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दिल्ली एन.सी.आर

‘सड़क की हिंसा तनाव, आक्रामक स्वभाव का परिणाम’

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नई दिल्ली| दिल्ली में सड़कों पर यातायात के दौरान होने वाले झगड़ों और हिंसा की संख्या लगाता बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के झगड़े और हिंसा बढ़ते तनाव, पीड़ित के प्रति उदासीनता और आक्रामक स्वभाव का परिणाम हैं। ऐसे 265 मामलों में वर्ष 2010 से 2014 के बीच दिल्ली पुलिस 350 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इसे कम करने के दिल्ली पुलिस के प्रयासों के बावजूद पिछले पांच सालों में ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं।
पांच अप्रैल को दिल्ली के तुर्कमान गेट के पास हुई ऐसी ही एक घटना ने लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया है। पांच अप्रैल को बाइक सवार 38 वर्षीय शाहनवाज से जाम में जगह देने को लेकर हुई बहस के बाद एक आई20 कार में सवार पांच लोगों ने शाहनवाज की बुरी तरह पिटाई की थी, जिसके बाद शानवाज की मौत हो गई थी।
विशेषज्ञ ‘तनाव’ को सड़क पर होने वाली हिंसा में वृद्धि का कारण मानते हैं।
फोर्टीज हेल्थकेयर में मेंटल हेल्थ एंड बिहेवियोरल साइंसेज के निदेशक समीर पारिख ने कहा, “यह मानसिक विकार नहीं है। यह हमारे आसपास रहने वाले लोगों की मन:स्थिति है। यह समाज में व्याप्त उच्च स्तर के तनाव के कारण है।”
वर्ष 2014 में दिल्ली पुलिस ने जनवरी से लेकर नवंबर तक सड़क पर होने वाले विवाद और हिंसा के 93 मामले दर्ज किए थे। वर्ष 2013 में ऐसे 53 और वर्ष 2012 में ऐसे 49 मामले दर्ज हुए थे।
दिल्ली पुलिस के अधिकारी ऐसी बढ़ती घटनाओं के आगे असहाय हैं।
एक पुलिस अधिकारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया, “सड़क पर होने वाले झगड़ों पर लगाम लगा पाना मुश्किल है, क्योंकि यह लोगों की मानसिक स्थिति पर निर्भर करता है। वाहन चलाते समय हर किसी को धर्य रखना चाहिए, अन्यथा ऐसी घटनाएं नहीं रुक सकतीं।”
उन्होंने बताया, “हमने ऐसे मामलों के अपराधियों को कम समय में पकड़ा, लेकिन हम ऐसे मामले रोकने में असफल रहे हैं।”
दिल्ली पुलिस के आंकड़ों अनुसार, पुलिस ने वर्ष 2014 में नवंबर तक ऐसे मामलों में 118 लोगों को गिरफ्तार किया था।
एक अन्य पुलिस अधिकारी ने कहा, “इसका स्तर इतना बढ़ चुका है कि वे पुलिसकर्मियों को मारने में भी पीछे नहीं हटते, जैसा कान्स्टेबल माना राम के मामले में हुआ था।”
माना राम ने 14 जून, 2014 को जखीरा फ्लाईओवर पर प्रवेश निषेध नियम का उल्लंघन करने वाली कार को रुकने का संकेत किया था और कार उन्हें 150 मीटर तक घसीटती चली गई थी।
विद्यासागर मानसिक स्वास्थ्य, न्यूरो एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ मनोचिकित्सक संजय पटनायक ने कहा, “यह व्यक्ति के व्यक्तित्व पर निर्भर करता है। यह शराब जैसी चीजों के प्रभाव के कारण भी होता है। यह लोगों के क्रोधी स्वभाव और मिजाज पर भी निर्भर है।”

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उत्तर प्रदेश

भगवा गढ़ में बन रही है सरकार वालों के व्यापार की कौन सी लिस्ट!

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गाजियाबाद (करंट क्राइम)। सरकार वाले बाजार में भी हैं और अलग अलग व्यापार में भी हैं। बस कारोबार को लेकर वो रडार पर आ गये हैं। सुना है कि सयंम वाले मामले के बाद भगवा कारोबारियों के व्यापार की लिस्ट मांग ली गई है। इस लिस्ट में प्रापर्टी डीलरों से लेकर रेस्टोरेंट कारोबारी हैं तो सरकारी विभागों के ठेकेदारों से लेकर लाईजनिंग वाले नाम भी आ गये हैं।
बताने वाले बता रहे हैं कि लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी कतई नहीं चाहती कि किसी भी भगवाई के कारोबार को लेकर विपक्ष या मीडिया सरकार के काम काज पर किसी तरह की अंगुली उठा दे। अदंरखाने निर्देश मिले हैं कि धुआं, जुआ, शराब, शबाब से लेकर खराब निर्माण वाला भगवाई मिले तो उसे पार्टी से भगा दें। अब सगंठन में पद देते समय इस बात का शिजरा निकल कर आयेगा। पार्टी कारोबार को लेकर सरकार की फजीहत कराने के मूड में नहीं है। कारोबार वाले सावधान हो जाये क्योंकि लिस्ट का ट्वीस्ट अभी नहीं बल्कि आठ महीने के बाद दिखाई देगा।
कन्फर्म सूत्र बता रहे हैं कि इस लिस्ट का ट्वीस्ट आने वाले समय में दिखाई देगा। क्योंकि बड़ी खबर यह है कि अन्दर खाने कौन सा नेता कौन सा कारोबार कर रहा है यह खबर भी भाजपा वाले ही खुद देकर आएंगे। इस लिस्ट में कई के कारोबार निकलकर सामने आएंगे। फिलहाल लिस्ट को लेकर काम शुरु हो गया है।

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उत्तर प्रदेश

पांच फरवरी को आईटीएस कॉलेज में जुटेंगे महानगर के 170 भाजपाई

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संगठन ने महानगर कार्यसमिति की बैठक है बुलाई
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। बैठकों का दौर बता रहा है कि भाजपा अपनी सियासी तैयारी को लगातार धार दे रही है। वो अपने संगठन की रणनीति पर चल रही है और यहां राष्टÑीय अध्यक्ष से लेकर मंडल अध्यक्ष तक वो जिम्मेदारियों तय कर रही है। एक बार फिर से भगवागढ में भाजपा के पदाधिकारी जुटने जा रहे हैं। खास बात ये है कि ये बैठक महानगर कार्यकारिणी की बैठक है। भाजपा महानगर कार्यसमिति की बैठक पांच फरवरी को आईटीएस कॉलेज में होगी। इस बैठक में भाजपा महानगर टीम के सभी पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक में चुनावी तैयारियों को लेकर ही संगठन की तैयारियों की समीक्षा होगी। कई योजनाओं को लेकर मंथन-चिंतन हो सकता है। पांच फरवरी को आईटीएस कॉलेज में होने वाली भाजपा महानगर कार्यसमिति की बैठक में मंडल और मोर्चों के पदाधिकारियों सहित 170 भाजपाई शामिल होंगे। आईटीएस कॉलेज में पांच फरवरी को ये बैठक बुलाई
गयी है।
4 सत्र में सांसद और विधायक भी रखेंगे अपनी अपनी बात
भाजपा महानगर कार्यसमिति की बैठक पांच फरवरी को होगी। आईटीएस कॉलेज में होने वाली यह बैठक सुबह साढ़े दस बजे शुरू होगी और चार बजे समाप्त होगी। इस बैठक में महानगर पदाधिकारियों के अलावा लोकसभा सांसद, राज्यसभा सांसद, विधायक और एमएलसी भी मौजूद रहेंगे। बताया जाता है कि आईटीएस कॉलेज में होने वाली इस बैठक को चार सत्र में बांटा गया है। सत्र के समापन पर लोकसभा सांसद तथा केन्द्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह अपना संबोधन देंगे। इस बैठक में राज्यसभा सांसद अनिल अग्रवाल भी मौजूद रहेंगे। इसके अलावा विधायक तथा क्षेत्रीय अध्यक्ष भी इस बैठक में भाग लेंगे। सभी विधायक भी यहां अपने संबोधन में अपनी बात रखेंगे।
पांच फरवरी को भगवा मय रहेगा आईटीएस कॉलेज का सभागार
ये तो सबको पता है कि सरकार वाले अब उस कॉलेज के सभागार से थोड़ी दूरी ही बना रहे हैं। यही वजह है कि अब राष्टÑीय अध्यक्ष जेपी नडडा से लेकर बीस मंडलों के अध्यक्ष भी बैठक करने के लिए नदियापार वाले आईटीएस कॉलेज में आ रहे हैं। पांच फरवरी को जब महानगर कार्यकारिणी की बैठक होगी तो 170 भाजपाई यहां 4 सत्र में अपनी बात रखेंगे। यहां पर केवल महानगर कार्यसमिति के पदाधिकारी ही नहीं आयेंगे बल्कि जिले के सांसद, जिले के विधायक भी आयेंगे और माना जा रहा है कि इस बैठक में क्षेत्रीय अध्यक्ष भी आ सकते हैं।

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उत्तर प्रदेश

भाजपा दफ्तर पर बैठक के बाद अधिकारियों को देंगे फिर निर्देश

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वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। आज जिले के प्रभारी मंत्री बनाये गये असीम अरूण अधिकारियों के साथ बैठक लेंगे और उससे पहले वो भाजपा कार्यालय पर कार्यकर्ताओं से रूबरू होंगे। प्रभारी मंत्री बनने के बाद पूर्व एडीजी असीम अरूण का मंत्री के रूप में यह पहला दौरा गाजियाबाद में होगा।
यहां पर सबसे खास बात यह है कि प्रभारी मंत्री अरूण असीम जिले के अफसरों से बाद में बात करेंगे लेकिन गाजियाबाद में आने के बाद वो सबसे पहले भाजपा महानगर कार्यालय पर कार्यकर्ताओं से बात करेंगे। माना जा रहा है कि वो पहले कार्यकर्ताओं के मन का संदेश लेंगे और फिर उस संदेश के बाद अधिकारियों को निर्देश देंगे। आज इस बैठक पर सभी की निगाहें रहेंगी। क्योंकि प्रभारी मंत्री जहां अधिकारियों की कार्यशैली की फीडबैक भाजपा कार्यकर्ताओं से लेंगे वहीं वो केन्द्र और राज्यसरकार द्वारा चलाई जा रही विकास तथा जन कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा अधिकारियों के साथ करेंगे।
सुबह साढ़े 11 बजे प्रभारी मंत्री आ
जायेंगे गाजियाबाद

(करंट क्राइम)। प्रभारी मंत्री असीम अरूण आज सुबह साढ़े 11 बजे गाजियाबाद आ जायेंगे। जिलाधिकारी गाजियाबाद द्वारा प्रभारी मंत्री का जो प्रस्तावित कार्यक्रम दिया गया है उसमें वो पहले कहां जायेंगे ये नहीं बताया गया है लेकिन ये बताया गया है कि प्रभारी मंत्री गाजियाबाद में केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विकास एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा करेंगे। वो किसी भी योजना का भौतिक सत्यापन कर सकते हैं। वहीं यह भी बताया गया है कि प्रभारी मंत्री द्वारा संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद का भी कार्यक्रम है। वहीं भाजपा महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा ने बताया है कि प्रभारी मंत्री असीम अरूण पहले भाजपा महानगर कार्यालय आयेंगे। यहां पर वो कार्यकर्ताओं के साथ बात करेंगे। उसके बाद वो अपनी सरकारी बैठक के लिए प्रस्थान करेंगे।
वो खुद रह चुके हैं जनसुनवाई का हिस्सा, जानते हैं पूरा किस्सा

(करंट क्राइम)। भगवागढ़ की खास बात ये है कि यहां जो भी प्रभारी मंत्री आता है उसे कार्यकर्ताओं से बात करते ही यह सवाल फेस करने पड़ते हैं कि पुलिस उनकी नहीं सुन रही है। सरकारी कर्मचारी नहीं सुनते हैं। जब आरकेजीआईटी में प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना आये तो यही बात थी और जब कानपुर वाले अजितपाल आये तो तब भी यही बात थी। आज जब प्रभारी मंत्री के रूप में अरूण असीम आयेंगे तो ये देखने की बात होगी कि शिकायतें क्या आयेंगी और समाधान क्या होगा। असीम अरूण खुद आईपीएस अधिकारी रहे हैं। उनके पिता श्रीराम अरूण उत्तर प्रदेश पुलिस के मुखिया रहे हैं। मंत्री बनने से पहले असीम अरूण पुलिस में पुलिस विभाग के एडीजी रहे हैं। लिहाजा जनसुनवाई से लेकर निस्तारण तक उनके लिए कोई नई चीज नहीं है। पुलिस नहीं सुनती है ये सवाल वो अपने अधिकारी वाले कार्यकाल में भी कई बार सुन चुके होंगे। प्रभारी मंत्री बनने के बाद यही सवाल जब उनके सामने आयेगा तो ये देखा जायेगा कि वो जन सुनवाई को त्वरित करने के लिए क्या निर्देश देते हैं। ­

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