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उत्तर प्रदेश

सिटी जोन में यह भी है अजब संयोग तीनों सर्किल के अफसरों का अ अक्षर से शुरु होता है नाम

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गाजियाबाद, ( करंट क्राइम)। कई बार कुछ प्रक्रिया ऐसी हो जाती हैं जो संयोगवश होती हैं या अकारण मगर उनकी चर्चाएं हो जाती हैं। कुछ ऐसा ही हो रहा है आजकल गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट के अंतर्गत आने वाले सिटी जोन एरिया में। दरअसल सिटी जोन वर्तमान में तीन सर्किल वाला है। पहला सर्किल कवि नगर है जिसके अंतर्गत कविनगर और मधुबन बापूधाम थानाक्षेत्र आता है। तो दूसरा सर्किल नंदग्राम है, जिसमें नंदग्राम थाना और सिहानी गेट थाना आता है।
वहीं तीसरा सर्किल है कोतवाली सर्किल जिसमें घंटाघर कोतवाली और विजय नगर थानाक्षेत्र आते हैं। अब यहां के तीनों ही सर्किल में जो एसीपी स्तर के अधिकारी पुलिस कमिश्नरेट वाले सिस्टम से जुड़े हैं उनके नाम अ अ अक्षर से शुरू होते हैं। जैसे कवि नगर सर्किल में एसीपी अभिषेक श्रीवास्तव हंै, जो कुछ ही दिन पूर्व फिरोजाबाद से आए थे और ट्रैफिक एसीपी रहने के बाद उन पर सीपी अजय मिश्रा द्वारा कवि नगर जैसे महत्वपूर्ण सर्किल की जिम्मेदारी दी गई है। तो वहीं नंदग्राम सर्किल की वर्तमान में एसीपी आलोक दुबे हैं। जिनका कुछ ही दिन पूर्व प्रमोशन हुआ है और वहां अभी एसीपी का दायित्व निभा रही हैं। उनके सर्किल में सिहानी गेट और नंदग्राम थाना आता है। महिला अधिकारी होने के बावजूद उनकी रिकॉर्ड बुक में एनकाउंटर से लेकर महिला सशक्तिकरण के कई महत्वपूर्ण और प्रशंसनीय कार्य ऐड हैं। वहीं कोतवाली की एसीपी अंशु जैन हैं जो घंटाघर कोतवाली और विजय नगर थाना क्षेत्र को संभाल रही हैं। वह यहां का सुपरविजन करती हैं और सिटी टीम में कवि नगर सर्किट और सिटी सर्किल के साथ ही पूर्व में इंदिरापुरम और साहिबाबाद में भी अपना सराहनीय कार्य करती रही हैं।
नदियापार में भी दोनों महिला अधिकारी कमा चुकी हैं नाम
गाजियाबाद पुलिस से जुड़ी दोनों ही महिला अधिकारी महिला सशक्तिरण से लेकर लॉ एड आॅर्डर वाला डंका पूर्व में ही बजा चुकी हैं। वहीं गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने से पूर्व में अंशु जैन और आलोक दुबे नदियापार इलाके में क्षेत्राधिकारी का कार्यभार संभाल चुकी हैं। अंशु जैन जहां किसान आंदोलन के समय इंदिरापुरम की सीओ रही हैं, तो वहीं आलोक दुबे साहिबाबाद सर्किल में रह चुकी हैं। मुख्यमंत्री के कई वीवीआईपी कार्यक्रम कराने से लेकर किसान आंदोलन और अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालती रही हंै। दोनों महिला पुलिस अधिकारी गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट टीम का प्रमुख हिस्सा भी हैं।
महत्वपूर्ण सर्किल का प्रभार संभाल रहे हैं अभिषेक श्रीवास्तव
2016 बैच के पीपीएस अधिकारी अभिषेक श्रीवास्तव इससे पहले कई महत्वपूर्ण जनपदों में क्षेत्राधिकारी के पद पर कार्यरत रह चुके हैं। गाजियाबाद कमिश्नरेट में पहले वह एसीपी ट्रैफिक के पद पर थे, लेकिन बीते कुछ दिन पहले ही सीपी अजय मिश्रा ने उनको कवि नगर जैसे महत्वपूर्ण सर्किल का जिम्मा सौंपा है। जिम्मा संभालने के बाद उन्होंने बीते दिनों आरडीसी के एक रेस्टोरेंट में कार्रवाई की थी जिसके बाद वह सुर्खियों में बने हुए हैं। साथ ही बेहर जनसुनवाई से लेकर शासन की मंशा के अनुरुप किए जाने वाले अभियानों में वह आगे रहते हैं। अपने सर्किल में पैदल गश्त व चेकिंग के अभियान की बेहतर ढंग से कमान भी संभालते हैं।

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इसे ही कहते हैं मोहब्बत का रूल

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कम समय में सबसे मिलकर चले गए आईएएस महेन्द्र सिंह तंवर, जब था टाइट पूरा शेड्यूल
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। कई अधिकारी जिले में आते हैं और चले जाते हैं लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो दिल में बस जाते हैं। वो जब भी जिले में आते हैं तो फिर सब उनसे मिलने आते हैं और वो सबसे मिलकर जाते हैं। ऐसे अधिकारियों में नगरायुक्त पद पर कार्यरत रह चुके आईएएस महेन्द्र सिंह तंवर भी हैं। ये एक ऐसे अधिकारियों में गिने जाते हैं जो अपने व्यवहार और प्यार से सरकार तो क्या विपक्ष के पार्षदों को भी अपना बना चुके हैं। इन दिनों अपने विजन और व्यवहार का जलवा मुख्यमंत्री की नगरी गोरखपुर में बिखेर रहे हैं। वहां गोरखपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष हैं।
वह जब शुक्रवार को गाजियाबाद आये तो उन्होंने गाजियाबाद आने से पहले गाजियाबाद के सभी साथियों को फोन किये। ये उनका अंदाज है कि उनके आने की खबर से ही सब उत्साहित थे। वो बता चुके थे कि मैं कल गाजियाबाद आ रहा हूं और यहां पर सभी साथियों से वो मिले भी। भाजपा महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा के पिता की शोकसभा में पहुंचे तो पत्रकार दीपक सिरोही के घर पर भी गये और उनकी माता के निधन पर शोक व्यक्त किया। निवर्तमान मेयर आशा शर्मा ने उन्हें देखा तो कहा कि डीएम बनकर गाजियाबाद आओ। पूर्व राज्यमंत्री व शहर विधायक अतुल गर्ग ने उनकी तारीफ की। कनेक्टिविटी के साथ महेन्द्र सिंह तंवर ने एक बार फिर से रिश्तों को लेकर अपना विजन दिखाया और अपनेपन का एक अहसास कराया।

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दो महीने तीन दिन में निर्णायक मोड़ पर पहुंची सुनवाई

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गाजियाबाद (करंट क्राइम)। शनिवार को एक पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। एक दुष्कर्म के आरोपी पर आज फैसला आएगा। साहिबाबाद थानाक्षेत्र में साढे 4 वर्षीय बच्ची का अपहरण कर दुष्कर्म के बाद हत्या की सनसनीखेज वारदात हुई थी। इस मामले में विशेष न्यायाधीश पास्को एक्ट की अदालत ने शुक्रवार को आरोपित को दोषी करार दिया है। सजा पर सुनवाई शनिवार को होगी। अभियोजन की तरफ से कुल 15 लोगों की गवाही हुई है। बच्ची के परिजनों ने दोषी को फांसी की सजा दिए जाने की मांग की है। इस मामले में गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट के पुलिस अधिकारियों ने 15 दिसंबर को आरोप पत्र पेश किए थे। मामले में प्रतिदिन सुनवाई चल रही थी, यही कारण है कि घटना के दो माह तीन दिन में यह मामला निर्णायक मोड़ तक जा पहुंचा है।
1 दिसंबर 2022 को घर से लापता हुई थी बच्ची
विशेष लोक अभियोजन संजीव ने बताया है कि साहिबाबाद थानाक्षेत्र की करहैड़ा कॉलोनी में राजमिस्त्री का परिवार के साथ रहता था। 1 दिसंबर 2022 को करीब 2:30 बजे उनकी साढ़े 4 साल की बेटी घर से बाहर खेलते हुए लापता हो गई थी। दूसरे दिन सिटी फॉरेस्ट के जंगल में उसका शव घर के पास ही मिला था। इसके बाद परिजनों ने शव की शिनाख्त की और पुलिस इस पूरे मामले में जांच में जुट गई थी। इसके बाद पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर अपहरण, हत्या और दुष्कर्म के आरोप में एफआईआर दर्ज करवाई थी।
महिला अधिकारियों की कांप गई थी रूह
साढ़े 4 साल की बच्ची के साथ अपहरण कर दुष्कर्म की सनसनीखेज हत्या ने इस पूरे मामले में तात्कालिक डीसीपी ट्रांस हिंडन दीक्षा शर्मा और एसीपी साहिबाबाद पूनम मिश्रा की रूह का कांप दी थी। पुलिस की महिला अधिकारियों ने शुरू से ही इस मामले में प्रमुखता से साक्ष्य न्यायालय के सामने पेश किए और आरोपी को अधिकतम सजा दिलाने के प्रयास किए हैं, जो शनिवार को सुनवाई के बाद सफल हो सकते हैं।

 

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भगवा गढ़ में बन रही है सरकार वालों के व्यापार की कौन सी लिस्ट!

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गाजियाबाद (करंट क्राइम)। सरकार वाले बाजार में भी हैं और अलग अलग व्यापार में भी हैं। बस कारोबार को लेकर वो रडार पर आ गये हैं। सुना है कि सयंम वाले मामले के बाद भगवा कारोबारियों के व्यापार की लिस्ट मांग ली गई है। इस लिस्ट में प्रापर्टी डीलरों से लेकर रेस्टोरेंट कारोबारी हैं तो सरकारी विभागों के ठेकेदारों से लेकर लाईजनिंग वाले नाम भी आ गये हैं।
बताने वाले बता रहे हैं कि लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी कतई नहीं चाहती कि किसी भी भगवाई के कारोबार को लेकर विपक्ष या मीडिया सरकार के काम काज पर किसी तरह की अंगुली उठा दे। अदंरखाने निर्देश मिले हैं कि धुआं, जुआ, शराब, शबाब से लेकर खराब निर्माण वाला भगवाई मिले तो उसे पार्टी से भगा दें। अब सगंठन में पद देते समय इस बात का शिजरा निकल कर आयेगा। पार्टी कारोबार को लेकर सरकार की फजीहत कराने के मूड में नहीं है। कारोबार वाले सावधान हो जाये क्योंकि लिस्ट का ट्वीस्ट अभी नहीं बल्कि आठ महीने के बाद दिखाई देगा।
कन्फर्म सूत्र बता रहे हैं कि इस लिस्ट का ट्वीस्ट आने वाले समय में दिखाई देगा। क्योंकि बड़ी खबर यह है कि अन्दर खाने कौन सा नेता कौन सा कारोबार कर रहा है यह खबर भी भाजपा वाले ही खुद देकर आएंगे। इस लिस्ट में कई के कारोबार निकलकर सामने आएंगे। फिलहाल लिस्ट को लेकर काम शुरु हो गया है।

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