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बिहार

नीतीश का नरेंद्र मोदी पर तीखा प्रहार

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पटना। मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद पहली बार नीतीश कुमार ने रविवार को गांधी मैदान में जदयू कार्यकर्ताओं को संबोधित किया और उन्हें चुनावी तैयारी में लग जाने को कहा। उन्होंने लोकसभा चुनाव के प्रचार एवं वादे, काला धन, बेरोजगारी, धर्मांतरण, लव-जिहाद, अधिक बच्चे पैदा करने की नसीहत से लेकर 14वें वित्त आयोग, आम बजट एवं जम्मू-कश्मीर में सरकार गठन तक को लेकर भाजपा, खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पर तीखा प्रहार किया। इस सिलसिले में उन्होंने नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह एवं अमित शाह के आडियो टेप भी सुनाए। गांधी मैदान में जुटी भीड़ और नीतीश कुमार के जन्मदिन के कारण यह सम्मेलन पार्टी के लिए अपने आप में विशेष था।

सम्मेलन में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव के अलावा सभी मंत्री, सांसद, विधायक एवं वरिष्ठ नेता मौजूद थे। करीब 65 मिनट के अपने भाषण में नीतीश कुमार ने भाजपा के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को भी निशाने पर लिया। कार्यकर्ताओं से उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए एक बार फिर माफी मांगी और कहा कि आगे ऐसी गलती कभी नहीं करेंगे।

नीतीश कुमार ने कार्यकर्ताओं से कहा कि हर दस घर पर एक सक्रिय कार्यकर्ता का चयन करें। प्रत्येक बूथ पर 15-20 कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जाए। चुनाव नजदीक है। एक दिन भी बर्बाद नहीं करना है। पार्टी का युवा प्रकोष्ठ केंद्र के खिलाफ रोजगार के मोर्चे पर अभियान चलाए तो किसान प्रकोष्ठ किसानों के हित का मुद्दा उठाए। भाजपा की ओर से तरह-तरह के झूठ एवं अफवाह फैलाए जाएंगे। इससे सतर्क रहना है। जान की बाजी लगा दें, लेकिन सामाजिक सद्भाव बिगडऩे न दें।

नीतीश कुमार ने काला धन के मसले पर नरेंद्र मोदी का आडियो-टेप सुनाया, जिसमें लोकसभा चुनाव के समय कहा गया था कि हर व्यक्ति को 15-20 लाख रुपये मिलेंगे। फिर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का वह टेप सुनाया, जिसमें उन्होंने कहा है कि यह जुमला है। भाषण देने का तरीका है। जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने के लिए उन्होंने मुफ्ती मोहम्मद सईद को बधाई दी और एक बार फिर नरेंद्र मोदी का टेप सुनाया, जिसमें उन्होंने चुनाव प्रचार में लोगों को बाप-बेटे (नेशनल कांफ्रेंस) और बाप-बेटी (पीडीपी) की पार्टी से सावधान रहने को कहा था। नीतीश ने कहा कि अब उसी पीडीपी के साथ मिल भाजपा ने सरकार बनाई है।

केंद्र सरकार के बजट को कारपोरेट घराने का बजट बताते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि जिनके अच्छे दिन आने थे, आ गए। देश के 10 बड़े लोगों की संपत्ति में हाल के दिनों में 82460 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है। इनमें से एक के धन में तो 16740 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है। 14वें वित्त आयोग की चर्चा करते हुए कहा कि हम झांसे में आने वाले नहीं हैं। कहा जा रहा है कि आयोग ने जो अनुशंसा की है उससे बिहार को फायदा होगा, मगर हकीकत यह है कि हर साल करीब 15000 करोड़ का घाटा होगा।

सम्मेलन में उन्होंने खुद अपना भी 15 अगस्त, 2012 का आडियो-टेप सुनाया, जिसमें उन्होंने कहा था कि 2015 तक बिजली की स्थिति नहीं सुधारेंगे तो वोट मांगने नहीं आएंगे। उन्होंने भीड़ से पूछा कि बिजली की स्थिति सुधरी है या नहीं, जिसके जवाब में सभी ने हां में हाथ उठाए। उन्होंने राज्यसभा चुनाव और फिर विधानसभा उप चुनाव में राजद, कांग्रेस एवं भाकपा के साथ लडऩे के कारण सफलता पाने की चर्चा कर संकेत दे दिया कि अगला विधानसभा चुनाव भी यह सभी दल साथ मिलकर लड़ेंगे।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन का संचालन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने किया। मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, रमई राम, श्रवण कुमार, श्याम रजक, ललन सिंह, पीके शाही, रामधनी सिंह, जावेद इकबाल अंसारी, मनोज कुशवाहा, सांसद अली अनवर, आरसीपी सिंह, गुलाम रसूल बलियावी, कहकशां परवीन, विधायक राजेश सिंह, डॉ. इजहार अहमद, प्रमोद चंद्रवंशी, पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता संजय सिंह, नीरज कुमार, राजीव रंजन, डॉ. निहोरा प्रसाद यादव, डॉ. अजय आलोक, छपरा जिला युवा जदयू के पूर्व अध्यक्ष गुड्डू सिंह, वरिष्ठ नेता डॉ. रणवीर नंदन, डॉ. नवीन आर्या, छोटू सिंह, नंदकिशोर कुशवाहा, ओमप्रकाश सेतु, चंद्रिका सिंह दांगी आदि भी मौजूद थे।

गांधी मैदान में जदयू कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण पूरा हिंदुस्तान बेचैन है। दिल्ली में लोगों ने अपनी बेचैनी दिखा दी। अब बिहार की बारी है। उन्होंने सभी से कहा कि अगले विधानसभा चुनाव में संपूर्ण देश की ओर से मतदान करें और भाजपा को उखाडऩे की बिहार से पहल कर दें।

शरद यादव ने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान जिस तरह के सपने दिखाए गए थे, उस पर नरेंद्र मोदी सरकार का बजट खामोश है। नदियों को जोडऩे के लिए राशि का प्रावधान नहीं किया गया है। यह नहीं बताया गया कि किसानों की जिंदगी कैसे बदलेगी। जो भूमि अधिग्रहण अध्यादेश है उससे तो अच्छा 120 वर्ष पहले का अंग्रेजों का बनाया कानून है। गंगा को धर्म के नाम पर बांटने की कोशिश की जा रही है। इससे खिलवाड़ मत करो। गंगा जीवन दे सकती है तो मौत भी दे सकती है। पूरा हिंदुस्तान आज टकटकी लगाए बिहार की ओर देख रहा है। बिहार की जनता अगले चुनाव में पूरे देश की ओर से वोट डालेगी।

देश

माली में फंसे झारखंड के 33 मजदूरों की वतन वापसी का रास्ता साफ

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रांची। दक्षिण अफ्रीकी देश माली स्थित भारतीय दूतावास के हस्तक्षेप के बाद वहां फंसे झारखंड के 33 मजदूरों की घर वापसी का रास्ता साफ हो गया है। भारतीय राजदूत अंजनी कुमार ने आईएएनएस को बताया कि सभी मजदूरों की घर वापसी के लिए जल्द ही फ्लाइट टिकट व्यवस्था की जाएगी।

इन मजदूरों को आंध्र प्रदेश की एक ब्रोकर कंपनी के जरिए इलेक्ट्रिक ट्रांसमिशन से जुड़े काम के लिए माली ले जाया गया था। वहां 4 महीने तक काम करने के बाद भी इन्हें वादे के अनुसार वेतन का भुगतान नहीं किया गया। इन मजदूरों के साथ केएसपी नामक एक बिचौलिया भी माली गया था, लेकिन पिछले हफ्ते वह इन्हें छोड़कर भारत लौट आया। इसके बाद वहां रह रहे मजदूरों ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर भारत सरकार और झारखंड सरकार से अपने घर वापसी की गुहार लगाई थी। झारखंड सरकार ने इस पर संज्ञान लेते हुए विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास से हस्तक्षेप की अपील की थी। माली स्थित भारतीय राजदूत अंजनी कुमार ने यह मामला संज्ञान में आते ही इन मजदूरों से काम ले रही कंपनी के अधिकारियों से बातचीत की।
बीते 18 जनवरी को कंपनी के अधिकारियों और मजदूरों के बीच भारतीय दूतावास की अध्यक्षता में माली की राजधानी बमाको में हुई बैठक में सभी के बकाया वेतन के भुगतान पर सहमति बनी। ये मजदूर जब तक वापस नहीं आते हैं, तब तक इनके आवास और भोजन आदि की व्यवस्था कंपनी ही देखेगी। इनकी वापसी की टिकट की व्यवस्था भी कंपनी की ओर से की जाएगी। भारतीय राजदूत अंजनी कुमार ने कहा कि मजदूरों और उनके परिजनों के परिजनों को अब किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। दूतावास इन सभी की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित कराएगा।

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देश

बिहार : स्कूल में चल रही थी ‘शराब पार्टी’, पहुंच गई पुलिस, हेडमास्टर सहित 3 शिक्षक गिरफ्तार

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नवादा। बिहार में जहां शराबबंदी कानून के कार्यान्वयन को लेकर विपक्ष सरकार पर लगातार निशाना साध रही है, वही सराकारी कर्मचारी भी इस कानून की धज्जियां उड़ाने में पीछे नहीं है। ऐसा ही एक मामला नवादा जिले के वारिसलीगंज थाना क्षेत्र के एक स्कूल से सामने आया जहां, शिक्षक शराब की पार्टी कर रहे थे और पुलिस पहुंच गई। पुलिस ने प्रधानाध्यापक (हेडमास्टर) समेत 3 शिक्षकों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के एक अधिकारी ने गुरुवार को बताया कि बुधवार की शाम पुलिस को सूचना मिली कि वारिसलीगंज नगर परिषद क्षेत्र के सामबे गांव स्थित मध्य विद्यालय में कुछ लोग शराब की पार्टी कर रहे हैं।
इसी सूचना के आधार पर पुलिस स्कूल पहुंच गई और मौके से प्रधानाध्यापक सुनील कुमार सहित तीन शिक्षकों को शराब पीते गिरफ्तार किया गया।वारिसलीगंज के थाना प्रभारी पवन कुमार ने बताया कि गिरफ्तार लोगो में सुनील कुमार के अलावा रजनीकांत शर्मा और प्रमोद कुमार सिंह हैं। उन्होंने बताया कि ये दोनो दूसरे स्कूल के शिक्षक हैं।
थाना प्रभारी ने बताया कि घटनास्थल से शराब की एक खाली बोतल भी बरामद की गई है। तीनों शिक्षकों की चिकित्सकीय जांच के बाद शराब पीने की पुष्टि भी हुई है। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है। उल्लेखनीय है कि राज्य में किसी भी प्रकार की शराब बिक्री और सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध है।

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तेजस्वी यादव के तेलंगाना सीएम चंद्रशेखर से मुलाकात ने बढ़ाई कांग्रेस की परेशानी!

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पटना। बिहार में मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख नेताओं में शामिल तेजस्वी यादव के हैदराबाद जाने और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर से मुलाकात के बाद इसके सियासी मायने निकाले जाने लगे हैं। इस मुलाकात के बाद कांग्रेस में हालांकि छटपटाहट है, लेकिन कोई नेता फिलहाल इस मुलाकात को ज्यादा तरजीह देने के मूड में नहीं है।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर ने राजद के प्रमुख लालू प्रसाद के पुत्र तेजस्वी से मुलाकात के पहले वामपंथी दलों के प्रमुख नेताओं से भी मुलाकात कर चुके हैं। अब बिहार में सबसे बड़े दल राजद के बड़े नेता से चंद्रशेखर से मुलाकात को लेकर तीसरे मोर्चे (गठबंधन) की शुरूआत मानी जा रही है।
कहा जा रहा है कि जिस प्रकार पिछले साल हुए बिहार विधानसभा उपचुनाव में दो सीटों पर हुए चुनाव में राजद ने महागठबंधन की सहयोगी पार्टी कांग्रेस को झटका देते हुए दोनो सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार दिए थे, उससे यह तय हो गया था दोनो पार्टियों के रिश्ते में खटास आ गई है। बाद में हालांकि कांग्रेस ने भी अपने प्रत्याशी उतार दिए थे।
माना जा रहा है कि इस मुलाकात का साइड इफेक्ट अभी से बिहार में दिखने भी लगा है। बिहार में स्थानीय निकाय कोटे से विधान परिषद की 24 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजद अपनी ही सहयोगी पार्टी कांग्रेस को कोई तरजीह देने के मूड में नहीं है।
भाजपा के उपाध्यक्ष राजीव रंजन तो कहते है कि विधानसभा उपचुनाव में महज एक सीट के लिए कांग्रेस को पूरे बिहार के सामने अपमानित करने के बाद अब विधान परिषद सीटों को लेकर राजद ने एक बार फिर कांग्रेस को उसकी औकात दिखा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को बिहार में राजद के तले ही कांग्रेस को राजनीति करनी होगी।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा भले ही इसके लिए केंद्रीय नेतृत्व से बातचीत की बात कह रहे हों, लेकिन राजद द्वारा प्रत्याशी तय करने की भी सूचना है।
इधर, उत्तर प्रदेश चुनाव में भी कांग्रेस से क्षेत्रीय पार्टी समाजवादी पार्टी ने दूरी बना ली है, जबकि अन्य भाजपा विरोधी पार्टियों को तरजीह देते दिख रही है।
वैसे, तेजस्वी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री की मुलाकात को शुरूआत बताया जा रहा है, लेकिन इसके मायने बड़े निकाले जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि भाजपा और कांग्रेस से समान दूरी बनाए दलों को एकजुट करने का प्रयास है।
इस बीच, राजद और कांग्रेस के नेता इस मुलाकात को लेकर ज्यादा खुलकर नहीं बोल रहे। दोनो दलों के नेता इसे राजनीतिक लोगो की मुलाकात और शिष्टाचार मुलाकात बता रहे हैं।
बहरहाल, बिहार सहित कई राज्यों में सहयोगी दलों के जरिए अपनी पहचान कायम रखने में कामयाब रही कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी ताकत भाजपा विरोधी दल ही माने जाते थे। ऐसे में अगर कांग्रेस का ऐसे दलों का साथ छूटा तो बड़ी परेशानी से इंकार नहीं किया जा सकता है।

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