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उत्तर प्रदेश

खतौली में चला दे दनादन हैंडपम्प और आ गये जीतकर मदन

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रालोद ने रचा इतिहास और बदल दिए सियासत के समीकरण
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। राष्टÑीय लोकदल ने जाट लैन्ड की राजनीति में उपचुनाव वाली सीट भाजपा से जीतकर एक बड़ा संदेश दिया है। राष्टÑीय लोकदल ने खतौली उपचुनाव में भाजपा को उस सीट पर हराया जिस सीट पर भाजपा काबिज थी। मुजफ्फरनगर दंगों के मुकदमें में यहां से निर्वाचित भाजपा विधायक विक्रम सैनी की सदस्यता चली गयी थी और उसके बाद खतौली में उपचुनाव हुआ। यहां पर भाजपा ने एक तरह से अपने ही विधायक को रिपीट किया।
उन्होंने सदस्यता गंवाने वाले विधायक विक्रम सैनी की पत्नी और कवाल गांव की पूर्व प्रधान राजकुमारी को टिकट दिया। यहां पर राष्टÑीय लोकदल ने खेकड़ा के पूर्व विधायक रहे मदन भईया को चुनावी मैदान में उतारा और मदन भईया ने यहां भाजपा उम्मीदवार को हरा दिया। उपचुनाव में आठ दिसम्बर गुरुवार का दिन रोमांच से भरा दिन रहा। यहां पर रालोद और सपा गठबंधन के उम्मीदवार मदन भईया ने 97071 वोट हासिल किये जबकि भाजपा की उम्मीदवार राजकुमारी सैनी को 74906 वोट मिले। मदन भईया ने यह सीट 22165 वोटों से इस चुनाव को जीता। मतगणना शुरू हुई और नवीन मंडी स्थल पर हो रही इस मतगणना में रालोद उम्मीदवार मदन भईया ने पहले राउंड से ही बढ़त बनाई और आखिरी राउंड तक वो फिर इस बढ़त को बढ़ाते चले गये।
दलित वोटों की लामबंदी हुई इस तरह मदन भईया के पक्ष में
उपचुनाव में मदन भईया ने ऐसे समय में ये जीत हासिल की है जब वो कुछ महीने पहले ही लोनी विधानसभा चुनाव में आठ हजार वोटों से हारे थे। यहां भाजपा के नंदकिशोर गुर्जर दूसरी बार जीते। लेकिन जब मदन भईया लोनी से खतौली पहुंचे तो उन्होंने यहां लगभग 22 हजार से ज्यादा वोटों से भाजपा उम्मीदवार को हराया। राष्टÑीय लोकदल ने उनपर भरोसा जताया था और वो इस भरोसे पर खरे उतरे। यहां पर उनकी जीत का एक बड़ा कारण दलित वोट बैंक भी माना जा रहा है। यहां पर गुडलक ये था कि बसपा इस उपचुनाव से दूर रही। यदि बसपा इस चुनाव में आती तो वह नुकसान हैन्डपम्प का ही होता। दूसरा फायदा ये हुआ कि आजाद समाज पार्टी के मुखिया चन्द्रशेखर रावण ने इस उपचुनाव में रालोद का साथ दिया। जयंत ने चन्द्रशेखर रावण को साथ लेकर नये समीकरण बनाये। रालोद को बसपा की चुनाव से दूरी का लाभ मिला और उसके वोटों का माईलेज रालोद को मिल गया।
मतदाता ने नही दिल तोड़ा सभी को खुश किया थोड़ा थोड़ा
चुनाव केवल खतौली में ही नही था बल्कि चुनाव रामपुर में भी था। चुनाव मैनपुरी में भी था, चुनाव गुजरात में भी था और चुनाव हिमांचल में भी था। मतदाताओं ने भी कुछ इस तरह से मतदान किया कि दिल किसी का नहीं तोड़ा है और सबको थोड़ा थोड़ा खुश किया है। दिल्ली एमसीडी चुनाव में मतदाता आम आदमी पार्टी के साथ गये हैं तो गुजरात में जनादेश भाजपा को मिला है। हिमांचल प्रदेश में कांगे्रस आई है तो यूपी की सभी उपचुनाव सीटों पर अलग अलग जनादेश हैं। रामपुर में भाजपा चुनाव जीती है और सपा के आजमखान चुनाव हार गये हैं। मैनपुरी में सपा के राष्टÑीय अध्यक्ष तथा पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव रिकॉर्ड वोटों से चुनाव जीती हैं। यहां भाजपा को बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। खतौली में भाजपा चुनाव हारी है।
भाजपा के दिग्गज जाट चेहरों के लिए एक बड़ी चुनौती है
उपचुनाव में भाजपा खतौली से हारी है लेकिन रामपुर से वो चुनाव जीती है। मगर यहां पर उसके जाट चेहरों के लिए ये चुनौती है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी जाट हैं। भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष मोहित बेनिवाल जाट हैं और सबसे बड़ी चुनौती केन्द्रीय मंत्री संजीव बालियान के लिए है। क्योंकि यह बेल्ट उन्हीं के क्षेत्र में आती है। यहां की जीत रालोद के लिए और हार भाजपा के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि उसकी पूरी लॉबी यहां चुनाव जिताने के लिए उतरी थी। लेकिन मदन भईया ने यहां बड़ा झटका दिया है और संदेश दिया है कि फिल्म अभी बाकी है।

खेकड़ा से खतौली तक ‘ख’ शब्द रहा मदन भईया के लिए लकी
(करंट क्राइम)। मदन भईया ने एक एतिहासिक जीत हासिल की है और यहां पर एक संयोग ये बना है कि वो सबसे पहले खेकड़ा से विधायक रहे और इसके बाद उन्होंने लोनी से दो चुनाव लड़े और वह दोनों ही चुनाव में परास्त रहे। लेकिन जब खेकड़ा छोड़कर वो खतौली पहुंचे तो यहां उन्होंने सत्ताधारी दल की उम्मीदवार को उपचुनाव में हरा दिया। मदन भईया की जीत के यहां तीन प्रमुख कारण हैं। मौजूदा समय की राजनीति में लोग यहां भाजपा उम्मीदवार से नाराज बताये जाते हैं। वहीं मदन भईया ने डेरा डालकर एक सधी हुई रणनीति के तहत प्रचार किया। कार्यकर्ताओं को साथ लिया और मतदाताओं को ये विश्वास दिलाने में कामयाब रहे कि ताकतवर नेता ही हमेशा जनता की रक्षा करता है।

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इसे ही कहते हैं मोहब्बत का रूल

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कम समय में सबसे मिलकर चले गए आईएएस महेन्द्र सिंह तंवर, जब था टाइट पूरा शेड्यूल
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। कई अधिकारी जिले में आते हैं और चले जाते हैं लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो दिल में बस जाते हैं। वो जब भी जिले में आते हैं तो फिर सब उनसे मिलने आते हैं और वो सबसे मिलकर जाते हैं। ऐसे अधिकारियों में नगरायुक्त पद पर कार्यरत रह चुके आईएएस महेन्द्र सिंह तंवर भी हैं। ये एक ऐसे अधिकारियों में गिने जाते हैं जो अपने व्यवहार और प्यार से सरकार तो क्या विपक्ष के पार्षदों को भी अपना बना चुके हैं। इन दिनों अपने विजन और व्यवहार का जलवा मुख्यमंत्री की नगरी गोरखपुर में बिखेर रहे हैं। वहां गोरखपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष हैं।
वह जब शुक्रवार को गाजियाबाद आये तो उन्होंने गाजियाबाद आने से पहले गाजियाबाद के सभी साथियों को फोन किये। ये उनका अंदाज है कि उनके आने की खबर से ही सब उत्साहित थे। वो बता चुके थे कि मैं कल गाजियाबाद आ रहा हूं और यहां पर सभी साथियों से वो मिले भी। भाजपा महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा के पिता की शोकसभा में पहुंचे तो पत्रकार दीपक सिरोही के घर पर भी गये और उनकी माता के निधन पर शोक व्यक्त किया। निवर्तमान मेयर आशा शर्मा ने उन्हें देखा तो कहा कि डीएम बनकर गाजियाबाद आओ। पूर्व राज्यमंत्री व शहर विधायक अतुल गर्ग ने उनकी तारीफ की। कनेक्टिविटी के साथ महेन्द्र सिंह तंवर ने एक बार फिर से रिश्तों को लेकर अपना विजन दिखाया और अपनेपन का एक अहसास कराया।

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दो महीने तीन दिन में निर्णायक मोड़ पर पहुंची सुनवाई

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गाजियाबाद (करंट क्राइम)। शनिवार को एक पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। एक दुष्कर्म के आरोपी पर आज फैसला आएगा। साहिबाबाद थानाक्षेत्र में साढे 4 वर्षीय बच्ची का अपहरण कर दुष्कर्म के बाद हत्या की सनसनीखेज वारदात हुई थी। इस मामले में विशेष न्यायाधीश पास्को एक्ट की अदालत ने शुक्रवार को आरोपित को दोषी करार दिया है। सजा पर सुनवाई शनिवार को होगी। अभियोजन की तरफ से कुल 15 लोगों की गवाही हुई है। बच्ची के परिजनों ने दोषी को फांसी की सजा दिए जाने की मांग की है। इस मामले में गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट के पुलिस अधिकारियों ने 15 दिसंबर को आरोप पत्र पेश किए थे। मामले में प्रतिदिन सुनवाई चल रही थी, यही कारण है कि घटना के दो माह तीन दिन में यह मामला निर्णायक मोड़ तक जा पहुंचा है।
1 दिसंबर 2022 को घर से लापता हुई थी बच्ची
विशेष लोक अभियोजन संजीव ने बताया है कि साहिबाबाद थानाक्षेत्र की करहैड़ा कॉलोनी में राजमिस्त्री का परिवार के साथ रहता था। 1 दिसंबर 2022 को करीब 2:30 बजे उनकी साढ़े 4 साल की बेटी घर से बाहर खेलते हुए लापता हो गई थी। दूसरे दिन सिटी फॉरेस्ट के जंगल में उसका शव घर के पास ही मिला था। इसके बाद परिजनों ने शव की शिनाख्त की और पुलिस इस पूरे मामले में जांच में जुट गई थी। इसके बाद पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर अपहरण, हत्या और दुष्कर्म के आरोप में एफआईआर दर्ज करवाई थी।
महिला अधिकारियों की कांप गई थी रूह
साढ़े 4 साल की बच्ची के साथ अपहरण कर दुष्कर्म की सनसनीखेज हत्या ने इस पूरे मामले में तात्कालिक डीसीपी ट्रांस हिंडन दीक्षा शर्मा और एसीपी साहिबाबाद पूनम मिश्रा की रूह का कांप दी थी। पुलिस की महिला अधिकारियों ने शुरू से ही इस मामले में प्रमुखता से साक्ष्य न्यायालय के सामने पेश किए और आरोपी को अधिकतम सजा दिलाने के प्रयास किए हैं, जो शनिवार को सुनवाई के बाद सफल हो सकते हैं।

 

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भगवा गढ़ में बन रही है सरकार वालों के व्यापार की कौन सी लिस्ट!

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गाजियाबाद (करंट क्राइम)। सरकार वाले बाजार में भी हैं और अलग अलग व्यापार में भी हैं। बस कारोबार को लेकर वो रडार पर आ गये हैं। सुना है कि सयंम वाले मामले के बाद भगवा कारोबारियों के व्यापार की लिस्ट मांग ली गई है। इस लिस्ट में प्रापर्टी डीलरों से लेकर रेस्टोरेंट कारोबारी हैं तो सरकारी विभागों के ठेकेदारों से लेकर लाईजनिंग वाले नाम भी आ गये हैं।
बताने वाले बता रहे हैं कि लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी कतई नहीं चाहती कि किसी भी भगवाई के कारोबार को लेकर विपक्ष या मीडिया सरकार के काम काज पर किसी तरह की अंगुली उठा दे। अदंरखाने निर्देश मिले हैं कि धुआं, जुआ, शराब, शबाब से लेकर खराब निर्माण वाला भगवाई मिले तो उसे पार्टी से भगा दें। अब सगंठन में पद देते समय इस बात का शिजरा निकल कर आयेगा। पार्टी कारोबार को लेकर सरकार की फजीहत कराने के मूड में नहीं है। कारोबार वाले सावधान हो जाये क्योंकि लिस्ट का ट्वीस्ट अभी नहीं बल्कि आठ महीने के बाद दिखाई देगा।
कन्फर्म सूत्र बता रहे हैं कि इस लिस्ट का ट्वीस्ट आने वाले समय में दिखाई देगा। क्योंकि बड़ी खबर यह है कि अन्दर खाने कौन सा नेता कौन सा कारोबार कर रहा है यह खबर भी भाजपा वाले ही खुद देकर आएंगे। इस लिस्ट में कई के कारोबार निकलकर सामने आएंगे। फिलहाल लिस्ट को लेकर काम शुरु हो गया है।

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