने, यह किसी को पता नहीं है। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। साथ ही सोसाइटी की सीसीटीवी फुटेज व अन्य पहलुओं पर जांच की जा रही है। कवि नगर एसएचओ अमित ने बताया है कि मृतक की पहचान वरदान शर्मा पुत्र सुनील शर्मा निवासी हापुड़ के रूप में हुई है। पुलिस को सूचना मिली कि युवक आठवीं मंजिल से गिरा है। पुलिस मौके पर पहुंची और तब तक उसे आसपास के लोग पास के निजी अस्पताल लेकर पहुंचे जहां उसकी मौत हो चुकी थी। उधर मृतक युवक के परिजन इसे हादसा होने से इंकार कर रहे हैं। पुलिस फिलहाल पूरे मामले को संदिग्ध मौत मानकर जांच कर रही है। सवाल उठ रहा है कि युवक ने आत्महत्या की या उसको किसी ने धक्का दिया।
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उत्तर प्रदेश

क्या बागियों पर हो रही ये कृपा बदलेगी निगम चुनाव की हवा

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लेंगे टिकट न मिलने पर देवतुल्य प्रेरणा और चुनाव लड़ेंगे होकर खफा वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। भाजपा में इन दिनों बागियों पर कृपा हो रही है। निगम चुनाव से ठीक पहले भाजपा ने विधानसभा चुनाव बागी होकर लड़ने वाले चेहरों से लेकर वार्ड में मोर्चा खोलने वाले चेहरों पर कृपा की है। सवाल अब ये उठा है कि भाजपा आखिर चुनाव में पूरी ताकत से बूथ पर पसीना बहाने वाले कार्यकर्ताओं को इग्नोर कर प्योर रूप से बगावत करने वाले चेहरों पर ये कृपा क्यों कर रही है। जिन्होंने मोर्चा खोला, जिन्होंने पार्टी की खिलाफत की, जिन्होंने खुलेआम बगावत की पार्टी उन्हीं पर ज्वाइनिंग की मेहरबानी कर रही है।
सियासी जानकार भाजपा की इस नई नीति को लोकसभा की रीति से जोड़कर चल रहे है। वो ये मान रहे है कि भाजपा चुनावों से ठीक पहले तैयारी नहीं करती है बल्कि वो चुनावों से बहुत पहले अपनी रणनीति को साधना शुरू करती है। चुनाव भले ही निगम और निकाय का है लेकिन फोकस लोकसभा चुनाव पर है। इसलिए भाजपा अपनी नीति को बदल रही है और पुरानी रीति से नहीं बल्कि नए रिवाज से चुनाव मैदान में आ रही है। भाजपा का संगठन भी जानता है कि जनता फूल का बटन यहां के स्थानीय चेहरों को देखकर नहीं दबाएगी बल्कि वो भाजपा की नीति और रीति के साथ आएगी। आम जनता को इससे कोई लेना-देना नहीं होता है कि फलां चेहरा नाराज है, वो तो पार्टी की नीति और पार्टी के माहौल के साथ है।
अब ये चर्चा है कि आखिर बागियों पर कृपा की ये हवा क्यों चल रही है। यदि संगठन को कार्यकर्ताओं की ताकत पर भरोसा है तो फिर वो बागी चेहरों को लेकर क्यों इतना राजी हो रही है। वो सुबह के भूलों को फिर से कमल के फूलों में क्यों कन्वर्ट कर रही है। अब भाजपा का एक वर्ग मान रहा है कि इस नीति से वो कार्यकर्ता प्रेरणा लेंगे जिन्हें पार्षद चुनाव में टिकट नहीं मिलेगा। उनका माइंड अभी से इस बात को लेकर सेट होगा कि यदि हमे वार्ड का टिकट नहीं मिला तो हम भी बागी होकर चुनाव लड़ेंगे। ये कार्यकर्ता को बगावत की तरफ प्रेरित करेगी। जब कार्यकर्ता को लगेगा कि अगर हम भी बागी होकर चुनाव लड़ लिए तो क्या दिक्कत है। जब उनकी घर वापसी हो गई तो हमारी भी हो जाएगी।
क्यों हो आने से उनके खफा, पहले भी ऐसा हुआ है कई दफा
केके शुक्ला पुराने भाजपाई है और विधानसभा चुनाव में उन्होंने विद्रोह कर दिया और वो बसपा में गए और भाजपा उम्मीदवार अतुल गर्ग के सामने चनाव लड़े। सुदेश शर्मा रालोद से विधायक रहे है और वर्ष 2022 में वो भाजपा उम्मीदवार मंजू शिवाच के सामने चुनाव लड़े है। अब जिन्हें ये लग रहा है कि पार्टी अपने खिलाफ चुनाव लड़ने वालों को अपने साथ ले रही है तो वो खफा न हो क्योंकि ऐसा पहले भी कई दफा हुआ है। जिला पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मी मावी और उनके पति पवन मावी जिला पंचायत चुनाव में खुलकर बागी हुए और चुनाव लड़े, भाजपा से निष्कासित हुए। फिर पवन मावी भाजपा में वापिस हुए। पार्षद में ऐसे कई उदाहरण है।

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