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पंजाब

सुक्खा की मौत का बदला लेने की साजिश बना रहे तीन दोस्त गिरफ्तार

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जालंधर। गैंगस्टर सुक्खा काहलवां के तीन और दोस्त पुलिस ने गिरफ्तार किए हैं। इनके कब्जे से दो पिस्तौल,10 कारतूस और सफारी गाड़ी, वैगनआर और बाइक बरामद की है। पुलिस फगवाड़ा गेट के रहने वाले पंचमनूर सिंह उर्फ पंचम, फगवाड़ा के उच्चा पिंड के जगशेर सिंह शैरी और तरनतारन के गांव हंसावाला के सहलप्रीत सिंह उर्फ मल्ली को बुधवार को कोर्ट में पेश करेगी। मल्ली तो 17 साल का है।

पंचम के पिता डेयरी फार्म चलाते हैं तो बड़ा भाई न्यूजीलैंड में है। शैरी के पिता दुबई में सेटल्ड हैं। सुक्खा के आठ ऐसे दोस्त पुलिस की जांच में निकल कर आए थे जो प्रेमा और गौंडर गैंग से बदला लेने के लिए साजिश बना रहे थे। पुलिस पहले ही खून का बदला खून की साजिश के मास्टर माइंड हरियाणा के गांव ऐरवा के शूटर राजिंदर पाल सिंह और काहलवां के राजविंदर सिंह को गिरफ्तार कर उनसे दो पिस्तौल बरामद कर चुकी है। दोनों जेल में बंद हैं।

एसपी (डी) हरकंवलप्रीत सिंह खख ने बताया कि सीआईए स्टाफ के इंचार्ज अंग्रेज सिंह और सब इंस्पेक्टर जरनैल सिंह को सूचना मिली थी कि सुक्खा के मर्डर का बदला लेने के लिए उसकी गैंग यूपी के मेरठ से असलहा की खेप लेकर आई है। पुलिस ने 7 फरवरी को शूटर राजिंदर पाल सिंह और राजविंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया था। उनकी पूछताछ में यह बात सामने आई थी कि राजविंदर सिंह की गैंग में आठ युवक थे जो पहले सुक्खा को कस्टडी से भगाना चाहते थे। अब मर्डर के बाद बदला लेना चाहते थे।
पुलिस ने मंगलवार को नेशनल हाईवे पर आईटीबीपी कांप्लेक्स के पास से शैरी, मल्ली और पंचम को गिरफ्तार कर लिया था। एसपी का कहना है कि सुक्खा के तीन फरार साथियों जिनमें एक मेरठ का आशीष है कि तलाश चल रही है। उधर पता चला कि सुक्खा के फेसबुक अपडेट होने को लेकर साइबर क्राइम की टीम जांच कर रही है। सुक्खा मर्डर केस में पंजाब पुलिस 27 दिन बाद भी गौंडर और प्रेमा को पकड़ नहीं पाई है।
सुखा को फरार करने की हो चुकी थी तैयारी
एसपी खख ने कहा कि पूछताछ में आरोपी स्वीकार करते हंै कि सुक्खा को कस्टडी से फरार करने के लिए यूपी के मेरठ में रहते सुक्खा के दोस्त आशीष ने हथियार भेजे थे। सुक्खा जानता था कि उसके विरोधी उसे मार सकते हैं। इसलिए भागने के लिए पूरी तैयारी हो चुकी थी, लेकिन सुक्खा फरवरी महीने में भागना चाहता था। इसलिए पंचम, शैरी और मल्ली कोर्ट में बिना हथियार के मिलने जाते थे। 21 जनवरी को ये तीनों आरोपी वेगनआर कार में आए थे, लेकिन उनकी कार रामामंडी के पास खराब हो गई। शाम को फगवाड़ा पहुंचे तो पता चला कि सुक्खा का मर्डर हो चुका है।
कपूरथला के गुरप्रीत गोपी ने सुक्खा से करवाई थी जान-पहचान
19 साल का शैरी दसवीं फेल है और उसके पिता बलविंदर सिंह दुबई में ट्राला चलाते हैं। वह दो बहनों का इकलौता भाई है। वहीं 17 साल का मल्ली बाहरवीं में पढ़ता है। दोनों की मुलाकात कपूरथला के गुरप्रीत सिंह गोपी ने सुक्खा से करवाई थी। गोपी से दोनों एक शादी में मिले थे। सुक्खा जब जेल में था तो फेसबुक पर उसके चर्चे होते थे। सुक्खा से दोस्ती करने को लेकर दोनों पेशी पर मिलने आए थे। गोपी कुछ समय पहले ही दुबई जा चुका है। मल्ली ने पूछताछ में कहा कि किसान पिता का देहांत हो चुका है और मां आंगनबाड़ी में है।

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देश

रेत खनन मामले में ईडी ने पंजाब के सीएम के भतीजे के घर छापा मारा

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पंजाब । प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विधानसभा चुनाव से कुछ हफ्ते पहले मंगलवार सुबह पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के भतीजे भूपिंदर सिंह हनी के दस अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की। मामला पंजाब में अवैध बालू खनन से संबंधित लांड्रिंग से जुड़ा हुआ है। एक सूत्र ने बताया कि ईडी की टीम ने मंगलवार तड़के हनी के होमलैंड हाइट्स स्थित आवास पर सबसे पहले छापेमारी की। किसी को भी घर से निकलने की इजाजत नहीं थी। ईडी विभिन्न दस्तावेजों और कंप्यूटरों की जांच कर रहा है।

सूत्र ने बताया कि अवैध बालू खनन मामले में पंजाब भर में दस जगहों पर ईडी की छापेमारी चल रही है।
पंजाब में राजनीतिक दलों ने पहले भी कई बार मुख्यमंत्री पर अपने ही निर्वाचन क्षेत्र में अवैध खनन का आरोप लगाया था। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने चल रहे अवैध रेत खनन रैकेट को लेकर कई बार ट्वीट किया था। उन्होंने ट्वीट किया था कि पंजाब के सीएम चन्नी इसे रोकने के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं।
स्थानीय पुलिस पहले से ही मामले की जांच कर रही थी और स्थानीय पुलिस जांच के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।
अभी तक, ईडी ने चल रहे छापे के संबंध में कोई बयान नहीं दिया है। सूत्रों ने बताया कि एक बार छापेमारी खत्म होने के बाद ही जांच एजेंसी कोई बयान जारी करेगी।
छापेमारी के दौरान ईडी ने उन लोगों के बयान दर्ज किए जो मुख्यमंत्री के भतीजे हनी के घर पर मौजूद थे।
बड़ी संख्या में लोग घर के बाहर जमा हो गए थे और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए स्थानीय पुलिस को बुलाया गया था।
मामले में आगे की जांच की जा रही है।

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देश

पंजाब विधानसभा चुनाव – गठबंधन तय लेकिन सीटों को लेकर अभी तक नहीं हो पाया है अंतिम फैसला

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नई दिल्ली/चंडीगढ़ । पंजाब में भाजपा पहली बार बड़े भाई की भूमिका में चुनाव लड़ने जा रही है, यह तय है। अमरिंदर सिंह और सुखदेव सिंह ढींढसा की पार्टी भाजपा के साथ मिलकर राज्य में विधानसभा चुनाव लड़ेंगी , यह भी तय है लेकिन गठबंधन के दलों के बीच अभी तक सीटों का बंटवारा नहीं हो पाया है। सूत्रों की मानें तो तो तीनों दलों के बीच अभी भी कई सीटों को लेकर पेंच फंसा हुआ है। सोमवार को दिल्ली के भाजपा राष्ट्रीय मुख्यालय में राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की अध्यक्षता और गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में पंजाब के राजनीतिक हालात और संभावित उम्मीदवारों के नामों पर विस्तार से चर्चा की गई। चुनाव प्रभारी एवं केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, चुनाव सह प्रभारी एवं केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी, भाजपा राष्ट्रीय महासचिव एवं पंजाब प्रभारी दुष्यंत गौतम, पंजाब प्रदेश अध्यक्ष और पंजाब भाजपा कोर कमेटी के अन्य नेताओं के साथ हुई बैठक में गठबंधन की सीटों को लेकर भी चर्चा की गई।

बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए पंजाब के प्रभारी दुष्यंत गौतम ने बताया कि बैठक में सभी सीटों पर चर्चा हुई। कुछ सीटों पर हम लड़ेंगे और कुछ पर हमारे सहयोगी लड़ेंगे। सहयोगी दलों के बीच सीट बंटवारे के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि अभी कुछ फाइनल नहीं हुआ है और अभी रास्ता निकलना है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि चुनाव की तारीख बढ़ गई है, इसलिए गठबंधन के बीच सीटों को फाइनल करने की हमारी तारीख भी बढ़ गई है।
बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए चुनाव सह प्रभारी मीनाक्षी लेखी ने भी गठबंधन और उम्मीदवारों के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कहा कि भाजपा में इसकी एक प्रक्रिया होती है और तय होने के बाद मीडिया को सब जानकारी दी जाएगी।
आपको बता दें कि , पंजाब चुनाव से जुड़े भाजपा के एक दिग्गज नेता ने 11 जनवरी को यह दावा किया था कि भाजपा राज्य की 117 सीटों में से 80 पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है और बची हुई सीटों को वह अपने दोनों सहयोगी दलों पंजाब लोक कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल ( संयुक्त) को देगी। लेकिन अब यह बताया जा रहा है कि गठबंधन दलों के बीच कुछ सीटों को लेकर पेंच फंस गया है। ऐसे में बीच का रास्ता निकालने की कवायद अभी जारी है।
भाजपा के एक नेता ने आईएएनएस को बताया कि गठबंधन काफी मजबूती से पंजाब में चुनाव लड़ेगा और जरूरत पड़ी तो भाजपा जिन 80 सीटों पर तैयारी कर रही है उनमें से भी कुछ सीटों को वो सहयोगी दलों को दे सकती है।
आपको बता दें कि, पंजाब के सभी दलों के अनुरोध को मानते हुए चुनाव आयोग ने राज्य में चुनाव की तारीख को आगे बढ़ा दिया है। अब पंजाब में 14 फरवरी की बजाय 20 फरवरी को चुनाव होगा।

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उत्तराखंड

गुपचुप ढंग से पंजाब के सीएम चरणजीत चन्नी पहुंचे हरिद्वार, हरकी पैड़ी में किया अस्थि विसर्जन

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चंडीगढ़/हरिद्वार। पंजाब में चल रहे हाइवोल्टेज ड्रामे के बीच पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी सोमवार को बिना किसी जानकारी और प्रोटोकॉल के हरिद्वार पहुंचे। पुलिस के अनुसार, पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी हरकी पैड़ी पर अपने किसी रिश्तेदार के अस्थि विसर्जन करने आये थे। पुलिस को भी उनके आने की जानकारी गाड़ियों का काफिला हरकी पैड़ी पर पंहुचने पर मिली। इसके बाद पुलिस ने उन्हें उनके प्रोटोकॉल के अनुसार सुरक्षा प्रदान की, चन्नी और उनके साथ आए करीब 8 से 10 लोग सीधे गऊघाट के पास स्थित अस्थि विसर्जन को अपने तीर्थ पुरोहित के पास घाट पर पहुंचे। वहां उनके परिचितों ने अपने पुरोहित से अस्थिविसर्जन संस्कार करवाया और करीब एक घंटा रुकने के बाद तुरंत वापस चले गए। देर शाम को इसे लेकर चर्चा शुरू हुई तो इस बात का पता चला कि चन्नी का काफिला महज एक ही घंटा यहां ठहरा।

बताया जा रहा है कि इस दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने हरकी पैड़ी पर मां गंगा जी की पूजा अर्चना भी की। पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी के हरिद्वार आने के बारे में हरिद्वार कोतवाली इंचार्ज राकेंद्र कठैत ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के कारण एक मुख्यमंत्री के तौर पर ना तो उनका कोई प्रोटोकॉल आया था और ना ही पहले से कोई जानकारी मिली थी। जब वह हरकी पैड़ी पर पहुंचे तब हरकी पैड़ी पुलिस चौकी पर तैनात पुलिस कर्मियों को पता चलने पर उन्हें सुरक्षा प्रदान की गई। उनके यहां पहुंचने का कोई कार्यक्रम जिला प्रशासन या पुलिस महकमे के पास नहीं था, लेकिन जैसे ही पंजाब के सीएम चन्नी के काफिले के आने की सूचना मिली प्रशासन पुलिस महकमा हकरत में आ गया। पंजाब के सीएम चन्नी का दौरा इतना गोपनीय था कि स्थानीय कांग्रेसियों को भी इसकी जानकारी बिलकुल भी नहीं थी।

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