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लाइफस्टाइल

प्यार (love)को हो जाने दो

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कल्पनाएं सभी के पास होती हैं और अगर ये सेक्स से जुड़ी हों तो इनकी पतंग सीमाओं की डोर काट कर उन्मुक्त ढंग से उडऩे को आतुर रहती है। इसके बावजूद कई बार वैवाहिक जीवन में सेक्स एक जज्बे या पैशन के बजाय रुटीन या आदत बन जाता है। प्यार (love)का ‘स्पार्क’ कहीं खो जाता है। प्रेम के इस महीने में ‘स्पार्क’ को फिर से जगाने की कोशिश करें। कुछ हॉट स्पॉट्स खास आपके लिए।

पता नहीं बोरियत थी या मानसिक परेशानियां, लेकिन हमारी जिंदगी पिछले दो साल से बोझिल हो रही थी। शादी के चार साल तो पलक झपकते गुजर गए। घर, गाड़ी, गैजेट्स….सामानों की भूलभुलैया में हम खोते रहे। पिछले वर्ष हमारी लाइफ में नन्हा बेटा आर्यन आया। न्यूक्लियर फेमिली की दिक्कतें, व्यस्त दिनचर्या, बढ़ती जिम्मेदारियां…। निशांत और मैं रात आठ-नौ बजे घर में घुसते तो थक कर निढाल होते। दिन भर मेड की देखरेख में पलता हमारा बच्चा पूरे दिन की कसर रात के इन्हींएक-दो घंटों में उतारना चाहता। 11-12 बजे बिस्तर पर जाते और नींद के आगोश में समा जाते। सब कुछ घड़ी की सुइयों के हिसाब से चल रहा था, लेकिन मेरे भीतर चिड़चिड़ाहट आ रही थी। निशांत पूछते तो मैं जवाब नहीं दे पाती। समझ नहीं पा रही थी कि गड़बड़ कहां है। एकाएक मैंने पाया कि हमारे वैवाहिकजीवन में रोमैंस के पल गायब होते जा रहे हैं। सेक्स तो खैर….। याद नहीं था कि पिछली बार कब हम एक-दूसरे की बांहों में बांहें डाल कर सोए थे। एक दिन निशांत ऑफिस से लौटे तो उनके हाथ में ट्रेन के दो टिकट थे। उन्होंने एक हफ्ते की छुट्टी प्लान की थी। मैंने कुछ कहना चाहा तो उन्होंने सुनने से इनकार कर दिया।

मजबूरन मुझे उसी समय अपने बॉस को फोन व ई.मेल से सूचना भेजनी पड़ी कि जरूरी काम से मुझे शहर के बाहर जाना पड़ रहा है….। छुट्टी से लौटी तो मैं पहले वाली निशा बन चुकी थी, खुशमिजाज और दिलकश…।

क्या आप जानना चाहेंगे निशा और निशांत का यह छोटा सा हनीमून कहां बीता? निशा से ही जान लेते हैं। ‘…निशांत का यह सरप्राइज मुझे ताउम्र याद रहेगा। वह मुझे अपने ननिहाल लेकर गए, जहां शायद वह खुद भी 20-22 वर्ष बाद जा रहे थे। उनकी मामी और उनके लंबे-चौड़े परिवार ने हमारी खूब खातिरदारी की। कंकरीट के शहर से दूर प्रकृति की गोद में बिताए ये छह-सात दिन मेरे लिए वरदान साबित हुए। मेरे एक वर्ष के बेटे को तो जैसे वहां की मिट्टी से कुछ ज्यादा ही प्यार हो गया। कभी इस हाथ तो कभी उस हाथ। मेरे लिए उसके पास वक्त ही नहीं था। निशांत और मेरे पास समय की कमी नहीं थी, हम दिन भर घूमते, तालाब के किनारे घास पर बैठ कर बातें करते रहते। एक बार फिर मेरे मन में भावनाएं उमडऩे लगी थीं। कुछ तो था, जिसे हम भूलते जा रहे थे। हमारी जिंदगी में यह नया स्पार्क था, जिसे हमने अभी-अभी यहां खोजा था…। थैंक गॉड, हमें किसी रिलेशनशिप एक्सपर्ट की मदद नहीं लेनी पड़ी। समझ आ गया कि गड़बड़ कहां थी। अब तक हम कंजूस जिंदगी से अपने लिए थोड़ा वक्त हक से नहीं मांग पा रहे थे।Ó <

हां, हमारी शादीशुदा जिंदगी अच्छी चल रही है।

और सेक्स लाइफ…?

प्रेम के लिए कोई खास समय मुकर्रर नहीं किया जा सकता। अगर सब कुछ रुटीन से चल रहा है तो इसका अर्थ है कि कोई समस्या है। सेक्स पैशन नहीं, रुटीन हो चुका है और अगर सचमुच ऐसा हो रहा है तो रुटीन को बदलना जरूरी है।

जिंदगी में सब कुछ अपनी रफ्तार से और व्यवस्थित ढंग से चलता रहता है, लेकिन कई बार रोमैंटिक लाइफ में नीरसता आने लगती है। अपनी सेक्स लाइफ में दोबारा रंग भरना चाहते हैं तो एक हल यह है कि अपनी एकरस जिंदगी से कुछ समय के लिए दूर चले जाएं। कई बार सिर्फ जगह बदलने से खोई हुई भावनाएं लौट सकती हैं। ऐसी कुछ जगहें हैं, जहां आप अपनी लव लाइफ को फिर से एक्सप्लोर कर सकते हैं।

पेरेंट्स का घर

लव लाइफ को एक्सप्लोर करने के लिए पेरेंट्स का घर भी मददगार हो सकता है। कुछ दिन का प्लान बनाएं और एक तीर से दो निशान साधें। माता-पिता को मूवी के टिकट देकर सिनेमा हॉल में बिठा दें या फिर किसी आध्यात्मिक स्थल की सैर पर भेज दें। इस बीच अपने लिए कुछ वक्त चुरा लें। जगह का बदलना, काम की चिंता न होना, जिम्मेदारियों से कुछ पल के लिए दूर होना भी जरूरी होता है। दिल्ली की लाइफस्टाइल एक्सपर्ट रचना खन्ना सिंह कहती हैं, ‘नई जगह, अकेलापन, रोमांच…, यह सब एक साथ हासिल हो जाए तो सेक्स लाइफ में भी नया बदलाव आ सकता है।

कैंप फायर

कॉलेज टाइम में दोस्तों के साथ कैंप फायर का मजा तो कभी न कभी लिया ही होगा। क्यों नहीं, घनिष्ठ दोस्तों के साथ फिर से किसी एडवेंचरस स्थान पर कैंप फायर करें! घुप अंधेरी रात, झींगुरों-सियारों की आवाज के बीच कैंप फायर करते, गेम्स खेलते हुए संभव है, वह खोया हुआ ‘स्पार्कÓ फिर जाग उठे! कैंप का माहौल आपकी सेक्स लाइफ को दोबारा हसीन बना दे! प्रकृति व पर्यावरण प्रेमी दंपती दीपा-आशीष ने उत्तराखंड के एक बीहड़ से जंगल में रिजॉर्ट बनाया है और यहां हर दिन एक नया रोमांच जीवन के प्रति उनका उत्साह बनाए रखता है। दीपा कहती हैं, ‘हनीमून के लिए आशीष ने ऐसा हिल स्टेशन चुना, जहां शाम के पांच बजे ही घुप अंधेरा छा जाता था। मेरी कल्पना थी कि वहां दूसरे कपल्स भी होंगे, लेकिन वहां तो दरबान और केयरटेकर के अलावा दूर-दूर तक कोई मनुष्य नहीं दिखता था। बीच-बीच में परिंदों की आवाजें आती थीं। परदे हिलते तो लगता कि कोई आ रहा है। बचपन की पढ़ी-देखी भुतहा कहानियां व फिल्में याद आ रही थीं। अचानक किसी जंगली जानवर की तेज चिंघाड़ ने मुझे इतना डरा दिया कि मैं डर से आशीष से लिपट गई। इतने करीब पहली बार ही आई थी, जिसका बाद में आशीष ने मजाक भी बनाया।

शॉवर के नीचे

सिर्फ एक दिन का ब्रेक लें। बच्चों के स्कूल जाने के बाद अपना शॉवर हनीमून प्लान करें। थोड़ा फिल्मी हो जाएं, रोमैंटिक सा संगीत म्यूजिक प्लेयर पर लगाएं, गुलाब की कुछ पंखुडिय़ां बाथ टब में डालें और संगीत की धुन के साथ एक-दूसरे के साथ अपनी लय को फिर से बनाएं। ठीक उस तरह, जिस तरह शादी के शुरुआती दिनों में करते थे, जब एक-दूसरे से कुछ-कुछ अनजान थे। थोड़ी झिझक, थोड़ा रोमांच…अपने मन के संदेश को शरीर तक पहुंचने दें। इन पलों में सारी थकान, तनाव को अलविदा कह दें और बस एक-दूसरे को खुश करने के बारे में सोचें। पूरे मन और कामनाओं से किया गया प्रेम दुनिया की हर दौलत से बढ़ कर है। इसके आगे सब बेकार है।

संयुक्त परिवार में रहने वाली अंकिता की परेशानी यह थी कि उन्हें और उनके बिजनेसमैन पति आदित्य को एक-दूसरे के लिए समय ही नहीं मिल पाता था। आए दिन घर में मेहमान आते रहते और उनका बेडरूम चाची, बुआ, भाभी और बहन के बच्चों का प्लेग्राउंड बन जाया करता। कहती हैं वह, ‘मेरे पति ने प्लान किया कि क्यों न हम तीन दिन के लिए शहर के पास ही होटल में कमरा बुक करा लें। हालांकि मुश्किल बहुत थी, क्योंकि इससे पहले कभी मेरे पति बिजनेस ट्रिप पर मुझे साथ लेकर नहीं जाते थे। खैर, किसी तरह उन्होंने अपने पेरेंट्स को समझाया कि उनके कुछ दोस्त अपनी फेमिली के साथ तीन दिन के लिए हिल स्टेशन जाने की योजना बना रहे हैं। जोखिम बहुत था, क्योंकि पति के लगभग सारे करीबी दोस्त घर आते-जाते रहते थे। मन झूठ बोलने के लिए खुद को तैयार नहीं कर पा रहा था, लेकिन हमने अपनी जिंदगी के लिए यह सब किया। थोड़ी ना-नुकुर के बाद पेरेंट्स हमारे हाल पर पसीजे। फिर क्या था, हमने तुरंत एक बैग पैक करके कार में रखा और ड्राइव करते हुए 40 मिनट में पहुंच गए अपने हिल स्टेशन, यानी शहर के पास ही एक होटल में। ये तीन दिन पूरी तरह हमारे थे। हमें यकीन नहीं था कि इस छोटे से झूठ और सस्पेंस से हमारे वैवाहिक जीवन में नयापन आ जाएगा।’

किसी के लिए यह सीक्रेट है तो किसी के लिए चुप्पी, किसी के लिए रेशमी-मुलायम एहसास है तो किसी के लिए कल्पनाओं की अनंत उड़ान…, मगर हर शादीशुदा जोड़े की जिंदगी में सेक्सुअल फैंटेसी के लिए थोड़ी जगह जरूर होती है। इसी से जिंदगी में जिंदादिली भी आती है। हर कोई जीवन में नयापन चाहता है, एकरसता किसी को पसंद नहीं आती। डॉ.रचना फिर कहती हैं, ‘सेक्सुअल डिजायर्स तो कपल्स के बीच प्रेमपूर्ण भावनाओं का एक्सटेंशन ही है। पहली जरूरत तो यह है कि दंपती के बीच प्रेम हो, भावनाएं हों और वे एक-दूसरे का खयाल रख सकते हों। इच्छाएं व कामनाएं तभी जन्म लेंगी, जब एक-दूसरे के प्रति भावनाएं होंगी। उस चाह को बरकरार रखें, जिसके कारण एक-दूसरे का हाथ थामा था। इसके लिए कोशिशें जारी रखें, तभी सेक्स लाइफ भी बेहतर हो सकेगी।’

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गर्दन का दर्द: डॉक्टर बताते हैं प्रकार, कारण

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गर्दन का दर्द आराम और गतिविधि में बदलाव के साथ अपने आप हल हो सकता है लेकिन कभी-कभी गर्दन का दर्द अधिक गंभीर विकृति से जुड़ा हो सकता है और इसके लिए विशेष प्रबंधन की आवश्यकता हो सकती है। डॉक्टर इसके प्रकार, कारण, लक्षण, उपचार, बचाव के उपाय बताते हैं।गर्दन का दर्द एक बहुत ही सामान्य मस्कुलोस्केलेटल डिसऑर्डर है जो साल में कम से कम एक बार हर तीन लोगों में से एक को प्रभावित करता है। यह हल्का या गंभीर हो सकता है और हमारे कंधों, बाहों में फैल सकता है और इससे सिरदर्द भी हो सकता है। गर्दन का दर्द या बेचैनी एक बहुक्रियात्मक बीमारी है और इसके परिणामस्वरूप उत्पादकता और दक्षता में कमी आ सकती है लेकिन एक स्वस्थ जीवन शैली जिसमें नियमित शारीरिक व्यायाम, संतुलित आहार और एक 
अच्छा कार्य-जीवन संतुलन शामिल है, गर्दन के दर्द को दूर रख सकता है।

प्रकार:1. ओसीसीपिटल न्यूराल्जिया - यह एक प्रकार का सिरदर्द है जिसमें गर्दन के ऊपरी हिस्से, सिर के पिछले हिस्से और कान के पीछे के हिस्से में दर्द होता है। ओसीसीपिटल नसें, जो खोपड़ी से गुजरती हैं, सूजन या घायल हो सकती हैं, जो ओसीसीपिटल न्यूराल्जिया का कारण बनती हैं।
2. सरवाइकल रेडिकुलोपैथी - इसे कभी-कभी पिंच नर्व के रूप में जाना जाता है, जो आमतौर पर गर्दन में डिस्क हर्नियेशन से विकसित होती है। इससे गर्दन, कंधे, हाथ और उंगलियों में असहनीय दर्द हो सकता है। यह सबसे दर्दनाक गर्दन की स्थिति में से एक है, और शुक्र है कि एक अच्छा पूर्वानुमान भी है।
3. पहलू आर्थ्रोपैथी - इस शब्द का अर्थ है गर्दन के छोटे कशेरुक जोड़ों का गठिया, और यह गर्दन के दर्द का एक प्रसिद्ध कारण है। यह उम्र बढ़ने या रुमेटीइड गठिया जैसी स्थितियों के कारण हो सकता है।
4. मायोफेशियल दर्द सिंड्रोम - मायोफेशियल दर्द सिंड्रोम एक पुरानी दर्द की स्थिति है जो गर्दन की मांसपेशियों और प्रावरणी को प्रभावित करती है। पीठ के निचले हिस्से और ऊपरी हिस्से, गर्दन, कंधे और छाती शरीर के उन हिस्सों में से हैं जहां मायोफेशियल दर्द सिंड्रोम प्रकट हो सकता है। यह दोहराए जाने वाले गतियों द्वारा लाया जा सकता है जो लोग काम पर करते हैं, तनाव से संबंधित मांसपेशियों में तनाव, मांसपेशियों में चोट, खराब मुद्रा, या मांसपेशी समूह निष्क्रियता।
5. सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस - सर्वाइकल स्पाइन में उम्र से संबंधित टूट-फूट के कारण गर्दन में तकलीफ और अकड़न होती है, जिसे सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस कहा जाता है।6. व्हिपलैश नेक मोच - यह आपकी गर्दन पर तेज आघात, दुर्घटना, कार दुर्घटना आदि के कारण होता है।
7. फाइब्रोमायल्गिया - यह व्यापक मस्कुलोस्केलेटल दर्द की विशेषता है जो नींद, स्मृति और मनोदशा में गड़बड़ी से जुड़ा हो सकता है। ज्यादातर लोगों को गर्दन और पीठ में तेज दर्द और अकड़न का अनुभव होता है।

कारण:नई दिल्ली के वसंत कुंज में द इंडियन स्पाइनल इंजरीज सेंटर के दर्द प्रबंधन चिकित्सक डॉ विवेक लूंबा ने कुछ सामान्य कारणों की ओर इशारा किया, जिसके परिणामस्वरूप गर्दन में दर्द होता है:
1. शारीरिक तनाव - यह गर्दन के दर्द का सबसे आम कारण है, जो भारी शारीरिक व्यायाम, भारोत्तोलन, कंधे पर भारी बैग ले जाने, लंबी दूरी की ड्राइविंग / यात्रा आदि जैसी गतिविधियों में गर्दन की मांसपेशियों के अति प्रयोग के परिणामस्वरूप होता है। ऐसी सभी गतिविधियों का कारण हो सकता है गर्दन में मोच आने के कारण गर्दन का दर्द द्वितीयक होता है। कभी-कभी इसका परिणाम डिस्क हर्नियेशन हो सकता है, जिससे गर्दन का दर्द बांह के नीचे विकीर्ण हो सकता है।
2. आसन - खराब मुद्रा गर्दन दर्द के प्रमुख कारणों में से एक है। स्मार्टफोन और लैपटॉप (टेक्स्ट नेक सिंड्रोम) का उपयोग करते समय धनुषाकार पीठ और आगे की ओर झुकी हुई गर्दन के साथ लंबे समय तक बैठने से सर्वाइकल स्पाइन पर तनाव बढ़ जाता है, जिससे सर्वाइकल डिजनरेशन, कठोरता और दर्द होता है। लूंबा का कहना है कि स्कूल जाने वाले बच्चों में इन लक्षणों के साथ उनके क्लिनिक में आने की संख्या लगातार बढ़ रही है। उनका मानना ​​​​है कि महामारी ने समस्या को और खराब कर दिया है। 
3. व्हिपलैश चोट - वाहन दुर्घटनाओं में अचानक झटकेदार गर्दन की गति के परिणामस्वरूप व्हिपलैश चोट लग सकती है, जिससे गर्दन में दर्द हो सकता है।
4. गठिया - गर्दन के कशेरुक जोड़ों के गठिया के परिणामस्वरूप गर्दन में दर्द हो सकता है। 
5. विविध - गर्दन का दर्द अन्य कारणों से हो सकता है जैसे चिंता, अवसाद, संक्रमण, ट्यूमर आदि।

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देश

अधिकांश भारतीय अपने खर्च प्रबंधन में कठिनाई का सामना कर रहे : सर्वे

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नई दिल्ली| अधिकांश भारतीयों को अपने खर्चो का प्रबंधन करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। आईएएनएस-सी वोटर सर्वेक्षण में यह बात सामने आई। सर्वेक्षण में लगभग 65.8 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि वर्तमान खर्चो को प्रबंधन करना मुश्किल हो गया है, जबकि 30 प्रतिशत लोगों ने कहा कि खर्च तो बढ़ गए हैं, लेकिन वे प्रबंधन योग्य हैं।

उत्तरदाताओं में से 2.1 प्रतिशत ने कहा कि पिछले एक साल में उनके खर्च में कमी आई है और अन्य 2.1 प्रतिशत मामले पर प्रतिक्रिया नहीं दे सके।

सर्वेक्षण से यह भी पता चला कि व्यवसायों और लोगों की कमाई पर महामारी के व्यापक प्रभाव के साथ, पिछले एक साल में अधिकांश भारतीयों की क्रय शक्ति कमजोर हो गई।

आम आदमी की कमाई पर पड़ने वाले प्रभाव के साथ-साथ लोगों पर भी इसका असर पड़ा है।

2020 में अधिकतर समय, खाद्य सामग्री और ईंधन की कीमतों में वृद्धि की वजह से मुद्रास्फीति उच्च स्तर पर बनी रही।

मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं के वजह से ही भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी महामारी के प्रारंभिक चरण के दौरान तेज कटौती के बाद उधार दरों को बरकरार रखा।

सर्वेक्षण में यह भी पता चला है कि पिछले एक साल में 70 प्रतिशत से अधिक लोगों ने वस्तुओं के बढ़े हुए मूल्य के प्रतिकूल प्रभाव को महसूस किया।

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नई नौकरी पर जा रहे हैं तो रखें इन बातों का ध्यान

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अगर आप पढ़ाई के बाद पहली बार नई जगह नौकरी पर जा रहे हैं या नौकरी बदल कर पहली बार ऑफिस जा रहे हैं तो आपको कई बातों का ध्यान रखना होगा। अगर आप ऑफिस के शुरुआती दिनों में इन बातों का ध्यान रखेंगे तो आपको नई जगह पर तालमेल बैठाने में आसानी होगी।
कॉलेज और ऑफिस में अंतर होता है। यह जान लें कि ऑफिस में लोग एक डेकोरम का पालन करते हैं। उनके खाने और चाय पीने का वक्त तय होता है। कुछ हद तक काम के लिए समय सीमा भी तय होती है। इसलिए पहले जॉब में खुद को साबित करने के लिए यह जरूरी है कि पहले आप किसी भी संस्थान के कायदे-कानून को अच्छी तरह समझ लें। आजकल हर दफ्तर में यह माना जाता है कि आप में इंटेलीजेंस कोशेंट (आईक्यू) और इमोशनल कोशेंट (ईक्यू) के साथ-साथ कल्चरल कोशेंट (सीक्यू) भी होना चाहिए। कोई व्यक्त‍ि यदि आपको ज्यादा पसंद नहीं आ रहा है तो भी आप उसके साथ भी काम करने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहें।
ज्यादा ना बोलें
हो सकता है आप बहुत अच्छा जोक क्रैक करते हों और आपके दोस्त आपकी इस अदा पर फिदा हों। पर ऑफिस में हो सकता है यह पसंद न किया जाए. अगर आप बहुत ज्यादा बोलते हैं और दूसरों की बात काटने की आपकी आदत है तो इसे भी बदल लें क्योंकि ऑफिस में आपसे इतनी गंभीरता की उम्मीद की जाती है कि आप पहले दूसरे की बात सुनेंगे और फिर उसका जवाब देंगे। मीटिंग के दौरान भी बार-बार बीच में न बोलें। अगर कोई बहुत अच्छा आइडिया है तो उसे जरूर शेयर करें, पर मीटिंग में यह न लगे कि आप अतिउत्साहित हो रहे हैं.
परफॉर्मेंस के साथ पोलाइटनेस भी
ये बात ठीक है कि ऑफिस में खुद को कार्यकुशल दिखाना जरूरी है, पर इसके साथ-साथ यह भी जरूरी है कि आप सीनियर्स और अपने कलीग्स के साथ ठीक से बात करें। काम के दौरान यदि कोई गलती पर टोके तो उस पर तीव्र प्रतिक्रिया देने की बजाय अपनी गलती की जिम्मेदारी लें। इस तरह आप सीनियर्स का दिल भी जीत लेंगे।
संतुलित जवाब दें
ऑफिस में आप नये-नये हैं तो सबसे पहले अपने कलीग्स के मिजाज को समझ लें क्योंकि हो सकता है कि आपके किसी जोक पर उन्हें गुस्सा आ जाए या वो नाराज हो जाएं। इसलिए हंसी-मजाक करने से पहले लोगों के व्यक्त‍ित्व को जान लेना सबसे जरूरी है। इसके अलावा अगर आपसे कुछ पूछ जाए तो उसका जवाब बढ़ा-चढ़ाकर देने की बजाय टू द प्वॉइंट दें। अपनी योग्यता को बहुत ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर बताने के बाद यदि आप उस पर खरे नहीं उतर पाए तो इससे आपके सहयोगियों के साथ आपका पेशेवर रिश्ता कमजोर हो जाएगा।
सोशल मीडिया से दूरी
कॉलेज में आप हो सकता है, पूरे दिन में कई बार सोशल मीडिया पर चैट करते हों या अपडेट्स करते हों। ऑफिस में यह नहीं चलता। कुछ संस्थानों में तो सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर प्रतिबंध रहता है। ऐसे में आप अगर ऑफिस समय में अपने फोन या ऑफिस पीसी पर सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं तो यह माना जाएगा कि आप काम को लेकर गंभीर नहीं हैं।

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