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दिल्ली एन.सी.आर

रंजीत सिन्हा का आरोपियों से मिलना अनुचित : सर्वोच्च न्यायालय

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नई दिल्ली | सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व निदेशक रंजीत सिन्हा को झटका देते हुए गुरुवार को कोयला घोटाले के आरोपियों के साथ सरकारी आवास बैठक करने को ‘अनुचित’ करार दिया।(ranjit sinha cbi hindi news) न्यायमूर्ति मदन बी.लोकुर की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने गुरुवार को फैसला सुनाते हुए कहा, “रंजीत सिन्हा का अपने सरकारी आवास पर कोयला घोटाले के आरोपियों से मिलना अनुचित था।”

न्यायालय ने यह मामला केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को सौंप दिया, जो अब मामले की आगे की जांच के संबंध में अपनी राय देगा।

कोयला घोटाले के आरोपियों से सिन्हा की मुलाकात की घटना की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराने को लेकर गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) कॉमन कॉज की याचिका को खारिज करते हुए न्यायालय ने सिन्हा की उस याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें झूठे साक्ष्य पेश करने का आरोप लगाकर वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी।

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मेयर सीट जनरल होने के बाद क्या होगी पंजाबियों की बल्ले-बल्ले

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पार्टी में लंबे समय से पंजाबी समाज के जनप्रतिनिधि की उम्मीद
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। गाजियाबाद की राजनीति में पंजाबी और सिख समाज का झुकाव-लगाव हमेशा से भाजपा के साथ रहा है। ये समाज अब दावा करता है कि उनकी संख्या भी अन्य बिरादारियों के समकक्ष है। लिहाजा टिकट दावेदारी भी शुरू हो गई है। यहां पर मेयर चुनाव की बात करें और जनरल सीट होने पर पंजाबियों के लिए स्पेशल क्या होगा तो यहां उसके नेताओं पर निगाह डालनी होगी।
सरदार एसपी सिंह भाजपा का सिख चेहरा है। पॉलिटिक्ली एक्टिव रहते है। यहां पर भाजपा की पंजाबी राजनीति का जिक्र अशोक मोंगा के बिना अधूरा है। महानगर अध्यक्ष रहे है। क्षेत्रीय महामंत्री रहे है। मेयर दावेदारी में जगदीश साधना का नाम भी आता है। यहां बलदेव राज शर्मा भी खामोशी से दावेदारी वाले फ्रेम में आते है। पंजाबी समाज सियासी रूप से एक्टिव है और यह समाज विधानसभा चुनावों में अपनी भागीदारी को लेकर एक प्रेस कांफ्रेंस भी कर चुका है। अब सवाल यही है कि मेयर सीट जब सामान्य हुई है तो इस पंजाबी बिरादरी में चुनावी अरमान भी जाग रहे है। सवाल यही है कि गाजियाबाद की राजनीति में सीट सामान्य होने पर पंजाबी चेहरों के लिए क्या स्पेशल होने जा रहा है। यहां अशोक मोंगा से लेकर जगदीश साधना तक किस चेहरे के नाम पर विचार होने जा रहा है। क्या यहां इस समाज को जनप्रतिनिधि होने वाली उम्मीद की कोई किरण किसी दावेदार में दिखाई देती है।

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त्यागी समाज से ये चेहरे मेयर टिकट के प्रबल दावेदार

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गाजियाबाद (करंट क्राइम)। भगवा गढ़ में त्यागी समाज की सियासी हिस्सेदारी को लेकर चर्चा होने लगी है। मेयर टिकट की बात करें तो यहां पूर्व मंत्री बालेश्वर त्यागी ने अपनी दावेदारी को लेकर इंकार कर दिया था। उन्होंने उम्र का हवाला दिया। खुद इंकार किया लेकिन किसी अन्य त्यागी नेता का जिक्र नहीं किया। भाजपा में मेयर दावेदारी की बात करें तो यहां सीनियर पार्षद राजेंद्र त्यागी का नाम इस दावेदारी में आता है। निगम एक्ट के जानकार और पूरा सियासी जीवन भाजपा और नगर निगम के बीच रहा है। पांच बार पार्षद रहे। निगम में खुलासे किए है। ईमानदार छवि और जनता के बीच सक्रिय रहकर राजनीति करते है। मेयर दावेदारी में वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. वीरेश्वर त्यागी का नाम आता है। लाइफ टाइम भाजपाई है और मुद्दों पर पकड़ रखते है, शानदार वक्ता है। लोकसभा से लेकर विधानसभा तक उनकी दावेदारी रही है। त्यागी समाज से ही एक चेहरा ऐसा है जो साइलेंट है लेकिन पूरी तरह कर्मठ और भाजपा के प्रति समर्पित है। ये चेहरा प्रेम त्यागी का है। भाजपा में विभिन्न पदों पर रहे है और किसान परिवार से आते है। सबसे बड़ी बात ये है कि साधन संपन्न होने के बाद भी बेहद सरल जीवन शैली है और बेहद विनम्र व्यवहार है। ये चेहरा भी त्यागी समाज से मेयर टिकट का दावेदार है।

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सीट हुई है सामान्य तो ब्राह्मण चेहरों में ये नाम भी है गणमान्य

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गाजियाबाद (करंट क्राइम)। सामान्य सीट होने के बाद निगम की मेयर दावेदारी में ब्राह्मण चेहरों की भागीदारी का जिक्र ब्राह्मण समाज के इन चेहरों के बिना अधूरा है। अभी तक एक ही ब्राह्मण चेहरे को मेयर बनने का मौका मिला है और मेयर के लिए भाजपा की भागीदारी में ये नाम आते है।
अब तक के सबसे लोकप्रिय अध्यक्ष मेयर दावेदारी में सबसे मजबूत नाम
गाजियाबाद (करंट क्राइम)। संजीव शर्मा महानगर अध्यक्ष है और लोकप्रियता का रिकॉर्ड उनके नाम है। मेयर दावेदारी में उनका नाम चल रहा है लेकिन मेयर दावेदारी उन्होंने कभी खुद नहीं स्वीकारी है मगर पार्टी सूत्र बताते हैं कि उनकी दावेदारी सभी पर भारी है। अब उन्होंने यहां सबसे प्रथम दावेदार के रूप में अनिल स्वामी से बॉयोडाटा तो ले लिया लेकिन अपना बॉयोडाटा किसे दिया है या देंगे ये भी सामने आ जाएगा। ब्राह्मण फैक्टर में यह नाम सबसे मजबूत माना जा रहा है। मुख्यमंत्री के सफल रोड शो से लेकर सुपर हिट प्रबुद्ध सम्मेलन संजीव शर्मा के नाम है। संजीव शर्मा सबसे बड़ी विधानसभा से मेयर दावेदारी करता एक मजबूत ब्राह्मण नाम है।

निगम के सबसे अनुभवी चेहरों में आता है अनिल स्वामी का नाम
गाजियाबाद (करंट क्राइम)। अनिल स्वामी भाजपा का वो चेहरा है जिन्हें सभासद से लेकर निगम पार्षद बनने का मौका मिला है। निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष रहे है और एक ऐसे नेता जो एक्ट के जानकार है और पूरे टैक्ट के साथ अफसरों की आंखों में आंखे डालकर बात करने का साहस रखते है। भाजपा के टिकट पर निर्विरोध चुनाव जीतने का रिकॉर्ड उनके नाम है। गेम फिनीशर अनिल स्वामी की दावेदारी पर पार्टी को विचार करना है। बेहद सिद्धांतों के साथ राजनीति करते है और सिद्धांत ये है कि जब उनकी बहन आशा शर्मा मेयर बनी तो उन्होंने खुद को निगम के कामों से अलग कर लिया था। मेयर दावेदारी में अनुभव, ज्ञान और पार्टी के प्रति समर्पण वाले रिपोर्ट कार्ड के साथ यह नाम सबसे पहले आता है।

सधे हुए अंदाज में मुद्दों को लेकर दावेदारी करते है अजय शर्मा

गाजियाबाद (करंट क्राइम)। अजय शर्मा भाजपा की राजनीति का वो नाम है जिन्होंने विपक्ष में थानों का घेराव किया और सरकार आने पर भी पुलिस से मोर्चा ले लिया। महानगर अध्यक्ष रहे है और हिंदुत्ववादी चेहरे के रूप में अपनी पहचान रखते है। राजनगर के लव मैरिज प्रकरण में अजय शर्मा को विरोध करने पर अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी। विपक्ष में रहते हुए थानों के घेराव का आंदोलन चलाया था। कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों को लेकर जो मुहिम चलाई थी उसकी सरकार ने भी प्रंशसा की थी और फिर सरकार ने इसी थीम पर अपनी योजना चलाई थी। मौजूदा समय में सदस्यता कार्यक्रम के प्रदेश संयोजक है। विधानसभा की दावेदारी कर चुके है और मेयर दावेदारी में फिर से मैदान में है।

सामान्य हुई है सीट और नाम हुआ रिपीट तो आशा शर्मा की दावेदारी पर कितना होगा विचार
गाजियाबाद (करंट क्राइम)। मौजूदा मेयर आशा शर्मा है और वो टिकट दावेदारी में है। सीट सामान्य आरक्षित हुई है और यहां पर एक चर्चा मेयर आशा शर्मा के टिकट रिपीट को लेकर भी है। यदि टिकट रिपीट होता है तो ब्राह्मण समाज के चेहरे के रूप में आशा शर्मा की दावेदारी बनती है। शानदार रूप से निगम चलाया है। स्वच्छता का पुरूस्कार निगम के हिस्से में आया है। मुख्यमंत्री तारीफ करके गए है। अब यदि नाम रिपीट होता है तो फिर आशा शर्मा की दावेदारी यहां बनती है।

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