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उत्तर प्रदेश

पूर्व सैनिक करेंगे लखनऊ में ट्रैफिक कंट्रोल

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लखनऊ। पंचायत चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में यातायात व्यवस्था को मुख्य रूप से पूर्व सैनिक नियंत्रित करते नजर आएंगे।(latest utter pradesh hindi news) किसी समय वर्दी पहने हाथों में हथियार उठाए दिन-रात सीमा पर मुस्तैद रहकर मातृभूमि की रक्षा करने वाले ये पूर्व सैनिक अब शहर में अनियंत्रित हो चली यातायात व्यवस्था से लोगों की सुरक्षा का जिम्मा उठाएंगे। माना जा रहा है कि पूर्व सैनिकों को इस काम में लगाने से शहर के विभिन्न प्रमुख चौराहों पर आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकेगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड चुने हुए करीब 150 पूर्व सैनिकों को विशेष प्रशिक्षण दिलवाने की तैयारी में है।

पूर्व सैनिक कल्याण निगम के अध्यक्ष ब्रिगेडियर (अवकाश प्राप्त) आर.डी. सिंह ने बताया कि सूबे में हो रहे पंचायत चुनाव के दौरान सिविल पुलिस व यातायात के सिपाहियों की दूर-दूराज क्षेत्रों में ड्यूटी लग जाने से यातायात व्यवस्था को संचालित कराने का संकट उठ खड़ा हुआ है। इसी के मद्देनजर जिला प्रशासन ने पूर्व सैनिक कल्याण निगम से शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारु तरीके सें संचालित कराने के लिए फिलहाल अभी 100 पूर्व सैनिकों की मांग की है।

निगम उनकी इस मांग को स्वीकार करते हुए प्रशासन को शीघ्र ही 100 पूर्व सैनिक मुहैया कराएगा, जो राजधानी की यातायात व्यवस्था को सुचारु तरीके से नियंत्रित करने में प्रशिक्षित होंगे।

उत्तर प्रदेश

खतौली में चला दे दनादन हैंडपम्प और आ गये जीतकर मदन

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रालोद ने रचा इतिहास और बदल दिए सियासत के समीकरण
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। राष्टÑीय लोकदल ने जाट लैन्ड की राजनीति में उपचुनाव वाली सीट भाजपा से जीतकर एक बड़ा संदेश दिया है। राष्टÑीय लोकदल ने खतौली उपचुनाव में भाजपा को उस सीट पर हराया जिस सीट पर भाजपा काबिज थी। मुजफ्फरनगर दंगों के मुकदमें में यहां से निर्वाचित भाजपा विधायक विक्रम सैनी की सदस्यता चली गयी थी और उसके बाद खतौली में उपचुनाव हुआ। यहां पर भाजपा ने एक तरह से अपने ही विधायक को रिपीट किया।
उन्होंने सदस्यता गंवाने वाले विधायक विक्रम सैनी की पत्नी और कवाल गांव की पूर्व प्रधान राजकुमारी को टिकट दिया। यहां पर राष्टÑीय लोकदल ने खेकड़ा के पूर्व विधायक रहे मदन भईया को चुनावी मैदान में उतारा और मदन भईया ने यहां भाजपा उम्मीदवार को हरा दिया। उपचुनाव में आठ दिसम्बर गुरुवार का दिन रोमांच से भरा दिन रहा। यहां पर रालोद और सपा गठबंधन के उम्मीदवार मदन भईया ने 97071 वोट हासिल किये जबकि भाजपा की उम्मीदवार राजकुमारी सैनी को 74906 वोट मिले। मदन भईया ने यह सीट 22165 वोटों से इस चुनाव को जीता। मतगणना शुरू हुई और नवीन मंडी स्थल पर हो रही इस मतगणना में रालोद उम्मीदवार मदन भईया ने पहले राउंड से ही बढ़त बनाई और आखिरी राउंड तक वो फिर इस बढ़त को बढ़ाते चले गये।
दलित वोटों की लामबंदी हुई इस तरह मदन भईया के पक्ष में
उपचुनाव में मदन भईया ने ऐसे समय में ये जीत हासिल की है जब वो कुछ महीने पहले ही लोनी विधानसभा चुनाव में आठ हजार वोटों से हारे थे। यहां भाजपा के नंदकिशोर गुर्जर दूसरी बार जीते। लेकिन जब मदन भईया लोनी से खतौली पहुंचे तो उन्होंने यहां लगभग 22 हजार से ज्यादा वोटों से भाजपा उम्मीदवार को हराया। राष्टÑीय लोकदल ने उनपर भरोसा जताया था और वो इस भरोसे पर खरे उतरे। यहां पर उनकी जीत का एक बड़ा कारण दलित वोट बैंक भी माना जा रहा है। यहां पर गुडलक ये था कि बसपा इस उपचुनाव से दूर रही। यदि बसपा इस चुनाव में आती तो वह नुकसान हैन्डपम्प का ही होता। दूसरा फायदा ये हुआ कि आजाद समाज पार्टी के मुखिया चन्द्रशेखर रावण ने इस उपचुनाव में रालोद का साथ दिया। जयंत ने चन्द्रशेखर रावण को साथ लेकर नये समीकरण बनाये। रालोद को बसपा की चुनाव से दूरी का लाभ मिला और उसके वोटों का माईलेज रालोद को मिल गया।
मतदाता ने नही दिल तोड़ा सभी को खुश किया थोड़ा थोड़ा
चुनाव केवल खतौली में ही नही था बल्कि चुनाव रामपुर में भी था। चुनाव मैनपुरी में भी था, चुनाव गुजरात में भी था और चुनाव हिमांचल में भी था। मतदाताओं ने भी कुछ इस तरह से मतदान किया कि दिल किसी का नहीं तोड़ा है और सबको थोड़ा थोड़ा खुश किया है। दिल्ली एमसीडी चुनाव में मतदाता आम आदमी पार्टी के साथ गये हैं तो गुजरात में जनादेश भाजपा को मिला है। हिमांचल प्रदेश में कांगे्रस आई है तो यूपी की सभी उपचुनाव सीटों पर अलग अलग जनादेश हैं। रामपुर में भाजपा चुनाव जीती है और सपा के आजमखान चुनाव हार गये हैं। मैनपुरी में सपा के राष्टÑीय अध्यक्ष तथा पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव रिकॉर्ड वोटों से चुनाव जीती हैं। यहां भाजपा को बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। खतौली में भाजपा चुनाव हारी है।
भाजपा के दिग्गज जाट चेहरों के लिए एक बड़ी चुनौती है
उपचुनाव में भाजपा खतौली से हारी है लेकिन रामपुर से वो चुनाव जीती है। मगर यहां पर उसके जाट चेहरों के लिए ये चुनौती है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी जाट हैं। भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष मोहित बेनिवाल जाट हैं और सबसे बड़ी चुनौती केन्द्रीय मंत्री संजीव बालियान के लिए है। क्योंकि यह बेल्ट उन्हीं के क्षेत्र में आती है। यहां की जीत रालोद के लिए और हार भाजपा के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि उसकी पूरी लॉबी यहां चुनाव जिताने के लिए उतरी थी। लेकिन मदन भईया ने यहां बड़ा झटका दिया है और संदेश दिया है कि फिल्म अभी बाकी है।

खेकड़ा से खतौली तक ‘ख’ शब्द रहा मदन भईया के लिए लकी
(करंट क्राइम)। मदन भईया ने एक एतिहासिक जीत हासिल की है और यहां पर एक संयोग ये बना है कि वो सबसे पहले खेकड़ा से विधायक रहे और इसके बाद उन्होंने लोनी से दो चुनाव लड़े और वह दोनों ही चुनाव में परास्त रहे। लेकिन जब खेकड़ा छोड़कर वो खतौली पहुंचे तो यहां उन्होंने सत्ताधारी दल की उम्मीदवार को उपचुनाव में हरा दिया। मदन भईया की जीत के यहां तीन प्रमुख कारण हैं। मौजूदा समय की राजनीति में लोग यहां भाजपा उम्मीदवार से नाराज बताये जाते हैं। वहीं मदन भईया ने डेरा डालकर एक सधी हुई रणनीति के तहत प्रचार किया। कार्यकर्ताओं को साथ लिया और मतदाताओं को ये विश्वास दिलाने में कामयाब रहे कि ताकतवर नेता ही हमेशा जनता की रक्षा करता है।

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मैडम एडीएम रितु सुहास का है कुछ अलग ही अंदाज

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बेहद सफलता पूर्वक सम्पन्न किया सेवा पखवाड़ा अभियान
गाजियाबाद (करंट क्राइम)। कुछ अधिकारी हमेशा से अपने काम की कार्यप्रणाली को लेकर एक अलग पहचान रखते हैं। काम के प्रति उनकी लगन और उनका विजन उन्हें सबसे अलग बनाता है। ऐसे ही अधिकारियों में एडीएम प्रशासन रितु सुहास का भी नाम आता है। एक ऐसी अधिकारी जिनके काम करने का अंदाज ही अलग है। वो चाहे मतदाता जागरूकता अभियान में स्वीप हो या फिर लखनऊ में हैन्डलूम फैशन शो हो। एक बार फिर रितु सुहास ने अपने अलग अंदाज से नगर सेवा पखवाड़े को एक पहचान दी है। 72 घंटे का अभियान सफलतापूर्व चलाकर उन्होंने स्वच्छता का नया संदेश दिया है। इस अभियान में 762 निकाय शामिल थे, जिसमें लोनी भी शामिल था। इसे नगर सु शोभन अभियान का नाम दिया गया था। इस अभियान में उन लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना था जो कूड़ा ईधर उधर डाल रहे थे। एडीएम प्रशासन रितु सुहास के पास लोनी का भी प्रभार है। उन्होंने लोनी में 15 स्थान चिन्हित कराये जहां पर लोग कूड़ा डाल रहे थे। रितु सुहास ने अभियान को एक चुनौती के रूप में लिया और सामाजिक सहयोग से उन्होंने इन स्थानों की दशा ही बदल दी। जहां पर लोग कूड़ा डालते थे वहां पर खूबसूरत पेंटिंग बनाई गयी हैं। इनमें कई मैट्रो पिलर भी ऐसे हैं जहां पर गंदगी हटाकर खूबसूरत पेंटिंग लगाई गयी हैं। अब यहां खूबसूरती दिखाई दे रही है और गंदगी नहीं दिखाई दे रही। एडीएम प्रशासन रितु सुहास ने लोगों से अपील की है कि वो इस अभियान को सफल बनायें और अपने आस पास ना किसी को गंदगी फैलाने दें और ना ही खुद फैलायें।

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लोनी से लेकर मुरादनगर पालिका चुनाव तक दिखाई देंगे खतौली इफैक्ट

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नगरपालिका परिषद में मजबूत चेहरों का रहेगा रिएक्ट वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। खतौली का नतीजा केवल खतौली पर ही असर नही डालेगा। इस चुनाव के इफैक्ट लोनी से लेकर मुरादनगर तक दिखाई देंगे। मदन भईया लोनी में रहते हैं और उनकी ये जीत कई मायनों में सियासत में अपना असर डालेगी। यहां भाजपा को सबसे बड़ी टक्कर देने की स्थिति में मदन भईया हैं।
लोनी विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत का अंतर महज आठ हजार वोट हैं। और खतौली में उसकी जीत का अंतर 22 हजार से भी ज्यादा है। नगरपालिका परिषद का चुनाव आ रहा है और लोनी में रालोद का फेस वो होगा जिसका अपना सियासी बेस माना जाता है। नगरपालिका परिषद के पूर्व चेयरमैन मनोज धामा और लोनी नगरपालिका परिषद की अध्यक्ष रंजीता धामा अब रालोद में हैं और यहां पर रंजीता धामा निर्दलीय चुनाव लड़कर अपनी ताकत का मुलाहिजा कर चुकी हैं। लिहाजा इस जीत के इफैक्ट लोनी चुनाव पर निश्चित रूप से पड़ेंगे। विधानसभा चुनाव में लहर थी, योगी थे , मोदी थे लेकिन नगरपालिक परिषद में समीकरण दूसरे होंगे। उम्मीदवार वही होंगे और वहीं दूसरी तरफ मुरादनगर में भी पार्टी को यहां चुनावी इफैक्ट का सामना करना होगा। यहां वहाब चौधरी चुनाव लड़े थे और भाजपा के विकास तेवतिया थे। वो चुनाव जीत जरूर गये थे लेकिन यहां फाईट बहुत जबरदस्त रही थी। हार जीत का अंतर हजार में नहीं बल्कि कुछ सौ वोट का था। यहां अब भाजपा को एक ऐसा चेहरा लाना होगा जो खुद की बिरादरी की वोट ले पाने में सक्षम हो। यहां संगठन या स्थानीय जनप्रतिनिधि की अपने किसी खास चेहरे को लाने की कोशिश पार्टी को झटका दे सकती है। खतौली चुनाव के इफैक्ट इन दोनों नगरपालिक परिषद पर आयेंगे।
खतौली चुनाव के बाद चर्चा यही है कि पहले भी मुरादनगर का पालिका चुनाव भाजपा के लिए काफी खटक रहा था। यहां मौजूद विधायक अजित पाल त्यागी और कद्दावर जाट नेता की जुगलबंदी से ब्रजपाल तेवतिया इस सीट पर कमल खिला था। फिलहाल आने वाले पालिका चुनाव में वैसे भी सरकार तो बननी नहीं है। यहां पर रालोद+सपा का समीकरण ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभाव डालेगा। शहर क्षेत्र इस लड़ाई से आउट रहेगा। ऐसे में भाजपा आलाकमान को यहां पर सोच समझकर कोई मजबूत चेहरा उतारना होगा। जातिगत फैक्टर पर फोकस करने से आगे जाकर सोचना होगा।

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