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ग़ाजियाबाद

सुभाष वाणी: सम्मान के साथ अपमान

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इन दिनों समाजसेवा से लेकर मीडिया के क्षेत्र में सम्मान प्रदान करने की एक नई परिपाठी शुरू हुई है। (ghaziabad hindi news) मीडिया के क्षेत्र में वो लोग भी सम्मानित हो जाते हैं जिनका मीडिया के क्षेत्र में कभी कोई योगदान रहा ही नहीं। ये सम्मान है या सम्मान का अपमान, यह भी बहस का विषय हो सकता है, लेकिन गाजियाबाद के सांसद ने जिस सम्मान के साथ साहित्यकारों का अपमान किया, उसने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। मध्यप्रदेश में सरकार ने साहित्याकारों सम्मानित करने के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया। सरकार साहित्यकारों को सम्मानित करना चाहती थी, लेकिन सरकार के मंत्रियों की सोच ने इस सम्मान पर ही अपमान का ग्रहण लगा दिया। इस समारोह में सरकार की ओर से अहम जिम्मेदारी गाजियाबाद के सांसद व केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह को सौंपी गई थी। सम्मान से ठीक पहले उनका एक बयान आया जिसमेंं कहा गया था कि साहित्यकार केवल खाने पीने के लिए ही आतें हैं और शराब पीकर लडते झगड़ते हैं। इस बयान के बाद साहित्य जगत में ही भारी विरोध के स्वर फूट पड़े। साहित्यकारों ने इसे अपना अपमान बताकर समारोह से दूरी बना ली। बयान देने के बाद सांसद वीके सिंह ने यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया कि उनके बयान को तोड़ मरोड़कर पेश किया गया है। सवाल बयान को तोड़ मरोड़कर पेश करने का नहीं, बल्कि साहित्यकारों ओर पत्रकारों के प्रति सरकार के मंत्री की सोच का है। ये वही जनरल वीके सिंह हैं जो पहले भी अपने बयान में मीडिया के एक वर्ग को वैश्या की संज्ञा दे चुके हैं। तब भी काफी हो हल्ला मचा था और जनरल को सफाई देनी पड़ी थी। देश का थिंक टैंक माने जाने वाले साहित्यकारों और पत्रकारों के वर्ग को लेकर जनरल की सोच ने अब एक नई बहस को जन्म दिया है। सवाल सरकार के मंत्री जनरल वीके सिंह के बयान का नहीं है, हो सकता है उनके अपने अनुभव मीडिया और साहित्य जगत को लेकर मधुर ना रहे हों, लेकिन साहित्य जगत और मीड़िया जगत को खुद इस बात का आंकलन करना होगा कि उनके प्रति यह सोच किन कारणों के चलते विकसित हुई है। आज सम्मान समारोह एक मजाक बनकर रह गये हैं। 20 हजार का चंदा देने वाला मिलावट खोर दुकान भी व्यापार गौरव की उपधि पा जाता है, तो दलाल के नाम से जाने जाने वाले लोग भी पत्रकारिता के क्षेत्र में पुरूस्कार हासिल कर लेते हैं। उद्योगपति की पत्नी पैसे के दम पर कवित्री हो जाती है। कविता भी खानदानी हो गई है। एक कवि के बेटे, बेटी और पत्नी भी काव्य जगत के आभूषण हो जाते हैं। जब अपने ही क्षेत्र में गंदगी फैली है तो किसी ओर को दोष देने से कोई लाभ नहीं है। आज मंत्री ने तीखी टिप्पणी की है तो कल संत्री भी अपमान कर ही देगा। ये तो सम्मान का अपमान हो गया, लेकिन साहित्यजगत की बिखरी हुई एकता देखी कि कुछ अपमान के बाद भी सम्मान ग्रहण करने पहुंच ही जायेंगे। सेरा यात्री से लेकर कुंवर बैचेन की धरती पर साहित्यकारों का अपमान करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद सबसे ज्यादा वोटों से जीतने वाले सांसद गाजियाबाद से ही हैं। समय किसी की टिप्पणी पर तल्ख होने का नहीं है, समय खुद की समीक्षा करने का है।

उत्तर प्रदेश

अनिल खेड़ा ने कहा मेरी कोशिश पार्टी करे मेरे नाम पर विचार

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गाजियाबाद (करंट क्राइम)। भगवागढ़ में चुनाव अभी दूर है लेकिन दावेदारी को लेकर इंटरनली माहौल पूरी तरह भरपूर है। कोई खुद को चुनावी दावेदारी से इतनी दूर दिखा रहा है कि इस चक्कर में वो अपनों से भी दूर हो जा रहा है। किसी के मन में अरमान हैं लेकिन वो पूरी तरह से शांत है। चुनावी दावेदारी को लेकर अगर चार माननीय एक साथ बैठ गये तो इसे लेकर भी फिर वो हुआ कि अनुशासन वाले ही भाजपा दफ्तर में आकर बैठे।
कोई खुलकर टिकट मांग रहा है और दावेदारी को लेकर यहां दूरियों की दास्तां है। राज्यसभा सांसद अनिल अग्रवाल लोकसभा की दावेदारी कर चुके हैं। अभी तक भगवागढ़ में यह सिंगल दावेदारी चल रही थी लेकिन अब इस सिंगल दावेदारी में दूसरी यानी डबल दावेदारी का भगवा मिंगल आ गया है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने लोकसभा के लिए दावेदारी की है। ये नेता अनिल खेड़ा हैं। अनिल खेड़ा भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शुमार होते हैं। क्षेत्रीय टीम में पदाधिकारी रहे हैं और उन्हें भाजपा का समर्पित कार्यकर्ता कहा जाता है। उन्होंने लोकसभा को लेकर अपनी दावेदारी की है। करंट क्राइम से बातचीत में अनिल खेड़ा ने कहा कि अभी संगठन की टीम में स्थान बनाने के लिए मैंने कोई प्रयास नहीं किया है। फिर बात लोकसभा टिकट की चली तो अनिल खेड़ा ने कहा कि मैं पहले भी टिकट की दावेदारी कर चुका हूं और इस बार भी मेरा प्रयास लोकसभा टिकट के लिए रहेगा।
मैं कार्यकर्ता होने के नाते लोकसभा टिकट की दावेदारी करूंगा। लोकसभा टिकट मांगूगा। पार्टी का जो भी निर्णय होगा वो मुझे स्वीकार होगा लेकिन लोकसभा चुनाव में मेरा चेहरा भी एक दावेदार के रूप में होगा। मेरी कोशिश रहेगी कि पार्टी मेरे नाम पर विचार करे।
खुली कार में माला से लेकर धौलाना तक अनिल खेड़ा
अनिल खेड़ा पहले भी लोकसभा चुनाव की दावेदारी कर चुके हैं। खुली कार में सवार होकर वह दावेदार के रूप में भगवा कार्यालय गये थे। अपना बॉयोडाटा लोकसभा दावेदार के रूप में देकर आये थे। इतना ही नहीं अनिल खेड़ा ने जब दावेदारी की थी तो विधानसभा से लेकर लोकसभा के क्षेत्र में अनिल खेड़ा के नाम की दीवारें बोल उठी थीं। धौलाना में उनकी सक्रियता अचानक से बढ़ी थी। देहात की पंचायतों से लेकर वो गांव की चौपाल तक नजर आने लगे थे। धौलाना में विशेष रूप से वो खुद का एक राजनीतिक माहौल बनाने लगे थे। टिकट नहीं होने के बाद उन्होंने खुद को एक्टिविटी के स्पीडोमीटर से अलग किया। अब वो फिर से दावेदारी में हैं तो अभी दीवारें भी खामोश हैं और धौलाना में भी फिलहाल कोई खास जोश नहीं है।

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उत्तर प्रदेश

पहली ही बैठक में सीपी ने की शहर से देहात तक के व्यापारियों से मुलाकात

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दिया हर सवाल का जवाब और बता दिया तीन महीने का प्लान
ट्रैफिक से लेकर अतिक्रमण और व्यापारियों की सुरक्षा से लेकर व्यवहार का उठाया गया मुद्दा
गाजियाबाद (करंट क्राइम)। मंगलवार को गाजियाबाद स्थित पुलिस लाइन के परमजीत हॉल में पुलिस कमिश्नरेट गाजियाबाद के सीपी अजय मिश्रा ने गाजियाबाद जिले के व्यापारियों, व्यापार मंडल के पदाधिकारियों के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा एवं समस्या सुनने पर समाधान हेतु एक आवश्यक मीटिंग का आयोजन किया। मीटिंग में जिले के तमाम व्यापार मंडल, उद्योग व्यापार मंडल और सरार्फा एसोसिएशन से लेकर व्यापार मंडल से जुड़े पदाधिकारियों को आमंत्रित किया गया।
बैठक की शुरूआत परिचय से हुई, इस दौरान सीपी अजय मिश्रा ने देहात में मुरादनगर, मोदीनगर और विजयनगर के व्यापारियों की बातचीत सुनी। तो वहीं अलग-अलग व्यापार मंडलों से सुझाव मांगे गए। इस दौरान बैठक में ट्रैफिक, अतिक्रमण, नए थानों कीशुरूआत, पुलिसकर्मियों की गश्त बढ़ाने से लेकर वाहनों की संख्या और व्यापारियों के साथ थाने और चौकी पर ठीक प्रकार से बर्ताव व व्यापारियों का उत्पीड़न ना किए जाने से लेकर उनको सुरक्षा और सरार्फा व्यापारियों को लेकर पुलिस हेल्पलाइन नंबरों पर विस्तार से चर्चा की गई।
पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद सीपी अजय मिश्रा पहली बार व्यापारियों से रूबरू हुए । इस कार्यक्रम में डीसीपी नगर निपुण अग्रवाल को व्यापारियों की किसी भी समस्या के निस्तारण के लिए निर्देश दिया गया है। तो अतिक्रमण और जाम की समस्या के निस्तारण के लिए एडीसीपी ट्रैफिक रामानंद कुशवाहा को जिम्मेदारी सौंपी गई है। बैठक करीब ढाई घंटे तक चली, जिसमें प्रमुख व्यापारियों और उनके पदाधिकारियों ने अपने विचार रखे।
इस दौरान सीपी अजय मिश्रा ने व्यापारियों के साथ हर माह डीसीपी सिटी निपुण अग्रवाल को बैठक करने और जो व्यापारी सवाल करेंगे उनका लिखित में जवाब देने का भी निर्देश दिया है। पुलिस के सभी थाना प्रभारियों, एसीपी स्तर के अधिकारियों और डीसीपी को जल्दी एक सर्कुलर जारी किया जाएगा। जिसमें व्यापारियों के साथ उचित व्यवहार और संवाद को स्थापित करने के लिए भी चर्चा की गई है। इस बैठक में मुख्य रूप से गोपीचंद, अशोक चावला, संदीप बंसल, तिलक राज अरोड़ा, बालकिशन गुप्ता, प्रीतमलाल, देवेंद्र हितकारी, अनिल सांवरिया, रामकिशोर अग्रवाल, प्रेमचंद गुप्ता, प्रेमप्रकाश चीनी, वसीम, हिमांशु पाराशर, अशोक भारतीय, अतुल जैन, गौरव गर्ग, विकास सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
सीपी ने व्यापारियों को दिया सुधार का भरोसा
सरार्फा एसोसिएशन के महामंत्री गौरव गर्ग ने कहा है कि बैठक के दौरान सीपी ने व्यापारियों को सुधार का भरोसा दिया है। साथ ही उन्होंने कहा कि सीपी अजय मिश्रा ने सभी विषयों पर बातचीत की गई। उसपर उनका मिशन क्लियर था, उनके पास हर चीज का जवाब था और आंकड़े भी मौजूद थे।
पुलिस व्यापारी संवाद जरूरी
महानगर उपाध्यक्ष राष्ट्रीय व्यापार मंडल के हिमांशु पराशर और व्यापारी नेता राकेश शर्मा ने कहा है कि जिस प्रकार से सीपी ने व्यापारियों के साथ संवाद स्थापित किया है यह अच्छी पहल है। इससे ना सिर्फ अपराध नियंत्रण बल्कि व्यापारियों की समस्या सुलझाने में भी पुलिस प्रशासन को मदद मिलेगी। इसका लाभ यह होगा कि व्यापारियों में पुलिस के प्रति एक अलग संदेश जाएगा। पुलिस समाज का महत्वपूर्ण अंग है और व्यापारी उस समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा।
ट्रांस हिंडन में खुलने
चाहिए और थाने
मंगलवार को व्यापारियों और पुलिस के सीपी की एक बैठक की गई। बैठक में साहिबाबाद विधानसभा अध्यक्ष विकास अग्रवाल ने कहा कि ट्रांस हिंडन में थानों की संख्या बढ़नी चाहिए। इससे लूट और अन्य घटनाएं जो हो रही थी, उसमें रोकथाम लगेगी। इस पर सीपी ने जल्द ही 6 नए थाने खोलने का भरोसा दिया है। जिसमें दो थाने ट्रांस हिंडन में खुलेंगे और पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ेगी। इस दौरान वसुंधरा सेक्टर-15 अध्यक्ष लाखन सिंह व सचिव विनीत अग्रवाल भी मौजूद रहे।

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उत्तर प्रदेश

नगर निकाय चुनाव को लेकर भाजपा की तैयारी

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राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार असीम अरूण को दी गई जनपद गाजियाबाद
के प्रभारी मंत्री की जिम्मेदारी
गाजियाबाद (करंट क्राइम)। भाजपा अभी से निकाय चुनावों की तैयारी में जुटी है। लखनऊ वाली बैठक में तैयारी के निर्देश मिले थे और अब निकाय चुनावों को लेकर प्रभारी मंत्री की जिम्मेदारी भी दे दी गई है। पूर्व आईपीएस तथा उत्तर प्रदेश के राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार असीम अरूण को नगर निकाय चुनाव में गाजियाबाद जिले से प्रभारी मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अरूण असीम कन्नौज की सदर सीट से विधायक है। वह 1994 बैच के आईपीएस रहे हैं और वर्ष 2022 विधानसभा के विधायक के रूप में अपनी सियासी पारी शुरू की है। जीवन में पहला चुनाव लड़े है और पहले चुनाव में ही उन्होंने भाजपा के टिकट पर जीत हासिल की। पहली बार विधानसभा का चुनाव जीतने वाले असीम अरूण को उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया है। चुनावों से जुड़ी सबसे अहम जिम्मेदारी उन्हें गाजियाबाद के प्रभारी मंत्री के रूप में मिली है।
गाजियाबाद को भगवा गढ़ कहा जाता है और निकाय चुनावों से पहले मुख्यमंत्री ने उन पर भरोसा जताया है और उन्हें गाजियाबाद का प्रभारी मंत्री बनाया है।
गाजियाबाद की सामाजिक
और राजनीतिक नब्ज को जानते है असीम अरूण
वर्ष 2022 में अपनी सियासी पारी शुरू करने वाले असीम अरूण प्रभारी मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे है और गाजियाबाद जिले से उनका पुलिस अधिकारी के रूप में नाता रहा है। वह वर्ष 2001-02 में पीएसी की बटालियन में कमांडेट रहे हैं। अलीगढ़ और हाथरस के साथ मेरठ में भी तैनात रहे है। गाजियाबाद की सामाजिक और राजनीतिक नब्ज को समझते है।
नगर निकाय चुनाव में बम्पर जीत की बड़ी जिम्मेदारी
असीम अरूण गाजियाबाद के प्रभारी मंत्री बने है और नगर निकाय चुनाव में भाजपा को बम्पर जीत दिलाना उनके सामने बड़ी जिम्मेदारी है। हालांकि यहां नगर निगम की मेयर सीट पर भाजपा का शुरू से कब्जा रहा है। निगम के 100 वार्डों में भाजपा अभी भी 60 से ज्यादा सीटों पर काबिज है। वहीं नगर पालिका परिषद में चेयरमैन पद पर भाजपा के ही चेहरे है। लेकिन बदलते हालात में लोनी, खोड़ा, मुरादनगर और मोदीनगर में भाजपा को संघर्ष करना है। प्रभारी मंत्री के तौर पर असीम अरूण को यहां अपनी रणनीति से भाजपा को केवल जीत नहीं बल्कि एक एतिहासिक जीत दिलानी है।

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