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उत्तर प्रदेश

लखनऊ में एक शख्स ने पत्नी को आठवीं मंजिल से नीचे धकेला,मौके पर ही मौत

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लखनऊ। लखनऊ के गोसाईगंज में एक व्यक्ति ने वैवाहिक विवाद के बाद अपनी पत्नी को इमारत की आठवीं मंजिल की बालकनी से नीचे धकेल दिया। 32 वर्षीय पीड़िता नीतू की मौके पर ही मौत हो गई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नीतू ने 36 साल के संजीव कुमार से 2011 में शादी की थी और उनके दो बच्चे हैं। एक बेटी 7 वर्ष की है और एक बेटा 5 वर्ष का है।
पुलिस ने बताया कि दंपति के बीच आए दिन झगड़ा होता रहता था। सोमवार को उनका झगड़ा हुआ था, जिसके बाद संजीव ने नीतू को आठवीं मंजिल पर उनके किराए के फ्लैट की बालकनी से नीचे धकेल दिया था।
संजीव एक निजी फर्म में फाइनेंसर के रूप में काम करता है, जबकि नीतू एक गृहिणी थी।
मृतक नीतू के भाई राज किरण ने शिकायत की थी कि उसके जीजाजी संजीव का पिछले तीन साल से विवाहेतर संबंध था। राज किरण ने कहा कि उसकी बहन ने हमेशा उसके रिश्ते पर आपत्ति जताई, लेकिन संजीव दावा करता था कि महिला उसकी बहन है और इसलिए वह कई बार उनके घर जाता है।
राज किरण ने कहा, “संजीव ने नीतू से कहा कि वह दिल्ली में है लेकिन वह दूसरी महिला के साथ उसके घर में दो महीने से रह रहा था और मेरी बहन को इस बारे में पता चला।
उसने पुलिस को बताया कि संजीव और नीतू का झगड़ा हुआ था जिसके बाद नीतू को दोनों बच्चों के सामने उसने बालकनी से फेंक दिया ।
गोसाईगंज थाना प्रभारी शैलेंद्र गिरी ने कहा, “हमें पीड़िता के भाई से शिकायत मिली और संजीव को गिरफ्तार कर लिया। हमने उस पर हत्या और महिला के साथ क्रूरता के आरोप में मामला दर्ज किया है। आरोपी को जेल भेज दिया गया है।”

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जब करंट क्राइम ने पूछा विधायक सुनील शर्मा से महानगर अध्यक्ष की पारी को लेकर सवाल

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विधायक बोले कार्यसमिति की बैठक से दिया है उन्होंने अपनी संगठनात्मक कौशलता का संदेश
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। राजनीति में शब्दों से जो संदेश दिया जाता है उससे ही पता चल जाता है कि कौन किसमें फेथ जता रहा है। कौन किस फेस के लिए बेस बना रहा है। शब्द राजनीति में सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। ये शब्द ही तो हैं जो नेताओं के बयान आने के बाद तूफान लाने की अहमियत रखते हैं। शब्दों से सियासत के ईशारे मिलते हैं। भाजपा में इन दिनों परिवर्तन की चर्चा है और चर्चा का ये कीर्तन भगवागढ़ में जोरो पर चल रहा है।
परिवर्तन की चर्चा संगठन को लेकर चल रही है और यूपी से लेकर भगवागढ़ तक चल रही है। परिवर्तन जीवन का नियम है और जब राजनीति में प्रदेश स्तर पर परिवर्तन हुआ है। मगर एक मजबूत लॉबी संजीव शर्मा में मजबूत अध्यक्ष के रूप में देख रही है।
चर्चाएं यही है कि महानगर में कोई परिर्वतन नहीं हो रहा है वहीं हर कोई महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा को लेकर अपनी पसंद का रिएक्शन दे रहा है। कोई विधायक उन्हें अब तक का सबसे लोकप्रिय अध्यक्ष बता चुके हैं तो खुद संजीव शर्मा जन्मदिन से लेकर पिता की शोकसभा तक बिना कहे ही अपनी टीआरपी का रियलिटी टेस्ट दिखा चुके हैं।
ऐसा नहीं है कि वो सबको ही पसंद हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि वो हटें और इस कुर्सी पर उनका उद्धार हो जाये। इस लॉबी के लिए संजीव शर्मा सेंटर आॅफ टारगेट हैं। ये वो लॉबी है जो टारगेट कर खुद सेट होने के प्रयासों में है। बहरहाल राजनीति में प्रयास और कयास दोनों ही लगाये जाते हैं।
राजनीति में सभी को अपने अपने ढंग से अपने अपने प्रयासों की जंग लड़ने का अधिकार है। एक चर्चा ये चल रही है कि महानगर अध्यक्ष के रूप में संजीव शर्मा फिर से पारी खेलेंगे। चुनाव नजदीक हैं और मजबूत किले में भाजपा कोई नया प्रयोग नहीं करना चाह रही। यहां भाजपा संगठन से लेकर चुनावी पिच तक मजबूत है। संजीव शर्मा को लेकर करंट क्राइम ने सवाल भी उन विधायक से किया जिनकी विधानसभा में संजीव शर्मा निवास करते हैं। संजीव शर्मा और उनका परिवार इस विधानसभा का मतदाता है।
ये साहिबाबाद सीट है और यहां से सुनील शर्मा लगातार दूसरी बार विधायक हैं। सुनील शर्मा सियासत के मंझे हुए खिलाड़ी हैं। वो जानते हैं कि शब्दों की गुगली से लेकर शब्दों की रिवर्स स्विंग कब और कौन सी पिच पर कौन से खिलाड़ी के लिए डालनी है।
क्या संजीव शर्मा महानगर अध्यक्ष के रूप में फिर से पारी खेलने जा रहे हैं। क्या पार्टी उनकी क्षमताओं को देखते हुए उन्हें फिर से जिम्मेदारी सौंपने जा रही है। करंट क्राइम के इस सवाल पर विधायक सुनील शर्मा ने कौशलता से लेकर कुशलता के साथ संदेश दिया। सुनील शर्मा वैसे भी गोमती नदी से लेकर कई उदाहरण अपनी बात में रखते हैं। यहां उन्होंने रिपीट से लेकर जिम्मेदारी वाले शब्द अपनी जुबान से दूर रखे और सवाल को कौशलता से जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि दो दिन पहले भाजपा महानगर कार्य समिति की बैठक में संजीव शर्मा ने अपनी संगठनात्मक कौशलता का संदेश दिया है। आयोजन से लेकर संचालन तक उन्होंने यह संदेश दिया है। करंट क्राइम ने जब उनसे फिर सवाल किया कि क्या संजीव शर्मा फिर से अध्यक्ष वाली पारी खेलने जा रहे हैं तो उन्होंने कहा कि जो कुछ मैंने कहा है उसी में सवाल का पूरा जवाब छिपा हुआ है। शब्दों में ही पूरी कहानी का सार छिपा हुआ है।

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काम की खबर: चाय की चुस्की और लजीज व्यंजनों का पुलिस लाइन के कैफिटेरिया में उठा सकेंगे लुत्फ

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रंगीन लाइट, आरामदायक फर्नीचर और इंटीरियर करेगा पुलिसकर्मियों का मूड फ्रैश
गौरव शशि नारायण (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। पुलिस आधुनिकरण स्कीम के तहत जल्द ही पुलिस कमिश्नरेट गाजियाबाद के अंतर्गत पुलिस लाइन में एक आरामदायक सुंदर और दूर से देख कर ही सुकून देने वाला स्थान लोगों को अपनी ओर खींचने और पुलिसकर्मियों के जीवन शैली के तनाव को दूर करने का काम करेगा। पुलिस लाइन हरसांव में कैफिटेरिया बनाया जा रहा है, जिसमें पुलिसकर्मी लजीज व्यंजनों के साथ चाय की चुस्की ले सकेंगे।
साथ ही यहां सुबह के नाश्ते से लेकर डिनर तक का उनको पौष्टिक पकवानों का लुत्फ उठाने का मौका मिलेगा। वहीं रंग बिरंगी लाइटों और एंटीक फर्नीचर से इसकी सजावट की जा रही है। जल्द ही इसकी शुरूआत होगी। जिसका फायदा पुलिसकर्मी और विभाग से जुड़े रिटायर्ड कर्मचारी भी उठा सकेंगे। यहां सामान्य दरों पर नाश्ता ,दोपहर का भोजन और डिनर भी उपलब्ध होगा। दरअसल पूर्व डीजीपी ओपी सिंह के विजन को ध्यान में रखते हुए बीते दिनों मेरठ, नोएडा और आईपीएस अधिकारी आकाश तोमर द्वारा सहारनपुर में बेलआउट कैसे बनाया गया था। जहां पुलिसकर्मियों और पुलिस के सजावटी सामान से उसकी डेकोरेशन की गई थी। उसी
तर्ज पर अब पुलिस कमिश्नरेट गाजियाबाद में भी जल्द ही ऐसा कैफिटेरिया शुरू करने का प्लान अंतिम दौर में चल रहा है।
सर्दी, गर्मी, धूप और बरसात का मिलेगा माहौल
पुलिस कमिश्नरेट गाजियाबाद के पुलिस लाइन स्थित परिसर में बनाए जा रहे इस कैफिटेरिया में बाकायदा आधुनिक किचन बनाई गई है। साथ ही अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के आराम से बैठने और खड़े होकर चाय पीने और कॉफी के साथ ही भोजन करने के लिए प्लेटफार्म बनाया गया है। यहां बम्बू से सजावटी लुक दिया गया है। तो रंग बिरंगी लाइटें और पुराने सामान को सजावटी अंदाज में लगाकर इसे आकर्षक और सुंदर बनाया जा रहा है। इस को अंतिम रूप देने का काम लगातार जारी है, जो जल्द ही बनकर तैयार होगा और यहां पुलिसकर्मियों के साथ ही पूर्व पुलिसकर्मी और अन्य लोगों को भी किफायती कीमत चुका कर इसका लाभ मिल सकेगा।
अधिकारियों और पुलिय लाइन प्रभारी ऊदल सिंह के दिशा- निर्देश में यहां का काम चल रहा है। यहां सर्दियों के मौसम में बैठने के लिए खुले स्थान का भी स्पेस छोड़ा गया है। तो बारिश में इनहाउस व्यवस्था रहेगी। सर्दी के मौसम को ध्यान में रखते हुए सिटिंग सेट भी लगाया जा रहा है। तो वही गर्मी के मौसम तारों की छांव में भी यहां डिनर का जायका सभी को लुभाएगा। बाहर की चकाचौंध और रंग बिरंगी लाइट से दूर बैठना है तो अंदर आरामदायक सोफे और कुर्सियां भी पुलिसकर्मियों को मुहैया होंगी।

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संघ प्रमुख मोहन भागवत का कथन न केवल तार्किक बल्कि ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित

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उनके कथन से मुस्लिम समाज के कुछ लोगों में भी भरोसा जगा है: बालेश्वर त्यागी
गाजियाबाद (करंट क्राइम)। एक समय में राजनीति में हम नारा लगाते थे-अंधेरे में एक चिंगारी, अटल बिहारी अटल बिहारी। आज सामाजिक क्षेत्र में जो द्वंद है, सामाजिक व्यवस्था दो राहे पर दिग्भर्मित सी खड़ी है उस समय देश में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत जी एक प्रकाश का विश्वास बन कर उभरे हैं। चाहे हिन्दू समाज में समाज को विभाजित करने वाले जातीय, ऊंच नीच, छोटा बड़ा, छुआछात जैसे विषय हों या भारत के मुसलमानों को लेकर उठे सवालों पर जिनसे देश और समाज विभाजित होता है पर अगर कोई स्पष्ट और तार्किक बोले हैं तो केवल श्री मोहन भागवत जी हैं। आज श्री मोहन भागवत जी पर देश के उन तमाम लोगों का भरोसा जगा है जिनको कई कारणों से विभक्त करने के प्रयास हो रहे हैं। श्री मोहन भागवत जी का कथन न केवल तार्किक है बल्कि ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित और धर्म सम्मत भी है।
श्री मोहन भागवत जी ने मुंबई में संत शिरोमणि रविदास जी की 647वीं जयंती के अवसर पर अपने सम्बोधन में कहा है कि जातियां ईश्वर ने नहीं बनाई । ईश्वर के सामने सभी जातियां और धर्म समान हैं। ये जातियां तो विद्वानों (पंडितों) ने बनाई । ये कथन एक दम सही है । जातिव्यवस्था न तो प्राकृतिक है और न मानवता और समाज के हित में है । किसी समय में उन विद्वानों ने जिन्होंने ने समाज की व्यवस्था के संचालन के लिए कुछ व्यवस्था बनाई होगी। उसमें से जातिवाद विकसित हुआ है । स्पष्ट है कि जातिव्यवस्था ईश्वर निर्मित नहीं है । मानव निर्मित है । इसलिए जन्मगत भी नहीं है। एक समय में ये कर्मगत थी लेकिन कालांतर में इसे जन्मगत भी बना दिया । और फिर जो सबसे ज्यादा श्रम का काम करते हैं उन्हें छोटा और जो बौद्धिक काम करते हैं ,उन्हें बड़ा बना दिया गया।
ये समाजिक विकृतियां हैं। अगर समाज को एक जुट करना है ,उसे शक्तिशाली और समर्थ बनाना है तो इन सभी समाजिक बुराइयों को दूर करना ही पड़ेगा। श्री मोहन भागवत जी ने इन सब बुराइयों की ओर इंगित किया है और उन्हें समाप्त करने का आह्वान किया है। श्री मोहन भागवत जी का ये प्रयास देश और समाज को सशक्त बनाने के लिए बहुत आवश्यक है। सारे हिन्दू समाज को श्री मोहन भागवत जी के प्रयासों के साथ जुड़ना चाहिए। एक एक शब्द को पकड़ कर,अर्थ का अनर्थ करके समाज की एकता के प्रयासों को विफल करने से बचना चाहिए।
मेरा मत है कि वर्तमान समय में आम आदमी के लिए जातिवाद शादी विवाह तक सीमित हो गया है। शहरीकरण ने जातीय व्यवस्था को अप्रसांगिक बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है । अब जातिवाद को बढ़ावा देने के लिए दो ही वर्ग सबसे ज्यादा प्रयास करते हैं । एक राजनेता ,वोट के लिए जातिवाद को खूब बढ़ावा देते हैं और दूसरे सरकारी कर्मचारी अधिकारी, वे भी मलाईदार पोस्टिंग के लिए जातीय व्यवस्था को खूब खाद पानी देते हैं।
श्री मोहन भागवत जी के कथन से मुस्लिम समाज के कुछ लोगों में भी ये भरोसा जगा है कि देश में एक व्यक्ति ऐसे हैं जो उनके सम्बन्ध में भी समाज की एकजुटता के लिए बोलते हैं। वैसे श्री मोहन भागवत जी जो बोलते हैं वह एक व्यक्ति नहीं हैं, वह पूरा भारतीय विचार दर्शन है।ये ही हिंदुत्व है जिसे श्री मोहन भागवत बोलते हैं। इसे विकृतियों से बचाकर और निस्वार्थ समाज और राष्ट्र के हित मे सही परिपेक्ष्य में प्रस्तुत करने के साहस की सर्वत्र प्रशंसा होनी चाहिए।

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