Connect with us

हिमाचल प्रदेश

हिमाचली राजमा, खुबानी की विदेशों में धूम

Published

on

रामपुर| हिमाचल प्रदेश की सर्द आबोहवा में उपजाए जाने वाले जैविक राजमा और खुबानी के स्वाद का जादू अब विदेशियों के भी सिर चढ़कर बोलने लगा है। (himachal pradesh hindi news, ) यूरोप और लैटिन अमेरिका के बाजारों में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है।

हिमालयन ऑर्गेनिक एग्री-प्रॉडक्ट रिसर्च ऐंड डेवेलपमेंट नामक संस्था के अध्यक्ष आर.एस. मिन्हास ने  बताया कि इस वर्ष लैटिन अमेरिका से राजमा की अच्छी मांग है।

उन्होंने कहा कि इस सीजन हमें 22 टन राजमा का ऑर्डर मिला है। चूंकि केंद्र सरकार ने दालों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा रखा है, इसलिए हम इसका निर्यात करने को लेकर असमंजस में हैं।

उन्होंने बताया कि संस्था ने पिछले साल आठ टन और वर्ष 2013 में 11 टन राजमा का निर्यात किया था। इसी तरह 375 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से सात टन खुबानी के निर्यात का भी ऑर्डर मिला है।

मिन्हास ने बताया कि प्रदेश में प्रति वर्ष 13 टन खुबानी की पैदावार होती है। हर साल औसतन सात से आठ टन खुबानी का निर्यात मुख्य रूप से स्पेन व ऑस्ट्रिया को किया जाता है; इस बार हमें सात टन के निर्यात का ऑर्डर मिला है।

गौरतलब है कि प्रदेश के 15,000 से भी अधिक किसान सम्मिलित रूप से संस्था के तहत फल, सब्जी, अखरोट, मसाले, अनाज और दाल का घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में विपणन कर रहे हैं। इस संस्था की स्थापना वर्ष 2001 में हुई थी।

संस्था ने अब अखरोट के तेल के कारोबार में भी पदार्पण किया है, जो सिर्फ स्पेन और ऑस्ट्रिया में ही मिलता है।

मिन्हास ने बताया, “हमने प्रयोग के तौर पर पहली बार अतिरिक्त फसल से थोड़ी मात्रा में अखरोट का तेल निकाला है। यह भोजन पकाने और देह मालिश के लिए बेहद अच्छा है इसकी कीमत 1600 रुपये प्रति लीटर है। ‘आई से ऑर्गेनिक’ नामक दिल्ली स्थित ऑनलाइन ग्रोसरी स्टोर ने 250 लीटर अखरोट के तेल की पूरी खेप ही खरीद ली है।”

मिन्हास ने कहा, “अगर इसका रिस्पॉन्स अच्छा रहता है तो अगले वर्ष से हम प्रचूर मात्रा में अखरोट तेल का उत्पादन करेंगे।”

उन्होंने बताया कि संस्था 40:60 के अनुपात में खुबानी तेल के सम्मिश्रण से अखरोट के तेल का उत्पादन करने की योजना बना रही है।

प्रदेश के कृषि निदेशक जे.सी. राणा ने कहा कि राज्य में वर्ष 2002 में जैविक खेती शुरू हुई, उस वक्त लगभग 2500 हेक्टेयर भूमि पर 4000 से अधिक किसान जैविक खेती के काम में जुटे थे।

राणा ने कहा, “आज हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि फिलहाल 18,000 हेक्टेयर जमीन पर जैविक खेती हो रही है और इस काम में 30,000 किसान शामिल हैं।”

राज्य में जैव कृषि के बाबत किसानों के मार्गदर्शन के लिए पांच अधिकृत एजेंसियां कार्यरत हैं। जैविक खेती अपनाने वाले अधिकांश किसान ऊपरी शिमला जिले के रामपुर इलाके के हैं। यहां जैविक खेती परियोजना की शुरुआत वर्ष 2005 में हुई थी।

शिमला से लगभग 120 किमी दूर रामपुर के समीप सूरज ठाकुर नामक एक दलहन किसान ने बताया कि राजमा की ज्वाला व चित्रा किस्मों की घरेलू व विदेशी बाजारों में अच्छी कीमत मिलती है।

उन्होंने बताया कि निर्यात से औसतन हमें प्रति किलोग्राम 130-140 रुपये मिल रहे हैं। राजमा की जैविक किस्म की घरेलू बाजार में भी 10 से 20 प्रतिशत अधिक कीमत मिल रही है।

राज्य में राजमा की कटाई सितंबर के आखिर में शुरू होती है, जो दिसंबर तक चलती है।

जीवन सिंह नामक एक अन्य किसान ने कहा कि जैविक पद्धति अपनाकर किसान न सिर्फ कृषि लागत 70 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरक क्षमता भी बढ़ा सकते हैं। इस पहाड़ी राज्य में कृषि लोगों की आजीविका का प्रमुख आधार है। इससे 71 प्रतिशत लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है।

उल्लेखनीय है कि चंबा जिले के पंगी और शिमला जिले के डोडरा क्वार इलाकों में किसान फसलों के लिए कभी कीटनाशक और खाद का इस्तेमाल नहीं करते।

राज्य सरकार मुख्य रूप से जैविक खेती पर जोर दे रही है। जैविक पद्धति अपनाकर कृषि आय बढ़ाने, फसलों की विविधता पर जोर देने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन करने के उद्देश्य से जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी-जेआईसीए के सहयोग से 321 करोड़ रुपये की परियोजना पर फिलहाल काम चल रहा है।

राज्य सरकार के अनुसार, इस वित वर्ष के दौरान 2000 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को जैविक खेती के तहत लाया जाएगा और 200 गांवों को पूरी तरह से जैविक गांव में परिवर्तित किया जाएगा।

देश

नवरात्रि शुरू होते ही हिमाचल के मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु

Published

on

शिमला । हिंदुओं द्वारा शुभ अवधि माने जाने वाले नौ दिवसीय नवरात्रि की शुारुआत पर गुरुवार को सैकड़ों भक्त हिमाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में एकत्र हुए और पूजा-अर्चना की। लेकिन मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कोविड-19 का टीकाकरण जरूरी है। उत्तर भारत के सबसे व्यस्त मंदिरों में से एक, बिलासपुर जिले में पहाड़ी की चोटी पर स्थित नैना देवी मंदिर में पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली के अधिकांश तीर्थयात्री आए।

ऊना जिले के चिंतपूर्णी के लोकप्रिय मंदिरों और कांगड़ा जिले के ज्वालाजी और ब्रजेश्वरी देवी मंदिरों में भारी भीड़ देखी गई।
नैना देवी मंदिर के एक अधिकारी ने आईएएनएस को फोन पर बताया, “हम नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन 25,000 से 30,000 भक्तों के आने की उम्मीद कर रहे हैं।”
अधिकारियों ने कहा कि केवल उन भक्तों को, जिनके पास अंतिम टीकाकरण प्रमाण पत्र या आरटी-पीसीआर नकारात्मक रिपोर्ट है, जो 72 घंटे से अधिक पुराने नहीं हैं, उन्हें राज्य भर के मंदिरों में प्रवेश करने की अनुमति दी जाएगी। भक्त ब्रजेश्वरी देवी, नैना देवी, चिंतपूर्णी और ज्वालाजी मंदिरों के ऑनलाइन लाइव “दर्शन” कर सकेंगे। वे मंदिरों के लिए ऑनलाइन पेशकश करने में भी सक्षम होंगे।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि सभी प्रमुख मंदिरों में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और क्लोज सर्किट टेलीविजन (सीसीटीवी) कैमरे लगाए गए हैं। महोत्सव का समापन 15 अक्टूबर को होगा।

Continue Reading

देश

तिब्बती स्कूलों को एनजीओ को न सौंपें – हिमाचल मंत्री

Published

on

शिमला । हिमाचल प्रदेश के शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर केंद्रीय तिब्बती स्कूलों को किसी एनजीओ को नहीं सौंपने और उन्हें केंद्रीय विद्यालय संगठन के दायरे में लाने का आग्रह किया है। पत्र में, भारद्वाज ने भारतीय छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने को ध्यान में रखते हुए इन स्कूलों को केंद्रीय विद्यालय के रूप में बदलने की सिफारिश की।

उन्होंने कहा कि 2013 में सभी केंद्रीय तिब्बती स्कूलों को निजी एनजीओ- धर्मशाला स्थित संभोता तिब्बती स्कूल सोसायटी को सौंपने का निर्णय लिया गया था।
उन्होंने कहा कि इन स्कूलों में पढ़ने वाले तिब्बती छात्रों की संख्या भारतीय छात्रों की तुलना में नगण्य है।
भारद्वाज ने कहा, “इसके अलावा, तिब्बती उन क्षेत्रों में अपने स्वयं के प्रशासित स्कूल चला रहे हैं जहां वे अपने छात्रों को समायोजित कर सकते हैं, अगर इन स्कूलों को तिब्बती एनजीओ को सौंप दिया जाता है तो भारतीय छात्रों के पास स्कूलों को छोड़ने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचेगा।”

Continue Reading

देश

भाजपा प्रभारी अविनाश राय खन्ना 2 सितंबर को धर्मशाला दौरे पर

Published

on

धर्मशाला । भाजपा प्रभारी अविनाश राय खन्ना 02 सितंबर को कांगड़ा प्रवास पर रहने वाले है।

भाजपा प्रभारी अविनाश राय खन्ना कल प्रातः 11 बजे धर्मशाला मंडल के त्रिदेव प्रशिक्षण वर्ग के उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे । उसके उपरांत भाजपा प्रभारी धर्मशाला में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करने जा रहे है।
शाम को अविनाश राय खन्ना एक बूथ स्तर की बैठक में भाग लेंगे जिसके बाद वो धर्मशाला के विधायक, नगर निगम के मेयर , डिप्टी मेयर और पार्षदों के साथ बैठक करने जा रहे है। यह सभी बैठकें पार्टी के दृष्टि से महत्वपूर्ण रहने वाली है, धीरे धीरे भाजपा 2022 का रोड मैप तैयार कर रही है।
3 सितंबर को भाजपा प्रभारी केंद्रीय विश्वविद्यालय में एक सत्र को संबोधित करेंगे।
भाजपा प्रभारी अविनाश राय खन्ना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का धन्यवाद करते हुए कहा कि हमारा समस्त नेतृत्व टोक्यो पैरालंपिक -2020 में गए पैरा एथलीटस का मनोबल लगातार बढ़ा रहे है ।
उन्होंने कहा कि मैं उन सभी प्रदेशों का भी धन्यवाद करना चाहता हूं जिन्होंने सभी जीत हासिल करने वाले पैरा एथलीट को पुरुस्कारो से नवाज़ा है। उन्होंने कहा कि अभी तक टोक्यो पैरालंपिक -2020 में भारत ने कुल 10 पदक जीते है जिसमे से 2 गोल्ड, 5 सिल्वर और 3 ब्रोंज है।

Continue Reading

Trending

%d bloggers like this: