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उत्तर प्रदेश

अखिलेश आज पेश करेंगे यूपी का आम बजट

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आज उत्तर प्रदेश का आम बजट पेश करेंगे। अखिलेश विधान भवन के तिलक हाल में करीब साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये का बजट पेश करेंगे।

विधान भवन के तिलक हॉल में करीब 1.30 बजे उत्तर प्रदेश का आम बजट पेश करने के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव प्रेस कांफ्रेस भी करेंगे। वित्तीय वर्ष 2015-16 का बजट करीब 3.5 लाख करोड़ के होने का अनुमान है।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आज जब अपनी सरकार का चौथा बजट पेश करेंगे तो उनकी निगाहें सूबे के विकास के साथ इसी वर्ष होने वाले पंचायत चुनाव और दो वर्ष के फासले पर खड़े विधानसभा चुनाव पर भी होगी। बुनियादी ढांचे के विकास को तरजीह देने की चाहत के साथ बजट में सरकार की सियासी मजबूरियों की अकुलाहट भी महसूस की जा सकेगी। इसी वजह से बजट के पिटारे में बुनियादी ढांचे के विकास की रफ्तार को धार देने के लिए आवश्यक संसाधनों के बंदोबस्त के साथ ही लोकलुभावन योजनाओं की ओर वापसी का इंतजाम भी होगा। दोनों को तवज्जो देने की सरकार की मंशा के चलते अगले साल के बजट का आकार तीन लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचने के आसार हैं।

पिछले बजट की तरह अखिलेश सरकार 2015-16 में भी बुनियादी ढांचे के विकास पर फोकस जारी रखेगी। सपा के असर वाले जिलों से गुजरने वाले आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर तो सरकार की मेहरबानी जारी रहेगी, बजट में इस पर भी निगाहें होंगी कि सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ से इस परियोजना को जोडऩे के लिए भी अखिलेश सरकार क्या कुछ करती है। लखनऊ में मेट्रो रेल परियोजना को रफ्तार देकर भी अखिलेश सरकार विकास को लेकर अपनी साख बढ़ाने की कोशिश होगी। सड़क-सेतुओं के निर्माण व रखरखाव को लेकर सरकार दरियादिली दिखाएगी तो प्रदेशवासियों को कहीं ज्यादा बिजली देने के लिए ऊर्जा सेक्टर पर भी पिछले बजट की तरह इनायत बरकरार रहेगी। बिजली के साथ अगले साल के बजट में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की भरपूर कोशिश होगी। मुख्यमंत्री की पहल को अमली जामा पहनाने के लिए कई शहरों में साइकिल ट्रैक बनाने के लिए भी सरकार संसाधन मुहैया कराएगी।

तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा करने के कगार पर पहुंची अखिलेश सरकार अगले विधानसभा चुनाव में जनता के बीच अपनी जवाबदेही को लेकर भी सतर्क है। वह जवाबदेही जो पिछले साल सपा के घोषणा पत्र की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर विराम लगाने से उपजी थी। पिछले साल बंद की गईं कन्या विद्या धन और लैपटॉप वितरण योजनाओं को बजट के जरिये नये स्वरूप में सामने लाकर अखिलेश सरकार वादे से मुकरने का दाग धोएगी। बजट में इन योजनाओं की वापसी के साथ ही इसी साल होने वाले पंचायत चुनाव को देखते हुए लोहिया ग्रामीण आवास योजना, लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना और जनेश्वर मिश्र ग्राम्य योजना को सरकार और ज्यादा तवज्जो देगी। समाजवादी पेंशन योजना नये बजट में भी अखिलेश सरकार की फ्लैगशिप स्कीम रहेगी।

कृषि की विकास दर में गिरावट से निपटने के लिए बजट में इस सेक्टर पर भी जोर होगा। कृषि क्षेत्र में नई योजना के एलान के भी कयास लगाये जा रहे हैं। वहीं अल्पसंख्यकों के लिए शैक्षणिक हब विकसित करने की योजना को बजट के जरिये रफ्तार दी जाएगी। लखनऊ में गोमती, गढ़ मुक्तेश्वर में गंगा और वाराणसी में वरुणा नदी के तटीय विकास के लिए भी सरकार खजाना खोलेगी।

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मेयर सीट जनरल होने के बाद क्या होगी पंजाबियों की बल्ले-बल्ले

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पार्टी में लंबे समय से पंजाबी समाज के जनप्रतिनिधि की उम्मीद
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। गाजियाबाद की राजनीति में पंजाबी और सिख समाज का झुकाव-लगाव हमेशा से भाजपा के साथ रहा है। ये समाज अब दावा करता है कि उनकी संख्या भी अन्य बिरादारियों के समकक्ष है। लिहाजा टिकट दावेदारी भी शुरू हो गई है। यहां पर मेयर चुनाव की बात करें और जनरल सीट होने पर पंजाबियों के लिए स्पेशल क्या होगा तो यहां उसके नेताओं पर निगाह डालनी होगी।
सरदार एसपी सिंह भाजपा का सिख चेहरा है। पॉलिटिक्ली एक्टिव रहते है। यहां पर भाजपा की पंजाबी राजनीति का जिक्र अशोक मोंगा के बिना अधूरा है। महानगर अध्यक्ष रहे है। क्षेत्रीय महामंत्री रहे है। मेयर दावेदारी में जगदीश साधना का नाम भी आता है। यहां बलदेव राज शर्मा भी खामोशी से दावेदारी वाले फ्रेम में आते है। पंजाबी समाज सियासी रूप से एक्टिव है और यह समाज विधानसभा चुनावों में अपनी भागीदारी को लेकर एक प्रेस कांफ्रेंस भी कर चुका है। अब सवाल यही है कि मेयर सीट जब सामान्य हुई है तो इस पंजाबी बिरादरी में चुनावी अरमान भी जाग रहे है। सवाल यही है कि गाजियाबाद की राजनीति में सीट सामान्य होने पर पंजाबी चेहरों के लिए क्या स्पेशल होने जा रहा है। यहां अशोक मोंगा से लेकर जगदीश साधना तक किस चेहरे के नाम पर विचार होने जा रहा है। क्या यहां इस समाज को जनप्रतिनिधि होने वाली उम्मीद की कोई किरण किसी दावेदार में दिखाई देती है।

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त्यागी समाज से ये चेहरे मेयर टिकट के प्रबल दावेदार

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गाजियाबाद (करंट क्राइम)। भगवा गढ़ में त्यागी समाज की सियासी हिस्सेदारी को लेकर चर्चा होने लगी है। मेयर टिकट की बात करें तो यहां पूर्व मंत्री बालेश्वर त्यागी ने अपनी दावेदारी को लेकर इंकार कर दिया था। उन्होंने उम्र का हवाला दिया। खुद इंकार किया लेकिन किसी अन्य त्यागी नेता का जिक्र नहीं किया। भाजपा में मेयर दावेदारी की बात करें तो यहां सीनियर पार्षद राजेंद्र त्यागी का नाम इस दावेदारी में आता है। निगम एक्ट के जानकार और पूरा सियासी जीवन भाजपा और नगर निगम के बीच रहा है। पांच बार पार्षद रहे। निगम में खुलासे किए है। ईमानदार छवि और जनता के बीच सक्रिय रहकर राजनीति करते है। मेयर दावेदारी में वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. वीरेश्वर त्यागी का नाम आता है। लाइफ टाइम भाजपाई है और मुद्दों पर पकड़ रखते है, शानदार वक्ता है। लोकसभा से लेकर विधानसभा तक उनकी दावेदारी रही है। त्यागी समाज से ही एक चेहरा ऐसा है जो साइलेंट है लेकिन पूरी तरह कर्मठ और भाजपा के प्रति समर्पित है। ये चेहरा प्रेम त्यागी का है। भाजपा में विभिन्न पदों पर रहे है और किसान परिवार से आते है। सबसे बड़ी बात ये है कि साधन संपन्न होने के बाद भी बेहद सरल जीवन शैली है और बेहद विनम्र व्यवहार है। ये चेहरा भी त्यागी समाज से मेयर टिकट का दावेदार है।

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मेयर सीट सामान्य होने के बाद इन चेहरों पर खेला जा सकता है दांव

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गाजियाबाद (करंट क्राइम)। मेयर सीट सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित है और इस सीट पर यदि इसके जनरल इतिहास को देखे तो यहां तीन बार वैश्य और एक बार ब्राह्मण चेहरे को मौका मिला है। यहां से वैश्य वर्ग स्व. डीसी गर्ग दो बार मेयर रहे। स्व. दमयंती गोयल जनरल महिला सीट पर भाजपा के टिकट पर मेयर निवार्चित हुई। सामान्य महिला वर्ग सीट आरक्षित होने पर आशा शर्मा मेयर चुनी गई और अगले मेयर के चयन तक वो मेयर है। यहां पर वैश्य वर्ग की भागीदारी मजबूत मानी जाती है और वैश्य समाज को शुरू से भाजपा का परंपरागत वोटर माना जाता है। यदि यहां पर वैश्य चेहरों की मेयर दावेदारी की बात करेंगे तो यहां ये चेहरे मेयर पद के लिए सामान्य सीट पर स्पेशल दावेदार हो सकते है।
मयंक गोयल की दावेदारी और उनकी पार्टी के प्रति वफादारी

(करंट क्राइम)। मयंक गोयल भाजपा का वो चेहरा है जो बाल्य काल से संघ संस्कारों से जुड़ा है तो पार्टी के लिए हर प्लेटफार्म पर उन्होंने मेहनत की। पूरा परिवार संघ पृष्ठभूमि से है। उनकी माता स्व. दमयंती गोयल गाजियाबाद की प्रथम महिला मेयर रही है। एक कार्यकर्ता के रूप में मयंक गोयल की पार्टी के प्रति वफादारी और उनकी कार्यशैली में जिम्मेदारी अलग ही दिखाई देती है। मौजूदा समय में संगठन के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष है। मेयर पद के लिए दावेदारी में नाम है और इससे पहले वह विधानसभा चुनाव के लिए प्रबल दावेदारी कर चुके है। कोरोना काल में मयंक गोयल विशेष रूप से जरूरतमंद लोगों की मदद की थी। भाजपा कार्यकर्ता के रूप में गैर विवादित चेहरा है वेदप्रकाश गर्ग

(करंट क्राइम)। भाजपा की राजनीति का जिक्र गाजियाबाद में वेद प्रकाश गर्ग खादी वालो के बिना अधूरा है। उनका नाम यहां किसी परिचय की जरूरत नहीं रखता। एक ऐसे भाजपाई जो विपक्षी सरकारों में अपनी जेब में भाजपा कार्यकर्ता वाला विजिटिंग कार्ड रखकर गर्व से अपना भाजपा परिचय देते थे। आज सरकार है तो बेहद विनम्र अंदाज और सौम्य व्यवहार के साथ संगठन के कामों को देखते है। महानगर उपाध्यक्ष रहे है और सहयोग आजीवन निधि का प्रभार है। पीढ़ी दर पीढ़ी ये परिवार भाजपाई है और सबसे बड़ी बात ये है कि वेद प्रकाश गर्ग और उनका परिवार सभी के सुख-दुख में शामिल होता है।
विधानसभा की दावेदारी के बाद मेयर दावेदारी में पवन गोयल

(करंट क्राइम)। भाजपा के वैश्य चेहरों की बात करें तो यहां पवन गोयल के जिक्र के बिना ये बात अधूरी है। सबसे युवा निगम पार्षद रहे है। जीडीए बोर्ड सदस्य है और एक्टिव राजनीति करते है। भाजपा का पुराना चेहरा है और लाइफ टाइम भाजपाई है। राजनीति के क्षेत्र में संबंधों की एक मजबूत चेन है। विधानसभा चुनाव में प्रबल दावेदार रहे है और मेयर चुनाव में दावेदारी के लिए वैश्य चेहरों में पवन गोयल का भी नाम है। कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर तालमेल है और वैश्य समाज की भागीदारी में पवन गोयल का नाम मेयर दावेदारी में आता है। एक ऐसा चेहरा जो पार्टी के सभी आयामों और बैठकों में नजर आता है।
सेवा और समर्पण के बेस पर ललित जायसवाल भी मेयर उम्मीदवारी का फेस

(करंट क्राइम)। ललित जायसवाल सिविल डिफेंस के चीफ वार्डन है और लगातार समाज सेवा में एक्टिव रहते है। भाजपा के ऐसे कार्यकर्ता है जो बेहद खामोशी से लेकिन पूरे समर्पण के साथ काम करते है। ललित जायसवाल वैश्य समाज का सौम्य चेहरा है। राजनीति में जब दावेदारी की बात चलेगी और यहां सौम्यता के साथ योग्यता की बात होगी तो ललित जायसवाल पर्दे के पीछे के बड़े खिलाड़ी है। सामाजिक, साहित्यक, सास्कृतिक गतिविधियों में अव्वल रहते है। हमेशा महानगर को कुछ नया और सकारात्मक देने का उनका प्रयास रहता है। योग दिवस से लेकर मतदाता मेले तक उनका विजन दिखाई देता है। सेवा और समर्पण के बेस पर ललित जायसवाल भी उम्मीदवारी का फेस हो सकते है।
निगम के पुराने खिलाड़ी विजय मोहन को देगी पार्टी यह मौका

(करंट क्राइम)। राजनीति में अगर सिद्धांतों की बात करें तो यहां पूर्व निगम पार्षद, पूर्व महानगर अध्यक्ष विजय मोहन का नाम आता है। एक ऐसे व्यक्ति जिन्होंने वार्ड महिला आरक्षित होने पर सिबंल वापस किया और चुनाव लड़ने से इंकार किया। पार्टी ने जब उन्हें कोई सरकारी जिम्मेदारी दी तो वापस लौटाई और संगठन में काम करने की इच्छा जताई। भाजपा की भगवा गढ़ राजनीति के पुराने खिलाड़ी है। यदि पार्टी यहां मेयर दावेदारों की बात करती है तो विजय मोहन के नाम को इग्नोर नहीं किया जा सकता। ईमानदार छवि और निगम एक्ट के गहरे जानकार है। वैश्य समाज में मजबूत पकड़ मानी जाती है।
संजीव गुप्ता की मेयर दावेदारी बनती है भगवा गढ़ की सियासत में

(करंट क्राइम)। संजीव गुप्ता वैश्य समाज का वो चेहरा है जो कारोबार से लेकर सियासत और समाज सेवा के हर सरोकार में नजर आता है। विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने दावेदारी की थी। सौम्य अंदाज में राजनीति करते है और कभी भी किसी के विरोध में कोई बात नहीं करते। भाजपा महानगर कोषाध्यक्ष है और मेयर चुनाव में वैश्य समाज से उनकी भी दावेदारी बनती है। तिरंगा यात्रा से लेकर पार्टी के हर आयाम में वो एक्टिव रहते है। वैश्य समाज का एक प्रतिष्ठित चेहरा है और मेयर चुनाव के लिए भाजपा उम्मीदवार के लिए इस नाम से भी उम्मीद की जा सकती है।

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