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बिहार

नेताओं के ऊटपटांग बयान न सुनें : मोदी

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पटना/मुंगेर| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को बिहार में चार अलग-अलग चुनावी रैलियों को संबोधित करते हुए जहां महागठबंधन को ‘महास्वार्थ बंधन’ बताया, वहीं लोगों से नेताओं के ऊटपटांग बयनाबाजी न सुनने की अपील की। (latest news) इधर, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद ने भी मोदी पर शब्दबाण छोड़े। बिहार के नवादा में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, “मैं देशवासियों से कहना चाहता हूं, राजनीति के कारण छोटे-मोटे नेता अपना राजनीतिक स्वार्थ पूरा करने के लिए ऊटपटांग बयान देने पर तुले हैं। इन नेताओं की बयानबाजी पर ध्यान मत दीजिए। खुद अगर मोदी भी ऊटपटांग बात कहता है तो उसकी बात भी मत सुनिए।”

उन्होंने आगे कहा, “अगर सुनना है तो कल (बुधवार) हमारे देश के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी दादा ने जो भाषण किया है और देश को जो संदेश दिया है उससे बड़ा कोई और संदेश व मार्गदर्शन नहीं हो सकता। हमारे देश के मुखिया राष्ट्रपति ने जो कहा है, उससे बड़ा कोई विचार नहीं हो सकता।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति के बताए रास्ते पर चलने से ही देश अपने मुकाम पर पहुंच सकता है। उन्होंने कहा, “देशवासियों से यही कहूंगा कि राजनीति का स्वार्थ सिद्ध करने का मार्ग ठीक करना होगा। जातिवाद, जहर घोलने की बात हो, गुमराह करने के तरीके हों, इन चीजों ने बिहार का भला नहीं किया है। राज्य का भला सिर्फ विकासराज से होने वाला है।”

मोदी ने मुंगेर, बेगूसराय और समस्तीपुर में अलग-अलग चुनावी सभाओं में राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सत्तारूढ़ महागठबंधन पर तंज कसते हुए कहा कि छोटे भाई और बड़े भाई ने बिहार को 25 वर्षो तक लूटा और अब फिर ‘महास्वार्थ बंधन’ कर लिए हैं। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में ‘जंगलराज’ और ‘विकासराज’ की लड़ाई है।

उन्होंने कहा, “मेरी इच्छा है कि वर्ष 2022 में आजादी के 75 साल पूरे होने तक हर भारतीय के पास अपना खुद का घर हो।”

मोदी ने कहा कि कांग्रेस, राजद और जद (यू) कभी एक-दूसरे को गाली देते थे, लेकिन आज सत्ता के लिए एक हो गए हैं। बिहार को फिर से जंगलराज बनाने का खेल खेला जा रहा है। लोग फिर से अपहरण उद्योग स्थापित करना चाहते हैं। उनको यह जान लेना चाहिए, जनता गलती माफ कर देती है, लेकिन धोखा देने वालों को कभी माफ नहीं करती।

बिहार की अपार जल संपदा और युवाशक्ति की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बिहार के कुछ इलाकों में खूब पानी है, जिसके लिए हिंदुस्तान के कई इलाके तरसते हैं। यहां लबालब जवानी (युवा) भी भरी पड़ी है।

उन्होंने कहा, “बिहार में अगर सिर्फ पानी और जवानी पर ध्यान दे दिया जाए तो राज्य की तस्वीर बदल जाए। बिहार के पानी और जवानी पर भरोसा है, ये केवल बिहार को नहीं, पूरे देश को बदल देंगे, इसका भरोसा है। मगर जरूरी है कि यहां पानी का सही प्रबंधन हो और जवानी को सही अवसर मिले।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि अमीरों को सरकार की जरूरत नहीं पड़ती, मगर गरीबों के कल्याण के लिए सरकार ही होती है।

मोदी ने कहा, “चुनाव तो गरीबों के नाम पर लड़े गए, लेकिन सरकार गरीबों के लिए नहीं चलाई गई। आज तक जितनी भी सरकारें आईं, वे अगर गरीबों के कल्याण को ध्यान में रखकर सरकार चलाई होती तो देश में न गरीबी बढ़ती न अशिक्षा।”

जयप्रकाश नारायण को याद करते हुए उन्होंने कहा कि देश की आजादी के बाद वह सुशासन के लिए लड़ते रहे। ‘संपूर्ण क्रांति’ का नारा देकर देश के नौजवानों में नया जोश भर दिया। आपातकाल के दौरान कांग्रेस ने जयप्रकाश नारायण को जेल में डाल दिया था। आज उसी कांग्रेस के साथ स्वार्थ की राजनीति करने वाले दल गठबंधन कर बिहार की सत्ता पर काबिज होना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, “हमें बिहार के भाग्य को बदलना है और राज्य के नौजवान इस काम को करेंगे।”

गोमांस संबंधी लालू के विवादित बयान पर मोदी ने उन पर जमकर शब्दवाण चलाए। मोदी को लालू पर यदुवंशियों को अपमान का आरोप लगाते हुए कहा, “यदुवंशी क्या खाते हैं, यह सवाल कर बिहार का अपमान किया गया है। जब बात आगे बढ़ी तो कहा गया कि उनके भीतर शैतान प्रवेश कर गया। सवाल यह है कि शैतान को उन्हीं का पता कैसे मिला, किसी और का ठिकाना शैतान को क्यों नहीं मिला।”

प्रधानमंत्री ने सवालिया लहजे में कहा कि जिसका पता शैतान ने ढूंढ़ लिया है, उसको क्या हम कभी देखेंगे? पहली बार पता चला है कि इंसानों के पीछे शैतान पड़ा है।

कांग्रेस पार्टी पर कटाक्ष करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस पीछे के दरवाजे से आने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस में अब ऐसा नेता भी नहीं बचा है, जिसका गुणगान किया जा सके।

मोदी पर पलटवार करते हुए लालू ने कहा कि मोदी ने उनके बहाने तमाम दलितों और पिछड़ों को शैतान कहा। लालू ने ट्विटर पर लिखा, “मोदी अपने मनगढ़ंत शैतान से बिहार को और अपमानित न करें। मैं मोदी व मीडिया के उनके कुछ चाटुकारों को चुनौती देता हूं कि मेरा वो बयान दिखाए।”

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा, “बिहार का वंचित समाज देख रहा है कि बड़बोले प्रधानमंत्री महंगाई, रोजगार और कालेधन पर चुप क्यों हैं? वह आरक्षण पर भागवत के बयान की भर्त्सना करने की हिम्मत दिखाएं।”

लालू ने मोदी पर दलितों का अपमान करने का आरोप लगाते हुए एक अन्य ट्वीट में लिखा, “मोदी ने मेरे बहाने तमाम दलितों व पिछड़ों को शैतान कहा है। दलितों व पिछड़ों की गोलबंदी से हताश आप शैतान के पीछे छुपने की कोशिश कर रहे हैं।”

मोदी को चुनौती देते हुए लालू ने लिखा, “मोदी को चैलेंज करता हूं कि वो मेरा शैतान वाला बयान दिखाएं, वरना सार्वजनिक रूप से सभी बिहारियों को शैतान कहने के लिए तुरंत माफी मांगें।”

उल्लेखनीय है कि बिहार विधानसभा चुनाव में राजद, जद (यू) और कांग्रेस महागठबंधन के तहत चुनाव मैदान में है। इसका मुकाबला भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से है। राज्य में चुनाव 12 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच पांच चरणों में होना है। परिणामों की घोषणा 8 नवंबर को होगी।

देश

माली में फंसे झारखंड के 33 मजदूरों की वतन वापसी का रास्ता साफ

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रांची। दक्षिण अफ्रीकी देश माली स्थित भारतीय दूतावास के हस्तक्षेप के बाद वहां फंसे झारखंड के 33 मजदूरों की घर वापसी का रास्ता साफ हो गया है। भारतीय राजदूत अंजनी कुमार ने आईएएनएस को बताया कि सभी मजदूरों की घर वापसी के लिए जल्द ही फ्लाइट टिकट व्यवस्था की जाएगी।

इन मजदूरों को आंध्र प्रदेश की एक ब्रोकर कंपनी के जरिए इलेक्ट्रिक ट्रांसमिशन से जुड़े काम के लिए माली ले जाया गया था। वहां 4 महीने तक काम करने के बाद भी इन्हें वादे के अनुसार वेतन का भुगतान नहीं किया गया। इन मजदूरों के साथ केएसपी नामक एक बिचौलिया भी माली गया था, लेकिन पिछले हफ्ते वह इन्हें छोड़कर भारत लौट आया। इसके बाद वहां रह रहे मजदूरों ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर भारत सरकार और झारखंड सरकार से अपने घर वापसी की गुहार लगाई थी। झारखंड सरकार ने इस पर संज्ञान लेते हुए विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास से हस्तक्षेप की अपील की थी। माली स्थित भारतीय राजदूत अंजनी कुमार ने यह मामला संज्ञान में आते ही इन मजदूरों से काम ले रही कंपनी के अधिकारियों से बातचीत की।
बीते 18 जनवरी को कंपनी के अधिकारियों और मजदूरों के बीच भारतीय दूतावास की अध्यक्षता में माली की राजधानी बमाको में हुई बैठक में सभी के बकाया वेतन के भुगतान पर सहमति बनी। ये मजदूर जब तक वापस नहीं आते हैं, तब तक इनके आवास और भोजन आदि की व्यवस्था कंपनी ही देखेगी। इनकी वापसी की टिकट की व्यवस्था भी कंपनी की ओर से की जाएगी। भारतीय राजदूत अंजनी कुमार ने कहा कि मजदूरों और उनके परिजनों के परिजनों को अब किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। दूतावास इन सभी की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित कराएगा।

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देश

बिहार : स्कूल में चल रही थी ‘शराब पार्टी’, पहुंच गई पुलिस, हेडमास्टर सहित 3 शिक्षक गिरफ्तार

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नवादा। बिहार में जहां शराबबंदी कानून के कार्यान्वयन को लेकर विपक्ष सरकार पर लगातार निशाना साध रही है, वही सराकारी कर्मचारी भी इस कानून की धज्जियां उड़ाने में पीछे नहीं है। ऐसा ही एक मामला नवादा जिले के वारिसलीगंज थाना क्षेत्र के एक स्कूल से सामने आया जहां, शिक्षक शराब की पार्टी कर रहे थे और पुलिस पहुंच गई। पुलिस ने प्रधानाध्यापक (हेडमास्टर) समेत 3 शिक्षकों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के एक अधिकारी ने गुरुवार को बताया कि बुधवार की शाम पुलिस को सूचना मिली कि वारिसलीगंज नगर परिषद क्षेत्र के सामबे गांव स्थित मध्य विद्यालय में कुछ लोग शराब की पार्टी कर रहे हैं।
इसी सूचना के आधार पर पुलिस स्कूल पहुंच गई और मौके से प्रधानाध्यापक सुनील कुमार सहित तीन शिक्षकों को शराब पीते गिरफ्तार किया गया।वारिसलीगंज के थाना प्रभारी पवन कुमार ने बताया कि गिरफ्तार लोगो में सुनील कुमार के अलावा रजनीकांत शर्मा और प्रमोद कुमार सिंह हैं। उन्होंने बताया कि ये दोनो दूसरे स्कूल के शिक्षक हैं।
थाना प्रभारी ने बताया कि घटनास्थल से शराब की एक खाली बोतल भी बरामद की गई है। तीनों शिक्षकों की चिकित्सकीय जांच के बाद शराब पीने की पुष्टि भी हुई है। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है। उल्लेखनीय है कि राज्य में किसी भी प्रकार की शराब बिक्री और सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध है।

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देश

तेजस्वी यादव के तेलंगाना सीएम चंद्रशेखर से मुलाकात ने बढ़ाई कांग्रेस की परेशानी!

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पटना। बिहार में मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख नेताओं में शामिल तेजस्वी यादव के हैदराबाद जाने और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर से मुलाकात के बाद इसके सियासी मायने निकाले जाने लगे हैं। इस मुलाकात के बाद कांग्रेस में हालांकि छटपटाहट है, लेकिन कोई नेता फिलहाल इस मुलाकात को ज्यादा तरजीह देने के मूड में नहीं है।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर ने राजद के प्रमुख लालू प्रसाद के पुत्र तेजस्वी से मुलाकात के पहले वामपंथी दलों के प्रमुख नेताओं से भी मुलाकात कर चुके हैं। अब बिहार में सबसे बड़े दल राजद के बड़े नेता से चंद्रशेखर से मुलाकात को लेकर तीसरे मोर्चे (गठबंधन) की शुरूआत मानी जा रही है।
कहा जा रहा है कि जिस प्रकार पिछले साल हुए बिहार विधानसभा उपचुनाव में दो सीटों पर हुए चुनाव में राजद ने महागठबंधन की सहयोगी पार्टी कांग्रेस को झटका देते हुए दोनो सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार दिए थे, उससे यह तय हो गया था दोनो पार्टियों के रिश्ते में खटास आ गई है। बाद में हालांकि कांग्रेस ने भी अपने प्रत्याशी उतार दिए थे।
माना जा रहा है कि इस मुलाकात का साइड इफेक्ट अभी से बिहार में दिखने भी लगा है। बिहार में स्थानीय निकाय कोटे से विधान परिषद की 24 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजद अपनी ही सहयोगी पार्टी कांग्रेस को कोई तरजीह देने के मूड में नहीं है।
भाजपा के उपाध्यक्ष राजीव रंजन तो कहते है कि विधानसभा उपचुनाव में महज एक सीट के लिए कांग्रेस को पूरे बिहार के सामने अपमानित करने के बाद अब विधान परिषद सीटों को लेकर राजद ने एक बार फिर कांग्रेस को उसकी औकात दिखा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को बिहार में राजद के तले ही कांग्रेस को राजनीति करनी होगी।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा भले ही इसके लिए केंद्रीय नेतृत्व से बातचीत की बात कह रहे हों, लेकिन राजद द्वारा प्रत्याशी तय करने की भी सूचना है।
इधर, उत्तर प्रदेश चुनाव में भी कांग्रेस से क्षेत्रीय पार्टी समाजवादी पार्टी ने दूरी बना ली है, जबकि अन्य भाजपा विरोधी पार्टियों को तरजीह देते दिख रही है।
वैसे, तेजस्वी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री की मुलाकात को शुरूआत बताया जा रहा है, लेकिन इसके मायने बड़े निकाले जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि भाजपा और कांग्रेस से समान दूरी बनाए दलों को एकजुट करने का प्रयास है।
इस बीच, राजद और कांग्रेस के नेता इस मुलाकात को लेकर ज्यादा खुलकर नहीं बोल रहे। दोनो दलों के नेता इसे राजनीतिक लोगो की मुलाकात और शिष्टाचार मुलाकात बता रहे हैं।
बहरहाल, बिहार सहित कई राज्यों में सहयोगी दलों के जरिए अपनी पहचान कायम रखने में कामयाब रही कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी ताकत भाजपा विरोधी दल ही माने जाते थे। ऐसे में अगर कांग्रेस का ऐसे दलों का साथ छूटा तो बड़ी परेशानी से इंकार नहीं किया जा सकता है।

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