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उत्तर प्रदेश

क्यों मिला रही है भाजपा अपनों को छोड़ गैरों से हाथ

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सियासी नजाकत है या फिर कोई नया समीकरण रही है पार्टी साध
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)
गाजियाबाद । चुनाव से पहले भाजपा का गैरों से हाथ मिलाना भाजपा के अपनों को खल रहा है। सवाल ये उठ रहा है कि अन्य जिलों में होता तो कोई बात नही थी लेकिन भगवागढ़ में ऐसी कौन सी मजबूरी है जो भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले भाजपा को जरूरी लग रहे हैं। ताजा मामला मोदीनगर के पूर्व विधायक सुदेश शर्मा का है। सुदेश शर्मा रालोद से पूर्व विधायक रहे हैं और सबसे बड़ी बात यह है कि उन्होंने चुनाव में बड़ी चुनौती ही भाजपा को दी। यहां से भाजपा की डा. मंजू सिवाच मौजूदा विधायक हैं।
मोदीनगर में नगरपालिका परिषद चेयरमैन अशोक माहेश्वरी भाजपा से हैं। भाजपा के गाजियाबाद जिलाध्यक्ष दिनेश सिंघल मोदीनगर से हैं। खास बात ये है कि भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले पूर्व विधायक भाजपाई होने जा रहे थे और संगठन के जिलाध्यक्ष को खबर नही थी। मेरठ में ज्वाईनिंग भी हो गयी और ना स्थानीय विधायक यहां थीं और ना ही जिलाध्यक्ष को पता चला। सवाल यही है कि आखिर भाजपा अपनों को छोड़ गैरों से क्यों हाथ मिला रही है। ये कोई सियासी नजाकत है या फिर पार्टी कोई नया समीकरण साध रही है।

क्यों थाम रखा था राज्यसभा वालों ने पूर्व विधायक का हाथ
मोदीनगर से 15 किलोमीटर की दूरी पर रालोद के पूर्व विधायक भाजपाई हो रहे थे और उसी पार्टी की विधायक को पता नहीं था। सबसे बड़ी बात ये है कि जब सुदेश शर्मा भाजपाई हुए तो यहां उनके बराबर में मंच पर बैठे हुए राज्यसभा सांसद अनिल अग्रवाल ने पूर्व विधायक सुदेश शर्मा का हाथ थाम रखा था।
सूत्र बताते हैं कि राज्यसभा वालों ने ही इस ज्वाईनिंग का ताना बाना बुना था और बताते हैं कि टयूनिंग एरर दूर करने के लिए ज्वाईनिंग के बाद अनिल अग्रवाल अपने साथ सुदेश शर्मा को लेकर भाजपा के जिलाध्यक्ष दिनेश सिंघल के घर गये और चाय पी। इस चाय के क्या मायने हैं और ये चाय अभी विधायक और चेयरमैन के यहां डयू है या फिर संगठन की चाय से ही काम चल जायेगा।

महाजनादेश वाले गढ़ में क्या प्रयोग करना चाहती है भाजपा
बागी होकर बसपा से चुनाव लड़े केके शुक्ला को विद टीम किसी थीम के तहत ही फिर से भाजपा में लिया गया। पूर्व विधायक सुदेश शर्मा को भाजपाई बनाया और दो पूर्व विधायकों की चर्चा चल रही है। सवाल ये है कि जिस गाजियाबाद में भाजपा को विधानसभा में देश का सबसे बड़ा जनादेश मिला। जिस लोकसभा में सबसे बड़ा जनादेश मिला। जिस भगवागढ़ में भाजपा निगम से लेकर निकाय और पालिका परिषद से लेकर जिलापंचायत अध्यक्ष पर काबिज है वहां आखिर उसे दूसरे दलों से आये नेताओं को लेने की क्या जरूरत है। जो बागी होकर चुनाव लड़े उनके नाम पर राजी होने की क्या जरूरत है। निगम के सौ वार्ड वाले सदन में वो 65 से ज्यादा पार्षदों के साथ है। अब सवाल सियासी गलियारों में ये उठ रहा है कि आखिर भाजपा महाजनादेश प्राप्त वाले गढ़ में कौन सा प्रयोग करना चाहती है। वो कौन सा लक्ष्य है जिसे लेकर उसे अपनों पर भरोसा नहीं है और वो गैरों के दम पर उस लक्ष्य को पूरा करना चाहती है।

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इसे ही कहते हैं मोहब्बत का रूल

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कम समय में सबसे मिलकर चले गए आईएएस महेन्द्र सिंह तंवर, जब था टाइट पूरा शेड्यूल
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। कई अधिकारी जिले में आते हैं और चले जाते हैं लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो दिल में बस जाते हैं। वो जब भी जिले में आते हैं तो फिर सब उनसे मिलने आते हैं और वो सबसे मिलकर जाते हैं। ऐसे अधिकारियों में नगरायुक्त पद पर कार्यरत रह चुके आईएएस महेन्द्र सिंह तंवर भी हैं। ये एक ऐसे अधिकारियों में गिने जाते हैं जो अपने व्यवहार और प्यार से सरकार तो क्या विपक्ष के पार्षदों को भी अपना बना चुके हैं। इन दिनों अपने विजन और व्यवहार का जलवा मुख्यमंत्री की नगरी गोरखपुर में बिखेर रहे हैं। वहां गोरखपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष हैं।
वह जब शुक्रवार को गाजियाबाद आये तो उन्होंने गाजियाबाद आने से पहले गाजियाबाद के सभी साथियों को फोन किये। ये उनका अंदाज है कि उनके आने की खबर से ही सब उत्साहित थे। वो बता चुके थे कि मैं कल गाजियाबाद आ रहा हूं और यहां पर सभी साथियों से वो मिले भी। भाजपा महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा के पिता की शोकसभा में पहुंचे तो पत्रकार दीपक सिरोही के घर पर भी गये और उनकी माता के निधन पर शोक व्यक्त किया। निवर्तमान मेयर आशा शर्मा ने उन्हें देखा तो कहा कि डीएम बनकर गाजियाबाद आओ। पूर्व राज्यमंत्री व शहर विधायक अतुल गर्ग ने उनकी तारीफ की। कनेक्टिविटी के साथ महेन्द्र सिंह तंवर ने एक बार फिर से रिश्तों को लेकर अपना विजन दिखाया और अपनेपन का एक अहसास कराया।

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दो महीने तीन दिन में निर्णायक मोड़ पर पहुंची सुनवाई

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गाजियाबाद (करंट क्राइम)। शनिवार को एक पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। एक दुष्कर्म के आरोपी पर आज फैसला आएगा। साहिबाबाद थानाक्षेत्र में साढे 4 वर्षीय बच्ची का अपहरण कर दुष्कर्म के बाद हत्या की सनसनीखेज वारदात हुई थी। इस मामले में विशेष न्यायाधीश पास्को एक्ट की अदालत ने शुक्रवार को आरोपित को दोषी करार दिया है। सजा पर सुनवाई शनिवार को होगी। अभियोजन की तरफ से कुल 15 लोगों की गवाही हुई है। बच्ची के परिजनों ने दोषी को फांसी की सजा दिए जाने की मांग की है। इस मामले में गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट के पुलिस अधिकारियों ने 15 दिसंबर को आरोप पत्र पेश किए थे। मामले में प्रतिदिन सुनवाई चल रही थी, यही कारण है कि घटना के दो माह तीन दिन में यह मामला निर्णायक मोड़ तक जा पहुंचा है।
1 दिसंबर 2022 को घर से लापता हुई थी बच्ची
विशेष लोक अभियोजन संजीव ने बताया है कि साहिबाबाद थानाक्षेत्र की करहैड़ा कॉलोनी में राजमिस्त्री का परिवार के साथ रहता था। 1 दिसंबर 2022 को करीब 2:30 बजे उनकी साढ़े 4 साल की बेटी घर से बाहर खेलते हुए लापता हो गई थी। दूसरे दिन सिटी फॉरेस्ट के जंगल में उसका शव घर के पास ही मिला था। इसके बाद परिजनों ने शव की शिनाख्त की और पुलिस इस पूरे मामले में जांच में जुट गई थी। इसके बाद पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर अपहरण, हत्या और दुष्कर्म के आरोप में एफआईआर दर्ज करवाई थी।
महिला अधिकारियों की कांप गई थी रूह
साढ़े 4 साल की बच्ची के साथ अपहरण कर दुष्कर्म की सनसनीखेज हत्या ने इस पूरे मामले में तात्कालिक डीसीपी ट्रांस हिंडन दीक्षा शर्मा और एसीपी साहिबाबाद पूनम मिश्रा की रूह का कांप दी थी। पुलिस की महिला अधिकारियों ने शुरू से ही इस मामले में प्रमुखता से साक्ष्य न्यायालय के सामने पेश किए और आरोपी को अधिकतम सजा दिलाने के प्रयास किए हैं, जो शनिवार को सुनवाई के बाद सफल हो सकते हैं।

 

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भगवा गढ़ में बन रही है सरकार वालों के व्यापार की कौन सी लिस्ट!

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गाजियाबाद (करंट क्राइम)। सरकार वाले बाजार में भी हैं और अलग अलग व्यापार में भी हैं। बस कारोबार को लेकर वो रडार पर आ गये हैं। सुना है कि सयंम वाले मामले के बाद भगवा कारोबारियों के व्यापार की लिस्ट मांग ली गई है। इस लिस्ट में प्रापर्टी डीलरों से लेकर रेस्टोरेंट कारोबारी हैं तो सरकारी विभागों के ठेकेदारों से लेकर लाईजनिंग वाले नाम भी आ गये हैं।
बताने वाले बता रहे हैं कि लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी कतई नहीं चाहती कि किसी भी भगवाई के कारोबार को लेकर विपक्ष या मीडिया सरकार के काम काज पर किसी तरह की अंगुली उठा दे। अदंरखाने निर्देश मिले हैं कि धुआं, जुआ, शराब, शबाब से लेकर खराब निर्माण वाला भगवाई मिले तो उसे पार्टी से भगा दें। अब सगंठन में पद देते समय इस बात का शिजरा निकल कर आयेगा। पार्टी कारोबार को लेकर सरकार की फजीहत कराने के मूड में नहीं है। कारोबार वाले सावधान हो जाये क्योंकि लिस्ट का ट्वीस्ट अभी नहीं बल्कि आठ महीने के बाद दिखाई देगा।
कन्फर्म सूत्र बता रहे हैं कि इस लिस्ट का ट्वीस्ट आने वाले समय में दिखाई देगा। क्योंकि बड़ी खबर यह है कि अन्दर खाने कौन सा नेता कौन सा कारोबार कर रहा है यह खबर भी भाजपा वाले ही खुद देकर आएंगे। इस लिस्ट में कई के कारोबार निकलकर सामने आएंगे। फिलहाल लिस्ट को लेकर काम शुरु हो गया है।

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