Connect with us

मध्यप्रदेश

बुंदेली महिलाओं ने बुझाई धरती की प्यास

Published

on

भोपाल| बुंदेलखंड का जिक्र आते ही सूखा, गरीबी, भुखमरी और पलायन की तस्वीर आखों के सामने घूमने लगती है, क्योंकि इस इलाके की हकीकत यही है, मगर इसी इलाके में एक गांव है झिरिया झोर, जहां अब न तो पलायन जैसा नजारा है और न ही पानी का संकट, क्योंकि यहां की महिलाओं के जुनून ने धरती को पानी से भर दिया है। (madhya pradesh hindi news) मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड के छतरपुर जिले में आता है झिरिया झोर। यह गांव टीकमगढ़-सागर और छतरपुर-सागर मार्ग को जोड़ने वाले मार्ग से करीब सात किलोमीटर अंदर की ओर बसा है। अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग बहुल, गांव तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क बनी हुई है।

इस गांव की कहानी भी बुंदेलखंड के अन्य गांव की तरह ही हुआ करती थी, खेती के लिए पानी का इंतजाम मुश्किल होता था, गर्मी आते तक पीने के पानी का संकट गहराने लगता था, मगर आज हालात बदल गए हैं, धान जैसी ज्यादा पानी चाहने फसल की भी पैदावार होने लगी है और मई माह में हैंडपंप से पानी मिल रहा है। यह संभव हुआ है, महिलाओं के जल संरक्षण प्रबंधन के प्रयासों से।

झिरिया झोर छोटा गांव है, यहां करीब 50 परिवार निवास करते हैं। इन परिवारों की महिलाओं में पानी की समस्या से लड़ने का गजब का जुनून है। गांव की महिलाओं ने वर्ष 2011 में पानी पंचायत समिति बनाई। समिति की अध्यक्ष पुनिया बाई है और सचिव सीमा विश्वकर्मा। समिति की सदस्य महिलाएं पानी बचाने के साथ बारिश के पानी को रोकने में भी सफल हो रही हैं।

पुनिया बाई ने आईएरनएस को बताया कि खेती के लिए पानी जुटाना मुश्किल होता था, साथ ही गर्मी आते ही उन्हें पीने के पानी की समस्या परेशान कर जाती थी, मगर उन्होंने परमार्थ समाज सेवा समिति के परामर्श से मेढ़ बंधान किया तो बारिश का पानी खेतों के बाहर बहने से बच गया। इसका नतीजा हुआ कि उन्होंने खेत में भरे पानी में धान उगा ली, कभी यहां गेहूं की खेती भी मुश्किल थी।

पुनिया बाई बताती हैं कि यहां की जमीन कंक्रीट वाली और ढालदार है, जिसके चलते पानी रुकता नहीं था और यही कारण था कि खेती करना और गर्मी के समय पीने के पानी की उपलब्धता एक बड़ी समस्या थी। बरसात में पानी रोका गया तो जमीन की प्यास बुझ गई और आज जमीन भले सूखी नजर आ रही हो, मगर जलस्रोत में भरपूर पानी है।

गांव के किसान कमला वंशकार का कहना है कि 15 वर्ष पूर्व उनके लिए अपने खेतों में खेती आसान नहीं थी, क्योंकि सिंचाई के लिए पानी नहीं होता था। जो भी पैदावार हो जाती थी, वह भगवान भरोसे होती थी, मगर अब ऐसा नहीं है।

इसी गांव के वारेलाल का कहना है कि उनके पास जमीन तो थी मगर वे उसका उपयोग खेती के लिए नहीं करते थे, क्योंकि उन्हें पैदावार की उम्मीद नहीं होती थी। गांव की पुनिया बाई के कहना पर खेत में मेढ़ बंधान किया गया, तो बरसात में यहां पानी भर गया और बीज डाला तो फसल हो गई।

जल पंचायत समिति की सचिव सीमा विश्वकर्मा सबसे ज्यादा पढ़ी-लिखी महिला है। वे बताती हैं कि इस गांव में ब्याह कर आई, उन्होंने देखा की यहा पानी की बड़ी समस्या है। महिलाओं के लिए इस समस्या से सबसे ज्यादा जूझना पड़ता है। पानी की समस्या ने महिलाओं को एक साथ ला दिया और महिलाओं ने हाथ से हाथ मिलाया तो आज हालात बदल गए हैं।

सीमा बताती हैं कि गर्मी में मई का महिना चल रहा है, हैंडपंप अब भी पानी दे रहे हैं और उम्मीद है कि गर्मी बगैर समस्या के निकल जाएगी। यह बरसात में खेतों में रोके गए पानी के चलते हुआ है। एक तरफ मैदान नजर आने वाले खेतों में अब फसल पैदा होने लगी है तो दूसरी ओर गर्मी में पानी मिल रहा है।

झिरिया झोर की महिलाओं की एक जुटता ने सफलता की नई इबारत लिख दी है। उन्होंने सूखे और रेतीली जमीन को भी पानीदार बना दिया है। महिलाओं की यह मुहिम उस सरकारी अमले को आईना दिखाने वाली है जो चेकडैम, स्टॉपडैम और नहर बनाने की योजनाओं के नाम पर लाखों फूंक देते है, फिर भी गांव के लोगों को पानी की समस्या से मुक्ति नहीं मिल पाती।

देश

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने संघ की तुलना ‘दीमक’ से की

Published

on

इंदौर । मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना दीमक से की है। इंदौर में युवक कांग्रेस के कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने आरएसएस पर हमला करते हुए कहा, “आप ऐसे संगठन से लड़ रहे हैं, जो ऊपर से नहीं दिखता। जैसे घर में दीमक लगती है, यह उसी तरह से काम करता है।”

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा, “मैं समझता हूं कि जब यह कहूंगा, तो सबसे ज्यादा गालियां खाऊंगा, क्योंकि मैंने आरएसएस की तुलना दीमक से की है।”
उन्होंने कहा कि संघ रजिस्टर्ड संस्था नहीं है। इसकी सदस्यता नहीं है, कोई अकाउंट नहीं है। संघ का कोई कार्यकर्ता जब आपराधिक कृत्य में पकड़ा जाता है, तो वे कहते हैं कि हमारा सदस्य ही नहीं है। यह ऐसा संगठन है, जो गुपचुप और छुपकर काम करता है। ये लोग केवल कानाफूसी करते हैं और गलत भावना फैलाते हैं। कभी आंदोलन नहीं करते और न ही किसी की समस्या के लिए लड़ते हैं।
उन्होंने सीधे तौर पर संघ पर हमला करते हुए कहा, “आरएसएस की विचारधारा नफरत की है। हिंदुओं को खतरा दिखाकर डर पैदा करो और डर पैदा करके बताओ कि हम ही तुम्हारी रक्षा कर सकते हैं, बाकी कोई नहीं कर सकता। आज जब राष्ट्रपति से लेकर नीचे तक के पदों पर हिंदू हैं, तो फिर खतरा किससे है?”

Continue Reading

देश

मानहानि मामले में मध्य प्रदेश की अदालत ने सीएम सहित दो अन्य को जारी किया नोटिस

Published

on

भोपाल। मध्य प्रदेश की एक जिला अदालत ने हाल ही में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा द्वारा दायर मानहानि मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने चौहान के अलावा शहरी विकास मंत्री भूपेंद्र सिंह और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वी.डी. शर्मा को भी उसी मामले में नोटिस जारी किया है, जिसमें कांग्रेस नेता ने ओबीसी आरक्षण के संबंध में ‘गलत तथ्यों का प्रचार’ करके उन्हें बदनाम करने का आरोप लगाया है।

कांग्रेस सांसद ने सर्वोच्च न्यायालय में ओबीसी आरक्षण मामले के बारे में कुछ टिप्पणियों को लेकर चौहान और दो अन्य के खिलाफ जबलपुर जिला अदालत में मामला दायर किया था। तन्खा ने कहा कि अदालत ने उनसे जवाब मांगा है और अगली सुनवाई की तारीख 25 फरवरी तय की है।
तन्खा ने कहा कि “मुझे अपने वकील (वाजिद हेडर) से जानकारी मिली है कि 10 करोड़ के मूल्य के नुकसान के हमारे दावे में, जबलपुर कोर्ट ने मुख्यमंत्री और अन्य प्रतिवादी पक्षों को अपना जवाब प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किया है। अदालत मामले पर 25 फरवरी को सुनवाई करेगी। तब से, सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) को स्थानीय निकाय में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित सीटों पर मतदान प्रक्रिया पर रोक लगाने और सामान्य वर्ग के लिए उन सीटों को फिर से अधिसूचित करने का निर्देश दिया। सरकार ने पंचायत चुनाव रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में तन्खा पर ओबीसी आरक्षण कोटा का विरोध करने का आरोप लगाया है।
यह तब शुरू हुआ, जब तन्खा स्थानीय कांग्रेस नेताओं द्वारा दायर एक याचिका के वकील के रूप में पेश हुए, जिसमें 2014 के रोटेशन और आरक्षण के आधार पर राज्य में पंचायत चुनाव कराने के लिए भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के अध्यादेश को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने राज्य में समुदाय (ओबीसी) को आरक्षण प्रदान करने में बाधा उत्पन्न करने के लिए एक-दूसरे पर आरोप लगाए। राज्य विधानसभा के हाल ही में संपन्न शीतकालीन सत्र के दौरान ओबीसी मुद्दे पर घंटों बहस हुई थी।

Continue Reading

देश

सावित्रीबाई फुले को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने याद किया

Published

on

भोपाल। छुआछूत मिटाने, विधवा विवाह कराने और महिलाओं को शिक्षित करने का अभियान चलाने वाली सावित्रीबाई फुले कि आज सोमवार को जयंती है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनके छायाचित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया।

मुख्यमंत्री चौहान ने महान समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले की जयंती पर उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री चौहान ने निवास कार्यालय स्थित सभागार में उनके चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की।
सावित्री बाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को हुआ था। सावित्रीबाई फुले भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्रिंसिपल और पहले किसान स्कूल की संस्थापक थी। सावित्रीबाई ने अपने जीवन को एक मिशन की तरह से जिया, जिसका उद्देश्य था विधवा विवाह कराना, छुआछूत मिटाना, महिलाओं की मुक्ति और दलित महिलाओं को शिक्षित बनाना। सावित्रीबाई फुले ने 3 जनवरी 1848 में पुणे में अपने पति के साथ मिलकर विभिन्न जातियों की 9 छात्राओं के साथ महिलाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना की । लड़कियों की शिक्षा पर उस समय सामाजिक पाबंदी थी।
सावित्रीबाई फुले उस दौर में न सिर्फ स्वयं पढ़ी अपितु दूसरी लड़कियों के पढ़ने का भी बंदोबस्त किया। दस मार्च 1897 को प्लेग के कारण सावित्रीबाई फुले का निधन हो गया।

Continue Reading

Trending

%d bloggers like this: