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उत्तर प्रदेश

गाजियाबाद कमिश्नरी के पहले कमिश्नर अजय मिश्रा आज लेंगे विधिवत चार्ज

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इसी सप्ताह चुनी जाएगी कमिश्नरी के अधिकारियों की पूरी टीम
गौरव शशि नारायण (करंट क्राइम)
गाजियाबाद। मंगलवार की देर रात आईपीएस अधिकारियों की लंबी तबादला लिस्ट आई, जिसमें गाजियाबाद में 2003 बैच के आईपीएस अधिकारी अजय मिश्रा को गाजियाबाद कमिश्नरेट का पहला कमिश्नर नियुक्त किया गया है। वहीं एसएसपी मुनिराज को आठ माह के शानदार कार्यकाल के बाद उन्हें अध्योध्या जैसे प्रमुख शहर का एसएसपी बनाया गया है। बुधवार को गाजियाबाद में पहले कमिश्नर के तौर पर अजय मिश्रा विधिवत चार्ज लेंगे और फिर पुलिस के अधिकारियों के साथ बैठक कर जल्द ही जिले के लिए अधिकारियों की टीम का चयन करेंगे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मंगलवार को उनको रिसीव करने के लिए लखनऊ कार भेजी गई थी और वह बुधवार को गाजियाबाद में बतौर प्रथम गाजियाबाद कमिश्नरेट कमिश्नर का चार्ज ले लेंगे। अजय मिश्रा उत्तर प्रदेश के आईपीएस अधिकारियों में रॉबिन हुड कहे जाते हैं। वह इमानदारी और पब्लिक के हक में फैसला लेने के लिए लखनऊ से लेकर दिल्ली तक पहचान रखते हैं। उनका स्वभाव और नेताओं को भाव नहीं देने का अंदाज भी किसी से छुपा नहीं है। उन्हें डेपुटेशन के दौरान आईबी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई थी, फिर उन्हें सितंबर माह में यूपी में कैडर वापसी की और डीजीपी मुख्यालय से अटैच किया गया था। इसके बाद उन्हें शासन ने गाजियाबाद के पहले कमिश्नर के रूप में भरोसा जताते हुए यहां बड़ी जिम्मेदारी देते हुए यह तैनाती दी है।

गाजियाबाद में रहेगी लगभग एक दर्जन आईपीएस अधिकारियों की फौज
शासन स्तर पर गाजियाबाद में पहले कमिश्नर के रूप में अजय मिश्रा को कमान सौंपी गई है। अब पुलिस के बेहद करीबी सूत्र बता रहे हैं कि जल्द ही गाजियाबाद कमिश्नरेट में लगभग आधा दर्जन आईपीएस अधिकारियों को पोस्टिंग दी जाएगी। इसमें तीनों जोन के प्रभारी के साथ डीसीपी ट्रैफिक, डीसीपी क्राइम, डीसीपी हेड क्वार्टर के साथ ही डीसीपी महिला सुरक्षा और साइबर क्राइम प्रभारी को यहां तैनाती दी जाएगी। इसके साथ ही अलग-अलग जोन और सर्किल के अधिकारियों को भी तैनात किया जाएगा ताकि कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद पुलिस अपनी सभी तैयारियां शुरू कर दें। सूत्र बता रहे हैं कि आईजी स्तर के अधिकारी आईपीएस अजय मिश्रा जल्द ही गाजियाबाद कमिश्नरी के पुलिस अधिकारियों और यह की जाने वाली नई पोस्टिंग के अधिकारियों के साथ एक बैठक करेंगे और इसके बाद में टीम गाजियाबाद कमिश्नरी का चयन करेंगे।

वाराणसी में गाड़ी को लेकर हुआ था विवाद
साल 2014 में वाराणसी के एसएसपी रहते हुए अजय मिश्रा खूब चर्चाओं में आए। वजह ये थी कि उन्होंने अपने ही एसपी से सरकारी गाड़ी छीन ली थी। इस मामले में अजय मिश्रा और उनके एसपी शासन में पेश हुए। बाद में दोनों ही अफसरों को वाराणसी से हटा दिया गया।

मिली तीन महीने में महत्वपूर्ण तैनाती
इसके बाद मार्च 2015 में अजय मिश्रा केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर चले गए। वे गृह मंत्रालय के अधीन इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) में सेवारत रहे। सितंबर 2022 में अजय मिश्रा की केंद्र से यूपी में फिर वापसी हो गई। फिलहाल वे डीजीपी मुख्यालय लखनऊ से अटैच थे। अब शासन ने गाजियाबाद के पहले पुलिस कमिश्नर के रूप में अजय मिश्रा पर भरोसा जताया है। अजय मिश्रा इसी पहले कानपुर, वाराणसी में एसएसपी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वे यूपीएटीएस में बतौर एसपी भी पोस्टेड रहे हैं।

पुलिस अधिकारियों में है अजीब सी हलचल किसको मिलेगी तैनाती और किसकी होगी रवानगी

गाजियाबाद में पहले कमिश्नर की तैनाती हो गई है लेकिन अभी भी गाजियाबाद में मौजूद आईपीएस अधिकारियों से लेकर पीपीएस और थाना प्रभारियों से लेकर चौकी प्रभारियों को इस बात का भीतर ही भीतर संक्षय चल रहा है कि कौन जिले में रुकेगा और किसको जिले से बाहर जाना पड़ सकता है। सूत्र बता रहे हैं कि कई पुलिस के अधिकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क में आ गए हैं कि अगर उनको कमिश्नरी सिस्टम में जगह नहीं मिली तो वे अन्य जगह तलाश में पुलिस के सूत्र बता रहे हैं कि कुछ गाजियाबाद में तैनात पुलिस के अधिकारी अन्य जिलों के अधिकारियों के संपर्क में हैं और यहां से टाटा बाय-बाय होने के बाद वह कहां जा सकते हैं।

आईपीएस अजय मिश्रा के पिता थे कांस्टेबल
अजय कुमार मिश्रा उत्तर प्रदेश में जिला बलिया के रहने वाले हैं। उनके पिता कुबेर नाथ शर्मा पुलिस में कांस्टेबल थे। वह ज्यादातर समय वाराणसी जिले में पोस्टेड रहे। कुबेर नाथ का सरकारी क्वार्टर वाराणसी पुलिस लाइन में था। अजय कुमार मिश्रा इसी सरकारी क्वार्टर में रहे और प्रारंभिक शिक्षा पूरी की। कुबेर नाथ मिश्रा का रिटायरमेंट भी वाराणसी पुलिस लाइन से हुआ, इसलिए अजय मिश्रा को वहां का रॉबिन हुड भी कहा जाता है। साल 2003 में अजय मिश्रा आईपीएस आॅफिसर बन गए।

भविष्य में मधुबन बापूधाम क्षेत्र में बनेगा गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर का आॅफिस
गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरी सिस्टम में जहां आईजी स्तर के अधिकारी को कमिश्नर बनाया गया है, तो वहीं उनके नीचे एक डीआईजी स्तर के अधिकारी को तैनाती दी जाएगी। आईजी स्तर के अधिकारी के नीचे आईपीएस कैडर के लगभग एक दर्जन के आसपास पुलिस अधिकारी तैनात किए जाएंगे, जो क्राइम कंट्रोल से लेकर ट्रैफिक मैनेजमेंट और पुलिस हेड क्वार्टर से लेकर साइबर क्राइम तक के मामलों को कंट्रोल करने का काम करेंगे। पुलिस के बेहद करीबी सूत्र बता रहे हैं कि गाजियाबाद कमिश्नरेट सिस्टम में लगभग 30 से ज्यादा पुलिस अधिकारियों का दल रहेगा, जो पूरे कमिश्नरी सिस्टम को वर्किंग बनाने का काम करेगा। अभी गाजियाबाद के तैनात होने वाले नए अधिकारियों और अलग-अलग जोन के प्रभारियों के कार्यालय पूर्व के अधिकारियों के कार्यस्थल से ही संचालित किए जाएंगे, लेकिन सूत्रों ने बताया है कि नगर निगम चुनाव के बाद कमिश्नरेट सिस्टम को पटरी पर लाने के लिए मधुबन बापूधाम इलाके में बड़े कार्यालय का निर्माण कार्य शुरू होगा। सूत्र बता रहे हैं कि यहां पर बहुमंजिला इमारत का निर्माण होगा और उसमें पूरा कमिश्नर आॅफिस अलग-अलग मंजिल पर मौजूद रहेगा। वहां से फाइल वर्क से लेकर कमिश्नरी सिस्टम की पूरी रूपरेखा संचालित की जाएगी।

अभी एसएसपी आॅफिस से चलेगा कमिश्नर का कार्यालय
पुलिस के सूत्रों ने जानकारी दी है कि गाजियाबाद कमिश्नरी सिस्टम लागू हो गया है और पहले कमिश्नर को तैनाती दे दी गई है। अजय मिश्रा बुधवार को चार्ज संभालने के बाद गाजियाबाद पुलिस के मुख्यालय से ही कमिश्नरी का कार्यभार संभालते हुए तमाम व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराने और लॉ एडं आॅर्डर से लेकर चुनावी और जन समस्याओं के निस्तारण की कार्रवाई शुरू कर देंगे। गाजियाबाद कमिश्नरी में लगभग आईपीएस और पीपीएस मिलाकर लगभग 30 से ज्यादा अधिकारियों की पोस्टिंग की जानी है, जो आने वाले कुछ ही दिनों में जोन से लेकर सर्किल तक तैनात कर दिए जाएंगे।

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इसे ही कहते हैं मोहब्बत का रूल

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कम समय में सबसे मिलकर चले गए आईएएस महेन्द्र सिंह तंवर, जब था टाइट पूरा शेड्यूल
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। कई अधिकारी जिले में आते हैं और चले जाते हैं लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो दिल में बस जाते हैं। वो जब भी जिले में आते हैं तो फिर सब उनसे मिलने आते हैं और वो सबसे मिलकर जाते हैं। ऐसे अधिकारियों में नगरायुक्त पद पर कार्यरत रह चुके आईएएस महेन्द्र सिंह तंवर भी हैं। ये एक ऐसे अधिकारियों में गिने जाते हैं जो अपने व्यवहार और प्यार से सरकार तो क्या विपक्ष के पार्षदों को भी अपना बना चुके हैं। इन दिनों अपने विजन और व्यवहार का जलवा मुख्यमंत्री की नगरी गोरखपुर में बिखेर रहे हैं। वहां गोरखपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष हैं।
वह जब शुक्रवार को गाजियाबाद आये तो उन्होंने गाजियाबाद आने से पहले गाजियाबाद के सभी साथियों को फोन किये। ये उनका अंदाज है कि उनके आने की खबर से ही सब उत्साहित थे। वो बता चुके थे कि मैं कल गाजियाबाद आ रहा हूं और यहां पर सभी साथियों से वो मिले भी। भाजपा महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा के पिता की शोकसभा में पहुंचे तो पत्रकार दीपक सिरोही के घर पर भी गये और उनकी माता के निधन पर शोक व्यक्त किया। निवर्तमान मेयर आशा शर्मा ने उन्हें देखा तो कहा कि डीएम बनकर गाजियाबाद आओ। पूर्व राज्यमंत्री व शहर विधायक अतुल गर्ग ने उनकी तारीफ की। कनेक्टिविटी के साथ महेन्द्र सिंह तंवर ने एक बार फिर से रिश्तों को लेकर अपना विजन दिखाया और अपनेपन का एक अहसास कराया।

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दो महीने तीन दिन में निर्णायक मोड़ पर पहुंची सुनवाई

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गाजियाबाद (करंट क्राइम)। शनिवार को एक पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। एक दुष्कर्म के आरोपी पर आज फैसला आएगा। साहिबाबाद थानाक्षेत्र में साढे 4 वर्षीय बच्ची का अपहरण कर दुष्कर्म के बाद हत्या की सनसनीखेज वारदात हुई थी। इस मामले में विशेष न्यायाधीश पास्को एक्ट की अदालत ने शुक्रवार को आरोपित को दोषी करार दिया है। सजा पर सुनवाई शनिवार को होगी। अभियोजन की तरफ से कुल 15 लोगों की गवाही हुई है। बच्ची के परिजनों ने दोषी को फांसी की सजा दिए जाने की मांग की है। इस मामले में गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट के पुलिस अधिकारियों ने 15 दिसंबर को आरोप पत्र पेश किए थे। मामले में प्रतिदिन सुनवाई चल रही थी, यही कारण है कि घटना के दो माह तीन दिन में यह मामला निर्णायक मोड़ तक जा पहुंचा है।
1 दिसंबर 2022 को घर से लापता हुई थी बच्ची
विशेष लोक अभियोजन संजीव ने बताया है कि साहिबाबाद थानाक्षेत्र की करहैड़ा कॉलोनी में राजमिस्त्री का परिवार के साथ रहता था। 1 दिसंबर 2022 को करीब 2:30 बजे उनकी साढ़े 4 साल की बेटी घर से बाहर खेलते हुए लापता हो गई थी। दूसरे दिन सिटी फॉरेस्ट के जंगल में उसका शव घर के पास ही मिला था। इसके बाद परिजनों ने शव की शिनाख्त की और पुलिस इस पूरे मामले में जांच में जुट गई थी। इसके बाद पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर अपहरण, हत्या और दुष्कर्म के आरोप में एफआईआर दर्ज करवाई थी।
महिला अधिकारियों की कांप गई थी रूह
साढ़े 4 साल की बच्ची के साथ अपहरण कर दुष्कर्म की सनसनीखेज हत्या ने इस पूरे मामले में तात्कालिक डीसीपी ट्रांस हिंडन दीक्षा शर्मा और एसीपी साहिबाबाद पूनम मिश्रा की रूह का कांप दी थी। पुलिस की महिला अधिकारियों ने शुरू से ही इस मामले में प्रमुखता से साक्ष्य न्यायालय के सामने पेश किए और आरोपी को अधिकतम सजा दिलाने के प्रयास किए हैं, जो शनिवार को सुनवाई के बाद सफल हो सकते हैं।

 

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भगवा गढ़ में बन रही है सरकार वालों के व्यापार की कौन सी लिस्ट!

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गाजियाबाद (करंट क्राइम)। सरकार वाले बाजार में भी हैं और अलग अलग व्यापार में भी हैं। बस कारोबार को लेकर वो रडार पर आ गये हैं। सुना है कि सयंम वाले मामले के बाद भगवा कारोबारियों के व्यापार की लिस्ट मांग ली गई है। इस लिस्ट में प्रापर्टी डीलरों से लेकर रेस्टोरेंट कारोबारी हैं तो सरकारी विभागों के ठेकेदारों से लेकर लाईजनिंग वाले नाम भी आ गये हैं।
बताने वाले बता रहे हैं कि लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी कतई नहीं चाहती कि किसी भी भगवाई के कारोबार को लेकर विपक्ष या मीडिया सरकार के काम काज पर किसी तरह की अंगुली उठा दे। अदंरखाने निर्देश मिले हैं कि धुआं, जुआ, शराब, शबाब से लेकर खराब निर्माण वाला भगवाई मिले तो उसे पार्टी से भगा दें। अब सगंठन में पद देते समय इस बात का शिजरा निकल कर आयेगा। पार्टी कारोबार को लेकर सरकार की फजीहत कराने के मूड में नहीं है। कारोबार वाले सावधान हो जाये क्योंकि लिस्ट का ट्वीस्ट अभी नहीं बल्कि आठ महीने के बाद दिखाई देगा।
कन्फर्म सूत्र बता रहे हैं कि इस लिस्ट का ट्वीस्ट आने वाले समय में दिखाई देगा। क्योंकि बड़ी खबर यह है कि अन्दर खाने कौन सा नेता कौन सा कारोबार कर रहा है यह खबर भी भाजपा वाले ही खुद देकर आएंगे। इस लिस्ट में कई के कारोबार निकलकर सामने आएंगे। फिलहाल लिस्ट को लेकर काम शुरु हो गया है।

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