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मध्यप्रदेश

जिंदगी बचाने में मददगार हो सकता है ‘सेवा एप’

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भोपाल| किसी हादसे का शिकार बने व्यक्ति या गंभीर मरीज के लिए समय पर चिकित्सा मिलना अब भी किसी चुनौती से कम नहीं है, क्योंकि मरीज को अस्पताल पहुंचने के बाद कई तरह की जटिल प्रक्रियाओं से होकर गुजरना होता है और कई बार तो उपचार की दरकार में उसकी मौत तक हो जाती है, मगर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के इंजीनियरिंग के चार छात्रों ने ‘सेवा एप’ तैयार किया है जो जीवन बचाने में मददगार साबित हो सकता है। देश में न तो सरकारी और न ही निजी चिकित्सालयों की कमी है, मगर कभी कोई कमी सामने आती है तो वह है पीड़ित को समय पर चिकित्सा सुविधा का हासिल न होना है। इसकी बड़ी वजह कहीं न कहीं व्यवस्थाओं की कमी है।

अस्पताल में इलाज कराने के लिए कतार में लगकर अपनी बारी का इंतजार करना आम बात है, इससे बचने की कोई व्यवस्था या सिस्टम नहीं है, यही बात भोपाल के निजी इंजीनियरिंग कॉलेज आईईएस ग्रुप के छात्रों को खटकी, इसीलिए उन्होंने एक ऐसा एप तैयार किया है जो अस्पतालों की व्यवस्था में सुधार लाने और मरीजों को त्वरित चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने मे सहायक हो सकता है।

‘सेवा एप’ बनाने वाले चार इंजीनियरिंग के छात्रों के समूह के अभिषेक कुमार ने बताया है कि इस एप को एंडाइड फोन अथवा कंप्यूटर पर डाउन लोड करना होगा, उसके बाद संबधित के फोन पर तीन विकल्प आएंगे, अस्पताल, आपातकाल व सूचना। इसमें से पीड़ित को अपनी जरूरत के अनुसार चयन करना होगा। अगर वह अस्पताल की जानकारी चाहता है तो उसके सामने जिले के सरकारी व निजी अस्पतालों की सूची होगी, उसमें अस्पताल के विभागों और चिकित्सकों का ब्यौरा होगा।

एप के जरिए चिकित्सक को दिखाने का समय तय करना आसान होगा, वही निर्धारित फीस ऑनलाइन जमा कर सकेगा।

अमित कुमार ने एप के काम करने के तरीके का ब्यौरा देते हुए बताया कि यह तीन जगह से जुड़ा होगा, दोनों उपयोगकर्ता अर्थात पीड़ित व चिकित्सक और एप का नियंत्रण कक्ष। इस तरह पीड़ित की मांग को नियंत्रण कर्ता पूरी करते हुए संबंधित अस्पताल या चिकित्सक तक संदेश दे देगा।

एप को लेकर चल रही तैयारी के संदर्भ में आकाश ने बताया है कि इसे पहले भोपाल स्तर पर शुरू किया जाएगा। इसमें जिले के सभी अस्पतालों के ब्यौरे के साथ उपलब्ध सुविधाएं और चिकित्सकों के नाम व फोन नंबर भी होंगे। इस एप का उपयोग करने पर एक तरफ जहां सामान्य मरीजों की कतार में लगने की समस्या से बचत होगी, वहीं समय पर इलाज मिल सकेगा।

समूह के सदस्य अमित कुमार सिंह ने बताया है कि इस एप का सबसे ज्यादा लाभ आपातकालीन (इमरजेंसी) सेवा चाहने वालों को होगा। इस श्रेणी के मरीजों के लिए दो विकल्प होंगे, गंभीर मरीज (हृदयरोगी) और हादसों में गंभीर रूप से घायल। इस स्थिति में सबसे पहले सूचना एप के जरिए नजदीक उपलब्ध एम्बुलेंस और अस्पताल को दी जाएगी। लिहाजा मरीज को एक तरफ जल्दी एम्बुलेंस मिल सकेगी तो अस्पताल पहुंचने से पहले वहां चिकित्सकीय तैयारी पूरी हो चुकी होगी।

आईईएस ग्रुप के निदेशक बादाम सिंह ने बताया कि याहू के सहयोग से एसेंचर द्वारा हर वर्ष नवाचार (एनोवेशन) करने वालों से देश भर से प्रविष्टियां बुलाई जाती है। इस वर्ष देश भर से 2500 प्रविष्टियां आई थी, जिनमें 15 का चयन हुआ है, इसमें मध्य प्रदेश का भी एक नवाचार चयनित हुआ है जो आईईएस के छात्रों ने किया है। आने वाले दिनों में 15 में से चार नवाचार को अंतिम रूप से चयनित किया जाएगा।

छात्रों का कहना है कि देश के कुछ प्रमुख अस्पताल अपोलो, कोकिला बेन, एम्स आदि ने मरीजों को सुविधा देने के लिए वेबसाइट शुरू की है, मगर यह वेबसाइट उस तरह से मदद नहीं कर पा रही है जो मरीज की जरूरत है। वहीं यह एप छोटे स्तर पर ज्यादा मददगार साबित हो सकता है।

सेवा एप तैयार करने वाले छात्रों का कहना है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल इंडिया की मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने यह प्रयास किया है। वे चाहते हैं कि चिकित्सा सुविधा का डिजिटलाइजेश हो और मरीज को त्वरित चिकित्सा सुविधा मिले, ताकि उनकी जान बचाई जा सके। इसी के मद्देनजर उन्होंने सेवा एप बनाया है।

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कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने संघ की तुलना ‘दीमक’ से की

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इंदौर । मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना दीमक से की है। इंदौर में युवक कांग्रेस के कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने आरएसएस पर हमला करते हुए कहा, “आप ऐसे संगठन से लड़ रहे हैं, जो ऊपर से नहीं दिखता। जैसे घर में दीमक लगती है, यह उसी तरह से काम करता है।”

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा, “मैं समझता हूं कि जब यह कहूंगा, तो सबसे ज्यादा गालियां खाऊंगा, क्योंकि मैंने आरएसएस की तुलना दीमक से की है।”
उन्होंने कहा कि संघ रजिस्टर्ड संस्था नहीं है। इसकी सदस्यता नहीं है, कोई अकाउंट नहीं है। संघ का कोई कार्यकर्ता जब आपराधिक कृत्य में पकड़ा जाता है, तो वे कहते हैं कि हमारा सदस्य ही नहीं है। यह ऐसा संगठन है, जो गुपचुप और छुपकर काम करता है। ये लोग केवल कानाफूसी करते हैं और गलत भावना फैलाते हैं। कभी आंदोलन नहीं करते और न ही किसी की समस्या के लिए लड़ते हैं।
उन्होंने सीधे तौर पर संघ पर हमला करते हुए कहा, “आरएसएस की विचारधारा नफरत की है। हिंदुओं को खतरा दिखाकर डर पैदा करो और डर पैदा करके बताओ कि हम ही तुम्हारी रक्षा कर सकते हैं, बाकी कोई नहीं कर सकता। आज जब राष्ट्रपति से लेकर नीचे तक के पदों पर हिंदू हैं, तो फिर खतरा किससे है?”

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देश

मानहानि मामले में मध्य प्रदेश की अदालत ने सीएम सहित दो अन्य को जारी किया नोटिस

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भोपाल। मध्य प्रदेश की एक जिला अदालत ने हाल ही में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा द्वारा दायर मानहानि मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने चौहान के अलावा शहरी विकास मंत्री भूपेंद्र सिंह और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वी.डी. शर्मा को भी उसी मामले में नोटिस जारी किया है, जिसमें कांग्रेस नेता ने ओबीसी आरक्षण के संबंध में ‘गलत तथ्यों का प्रचार’ करके उन्हें बदनाम करने का आरोप लगाया है।

कांग्रेस सांसद ने सर्वोच्च न्यायालय में ओबीसी आरक्षण मामले के बारे में कुछ टिप्पणियों को लेकर चौहान और दो अन्य के खिलाफ जबलपुर जिला अदालत में मामला दायर किया था। तन्खा ने कहा कि अदालत ने उनसे जवाब मांगा है और अगली सुनवाई की तारीख 25 फरवरी तय की है।
तन्खा ने कहा कि “मुझे अपने वकील (वाजिद हेडर) से जानकारी मिली है कि 10 करोड़ के मूल्य के नुकसान के हमारे दावे में, जबलपुर कोर्ट ने मुख्यमंत्री और अन्य प्रतिवादी पक्षों को अपना जवाब प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किया है। अदालत मामले पर 25 फरवरी को सुनवाई करेगी। तब से, सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) को स्थानीय निकाय में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित सीटों पर मतदान प्रक्रिया पर रोक लगाने और सामान्य वर्ग के लिए उन सीटों को फिर से अधिसूचित करने का निर्देश दिया। सरकार ने पंचायत चुनाव रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में तन्खा पर ओबीसी आरक्षण कोटा का विरोध करने का आरोप लगाया है।
यह तब शुरू हुआ, जब तन्खा स्थानीय कांग्रेस नेताओं द्वारा दायर एक याचिका के वकील के रूप में पेश हुए, जिसमें 2014 के रोटेशन और आरक्षण के आधार पर राज्य में पंचायत चुनाव कराने के लिए भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के अध्यादेश को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने राज्य में समुदाय (ओबीसी) को आरक्षण प्रदान करने में बाधा उत्पन्न करने के लिए एक-दूसरे पर आरोप लगाए। राज्य विधानसभा के हाल ही में संपन्न शीतकालीन सत्र के दौरान ओबीसी मुद्दे पर घंटों बहस हुई थी।

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देश

सावित्रीबाई फुले को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने याद किया

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भोपाल। छुआछूत मिटाने, विधवा विवाह कराने और महिलाओं को शिक्षित करने का अभियान चलाने वाली सावित्रीबाई फुले कि आज सोमवार को जयंती है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनके छायाचित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया।

मुख्यमंत्री चौहान ने महान समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले की जयंती पर उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री चौहान ने निवास कार्यालय स्थित सभागार में उनके चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की।
सावित्री बाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को हुआ था। सावित्रीबाई फुले भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्रिंसिपल और पहले किसान स्कूल की संस्थापक थी। सावित्रीबाई ने अपने जीवन को एक मिशन की तरह से जिया, जिसका उद्देश्य था विधवा विवाह कराना, छुआछूत मिटाना, महिलाओं की मुक्ति और दलित महिलाओं को शिक्षित बनाना। सावित्रीबाई फुले ने 3 जनवरी 1848 में पुणे में अपने पति के साथ मिलकर विभिन्न जातियों की 9 छात्राओं के साथ महिलाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना की । लड़कियों की शिक्षा पर उस समय सामाजिक पाबंदी थी।
सावित्रीबाई फुले उस दौर में न सिर्फ स्वयं पढ़ी अपितु दूसरी लड़कियों के पढ़ने का भी बंदोबस्त किया। दस मार्च 1897 को प्लेग के कारण सावित्रीबाई फुले का निधन हो गया।

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